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आसानअपडेट 30 अगस्त 2026

अजवाइन

Trachyspermum ammi

मुख्यतः गुजरात और राजस्थान में बहुत हल्की बीज दर पर उगाई जाने वाली एक मज़बूत रबी बीज-मसाला फसल — और जो ग़लती किसी भी रोग से ज़्यादा अजवाइन की फसल बिगाड़ती है वह है खड़ा पानी। इसकी मूसला जड़ जलभराव में नहीं बचती और मिट्टी लगातार गीली रहने के क़रीब 48 घंटे में ही सड़ने लगती है।

Umbrella-shaped white flower clusters (umbels) on an ajwain plant, close up at night

त्वरित सारांश

इस पेज की मुख्य बातें लगभग दो मिनट में — पढ़ें या सुनें।

त्वरित सारांश

अजवाइन (Trachyspermum ammi) एक रबी बीज-मसाला फसल है जो मुख्यतः गुजरात और राजस्थान में, और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में भी, अपने छोटे, तीख़े, थाइमॉल-भरपूर बीज के लिए उगाई जाती है। यह एक असाधारण रूप से मज़बूत, सूखा- व गर्मी-सहनशील फसल है जो "आमतौर पर कीट-रोगों से कम प्रभावित" होती है — तो इस फसल का सबसे बड़ा ख़तरा कोई कीट नहीं, बल्कि जल-निकासी है।

अजवाइन की मूसला जड़ खड़े पानी में नहीं बचती: मिट्टी लगातार गीली रहने के लगभग 48 घंटे में जड़-सड़न शुरू हो जाती है, जो अक्सर 30–45 दिन के पौधों में अचानक पीलेपन के रूप में दिखती है। जो किसान "सुरक्षा के लिए" खेत में पानी भर देते हैं या नीची, जलभराव-प्रवण ज़मीन पर बोते हैं, वे किसी कीट या फफूँद से ज़्यादा इसी एक कारण से फसल गँवाते हैं। जल-निकासी सही रखें — अच्छी जल-निकासी वाली दोमट या चिकनी दोमट, कभी बलुई या जलभराव-प्रवण ज़मीन नहीं, भारी खेत में ऊँची क्यारियाँ — तो अजवाइन उगाने में सबसे सहज मसाला फसलों में से एक है।

इसका एक ही असली रोग चूर्णिल फफूँदी है, पत्तियों पर सफ़ेद फफूँदी की परत जो नम, बादली मौसम में बढ़ती है और फूल आने पर गंधक की धूल या घुलनशील गंधक छिड़काव से सस्ते में नियंत्रित हो जाती है। माहू देखने लायक मुख्य कीट है, ज़्यादातर वानस्पतिक अवस्था में। किस्म के हिसाब से अवधि बहुत अलग-अलग है — क़रीब 123 दिन में पकने वाली अगेती किस्म से लेकर 175–180 दिन लेने वाली लंबी-अवधि किस्म तक — तो किस्म का चुनाव असल में इस बात का फ़ैसला है कि आप खेत कितने दिन रोक सकते हैं। सटीक बीज दर, दूरी, खाद कार्यक्रम, सिंचाई सीमा और अपेक्षित उपज नीचे पेज पर दी गई हैं।

फसल प्रकार
मसाला (बीज)
सीज़न
रबी
उपयुक्त राज्य
8+ प्रमुख राज्य
बढ़वार अवधि
123–180 दिन (किस्म पर निर्भर)
जल आवश्यकता
कम; कभी जलभराव नहीं
तापमान
20–30°C; शुष्क गर्मी अच्छी तरह सहती है
मिट्टी
अच्छी जल-निकासी वाली दोमट/चिकनी दोमट
कठिनाई स्तर
आसान
अपेक्षित उपज
4–15 क्विंटल/हेक्टेयर (बारानी–सिंचित)
मुख्य तरीक़ा
खेत में कभी पानी खड़ा न होने दें

