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भारत सरकारकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयसक्रियअपडेट 13 जुलाई 2026

परम्परागत कृषि विकास योजना

Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY)

किसान समूहों (क्लस्टर) को 3 साल में प्रति हेक्टेयर ₹31,500 की सहायता — इनपुट, PGS-India प्रमाणन, प्रशिक्षण और मार्केटिंग सहयोग के साथ, ताकि समूह मिलकर जैविक खेती अपना सकें।

प्रति हेक्टेयर सहायता
3 साल में ₹31,500
योजना की स्थिति
सक्रिय
शुरुआत
2015-16
आवेदन का तरीका
क्लस्टर / रीजनल काउंसिल के जरिए
लाभान्वित किसान
25.30 लाख (फरवरी 2025 तक)
मंत्रालय
कृषि एवं किसान कल्याण
श्रेणी
जैविक खेती संवर्धन
प्रति किसान अधिकतम क्षेत्र
2 हेक्टेयर

परिचय

PKVY एक क्लस्टर-आधारित योजना है जो किसानों के समूहों को एक साथ जैविक खेती अपनाने में मदद करती है, न कि हर किसान को अलग-अलग पैसा देकर। कम से कम 20 किसानों का एक समूह, जो लगभग 20 हेक्टेयर के लगातार खेत पर खेती करता हो, आधार इकाई है; 25 से 50 ऐसे समूह (500–1,000 हेक्टेयर) मिलकर एक PKVY क्लस्टर बनाते हैं, जिसे एक रीजनल काउंसिल की मदद से चलाया जाता है।

तीन साल में राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रति हेक्टेयर ₹31,500 प्रति क्लस्टर मिलते हैं: ₹15,000 सीधे किसान के खाते में DBT से जैविक इनपुट के लिए, ₹9,000 प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण के लिए, ₹4,500 मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के लिए, और ₹3,000 प्रमाणन व अवशेष जांच (रेसिड्यू एनालिसिस) के लिए। एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक सहायता मिल सकती है।

गुणवत्ता जांच PGS-India — यानी सहभागी गारंटी प्रणाली (Participatory Guarantee System) — के जरिए होती है, जिसमें एक ही समूह के किसान एक-दूसरे के खेत का निरीक्षण करते हैं, न कि किसी बाहरी (थर्ड-पार्टी) ऑडिटर को पैसा देकर जांच कराई जाती है। रूपांतरण (कन्वर्जन) के वर्षों में भूमि को PGS-Green और मानक पूरी तरह पूरे होने पर PGS-Organic प्रमाणित किया जाता है, और परिणाम PGS-India पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से देखे जा सकते हैं।

योजना की मुख्य बातें

  • व्यक्तिगत नहीं, समूह (क्लस्टर) आधारित सहायता

    20 या अधिक किसानों का समूह 20 हेक्टेयर लगातार भूमि पर; 25–50 समूह (500–1,000 हेक्टेयर) मिलकर एक क्लस्टर बनाते हैं, जिसे रीजनल काउंसिल संभालती है।

  • 3 साल में प्रति हेक्टेयर ₹31,500

    इनपुट के लिए ₹15,000 DBT, प्रशिक्षण के लिए ₹9,000, मार्केटिंग/ब्रांडिंग के लिए ₹4,500, और प्रमाणन व अवशेष जांच के लिए ₹3,000।

  • PGS-India प्रमाणन

    सहकर्मी-समीक्षा (peer-reviewed) आधारित समूह प्रमाणन — किसी थर्ड-पार्टी ऑडिटर की फीस नहीं। योजना के तहत बने समूहों के लिए निःशुल्क।

  • डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर

    ₹15,000/हेक्टेयर का इनपुट हिस्सा सीधे किसान के बैंक खाते में जाता है, किसी बिचौलिए के जरिए नहीं।

  • बाज़ार जुड़ाव में सहायता

    ब्रांडिंग, पैकेजिंग, व्यापार मेले और जैविक खेती पोर्टल से क्लस्टर सीधे खरीदारों तक अपनी उपज पहुंचा पाते हैं।

  • 52,289 क्लस्टर बने

    2015-16 से अब तक लगभग 15 लाख हेक्टेयर जैविक खेती के अंतर्गत और 25.30 लाख किसान लाभान्वित (फरवरी 2025 तक)।

