मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
Soil Health Card Scheme
आपके अपने खेत की मुफ़्त मिट्टी जाँच, हर दो साल में एक बार — अंदाज़े से नहीं, आपकी मिट्टी को सच में जितनी खाद और उर्वरक चाहिए उतनी ही मात्रा के साथ।
- किसान को लागत
- मुफ़्त
- योजना की स्थिति
- सक्रिय
- शुरुआत
- 2015
- जाँच चक्र
- हर 2 साल में एक बार
- आवेदन का तरीका
- सरकारी सैंपलिंग अभियान / पोर्टल
- बाँटे गए कार्ड
- 25+ करोड़
- मंत्रालय
- कृषि एवं किसान कल्याण
- श्रेणी
- मृदा परीक्षण / सलाह
परिचय
मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) भारत सरकार की योजना है, जिसकी शुरुआत 19 फ़रवरी 2015 को सूरतगढ़, राजस्थान में हुई। इसमें किसान के अपने खेत की मिट्टी के 12 पैरामीटर जाँचे जाते हैं और एक रिपोर्ट दी जाती है — उस विशेष खेत की पोषक-तत्व स्थिति, साथ ही फ़सल के हिसाब से कितनी खाद, जैव-उर्वरक या जैविक सुधार डालना है इसकी सिफ़ारिश।
2022–23 से यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के ‘मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता’ घटक के रूप में चलती है, जिसे हर राज्य का कृषि विभाग लागू करता है। नमूना लेना, जाँच करना और कार्ड बनाना — यह सब पूरी तरह सरकार द्वारा वित्त-पोषित है। केंद्र सरकार हर नमूने के लिए राज्य को ₹190 देती है, जिसमें संग्रह, जाँच, कार्ड बनाना और वितरण — सब शामिल है।
हर जोत के लिए कार्ड हर दो साल में एक बार जारी होना तय है, ताकि अगले चक्र में यह दिखे कि मिट्टी में क्या बदलाव आया। 2015 से अब तक 25 करोड़ से ज़्यादा कार्ड बाँटे जा चुके हैं — 8,272 से अधिक मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के नेटवर्क और एक GIS-आधारित पोर्टल, soilhealth.dac.gov.in, के ज़रिए।
योजना की मुख्य बातें
मिट्टी के 12 पैरामीटर जाँचे जाते हैं
मुख्य पोषक तत्व N, P, K, S; सूक्ष्म पोषक तत्व Zn, Fe, Cu, Mn, B; साथ ही pH, EC (विद्युत चालकता) और OC (जैविक कार्बन)।
किसान के लिए पूरी तरह मुफ़्त
केंद्र सरकार हर नमूने के लिए राज्य सरकार को ₹190 देती है — संग्रह, जाँच, कार्ड बनाना और वितरण, सब इसी में शामिल है।
हर 2 साल में एक बार
योजना का बताया गया उद्देश्य है कि हर जोत को दो साल के चक्र में एक नया मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिले, ताकि समय के साथ बदलाव ट्रैक हो सके।
SHC मोबाइल ऐप + GIS पोर्टल
फ़ील्ड एजेंट हर नमूने को SHC मोबाइल ऐप से जियो-टैग करते हैं; हर नमूने को यूनीक QR कोड मिलता है और परिणाम इंटरैक्टिव मैप पर दिखते हैं।
8,272 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ
देशभर में स्थायी, मोबाइल, मिनी और गाँव-स्तर की प्रयोगशालाएँ (फ़रवरी 2025 तक 1,068 स्थायी, 163 मोबाइल, 6,376 मिनी, 665 गाँव-स्तर)।
25+ करोड़ कार्ड बाँटे गए
2015 में योजना शुरू होने के बाद से जुलाई 2025 तक देशभर के किसानों को बाँटे गए।
आपको क्या मिलता है
कार्ड से क्या मिलता है
आपके अपने खेत की 12 पैरामीटर पर पोषक-तत्व स्थिति, साथ ही फ़सल के हिसाब से खाद, जैव-उर्वरक और जैविक सुधार की मात्रा की सिफ़ारिश।
किसे मिलता है
हर वह किसान जिसके पास ऐसी खेती योग्य ज़मीन है जिसे पहचाना और जियो-टैग किया जा सके — योजना भारत के सभी किसानों पर लागू बताई गई है।
कितनी बार