परिचय

अजवाइन (Trachyspermum ammi), जिसे कैरम सीड भी कहते हैं, धनिया परिवार (Apiaceae) की एक रबी बीज-मसाला फसल है, जो मुख्यतः गुजरात व राजस्थान में और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में भी अपने छोटे, बेहद तीख़े, थाइमॉल-भरपूर बीज के लिए उगाई जाती है।

फसल असाधारण रूप से मज़बूत है: यह शुष्क गर्मी व हल्की मिट्टी सहन करती है, और ज़्यादातर मसाला फसलों की तुलना में "आमतौर पर कीट-रोगों से कम प्रभावित" होती है। इसकी असली कमज़ोरी कोई कीट नहीं बल्कि जल-निकासी है — मूसला जड़ खड़े पानी में नहीं बचती, और मिट्टी लगातार गीली रहने के क़रीब 48 घंटे में जड़-सड़न शुरू हो जाती है।

जल-निकासी के अलावा, एकमात्र असली रोग चूर्णिल फफूँदी है, जो गंधक से सस्ते में नियंत्रित होता है, और देखने लायक मुख्य कीट वानस्पतिक अवस्था का माहू है। यह गाइड जल-निकासी, गंधक-छिड़काव के सही समय और किस्मों की व्यापक अवधि-विविधता को ध्यान में रखकर फसल का अनुसरण करती है।

फसल की समयरेखा, बुवाई से कटाई तक

पूरे सीज़न की एक झलक — हर अवस्था की पूरी जानकारी के लिए नीचे संबंधित सेक्शन पर जाएँ।

  1. दिन 0

    बुवाई

    45 सेमी कतारों में बारीक, अच्छी जल-निकासी वाली रबी बीज-क्यारी में छोटा बीज उथला बोएँ — भारी ज़मीन में ऊँची क्यारियाँ।

  2. दिन 8–15

    अंकुरण

    बीज-मसालों जैसा धीमा, छोटे-बीज अंकुरण; कतार में पौध को 20–30 सेमी पर पतला करें।

  3. दिन 20–45

    वानस्पतिक बढ़वार

    पत्तेदार बढ़वार बनती है; अब खेत खरपतवार-मुक्त रखें और नरम बढ़वार पर माहू देखें।

  4. दिन 45–60

    फूल शुरू

    चूर्णिल फफूँदी के विरुद्ध पहली गंधक धूल या छिड़काव यहीं होनी चाहिए, लक्षण दिखने से पहले, 15 दिन बाद दोहराएँ।

  5. दिन 60–110

    बीज-बंधन व भराव

    अब से सिर्फ़ हल्की, सावधान सिंचाई — यही वह समय भी है जब किसी भी खड़े पानी से जड़-सड़न सबसे ज़्यादा नुक़सान करती है।

  6. दिन 110–140

    पकाव

    पौधा सूखते ही बीज का रंग हरे से धूसर-भूरा होता है; निचली पत्तियाँ पीली पड़ती हैं।

  7. दिन 123–180

    कटाई

    बीज सख़्त व धूसर होने पर काटें — अगेती किस्म में क़रीब 123 दिन से लेकर लंबी-अवधि किस्म में 175–180 दिन तक कहीं भी।

उपयुक्त राज्य

जिन राज्यों में यह फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, वे नीचे हाइलाइट हैं। आपके खेत के लिए अंतिम सलाह हमेशा आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही देगा।

  • जम्मू और कश्मीर
  • हिमाचल प्रदेश
  • पंजाब
  • उत्तराखंड
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • उत्तर प्रदेश
  • राजस्थान
  • बिहार
  • झारखंड
  • पश्चिम बंगाल
  • सिक्किम
  • असम
  • अरुणाचल प्रदेश
  • मेघालय
  • नागालैंड
  • मणिपुर
  • मिज़ोरम
  • त्रिपुरा
  • गुजरात
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • गोवा
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक
  • केरल
  • तमिलनाडु
  • पुदुचेरी
  • लद्दाख
  • चंडीगढ़

