राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन
National Beekeeping and Honey Mission (NBHM)
एक केंद्रीय क्षेत्र योजना जो नेशनल बी बोर्ड के ज़रिए शहद-जाँच लैब, प्रसंस्करण यूनिट, कस्टम हायरिंग सेंटर व नस्ल-सुधार केंद्र को फंड करती है — वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक ₹500 करोड़ — जिसमें हर मौन-पालक, व्यापारी व प्रोसेसर मधुक्रांति ट्रेसेबिलिटी पोर्टल पर पंजीकृत होता है।
- राशि
- ₹500 करोड़ कुल (वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26)
- चालू है
- वित्त वर्ष 2020-21 से, 2025-26 तक बढ़ाई गई
- योजना स्थिति
- सक्रिय
- क्रियान्वयन एजेंसी
- नेशनल बी बोर्ड (एनबीबी)
- ढाँचा
- 3 मिनी मिशन — MM-I, MM-II, MM-III
- भारत का शहद रैंक
- विश्व में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक (वित्त वर्ष 2023-24)
- मधुक्रांति पर पंजीकृत
- 14,859+ मौन-पालक (14 अक्टूबर 2025 तक)
- पंजीकरण कहाँ
- madhukranti.in/NBB पोर्टल
त्वरित सारांश
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त्वरित सारांश
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन केंद्र सरकार की वह योजना है जो गाँव-गाँव के मौन-पालन को एक व्यवस्थित, कमाई देने वाले उद्योग में बदलने के लिए बनाई गई है। ज़्यादातर दूसरी कृषि योजनाओं की तरह यह सीधे किसान के खाते में नकद नहीं भेजती — इसके बजाय मौन-पालन के आस-पास का ढाँचा खड़ा करती है: शहद की शुद्धता जाँचने वाली लैब, प्रसंस्करण व पैकेजिंग यूनिट, उपकरण किराए पर देने वाले केंद्र, अच्छी नस्ल की मधुमक्खियाँ तैयार करने वाले केंद्र, और मधुमक्खी-अनुकूल फूलों के प्रदर्शन बाग़। सोच यह है कि मौन-पालक के आस-पास बेहतर ढाँचा ही असली कमाई और निर्यात-लायक गुणवत्ता लाता है, न कि सीधा भुगतान।
यह मिशन तीन जुड़े हुए हिस्सों में काम करता है। एक हिस्सा मधुमक्खी कालोनियाँ बढ़ाने और परागण से फ़सल की पैदावार सुधारने पर केंद्रित है, क्योंकि स्वस्थ मधुमक्खियाँ सिर्फ़ शहद ही नहीं, बाक़ी फ़सलों की उपज भी बढ़ा देती हैं। दूसरा हिस्सा शहद जमा करने, प्रोसेस करने, रखने और बेचने की व्यवस्था बनाता है, ताकि छत्ते से दुकान तक शहद ख़राब या मिलावटी न हो। तीसरा हिस्सा क्षेत्र के हिसाब से मौन-पालन के तरीक़े और बीमारी-प्रबंधन पर शोध कराता है।
मौन-पालक के लिए मिशन से जुड़ने की असली शुरुआत मधुक्रांति पोर्टल पर पंजीकरण से होती है, जो एक ट्रेसेबिलिटी प्रमाणपत्र देता है और शहद के असली स्रोत को साबित करने में मदद करता है — यह ज़रूरत भारत के बढ़ते शहद निर्यात के साथ और बढ़ी है। पंजीकरण से आगे, प्रोसेसिंग यूनिट, टेस्टिंग लैब या नस्ल-सुधार केंद्र के लिए असली फंडिंग नेशनल बी बोर्ड या राज्य की क्रियान्वयन एजेंसी को भेजे गए प्रोजेक्ट प्रस्ताव से मिलती है, न कि किसी सामान्य ऑनलाइन फॉर्म से। मौन-पालकों के स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियाँ और किसान उत्पादक संगठन बनाने को ख़ास तौर पर बढ़ावा दिया जाता है। नीचे पूरे पेज पर सही बजट, समय-सीमा और उपलब्धियों के आँकड़े मौजूद हैं।
परिचय
