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कृषि वानिकीसमीक्षा 31 अगस्त 2026

सिल्वोपास्चर — पेड़ + पशुधन

चारे या छाया के पेड़, चारागाह घास, और चरते पशु — एक ही ज़मीन पर साथ।

पौध-सुरक्षा अवधि
2–3 वर्ष
सामान्य पेड़ घनत्व
100–200 पेड़/हेक्टेयर
सबसे उपयुक्त
चरागाह व सीमांत ज़मीन के लिए
आम चारे के पेड़
सुबबूल, सहजन, बबूल

परिचय

सिल्वोपास्चर एक साथ तीन चीज़ें एक ही ज़मीन पर लाता है: पेड़, चारा (घास या बोई गई चारा-दलहन), और चरते पशुधन। पेड़ों की छाया पशुओं को आराम देती है और सूखे महीनों में घास को ज़्यादा देर तक हरी रखती है; अगर पेड़ चारे की प्रजाति का है, तो काटी गई पत्तियाँ प्रोटीन-युक्त पूरक देती हैं जो अकेली घास नहीं देती।

यह उन किसानों के लिए स्वाभाविक है जो पहले से ही मवेशी, भैंस, बकरी या भेड़ को सीमांत या मेड़-किनारे की ज़मीन पर चराते हैं जो सघन खेती में नहीं है — बंजर चरागाह, खेत की सीमाएं, या भरोसेमंद फ़सल के लिए बहुत सूखी या ढालू ज़मीन। पेड़ वाला हिस्सा उस ज़मीन को, जो पहले सिर्फ़ कम-मूल्य की चराई देती थी, इमारती लकड़ी, फल या चारा भी देने वाली ज़मीन में बदल देता है।

असली जोखिम पशु ख़ुद हैं: छोटे पौधे स्थापित होने से पहले चर लिए जाते हैं, छाल छिल जाती है या कुचल दिए जाते हैं। यह प्रणाली तभी काम करती है जब छोटे पेड़ों को सुरक्षा दी जाए — बाड़, ट्री-गार्ड, या पहुँच से बाहर रखकर — जब तक वे इतने ऊँचे व मज़बूत न हो जाएं कि चराई का दबाव सह सकें।

तीनों हिस्से कैसे साथ काम करते हैं

  • पेड़ बिखरे झुंडों में, ढालू ज़मीन पर कंटूर-रेखाओं के साथ, या इतनी चौड़ी क़तारों में लगाए जाते हैं कि पशु व चराई के उपकरण गुज़र सकें — घनत्व इमारती-लकड़ी वाले ब्लॉक से बहुत कम रखा जाता है, क्योंकि प्राथमिकता घास तक रोशनी पहुँचाना है, प्रति हेक्टेयर अधिकतम पेड़ नहीं।
  • सुबबूल, सहजन (मोरिंगा) और बबूल जैसे चारे के पेड़ों की पत्तियाँ बारी-बारी काटी जाती हैं, जो सिर्फ़ घास की चराई से न मिलने वाला प्रोटीन-युक्त पूरक देती हैं — यह सूखे मौसम में सबसे ज़्यादा मायने रखता है, जब घास की गुणवत्ता सबसे तेज़ी से गिरती है।
  • पतली छतरी के नीचे बोई या ऊपर से बिखेरी गई सुधरी हुई चारागाह घास (नेपियर, गिनी घास) आमतौर पर बिना-सुधरी प्राकृतिक घास से ज़्यादा उपज देती है, भले ही कुछ छाया रोशनी के लिए प्रतिस्पर्धा करे।
  • बारी-बारी चराई — पशुओं को बाड़ वाले टुकड़ों के बीच घुमाना, बजाय एक ही जगह लगातार चराने के — घास और छोटे पेड़ों दोनों को खुली, लगातार चराई से कहीं बेहतर सुरक्षा देती है।