हर जोत के लिए दो साल में एक बार, ताकि अगला कार्ड बताए कि पिछली जाँच के बाद मिट्टी में क्या बदला।
लागत
मुफ़्त। केंद्र सरकार पूरा चक्र — संग्रह, प्रयोगशाला जाँच, कार्ड बनाना और वितरण — ₹190 प्रति नमूना की दर से वहन करती है।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- किसी भी आकार की खेती योग्य कृषि भूमि रखने वाला किसान
- ज़मीन राज्य के राजस्व मानचित्र पर पहचानी और जियो-टैग की जा सके
- ज़िला/ब्लॉक राज्य के मौजूदा वार्षिक कार्ययोजना के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड सैंपलिंग में शामिल हो
- खेत सैंपलिंग के लिए सुलभ हो — फ़सल कटने के बाद, या जब खेत में कोई खड़ी फ़सल न हो
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- आधिकारिक दिशानिर्देशों में कोई पात्रता-अपवर्जन तय नहीं है — योजना भारत के सभी किसानों पर लागू बताई गई है; व्यावहारिक शर्तें बस इतनी हैं कि ज़मीन पहचानी जा सके और वह मौजूदा सैंपलिंग चक्र में आती हो।
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
भूमि / खेत रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी)
राज्य के राजस्व मानचित्र पर सही खेत को पहचानने और जियो-टैग करने के लिए ज़रूरी।
मोबाइल नंबर
सैंपलिंग अनुरोध दर्ज करने और कार्ड तैयार होने पर अपडेट पाने के लिए इस्तेमाल होता है।
किसान ID / आधार (जहाँ राज्य माँगे)
कुछ राज्य पोर्टल पर आपके नाम और जोत से कार्ड जोड़ने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
सैंपलिंग टीम के लिए खेत तक पहुँच
नमूना लेने के लिए प्रशिक्षित एजेंट को खेत पर खुद जाना होता है — बिना नमूने के कोई “स्वयं-रिपोर्ट” रास्ता नहीं है।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
अपने कृषि अधिकारी से पूछें
अपने ज़िला या ब्लॉक कृषि अधिकारी से संपर्क करें, या soilhealth.dac.gov.in पर देखें कि आपका इलाका सैंपलिंग के लिए कब निर्धारित है।
- 2
कवरेज की पुष्टि
अधिकारी जाँचता है कि आपका गाँव या ब्लॉक राज्य की मौजूदा वार्षिक कार्ययोजना में मृदा स्वास्थ्य कार्ड सैंपलिंग के लिए शामिल है या नहीं।
- 3
खेत का दौरा और नमूना लेना
अधिकृत एजेंट SHC मोबाइल ऐप से आपके खेत को जियो-टैग करता है और फ़सल कटने के बाद या जब कोई खड़ी फ़सल न हो, तब खेत के चार कोनों और बीच से 15–20 सेमी गहराई से मिट्टी लेता है।
- 4
प्रयोगशाला जाँच
नमूने की जाँच किसी मान्यता-प्राप्त मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में सभी 12 पैरामीटर पर होती है; गुणवत्ता जाँच के लिए करीब 1% नमूने किसी रेफ़रल लैब में फिर जाँचे जाते हैं।
- 5
कार्ड तैयार होता है
पोर्टल पर मृदा स्वास्थ्य रिपोर्ट बनती है — आपके खेत की पोषक-तत्व स्थिति और फ़सल के हिसाब से खाद, जैव-उर्वरक व सुधार की सिफ़ारिश, आपकी स्थानीय भाषा में।
- 6
अगला चक्र
दो साल बाद आने वाला अगला मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिखाता है कि पिछली जाँच के बाद आपकी मिट्टी में क्या बदला।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
योजना की शुरुआत
19 फ़रवरी 2015
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सूरतगढ़, राजस्थान से शुभारंभ — 2015 अंतरराष्ट्रीय मृदा वर्ष था
अब जिस योजना के तहत चलती है
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
“मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता” घटक, 2022–23 से
जाँच चक्र
हर 2 साल में एक बार
प्रति जोत, जैसा योजना के उद्देश्यों में बताया गया है
डिजिटल सिस्टम अपग्रेड
अप्रैल 2023 से लागू
जियो-टैग, QR-कोडेड सैंपलिंग के लिए GIS-आधारित पोर्टल और SHC मोबाइल ऐप
तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए
13 जुलाई 2026
soilhealth.dac.gov.in और pib.gov.in से
अपनी पात्रता जाँचें
सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।
5 में से 0 जवाब दिए
यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
डाउनलोड
केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना FAQ (आधिकारिक)
मंत्रालय का FAQ — सैंपलिंग के नियम, 12 पैरामीटर और जाँच प्रक्रिया।
मिट्टी नमूना जाँच आउटसोर्सिंग दिशानिर्देश
लैब और गुणवत्ता-मानकों को तय करने वाला आधिकारिक दिशानिर्देश दस्तावेज़।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड मोबाइल ऐप
खेत जियो-टैग करने, नमूना दर्ज करने और कार्ड की स्थिति देखने के लिए आधिकारिक Android ऐप।
आधिकारिक लिंक और हेल्पलाइन
पोर्टल को ही बुकमार्क करें — कोई भी तीसरी वेबसाइट भुगतान न जारी कर सकती है, न रोक सकती है, न तेज़ कर सकती है।
- आधिकारिक पोर्टलsoilhealth.dac.gov.in — राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल
- कृषि एवं किसान कल्याण विभागयोजना लागू करने वाला मूल विभाग
- myScheme सूचीभारत सरकार की योजना डायरेक्टरी में प्रविष्टि — RKVY: मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता
- पोर्टल सहायता / हेल्पडेस्कपोर्टल या कार्ड-निर्माण संबंधी समस्या के लिए टिकट दर्ज करें
- योजना बैकग्राउंडर (PIB)नवीनतम आँकड़ों के साथ आधिकारिक विवरण (अगस्त 2025)
हेल्पलाइन
24×7 IVRS और हेल्प डेस्क, मंत्रालय चलाता है — अटके भुगतान की जाँच का सबसे तेज़ तरीका फोन ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना क्या है?
यह भारत सरकार की योजना है जिसमें किसान के अपने खेत की मिट्टी के 12 पैरामीटर जाँचे जाते हैं और एक रिपोर्ट दी जाती है — उस खेत की पोषक-तत्व स्थिति, साथ ही फ़सल के हिसाब से कितनी खाद, जैव-उर्वरक और जैविक सुधार डालना है इसकी सिफ़ारिश। इसकी शुरुआत 19 फ़रवरी 2015 को हुई थी और अब यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के “मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता” घटक के रूप में चलती है।
क्या मृदा स्वास्थ्य कार्ड मुफ़्त है?
हाँ। किसान को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। केंद्र सरकार हर नमूने के लिए राज्य सरकार को ₹190 देती है, जिसमें संग्रह, जाँच, कार्ड बनाना और वितरण — सब शामिल है।
मुझे नया मृदा स्वास्थ्य कार्ड कितनी बार मिलेगा?
योजना का बताया गया चक्र हर जोत के लिए दो साल में एक बार है, ताकि अगला कार्ड दिखा सके कि आपकी मिट्टी में क्या बदला है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में कौन से 12 पैरामीटर जाँचे जाते हैं?
मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और सल्फर; सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज़ और बोरॉन; और pH, विद्युत चालकता (EC) व जैविक कार्बन (OC)।
अपने खेत के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड कैसे बनवाएँ?