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (एनबीएचएम) की घोषणा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत तीन साल — वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23 — के लिए कुल ₹500 करोड़ की राशि के साथ हुई थी, और इसे बाद में और तीन साल — वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 — के लिए बढ़ाया गया, जिसमें उसी मूल राशि में से ₹370 करोड़ आगे बढ़ाए गए। यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है — पूरी तरह केंद्र द्वारा वित्तपोषित, कोई राज्य हिस्सेदारी नहीं — जिसे नेशनल बी बोर्ड (एनबीबी) लागू करता है, जो जुलाई 2000 में पंजीकृत एक सोसाइटी है और जून 2006 में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में पुनर्गठित हुई थी, और भारत में वैज्ञानिक मौन-पालन के लिए नोडल एजेंसी नामित है।
यह मिशन तीन उप-मिशनों से चलता है। मिनी मिशन-I वैज्ञानिक मौन-पालन से मदद प्राप्त परागण के ज़रिए फ़सलों के उत्पादन व उत्पादकता सुधार को फंड करता है। मिनी मिशन-II कटाई-उपरांत प्रबंधन को कवर करता है — शहद व अन्य मधुमक्खी-उत्पादों का संग्रह, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन व मूल्य-वर्धन, साथ ही इसे सहारा देने वाली अवसंरचना: प्रसंस्करण संयंत्र, कोल्ड स्टोरेज, कलेक्शन-ब्रांडिंग-मार्केटिंग केंद्र और टेस्टिंग लैब। मिनी मिशन-III क्षेत्र की कृषि-जलवायु व सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के अनुरूप शोध व तकनीक विकास को फंड करता है। योजना के दिशानिर्देशों में नस्ल-सुधार केंद्र, क्षेत्रीय व ज़िला स्तर पर गुणवत्ता-नियंत्रण लैब, ब्लॉकचेन-आधारित ट्रेसेबिलिटी, हनी कॉरिडोर, और कृषि-उद्यमियों, कृषि-स्टार्टअप व मौन-पालक समूहों को सहायता जैसे उद्देश्य भी शामिल हैं।
किसी भी मिनी मिशन के तहत प्रोजेक्ट की जाँच व स्वीकृति एक बहु-स्तरीय ढाँचे से होती है — नीति दिशा के लिए जनरल काउंसिल/नेशनल लेवल स्टीयरिंग कमेटी, राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट अप्रूवल एंड मॉनिटरिंग कमेटी व एक्ज़ीक्यूटिव कमेटी, और इसके नीचे प्रोजेक्ट अप्रेज़ल कमेटी, स्टेट लेवल स्टीयरिंग कमेटी व डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी — जिसमें राज्य विभाग, एनडीडीबी, नाफेड, आईसीएआर, केवीआईसी, ट्राइफेड व एसआरएलएम/एनआरएलएम निकाय क्रियान्वयन एजेंसी की भूमिका निभाते हैं। व्यक्तिगत मौन-पालक, एग्रीगेटर/व्यापारी व प्रोसेसर मधुक्रांति पोर्टल (madhukranti.in) पर अलग से 5 साल के ट्रेसेबिलिटी प्रमाणपत्र के लिए पंजीकरण करते हैं; यह पंजीकरण एनबीएचएम-वित्तपोषित अवसंरचना व बाज़ार सम्पर्क से अलग है, लेकिन अक्सर उसका लाभ पाने की पहली शर्त होती है।
योजना की मुख्य बातें
तीन जुड़े हुए मिनी मिशन
परागण व उत्पादन के लिए MM-I, कटाई-उपरांत प्रसंस्करण व विपणन अवसंरचना के लिए MM-II, शोध व क्षेत्र-विशेष तकनीक के लिए MM-III।
टेस्टिंग लैब व एक सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
मार्च 2025 तक 6 विश्व-स्तरीय हनी टेस्टिंग लैब, 47 मिनी हनी टेस्टिंग लैब व 6 डिज़ीज़ डायग्नोस्टिक लैब स्वीकृत, साथ ही आईआईटी रुड़की में नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस इन बीकीपिंग।
प्रसंस्करण व विपणन अवसंरचना
एनबीएचएम के तहत मार्च 2025 तक 26 हनी प्रोसेसिंग यूनिट, 18 कलेक्शन-ब्रांडिंग व मार्केटिंग यूनिट व 10 पैकेजिंग/कोल्ड स्टोरेज यूनिट स्वीकृत।
मधुक्रांति ट्रेसेबिलिटी पोर्टल