यहाँ उगाई जाती है

जलवायु की ज़रूरतें

अजवाइन एक मज़बूत, अपेक्षाकृत सूखा- व गर्मी-सहनशील बीज-मसाला है — इसकी असली कमज़ोरी गीले पैर हैं, सूखा मौसम नहीं। मूसला जड़ जलभराव में नहीं बचती और मिट्टी लगातार गीली रहने के क़रीब 48 घंटे में सड़ने लगती है, इसलिए फसल के जीने-मरने में जल-निकासी वर्षा या सिंचाई की कुल मात्रा से कहीं ज़्यादा मायने रखती है।

  • आदर्श तापमान

    20–30°C बढ़वार को उपयुक्त; फसल शुष्क गर्मी अच्छी तरह सहती है, पर फूल पर पाला हानिकारक

  • वर्षा

    कुछ हल्की सिंचाई पर सूखा रबी सीज़न सबसे उपयुक्त — किसी भी अवस्था में खड़ा पानी फसल का सबसे बड़ा शत्रु है, सूखा नहीं

  • नमी

    कम आर्द्रता बेहतर; फूल पर नम, बादली दौर चूर्णिल फफूँदी को बढ़ावा देते हैं

  • धूप

    अच्छे फूल, बीज-भराव व सुगंध को पूरे सीज़न भरपूर धूप

मिट्टी की ज़रूरतें

पहले अच्छी जल-निकासी वाला खेत चुनें, मिट्टी का प्रकार बाद में। अजवाइन दोमट, चिकनी दोमट या यहाँ तक कि काफ़ी हल्की मिट्टी में भी उग जाएगी, पर बारिश या सिंचाई के बाद खेत में पानी रुकता हो तो कोई मिट्टी-सिफ़ारिश मायने नहीं रखती — यही एक शर्त है जो यह फसल माफ़ नहीं करती।

  • उपयुक्त मिट्टी

    ज़्यादातर मिट्टी में उगती है पर अच्छी जल-निकासी वाली दोमट व चिकनी दोमट पर सबसे अच्छी उपज देती है; शुद्ध बलुई मिट्टी से बचें, जो बहुत कम नमी व पोषक तत्व रोकती है

  • pH स्तर

    6.5–8.0; अपने मुख्य गुजरात व राजस्थान पट्टी की हल्की क्षारीय मिट्टी सहती है

  • जल निकासी

    अच्छी जल-निकासी इस फसल के लिए सबसे ज़रूरी मिट्टी-शर्त है — नीची या भारी ज़मीन जो पानी रोके, दिनों में जड़-सड़न लाती है

  • जैविक तत्व

    मध्यम; यह कम-भक्षक फसल अच्छी खाद वाली पिछली फसल की अवशिष्ट उर्वरता पर अच्छा करती है

खेत की तैयारी

क्षेत्र चाहे जो हो, चार कदम वही रहते हैं — बस समय बुवाई के अनुसार बदलता है।

  1. 1

    बारीक, अच्छी जल-निकासी वाली बीज-क्यारी

    बारीक बीज के लिए दो-तीन जुताई व पाटा, ऐसी ज़मीन पर जो सिद्ध रूप से पानी निकालती हो — सिर्फ़ सुविधाजनक ज़मीन पर नहीं।

  2. 2

    भारी ज़मीन में ऊँची क्यारियाँ

    जहाँ खेत भारी चिकनी मिट्टी या पानी रोकने वाला हो, वहाँ सपाट ज़मीन की जगह ऊँची क्यारियों या मेड़ों पर बोएँ, ताकि अतिरिक्त पानी जड़ के पास रुकने की बजाय बह जाए।

  3. 3

    आधारीय गोबर खाद व उर्वरक

    बुवाई से पहले 8–10 टन/हेक्टेयर गोबर खाद और पूरा फ़ॉस्फ़ोरस व पोटाश क्यारी में मिलाएँ।

बीज की जानकारी

मुख्य किस्मों की तुलना — अवधि, उपज, रोग-प्रतिरोध या आप किस मक़सद से उगा रहे हैं, इसके आधार पर चुनें।

किस्मअवधिउपजरोग-प्रतिरोधसर्वश्रेष्ठ राज्यकिसके लिए उपयुक्त

अजमेर अजवाइन-1 (AA-1)