छोटे पेड़ों को पशुओं से बचाना

  • नए लगाए पौधों को ट्री-गार्ड, कांटेदार झाड़ी की बाड़, या अस्थायी रूप से बाड़ वाले ब्लॉक की ज़रूरत होती है, जब तक तना इतना मोटा व ऊँचा न हो जाए कि पशु आसानी से छाल को नुक़सान न पहुँचा सकें या तना न तोड़ सकें — अधिकतर प्रजातियों के लिए आमतौर पर 2–3 वर्ष।
  • बकरियों से पेड़ बचाना सबसे मुश्किल है — वे खड़े पत्तों को चरती हैं जिन्हें मवेशी व भैंस आमतौर पर छोड़ देते हैं, इसलिए बकरी-चराई वाले सिल्वोपास्चर में सिर्फ़-मवेशी वाली प्रणाली से मज़बूत, ऊँचे गार्ड चाहिए।
  • वर्षों की लगातार चराई से जड़ क्षेत्र के आसपास मिट्टी दब जाती है — पैडॉक बदलते रहना और भारी बारिश के तुरंत बाद, जब मिट्टी नरम हो, चराई से बचना इसे घटाता है।
  • पेड़ स्थापित हो जाने के बाद, नियंत्रित छंटाई-ऊँचाई (सबसे नीची चरी जा सकने वाली शाखाओं को पशुओं की पहुँच से ऊपर रखना) परिपक्व पेड़ों के चारों ओर स्थायी बाड़ की ज़रूरत हटा देती है।

स्टॉकिंग दर व बारी-बारी चराई

  • ज़रूरत से ज़्यादा पशु रखना सबसे आम गड़बड़ी है — यह घास को उतनी तेज़ी से ख़राब कर देता है जितनी वह दोबारा उग नहीं पाती, और पेड़ की छाल व पौधों पर दबाव बढ़ाता है। स्टॉकिंग दर को चरागाह की दोबारा-उगने की क्षमता के हिसाब से रखें, फार्म पर कितने पशु हैं उसके हिसाब से नहीं।
  • एक सीधी पैडॉक-रोटेशन — चराई क्षेत्र को 3-4 हिस्सों में बाँटकर हर कुछ हफ़्तों में पशु घुमाना — चरी गई घास को पशुओं के लौटने से पहले उबरने देता है, जिससे वर्षों में उपज घटने की बजाय बनी रहती है।
  • सूखे मौसम में चारे के पेड़ों की पत्ती-कटाई घटती घास आपूर्ति के पूरक के रूप में योजनाबद्ध होनी चाहिए, पूरी तरह विकल्प के रूप में नहीं — पशुओं को अब भी भारी चारा चाहिए, पेड़ सिर्फ़ प्रोटीन-टॉप-अप देते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सिल्वोपास्चर के लिए कौन-से पशु सबसे उपयुक्त हैं?

मवेशी व भैंस को छोटे पेड़ों के साथ मिलाना सबसे आसान है क्योंकि वे ज़्यादातर ज़मीनी घास चरते हैं, खड़े पत्ते नहीं। बकरी व भेड़ सीधे पत्ते व छाल चरती हैं, इसलिए उन्हें मज़बूत पेड़-सुरक्षा चाहिए और आमतौर पर पेड़ अच्छी तरह स्थापित होने के बाद ही लाई जाती हैं।

छोटे पेड़ों को पशुओं से नुक़सान से कैसे बचाएं?

पहले 2–3 वर्षों तक पौधों के चारों ओर ट्री-गार्ड, कांटेदार झाड़ी की बाड़, या अस्थायी रूप से बाड़ वाला नर्सरी-ब्लॉक सामान्य तरीक़ा है। जब तक छाल मोटी न हो जाए और तना आसान पहुँच से ऊपर इतना ऊँचा न हो, पेड़ असुरक्षित रहते हैं।

क्या पेड़ों की छाया घास की बढ़वार को नुक़सान पहुँचाती है?

हल्की छाया आमतौर पर नुक़सान से ज़्यादा फ़ायदा देती है — यह मिट्टी की नमी ऊँची रखती है और घास को सूखे मौसम तक हरी रखती है। घनी, अनियंत्रित छतरी नीचे की घास-उपज ज़रूर घटाती है, इसीलिए सिल्वोपास्चर के पेड़ कम घनत्व पर रखे जाते हैं और समय-समय पर काटे जाते हैं, बंद छतरी बनने नहीं दी जाती।

क्या मैं पहले से चराई वाली ज़मीन पर सिल्वोपास्चर शुरू कर सकता हूं?

हां — यह सबसे आम शुरुआत है। पहले मौजूदा चरागाह ज़मीन के एक हिस्से को बाड़बंदी कर उसमें पेड़ लगाएं, 2–3 वर्ष तक पौधों की सुरक्षा करें, फिर पेड़ स्थापित होने पर उस हिस्से को नियंत्रित चराई के लिए फिर खोलें, इसके बाद अगले हिस्से की ओर बढ़ें।

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दूरी, प्रजाति व प्रबंधन संबंधी सलाह ICAR व राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की कृषि-वानिकी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित है। आपके खेत के लिए सही प्रजाति व दूरी स्थानीय मिट्टी, पानी व बाज़ार की स्थिति ही तय करती है। संपादकीय नीति.