व्यक्तिगत मौन-पालक, एग्रीगेटर/व्यापारी व प्रोसेसर के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व 5 साल का प्रमाणपत्र, जो शहद व मधुमक्खी-उत्पादों को उनके स्रोत तक ट्रेस करता है।
सामूहिक गठन सहायता
मौन-पालकों व शहद उत्पादकों के 10,000 एफपीओ का लक्ष्य, जिसमें से 100 ट्राइफेड, नाफेड व एनडीडीबी को गठन के लिए दिए गए — मार्च 2025 तक 97 पंजीकृत/गठित।
महिला सशक्तिकरण गतिविधियाँ
विभिन्न राज्यों में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को मौन-पालन में लाने के लिए एनबीएचएम के तहत 167 गतिविधियाँ स्वीकृत।
आपको क्या मिलता है
गुणवत्ता अवसंरचना
हनी टेस्टिंग लैब, डिज़ीज़ डायग्नोस्टिक लैब व नस्ल-सुधार केंद्र, जिनका लक्ष्य मिलावट घटाना व कालोनी स्वास्थ्य सुधारना है।
कटाई-उपरांत सहायता
प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज व कलेक्शन-ब्रांडिंग-मार्केटिंग यूनिट छत्ते से दुकान तक की खाई पाटते हैं।
प्रोजेक्ट-आधारित अनुदान, व्यक्तिगत नकद नहीं
लैब, प्रसंस्करण यूनिट या कस्टम हायरिंग सेंटर जैसे प्रस्तावित घटक के लिए केंद्रीय फंडिंग प्रोजेक्ट प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत क्रियान्वयन एजेंसी को जाती है, न कि एक सामान्य व्यक्तिगत आवेदन के रूप में।
ट्रेसेबिलिटी प्रमाणपत्र
मधुक्रांति पंजीकरण मौन-पालक, व्यापारी या प्रोसेसर को 5 साल का प्रमाणपत्र देता है जो उनके शहद व मधुमक्खी-उत्पादों के स्रोत की पुष्टि करता है।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- व्यक्तिगत मौन-पालक, मौन-पालन/शहद सोसाइटी, एग्रीगेटर, व्यापारी व प्रोसेसर — मधुक्रांति पंजीकरण व ट्रेसेबिलिटी के लिए
- मौन-पालकों के स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन, सहकारी समितियाँ व फ़ेडरेशन — सामूहिक गठन व प्रोजेक्ट फंडिंग में प्राथमिकता के साथ
- राज्य विभाग, नेशनल बी बोर्ड, आईसीएआर संस्थान, नाबार्ड, नाफेड, एनडीडीबी, केवीआईसी, ट्राइफेड, एसआरएलएम/एनआरएलएम व एमएसएमई निकाय — प्रोजेक्ट-क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में
- मौन-पालन या शहद मूल्य-श्रृंखला परियोजना प्रस्तावित करने वाले कृषि-उद्यमी व कृषि-स्टार्टअप
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- नेशनल बी बोर्ड या राज्य क्रियान्वयन एजेंसी के ज़रिए कोई प्रोजेक्ट प्रस्ताव या विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) नहीं भेजी गई
- परियोजना तीनों मिनी मिशन — उत्पादन/परागण, कटाई-उपरांत/विपणन, या शोध — के दायरे से बाहर हो
- मधुक्रांति पोर्टल पर पंजीकृत नहीं, जबकि माँगा गया लाभ उसी पंजीकरण से जुड़ा हो
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
प्रोजेक्ट प्रस्ताव / डीपीआर
प्रस्तावित घटक — टेस्टिंग लैब, प्रसंस्करण यूनिट, नस्ल-सुधार केंद्र आदि — उसकी लागत, और वह किस मिनी मिशन के अंतर्गत आता है, यह बताते हुए।
केवाईसी दस्तावेज़
आवेदक की, या समूह इकाई/क्रियान्वयन एजेंसी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता की, पहचान व पते का प्रमाण।
ज़मीन या सुविधा प्रमाण
जिस स्थल पर स्वीकृत अवसंरचना बनेगी, उसके स्वामित्व या पट्टे का प्रमाण।
बैंक खाता विवरण
स्वीकृत माइलस्टोन के अनुसार प्रोजेक्ट अनुदान जारी करने के लिए।
मधुक्रांति पंजीकरण