ICAR-NRCSS, अजमेर में प्रतापगढ़ स्थानीय जननद्रव्य से लगातार चयन द्वारा विकसित। सिंचित व बारानी दोनों खेती के लिए उपयुक्त लंबी-अवधि, अधिक-उपज किस्म।

~165 दिन14.26 क्विंटल/हेक्टेयर सिंचित, 5.8 क्विंटल/हेक्टेयर बारानीविशेष रूप से प्रलेखित नहींराजस्थानसिंचित व बारानी दोनों खेत

अजमेर अजवाइन-2 (AA-2)

ICAR-NRCSS, अजमेर में स्थानीय जननद्रव्य से जल्दी पकने के चयन द्वारा विकसित। सिंचित व बारानी दोनों खेती के लिए राष्ट्रीय-जाँच किस्म, और दोनों अजमेर किस्मों में चूर्णिल फफूँदी की अधिक सहनशीलता वाली।

~147 दिन12.83 क्विंटल/हेक्टेयर सिंचित, 5.2 क्विंटल/हेक्टेयर बारानीचूर्णिल फफूँदी सहनशीलराजस्थानसिंचित व बारानी खेत; फफूँदी-प्रवण क्षेत्र

अजमेर अजवाइन-93 (AA-93)

ICAR-NRCSS, अजमेर से जल्दी पकने वाली किस्म, सिर्फ़ 46 दिन में फूल आना शुरू — सामान्य-अवधि किस्मों से 30–40 दिन पहले। इसका खड़ा पौधा ढाँचा ज़्यादा सघन बुवाई देता है, जो प्रति-पौधा कम उपज की भरपाई करता है, और यह ओस से गिरने (लॉजिंग) को सहती है।

~123 दिनसामान्य-अवधि किस्मों से प्रति-पौधा कम; अधिक पौध-घनत्व से बढ़ाई गईविशेष रूप से प्रलेखित नहींराजस्थान व अन्य अजवाइन क्षेत्र जहाँ कम-अवधि विकल्प चाहिएछोटा रबी मौसम; ओस-गिरावट-प्रवण खेत

गुजरात अजवाइन-1 (GA-1)

सरदारकृष्णनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय (SDAU), जगुदन, गुजरात द्वारा जारी। गुजरात की स्थानीय किस्म से लगभग 25% अधिक उपज देने वाली लंबी-अवधि किस्म।

175–180 दिनस्थानीय गुजरात किस्म से ~25% अधिकविशेष रूप से प्रलेखित नहींगुजरात, राजस्थानलंबा रबी सीज़न, मुख्य गुजरात उगाई क्षेत्र

गुजरात अजवाइन-3 (GA-3)

बहु-स्थान परीक्षणों के बाद SDAU, जगुदन, गुजरात द्वारा जारी। राष्ट्रीय-जाँच किस्मों AA-1 व AA-2 से क्रमशः 12.9% व 4.5% अधिक बीज उपज देती है, मोटे, एक-से, आकर्षक, अधिक तीख़े व सुगंधित बीज के साथ।

मध्यम अवधिपरीक्षणों में औसत 1035 किग्रा/हेक्टेयर; मोटा बीज (1.15 ग्राम परीक्षण-भार)विशेष रूप से प्रलेखित नहींगुजरात, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़अधिक उपज-सीमा और प्रीमियम, अधिक तीख़ा बीज ग्रेड
बीज दर
कतार-बुवाई (ड्रिलिंग) को 1.5–2.5 किग्रा/हेक्टेयर; छिटकवाँ बुवाई को थोड़ा अधिक
प्रमाणित बीज
फफूँदी-प्रवण क्षेत्र में AA-2 जैसी सहनशील किस्म वाक़ई मदद करती है — पर किस्म जो भी हो, खेत की अपनी जल-निकासी बीज के पैकेट से ज़्यादा मायने रखती है। फफूँदी-रोधी किस्म भी खड़े पानी में सड़ ही जाती है।
दूरी
कतारों के बीच 45 सेमी, कतार में पतला करके 20–30 सेमी
बीज उपचार
धीमे-अंकुरित बीज को ठंडी, नम बीज-क्यारी में आर्द्र-गलन से बचाने को बुवाई से पहले थायरम या कार्बेन्डाज़िम के साथ Trichoderma जैसे जैव-कारक से उपचारित करें।