आपको क्या मिलता है

  • वित्तीय सहायता

    प्रति क्लस्टर 3 साल में प्रति हेक्टेयर ₹31,500; प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर। इसमें से ₹15,000/हेक्टेयर इनपुट के लिए DBT है।

  • प्रमाणन की लागत शामिल

    3 साल में ₹3,000/हेक्टेयर से PGS-India प्रमाणन और NABL-मान्यता प्राप्त लैब में अवशेष जांच होती है — किसान को अलग से कुछ नहीं देना पड़ता।

  • प्रशिक्षण और सहयोग

    3 साल में क्षमता निर्माण के लिए ₹9,000/हेक्टेयर; लगभग हर 100 किसानों पर एक लीड रिसोर्स पर्सन सहयोग करता है।

  • मार्केटिंग सहयोग

    3 साल में ₹4,500/हेक्टेयर सामान्य पैकेजिंग, ब्रांडिंग, परिवहन और व्यापार मेलों व जैविक मेलों में भागीदारी के लिए।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • ऐसे किसान जो PKVY/PGS स्थानीय समूह से जुड़ना या बनाना चाहते हैं और 3 साल में पूरी तरह जैविक खेती अपनाने को तैयार हों
  • कम से कम 20 किसानों का समूह जो 20 हेक्टेयर लगातार भूमि पर खेती करता हो (या राज्य सरकार द्वारा क्लस्टर के लिए चिन्हित मौजूदा FPO क्षेत्र)
  • वित्तीय सहायता के लिए भूमि जोत अधिकतम 2 हेक्टेयर तक पात्र (बड़ी जोत बिना अतिरिक्त वित्तीय सहायता के प्रमाणन हेतु समूह में जुड़ सकती है)
  • छोटे और सीमांत किसानों को, और पहाड़ी, आदिवासी व वर्षा-आधारित क्षेत्रों को प्राथमिकता
  • PGS-India मानकों का पालन करने, सहकर्मी-निरीक्षण (peer appraisal) में शामिल होने और खेत का इनपुट रिकॉर्ड रखने की इच्छा

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • बिना किसी मान्यता प्राप्त समूह या क्लस्टर के अकेले नकद सहायता चाहने वाले व्यक्तिगत किसान — PKVY क्लस्टर को फंड करती है, अकेले आवेदकों को नहीं
  • ऐसी भूमि जो पहले ही जैविक प्रमाणित हो चुकी है और उसी घटक के तहत दोबारा कन्वर्जन-अवधि सहायता मांगी जा रही हो
  • प्रति किसान 2 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र वित्तीय-सहायता घटकों के लिए (केवल-प्रमाणन सहायता फिर भी लागू हो सकती है)
  • सहकर्मी-निरीक्षण से इनकार करने वाले या PGS-India पोर्टल पर निरीक्षण डेटा प्रकाशित न करने वाले समूह
  • पूर्वोत्तर राज्य, जो PKVY के बजाय अलग योजना मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) के अंतर्गत आते हैं

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • PGS आवेदन फॉर्म और प्रतिज्ञा-पत्र

    हस्ताक्षरित किसान आवेदन, फार्म-हिस्ट्री शीट और अनिवार्य “किसान प्रतिज्ञा” जिसमें जैविक मानकों का पालन करने का वचन हो।

  • आधार कार्ड

    पहचान सत्यापन और DBT हेतु बैंक खाते को आधार से जोड़ने के लिए उपयोग होता है।

  • बैंक खाता विवरण

    DBT से मिलने वाली ₹15,000/हेक्टेयर इनपुट सहायता के लिए खाता संख्या और IFSC।

  • भूमि रिकॉर्ड

    खसरा/भूमि दस्तावेज़ जो क्लस्टर में शामिल होने वाले प्लॉट और उसका क्षेत्रफल दिखाता हो।

  • समूह समझौता / संदर्भ शर्तें (ToR)

    स्थानीय समूह को PGS-India के मानकों और सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रिया से बांधने वाला हस्ताक्षरित समझौता।

  • मोबाइल नंबर

    PGS-India पोर्टल और जैविक खेती मार्केटिंग पोर्टल पर पंजीकरण के लिए आवश्यक।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    स्थानीय समूह से जुड़ें या बनाएं

    राज्य कृषि विभाग से सलाह लेकर कम से कम 20 किसानों का, 20 हेक्टेयर लगातार भूमि पर खेती करने वाला PKVY/PGS स्थानीय समूह खोजें या बनाएं।