ट्रेसेबिलिटी प्रमाणपत्र चाहने वाले व्यक्तिगत मौन-पालक, व्यापारी व प्रोसेसर के लिए अलग से आवश्यक।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
मधुक्रांति पोर्टल पर पंजीकरण करें
व्यक्तिगत मौन-पालक, एग्रीगेटर/व्यापारी व प्रोसेसर madhukranti.in/NBB पर 5 साल के ट्रेसेबिलिटी प्रमाणपत्र के लिए पंजीकरण करें — ज़्यादातर मौन-पालकों के लिए यही शुरुआती क़दम है।
- 2
अपना मिनी मिशन घटक तय करें
अपनी प्रस्तावित गतिविधि को MM-I (परागण/उत्पादन), MM-II (कटाई-उपरांत/विपणन अवसंरचना) या MM-III (शोध) से मिलाएँ।
- 3
प्रोजेक्ट प्रस्ताव या डीपीआर तैयार करें
उस विशेष घटक की लागत अनुमान व पात्र-वस्तु सूची सहित।
- 4
एनबीबी या अपनी राज्य क्रियान्वयन एजेंसी से भेजें
राज्य विभाग या प्रोजेक्ट अप्रेज़ल कमेटी प्रस्ताव की जाँच व सिफ़ारिश करती है; मौन-पालकों के SHG, FPO व सहकारी समितियाँ सामूहिक रूप से आवेदन कर सकती हैं।
- 5
प्रोजेक्ट अप्रूवल एंड मॉनिटरिंग कमेटी से स्वीकृति
राष्ट्रीय स्तर की पीए&एमसी व एक्ज़ीक्यूटिव कमेटी प्रोजेक्ट की जाँच कर स्वीकृति देती हैं।
- 6
माइलस्टोन के अनुसार अनुदान जारी
स्वीकृत अवसंरचना के क्रियान्वयन व संबंधित कमेटी द्वारा सत्यापन के साथ राशि जारी होती है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
शुरुआत
वित्त वर्ष 2020-21
आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत घोषित, शुरुआत में वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23 के लिए
विस्तार
वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26
₹500 करोड़ की राशि में से ₹370 करोड़ विस्तारित अवधि में आगे बढ़ाए गए
नेशनल बी बोर्ड पुनर्गठित
जून 2006
19 जुलाई 2000 को सोसाइटी के रूप में पंजीकृत
तथ्य अंतिम जाँच
2026-09-02
PIB बैकग्राउंडर (नवंबर 2025) व राज्यसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 2415 (21 मार्च 2025) के अनुसार — pib.gov.in, sansad.in
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सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।
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यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
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केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।
PIB बैकग्राउंडर: राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (नवंबर 2025)
प्रेस सूचना ब्यूरो का विस्तृत पृष्ठभूमि दस्तावेज़ — मिनी मिशन ढाँचा, उपलब्धियाँ व निर्यात आँकड़े।
राज्यसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 2415 (21 मार्च 2025)
योजना शुरू होने से अब तक एनबीएचएम परियोजना लाभार्थियों की राज्यवार व वर्षवार आधिकारिक गिनती।
आधिकारिक लिंक और हेल्पलाइन
पोर्टल को ही बुकमार्क करें — कोई भी तीसरी वेबसाइट भुगतान न जारी कर सकती है, न रोक सकती है, न तेज़ कर सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन क्या है?
भारत सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना, जिसे नेशनल बी बोर्ड वित्त वर्ष 2020-21 से लागू कर रहा है, वित्त वर्ष 2025-26 तक कुल ₹500 करोड़ की राशि के साथ, जो मौन-पालन अवसंरचना — टेस्टिंग लैब, प्रसंस्करण यूनिट, नस्ल-सुधार केंद्र व शोध — को फंड करती है, न कि व्यक्तिगत किसानों को सीधा नकद भुगतान।
एनबीएचएम के तीन मिनी मिशन क्या हैं?