बुवाई गाइड

सटीक बुवाई तारीख़ की चिंता से पहले खेत की जल-निकासी सही करें — सही समय बुवाई भी सिंचाई के बाद पानी रोकने वाले खेत में जड़-सड़न से फसल गँवा देती है। बुवाई के समय मिट्टी थोड़ी सूखी हो तो 4–5 दिन बाद एक हल्की सिंचाई एक-सा अंकुरण देती है।

सबसे अच्छा समय
मुख्य रबी फसल को अक्टूबर–नवंबर; कुछ गरम क्षेत्रों में सितंबर से थोड़ा जल्दी
क़तार की दूरी
45 सेमी
पौधे की दूरी
कतार में 20–30 सेमी
बुवाई की गहराई
1–2 सेमी
तरीक़ा
छोटे बीज को बारीक, नम, अच्छी जल-निकासी वाली क्यारी में उथला ड्रिल करें और हल्का ढकें; भारी या जलभराव-प्रवण ज़मीन में सपाट के बजाय ऊँची क्यारियों या मेड़ों पर बोएँ

खाद कार्यक्रम

बुवाई के समय एक साथ पूरी खाद डालने से बँटी हुई मात्रा बेहतर है — खासकर नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या रिसकर बह जाता है।

  1. 1

    आधारीय (भूमि तैयारी पर)

    बुवाई से पहले

    8–10 टन/हेक्टेयर गोबर खाद प्लस पूरा फ़ॉस्फ़ोरस व पोटाश और नाइट्रोजन का हिस्सा — सीज़न भर के लिए कुल लगभग 80 N : 50 P₂O₅ : 50 K₂O किग्रा/हेक्टेयर।

  2. 2

    पहली टॉप-ड्रेसिंग

    बुवाई के 45 दिन बाद

    बची नाइट्रोजन का एक हिस्सा, एक सिंचाई के साथ दें।

  3. 3

    दूसरी टॉप-ड्रेसिंग

    फूल आने से ठीक पहले

    नाइट्रोजन का अंतिम हिस्सा — फूल शुरू होने के बाद नाइट्रोजन न धकेलें, क्योंकि तब नरम बढ़वार माहू व फफूँदी न्योतती है।

सिंचाई कार्यक्रम

  1. 1. अंकुरण

    दिन 0–10

    बुवाई के समय बीज-क्यारी थोड़ी सूखी हो तो लगभग 4–5 दिन बाद एक हल्की सिंचाई छोटे बीज के अंकुरण को एक-सा बनाती है।

  2. 2. वानस्पतिक बढ़वार

    25–45 दिन

    क़रीब 15–25 दिन के अंतराल पर एक-दो सिंचाई फसल बनाती हैं; हल्की रखें, भारी नहीं।

  3. 3. फूल व बीज भराव

    60–110 दिन

    केवल हल्की, सावधान सिंचाई — यही वह अवस्था है जब खड़ा पानी जड़-सड़न से सबसे ज़्यादा नुक़सान करता है।

महत्वपूर्ण अवस्थाएँ

  • फूल
  • बीज-भराव

पानी बचाने के तरीक़े

  • अजवाइन को पूरे सीज़न में सिर्फ़ क़रीब 5–6 हल्की सिंचाई चाहिए, 2–3 हफ़्ते के अंतराल पर — ज़्यादा पानी उपज नहीं बढ़ाता, सिर्फ़ जड़-सड़न का ख़तरा बढ़ाता है।
  • ऐसे खेत में कभी सिंचाई न करें जो एक दिन में न सूखे; भारी मिट्टी में ऊँची क्यारियों पर बोएँ ताकि अतिरिक्त पानी जड़ के पास रुकने की बजाय बह जाए।
  • अच्छी सिंची पिछली फसल के बाद अच्छी अवशिष्ट नमी में बुवाई पहली सिंचाई बचा सकती है।