  2. 2

    समूह रीजनल काउंसिल में पंजीकृत होता है

    समूह अपना आवेदन, फार्म-हिस्ट्री शीट और हस्ताक्षरित प्रतिज्ञा-पत्र निकटतम PGS-India रीजनल काउंसिल को अनुमोदन के लिए जमा करता है।

  3. 3

    क्लस्टर बनता है और राज्य वार्षिक कार्ययोजना भेजता है

    25–50 समूह (500–1,000 हेक्टेयर) मिलाकर एक क्लस्टर बनाया जाता है; राज्य सरकार इसे अपनी क्लस्टर-वार वार्षिक कार्ययोजना में शामिल कर मंत्रालय को भेजती है।

  4. 4

    कन्वर्जन अवधि और सहकर्मी-निरीक्षण शुरू होता है

    3 साल तक समूह जैविक तरीके अपनाता है जबकि समूह के सदस्य हर मौसम में कम से कम एक बार एक-दूसरे के खेत का निरीक्षण करते हैं; इस दौरान भूमि PGS-Green प्रमाणित होती है।

  5. 5

    वित्तीय सहायता जारी होती है

    धनराशि केंद्र → राज्य → रीजनल काउंसिल के रास्ते चलती है; ₹15,000/हेक्टेयर इनपुट हिस्सा किसान के आधार-सीडेड खाते में DBT से पहुंचता है, बाकी राशि समूह के प्रशिक्षण, प्रमाणन और मार्केटिंग पर खर्च होती है।

  6. 6

    प्रमाणन और बाज़ार जुड़ाव

    मानक पूरी तरह पूरे होने पर उपज PGS-Organic प्रमाणित होती है। क्लस्टरों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और जैविक खेती पोर्टल व व्यापार मेलों के जरिए बिक्री में सहायता मिलती है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • योजना शुरू हुई

    2015-16

    राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के अंतर्गत

  • संशोधित दिशा-निर्देश जारी

    1 फरवरी 2022

    500–1,000 हेक्टेयर क्लस्टर मॉडल लागू हुआ

  • संचयी राशि जारी (2015–25)

    ₹2,265.86 करोड़

    30 जनवरी 2025 तक

  • वित्त वर्ष 2024-25 में जारी राशि

    ₹205.46 करोड़

    राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत PKVY के लिए जारी

  • आवेदन की अंतिम तिथि

    कोई नहीं — क्लस्टर हर साल राज्य की वार्षिक कार्ययोजना में शामिल किए जाते हैं

  • तथ्य अंतिम बार जांचे गए

    13 जुलाई 2026

    pib.gov.in, agriwelfare.gov.in और pgsindia-ncof.gov.in के अनुसार

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आप कम से कम 20 सदस्यों का, लगातार भूमि (आदर्श रूप से 20 हेक्टेयर) पर खेती करने वाला समूह बना सकते हैं या उससे जुड़ सकते हैं?
  2. 2.क्या आप 3 साल की अवधि में पूरी तरह जैविक खेती (बिना रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक) अपनाने को तैयार हैं?
  3. 3.क्या जिस क्षेत्र के लिए आप सहायता चाहते हैं वह 2 हेक्टेयर या उससे कम है?
  4. 4.क्या आपका खेत किसी पूर्वोत्तर राज्य में स्थित है?
  5. 5.क्या आप किसी भुगतान वाले थर्ड-पार्टी ऑडिटर की बजाय अपने समूह के साथी सदस्यों द्वारा खेत के निरीक्षण (सहकर्मी-समीक्षा) के लिए तैयार हैं?
  6. 6.क्या आपके पास आधार और ऐसा बैंक खाता है जिसे आधार से जोड़ा जा सके?
  7. 7.क्या आप खेत के इनपुट का बुनियादी रिकॉर्ड रख सकते हैं और अपने समूह की कम से कम आधी वार्षिक बैठकों में शामिल हो सकते हैं?

7 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) क्या है?

PKVY भारत सरकार की एक योजना है जो क्लस्टर दृष्टिकोण से जैविक खेती को बढ़ावा देती है। किसानों के समूह मिलकर जैविक तरीके अपनाते हैं, PGS-India प्रमाणन पाते हैं, और उन्हें इनपुट, प्रशिक्षण, प्रमाणन व मार्केटिंग के लिए संयुक्त सहायता मिलती है — प्रति क्लस्टर 3 साल में प्रति हेक्टेयर ₹31,500।

PKVY क्लस्टर कैसे बनता है?