यह जानने के लिए कि आपका इलाका राज्य की वार्षिक कार्ययोजना के तहत सैंपलिंग के लिए तय है या नहीं, अपने ज़िला या ब्लॉक कृषि अधिकारी से संपर्क करें। इसके बाद अधिकृत एजेंट आपके खेत आता है, उसे जियो-टैग करता है और नमूना लेता है; प्रयोगशाला जाँच के बाद कार्ड तैयार होता है।
मिट्टी का नमूना असल में कौन लेता है?
एक प्रशिक्षित व्यक्ति — राज्य कृषि विभाग का कर्मचारी, किसी आउटसोर्स एजेंसी का स्टाफ़, या कृषि/विज्ञान कॉलेज के छात्र — खेत के चार कोनों और बीच से “V” आकार में काटकर 15–20 सेमी गहराई से मिट्टी लेते हैं, फिर मिलाकर बैग में भरते हैं।
मिट्टी का नमूना लेने का सबसे उपयुक्त समय कब है?
रबी या खरीफ़ की फ़सल कटने के बाद, या जब भी खेत में कोई खड़ी फ़सल न हो।
कार्ड पर दी गई सिफ़ारिशों का क्या करूँ?
कार्ड बताता है कि आपके इस खेत को, इस फ़सल के लिए, कितनी खाद, जैव-उर्वरक और मिट्टी-सुधार की ज़रूरत है — एक ही तयशुदा मात्रा हर जगह डालने के बजाय इन्हीं मात्राओं का पालन करें।
क्या मृदा स्वास्थ्य कार्ड का कोई आधिकारिक मोबाइल ऐप है?
हाँ — SHC मोबाइल ऐप का इस्तेमाल फ़ील्ड एजेंट खेत को जियो-टैग करने और नमूना लेने के लिए करते हैं; हर नमूने को एक यूनीक QR कोड मिलता है जो उसे पोर्टल पर उसके जाँच परिणाम से जोड़ता है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड अब किस योजना के तहत आता है?
2022–23 से इसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) में “मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता” नाम के घटक के रूप में मिला दिया गया है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना कब शुरू हुई?
इसकी शुरुआत 19 फ़रवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूरतगढ़, राजस्थान से की थी — यही वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय मृदा वर्ष घोषित किया था।
अब तक कितने मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी हो चुके हैं?
जुलाई 2025 तक 25 करोड़ से ज़्यादा कार्ड बाँटे जा चुके थे, जो देशभर की 8,272 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं (स्थायी, मोबाइल, मिनी और गाँव-स्तर) के नेटवर्क से तैयार हुए।
क्या सिफ़ारिशों का पालन करने से सच में फ़ायदा होता है?
मंत्रालय ने कुछ व्यक्तिगत उदाहरण दर्ज किए हैं — जैसे बिहार के नालंदा ज़िले के एक किसान का, जिनके प्रदर्शन-खेत में कार्ड की जैविक-सुधार और खाद सिफ़ारिशें अपनाने के बाद उपज लगभग 16% ज़्यादा रही (32 क्विंटल/हेक्टेयर बनाम उनके सामान्य 27.5 क्विंटल/हेक्टेयर)। यह एक दर्ज उदाहरण है, कोई प्रकाशित राष्ट्रीय औसत नहीं।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से जुड़ी किसी समस्या पर मदद कैसे लूँ?
किसान कॉल सेंटर की टोल-फ़्री हेल्पलाइन 1800-180-1551 (1551 से भी) पर कॉल करें, जो रोज़ सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक 22 भाषाओं में उपलब्ध है, या मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल के सपोर्ट डेस्क पर टिकट दर्ज करें।
अगर मेरे गाँव में अभी तक सैंपलिंग नहीं हुई है तो क्या करूँ?
सैंपलिंग हर राज्य की वार्षिक कार्ययोजना के तहत ज़िले-दर-ज़िले होती है। अपने ब्लॉक या ज़िला कृषि अधिकारी से पूछें कि आपका इलाका कब निर्धारित है — इसे बायपास करने वाला कोई अलग व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन नहीं है।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन 1800-180-1551 ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