खरपतवार प्रबंधन

जैविक नियंत्रण

  • छतरी बंद होने से पहले 30–40 दिन तक एक-दो हाथ निराई।
  • साफ़, अच्छी जल-निकासी वाली बीज-क्यारी अधिक एक-सा अंकुरित होती है और फसल को खरपतवारों पर शुरुआती बढ़त देती है।

रासायनिक नियंत्रण

  • बुवाई के तुरंत बाद नम मिट्टी पर पेंडिमेथालिन पूर्व-अंकुरण, इस धीमे शुरू होती फसल में अगेते खरपतवार रोकता है।
  • 30–35 दिन पर एक हाथ निराई फसल को उसकी सबसे नाज़ुक अवधि में साफ़ रखती है।

पोषक तत्व की कमी की पहचान

हर पोषक तत्व की कमी पौधे पर असल में कैसी दिखती है — ताकि ग़लत स्प्रे करने से पहले आप कमी और रोग में फ़र्क़ कर सकें।

ध्यान देने योग्य रोग

लक्षण, संभावित कारण और असल में क्या इलाज करता है — सिर्फ़ किसी स्प्रे का नाम नहीं।

ध्यान देने योग्य कीट

नुक़सान दिखने से पहले क्या देखें, और रसायन से पहले जैविक विकल्प क्या हैं।

आम ग़लतियाँ जिनसे बचें

जो ग़लतियाँ किसानों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती हैं, खेत में जितनी बार दिखती हैं उसी क्रम में — हमेशा वैसे नहीं जैसा आप सोचें।

  1. 1

    नीची या जलभराव-प्रवण ज़मीन पर बुवाई।

    नुक़सान क्यों होता है

    अजवाइन की मूसला जड़ खड़े पानी में नहीं बचती — जलभराव के लगभग 48 घंटे में जड़-सड़न शुरू हो सकती है, जो किसी भी कीट या रोग से कहीं तेज़ फसल को मार देती है।

  2. 2

    "सुरक्षा के लिए" भारी या बार-बार सिंचाई।

    नुक़सान क्यों होता है

    फसल को पूरे सीज़न में सिर्फ़ 5–6 हल्की सिंचाई चाहिए; अतिरिक्त पानी उपज नहीं बढ़ाता, सिर्फ़ जड़-सड़न का ख़तरा बढ़ाता है।

  3. 3

    चूर्णिल फफूँदी दिखने का इंतज़ार करके तब छिड़काव करना।

    नुक़सान क्यों होता है

    सफ़ेद परत दिखने तक फफूँद पहले ही फैल चुकी होती है — पहली गंधक धूल या छिड़काव फूल आने पर, लक्षण दिखने से पहले, फिर 15 दिन बाद दोहराते हुए होनी चाहिए।

  4. 4

    छोटे बीज को बहुत गहरा या ढेलेदार क्यारी में बोना।

    नुक़सान क्यों होता है

    अधिकतर बीज-मसालों की तरह अजवाइन का बीज छोटा है और एक-से जमाव को बारीक, उथली-ढकी क्यारी चाहता है — गहरा या ढेलों में बोने पर अंकुरण धीमा व पैचदार होता है।

  5. 5

    फूल शुरू होने के बाद नाइट्रोजन धकेलना।

    नुक़सान क्यों होता है

    पछेती नाइट्रोजन नरम, हरी-भरी बढ़वार देती है जो माहू व फफूँदी न्योतती और परिपक्वता में देरी करती है — फसल का अंतिम नाइट्रोजन हिस्सा फूल से ठीक पहले है, बाद में नहीं।

  6. 6

    एक ही खेत में अजवाइन के बाद अजवाइन, या किसी अन्य बीज-मसाला के बाद, उगाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    जड़-सड़न व अन्य मिट्टी-जनित समस्याएँ मिट्टी में तब तक जमा होती हैं जब तक फसल पैच में विफल होने लगे — अनाज या असंबंधित फसल से फ़सल-चक्र लें।