एक स्थानीय समूह में कम से कम 20 किसान होते हैं जो 20 हेक्टेयर लगातार भूमि पर खेती करते हैं। 25 से 50 ऐसे समूह — 500 से 1,000 हेक्टेयर (पहाड़ी क्षेत्रों में 500) — को राज्य सरकार मिलाकर एक क्लस्टर बनाती है, जिसे रीजनल काउंसिल और एक सहयोगी एजेंसी सहायता देती है।

PKVY में प्रति हेक्टेयर कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रत्येक जैविक क्लस्टर के लिए 3 साल में प्रति हेक्टेयर ₹31,500 मिलते हैं। इसमें से ₹15,000/हेक्टेयर सीधे किसान को DBT से जैविक इनपुट के लिए, ₹9,000/हेक्टेयर प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण के लिए, ₹4,500/हेक्टेयर मार्केटिंग, पैकेजिंग व ब्रांडिंग के लिए, और ₹3,000/हेक्टेयर प्रमाणन व अवशेष जांच के लिए दिया जाता है। एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक सहायता मिल सकती है।

क्या पुराना ₹50,000 प्रति हेक्टेयर वाला आंकड़ा अब भी सही है?

संशोधित PKVY दिशा-निर्देश (1 फरवरी 2022) में एक अधिक विस्तृत ₹50,000/हेक्टेयर, ₹500 लाख प्रति 1,000-हेक्टेयर-क्लस्टर विवरण दिया गया है, जिसमें किसान-केंद्रित घटकों के साथ-साथ कार्यान्वयन एजेंसी और रीजनल काउंसिल की लागत भी शामिल है। मंत्रालय का मौजूदा सार्वजनिक संचार (PIB, 2025) मुख्य सहायता राशि 3 साल में ₹31,500/हेक्टेयर बताता है — इनपुट, प्रशिक्षण, प्रमाणन और मार्केटिंग के लिए। किसी विशेष प्रोजेक्ट का बजट बनाने से पहले ₹31,500/हेक्टेयर को आज के किसान-केंद्रित मुख्य घटकों वाला आंकड़ा मानें और नवीनतम विस्तृत लागत मानदंडों के लिए agriwelfare.gov.in जांचें।

PGS-India प्रमाणन क्या है?

सहभागी गारंटी प्रणाली फॉर इंडिया (PGS-India) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाई जाने वाली एक सहकर्मी-समीक्षा आधारित, समूह-केंद्रित जैविक प्रमाणन प्रणाली है। एक ही स्थानीय समूह के किसान किसी थर्ड-पार्टी प्रमाणन एजेंसी को पैसे देने की बजाय एक-दूसरे के खेत का निरीक्षण करते हैं, और समूह मिलकर उस सहकर्मी-निरीक्षण के आधार पर हर सदस्य की प्रमाणन स्थिति तय करता है।

PGS-India, थर्ड-पार्टी (NPOP) प्रमाणन से कैसे अलग है?

NPOP (नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन) प्रमाणन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एक मान्यता प्राप्त थर्ड-पार्टी एजेंसी द्वारा किया जाता है, जो मुख्य रूप से निर्यात-उन्मुख और वैल्यू-चेन प्रमाणन के लिए है। PGS-India कृषि मंत्रालय के अंतर्गत एक किसान-समूह, सहकर्मी-निरीक्षण प्रणाली है, जो घरेलू बाज़ार के लिए है और छोटे व सीमांत किसानों के लिए किफायती बनाई गई है। PKVY अपने क्लस्टरों के लिए PGS-India प्रमाणन को फंड करती है; किसान चाहें तो योजना से अलग, अपने खर्च पर NPOP भी अपना सकते हैं।

PGS-Green और PGS-Organic क्या हैं?

PGS-Green कन्वर्जन अवधि के दौरान दी जाने वाली स्थिति है — उपज पूरी तरह जैविक मानकों के अनुसार उगाई जाती है, लेकिन भूमि ने अभी आवश्यक कन्वर्जन अवधि पूरी नहीं की होती। जब समूह की भूमि कन्वर्जन पूरा कर लेती है और PGS-India मानकों को पूरी तरह पूरा करती है, तब सहकर्मी-निरीक्षण के आधार पर PGS-Organic प्रमाणन दिया जाता है।

कन्वर्जन अवधि में कितना समय लगता है?