मिनी मिशन-I उत्पादन व परागण से जुड़ी उत्पादकता सुधार को फंड करता है; मिनी मिशन-II कटाई-उपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन व संबंधित अवसंरचना को फंड करता है; मिनी मिशन-III अलग-अलग क्षेत्रों के अनुरूप शोध व तकनीक विकास को फंड करता है।
एनबीएचएम का बजट कितना है?
कुल ₹500 करोड़ — आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत पहले तीन साल (वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23) के लिए ₹500 करोड़ स्वीकृत हुए थे, और फिर मिशन को और तीन साल (वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26) के लिए बढ़ाया गया, जिसमें उसी राशि में से ₹370 करोड़ आगे बढ़ाए गए।
एनबीएचएम के तहत मौन-पालक के रूप में पंजीकरण कैसे करें?
मधुक्रांति पोर्टल (madhukranti.in/NBB) के ज़रिए — व्यक्तिगत मौन-पालक, एग्रीगेटर/व्यापारी व प्रोसेसर वहाँ 5 साल के लिए वैध ट्रेसेबिलिटी प्रमाणपत्र हेतु पंजीकरण कर सकते हैं, और बाद में इसे नवीनीकृत या कालोनियाँ जोड़ सकते हैं।
शहद प्रसंस्करण यूनिट या टेस्टिंग लैब के लिए फंडिंग कैसे मिले?
मिनी मिशन-II के उस विशेष घटक के लिए प्रोजेक्ट प्रस्ताव या डीपीआर तैयार कर नेशनल बी बोर्ड या अपनी राज्य क्रियान्वयन एजेंसी के ज़रिए भेजकर — प्रस्ताव की जाँच राज्य स्तर पर होती है और स्वीकृति राष्ट्रीय प्रोजेक्ट अप्रूवल एंड मॉनिटरिंग कमेटी देती है, न कि किसी व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन से।
एनबीएचएम प्रोजेक्ट सहायता के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
व्यक्तिगत मौन-पालक व मौन-पालक समूह (SHG, FPO, सहकारी समितियाँ), कृषि-उद्यमी व कृषि-स्टार्टअप, और राज्य विभाग, आईसीएआर संस्थान, नाबार्ड, नाफेड, एनडीडीबी, केवीआईसी व ट्राइफेड जैसी मान्यता-प्राप्त क्रियान्वयन एजेंसियाँ।
क्या एनबीएचएम व्यक्तिगत मौन-पालकों को सीधे नकद देती है?
ज़्यादातर नहीं — एनबीएचएम की संरचना अवसंरचना (लैब, प्रसंस्करण यूनिट, नस्ल-सुधार केंद्र) के लिए प्रोजेक्ट-आधारित अनुदान की है, जो क्रियान्वयन एजेंसियों के ज़रिए जाता है, न कि किसी व्यक्तिगत किसान के खाते में तय सालाना नकद अंतरण।
एनबीएचएम के तहत भारत का शहद निर्यात कैसा प्रदर्शन कर रहा है?
भारत ने वित्त वर्ष 2023-24 में क़रीब 1.07 लाख मीट्रिक टन प्राकृतिक शहद निर्यात किया, जिसकी क़ीमत USD 177.52 मिलियन थी — वित्त वर्ष 2020-21 के 59,999 मीट्रिक टन (USD 96.77 मिलियन) से बढ़कर — जिससे भारत मार्केटिंग वर्ष 2024 तक विश्व का दूसरा सबसे बड़ा शहद निर्यातक बन गया, जो 2020 में 9वें स्थान पर था।
मधुक्रांति पोर्टल क्या है?
एनबीएचएम के तहत व्यक्तिगत मौन-पालकों, मौन-पालन/शहद सोसाइटी, एग्रीगेटर/व्यापारी व प्रोसेसर के लिए शुरू किया गया एक ऑनलाइन पंजीकरण व ट्रेसेबिलिटी सिस्टम, जो शहद व अन्य मधुमक्खी-उत्पादों के स्रोत को प्रमाणित व ट्रेस करने के लिए बना है।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