  7. 7

    छोटे रबी मौसम में लंबी-अवधि किस्म चुनना।

    नुक़सान क्यों होता है

    GA-1 जैसी लंबी किस्म को 175–180 दिन चाहिए; मौसम छोटा हो तो AA-93 (क़रीब 123 दिन) जैसी अगेती किस्म ठीक बैठती है, भले ही उसकी कम प्रति-पौधा उपज की भरपाई को अधिक पौध-घनत्व चाहिए।

  8. 8

    बहुत जल्दी काटना या फसल को खेत में ज़्यादा खड़ा रहने देना।

    नुक़सान क्यों होता है

    बहुत जल्दी काटा बीज कच्चा रहकर तीखापन व सुगंध खोता है; बहुत देर तक खड़ा बीज झड़कर खेत में गिरता है — बीज सख़्त व धूसर-भूरा होने पर ही काटें।

कटाई

बीज सख़्त होकर हरे से धूसर-भूरे रंग का होने पर काटें, ज़्यादातर किस्मों में आमतौर पर बुवाई के 130–180 दिन बाद, या AA-93 जैसी अगेती किस्म में क़रीब 123 दिन जितना जल्दी। देर से काटने पर बीज झड़ जाता है।

तैयार होने के संकेत

  • बीज का रंग धूसर-भूरा व सख़्त होना
  • तने में कुछ हरापन रहते छत्रकों का सूखना
  • निचली पत्तियों का पीला पड़ना व सूखना

उपकरण

  • पूरे पौधे काटने को हँसिया
  • सुखाने व मड़ाई को तिरपाल या साफ़ खलिहान
  • सुगंध व तीखापन बचाने को छाया या हल्की धूप

अपेक्षित उपज

बारानी में 4–6 क्विंटल/हेक्टेयर; AA-1, AA-2 या GA-3 जैसी अधिक-उपज किस्म के साथ सिंचाई में 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर

कटाई के बाद व भंडारण

  • भंडारण

    मड़ाई किए बीज को सुरक्षित कम नमी तक सुखाएँ और ठंडे, सूखे, हवादार भंडार में रखें; अच्छा सूखा अजवाइन महीनों तक अपना तीखापन व सुगंध बनाए रखता है।

  • पैकेजिंग

    साफ़, पूरी तरह सूखा बीज सूखे भंडार में फ़र्श से ऊपर रखे साफ़ बोरों में पैक करें।

  • परिवहन

    केवल पूरी तरह सूखा बीज नमी से बचाकर भेजें — नम बीज रास्ते में जल्दी फफूँद लगाता है।

  • भंडारण अवधि

    अच्छे सूखे, सही रखे बीज को कई महीने से लगभग एक साल तक।

मंडी भाव

सरकार के अपने एगमार्कनेट डेटा से, आपके नज़दीक का आज का मंडी भाव — लाइव।

सरकारी एगमार्कनेट डेटा से रोज़ाना लाइव मंडी भाव।

आज के भाव ला रहे हैं…

data.gov.in (एगमार्कनेट) से सिंक होता है। भाव ₹ प्रति क्विंटल हैं।

मौसम

आपके चुने गए स्थान की मौजूदा स्थिति और 5-दिन का पूर्वानुमान, फसल की अवस्था के अनुसार एक सलाह के साथ।

मौजूदा स्थिति और 5-दिन के पूर्वानुमान के लिए अपना राज्य चुनें।

मौसम की जानकारी ला रहे हैं…

Open-Meteo से लाइव डेटा

मुनाफ़ा कैलकुलेटर

आपकी अपनी लागत, अपेक्षित उपज और बिक्री भाव — हमारी नहीं।

पैसा कहाँ जाता है

नीचे कैलकुलेटर की डिफ़ॉल्ट लागत के अनुसार प्रति एकड़ कुल लागत में हर मद का हिस्सा — वहाँ अपने आँकड़े बदलने पर यह तस्वीर पूरी तरह आप पर लागू नहीं रहेगी, पर क्रम शायद ही बदलता है।

  • ज़मीन का किराया35% (₹8,000)
  • मज़दूरी24% (₹5,500)
  • सिंचाई11% (₹2,500)
  • खाद10% (₹2,200)
  • मशीन9% (₹2,000)
  • कीटनाशक और खरपतवारनाशक5% (₹1,200)
  • ब्याज3% (₹800)
  • बीज3% (₹700)

आधिकारिक डाउनलोड

केवल सरकार और ICAR के दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ किसी आधिकारिक सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अजवाइन के लिए जलभराव इतना ख़तरनाक क्यों है?