PKVY प्रोजेक्ट 3 साल के चक्र में चलते हैं, जो मानक जैविक कन्वर्जन अवधि से मेल खाता है। इस दौरान हर मौसम में कम से कम एक बार सहकर्मी-निरीक्षण होता है, और मानक पूरी तरह पूरे होने पर समूह प्रमाणन का अनुरोध कर सकता है।

क्या कोई किसान अकेले PKVY के लिए आवेदन कर सकता है?

PKVY की सहायता किसान समूहों और क्लस्टरों को मिलती है, अकेले आवेदकों को नहीं। एक किसान कम से कम 20 किसानों के स्थानीय समूह से जुड़ता है या उसे बनाने में मदद करता है (PGS-India अलग से 5 या अधिक सदस्यों के छोटे समूहों को व्यक्तिगत पंजीकरण की अनुमति देता है, जिनसे 2 साल के भीतर बड़े समूह में शामिल होने की अपेक्षा की जाती है)।

PKVY के लिए आवेदन कैसे करें?

इसमें कोई व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन नहीं है। एक किसान गांव या आसपास के गांवों के अन्य किसानों के साथ स्थानीय समूह से जुड़ता है या बनाता है, और वह समूह निकटतम PGS-India रीजनल काउंसिल में पंजीकृत होता है। इसके बाद राज्य कृषि विभाग पात्र समूहों को अपनी क्लस्टर-वार वार्षिक कार्ययोजना में शामिल कर हर साल मंत्रालय को भेजता है।

PKVY / PGS-India पंजीकरण के लिए किसान को कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

हस्ताक्षरित आवेदन फॉर्म और किसान प्रतिज्ञा-पत्र, फार्म-हिस्ट्री शीट, आधार, DBT के लिए बैंक खाता, नामांकित प्लॉट के बुनियादी भूमि रिकॉर्ड, और PGS-India मानकों के पालन का हस्ताक्षरित समूह समझौता।

क्या PKVY पूर्वोत्तर राज्यों में भी उपलब्ध है?

नहीं। पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देने का काम एक अलग योजना — मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) — करती है, जो 3 साल में प्रति हेक्टेयर ₹46,500 देती है, जो उस क्षेत्र के लिए अलग दर है।

क्या PKVY को किसी अन्य योजना में मिला दिया गया है?

PKVY अपने आप में एक अलग योजना बनी हुई है, जिसे अब फंडिंग के लिहाज़ से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के एक घटक के रूप में प्रशासित किया जाता है। इसका प्राकृतिक-खेती घटक, भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP), जो 2020-21 से 2022-23 तक PKVY के तहत चला था, अब एक अलग राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) में पुनर्गठित हो चुका है। PKVY की जैविक-खेती और PGS-India प्रमाणन वाली भूमिका पहले जैसी ही है।

जैविक खेती पोर्टल क्या है?

जैविक खेती मंत्रालय का समर्पित पोर्टल है — एक ज्ञान और सीधी-मार्केटिंग वाला प्लेटफॉर्म, जहां प्रमाणित किसान, स्थानीय समूह, इनपुट आपूर्तिकर्ता और खरीदार पंजीकरण कर सकते हैं और जैविक उपज का व्यापार कर सकते हैं, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है।

क्या PKVY में किसान को कुछ खर्च करना पड़ता है?

PKVY-समर्थित समूह के जरिए प्राप्त PGS-India प्रमाणन के लिए किसान से कोई शुल्क नहीं लिया जाता — यह ₹3,000/हेक्टेयर वाला प्रमाणन व अवशेष-जांच घटक इसे कवर करता है। योजना से बाहर लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन या थर्ड-पार्टी NPOP प्रमाणन चुनने वाले किसानों को अलग, स्वयं-वित्तपोषित लागत उठानी पड़ सकती है।

PKVY की प्रगति और अपने समूह की प्रमाणन स्थिति कहां देखें?

PGS-India पोर्टल (pgsindia-ncof.gov.in) पर रीजनल काउंसिल, समूह और प्रमाणपत्र संबंधी डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। योजना-स्तर के दिशा-निर्देशों और प्रगति के लिए agriwelfare.gov.in और pib.gov.in पर PIB बैकग्राउंडर देखें।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन 1800-180-1551 ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।