अजवाइन की मूसला जड़ खड़े पानी में नहीं बचती। मिट्टी लगातार गीली रहते ही लगभग 48 घंटे में जड़-सड़न शुरू हो सकती है, जो अक्सर 30–45 दिन के पौधों में अचानक पीलेपन के रूप में दिखती है। यह एक कारण किसी भी कीट या रोग से ज़्यादा अजवाइन की फसलें बिगाड़ता है — इसीलिए अच्छी जल-निकासी, और भारी ज़मीन में ऊँची क्यारियाँ, इस फसल पर आपके लगभग किसी भी अन्य फ़ैसले से ज़्यादा मायने रखती हैं।

अजवाइन का मुख्य रोग क्या है और इसे कैसे नियंत्रित करूँ?

चूर्णिल फफूँदी — पत्तियों व तनों पर सफ़ेद, चूर्ण-सी फफूँदी की परत — अजवाइन का एकमात्र असली रोग है, फूल के आसपास नम, बादली मौसम में सबसे बुरा। इसे सस्ते में लगभग 25 किग्रा/हेक्टेयर गंधक की धूल से, या 0.1% घुलनशील गंधक छिड़ककर नियंत्रित करें, फूल आने पर लक्षण दिखने से पहले और 15 दिन बाद फिर से।

अजवाइन को कितना पानी चाहिए?

बहुत कम — पूरे सीज़न में क़रीब 5–6 हल्की सिंचाई, लगभग 2–3 हफ़्ते के अंतराल पर, काफ़ी हैं। ज़्यादातर फसलों के उलट, अजवाइन को "सुरक्षा के लिए" अतिरिक्त पानी देना उपज नहीं बढ़ाता; यह सिर्फ़ जड़-सड़न का ख़तरा बढ़ाता है, क्योंकि फसल की मूसला जड़ किसी भी अवस्था में खड़ा पानी सहन नहीं करती।

मुझे कौन-सी अजवाइन किस्म चुननी चाहिए?

यह आपके मौसम व खेत पर निर्भर करता है। AA-2 कुछ चूर्णिल-फफूँदी सहनशीलता के साथ एक अच्छी सर्वांगीण किस्म है। AA-93 लगभग 123 दिन में पकती है — जहाँ रबी मौसम छोटा हो वहाँ उपयोगी, हालाँकि इसकी प्रति-पौधा उपज कम है और भरपाई को अधिक पौध-घनत्व चाहिए। GA-1 व GA-3 लंबी-अवधि, अधिक-उपज वाली गुजरात किस्में हैं, GA-3 अपने मोटे, अधिक तीख़े, सुगंधित बीज के लिए भी क़ीमती है।

अजवाइन कब काटूँ?

बीज सख़्त होकर हरे से धूसर-भूरे रंग का होने पर काटें — ज़्यादातर किस्मों में आमतौर पर बुवाई के 130–180 दिन बाद, हालाँकि AA-93 जैसी अगेती किस्म क़रीब 123 दिन में तैयार हो जाती है। बहुत जल्दी काटने पर तीखापन व सुगंध की कमी रहती है; फसल को बहुत देर तक खड़ा रखने पर बीज झड़कर खेत में गिरता है।

क्या अजवाइन का एमएसपी है?

नहीं। अजवाइन बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य वाली बाज़ार बीज-मसाला फसल है — इसका दाम मंडी व मसाला-बाज़ार माँग से तय होता है और सालों व सीज़न के बीच व्यापक रूप से घट-बढ़ सकता है। फसल की योजना बनाते व कब बेचें तय करते इस पृष्ठ के लाइव मंडी भाव व लाभ कैलकुलेटर का उपयोग करें।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके खेत और मिट्टी से जुड़ी किसी भी ख़ास बात के लिए आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही आधिकारिक जवाब है।