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लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC), भारत सरकारकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयसक्रियअपडेट 13 जुलाई 2026

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)

National Agriculture Market (e-NAM)

एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल जो 1,656 मंडियों को एक बाज़ार में जोड़ता है — ताकि आपकी उपज को अपनी स्थानीय मंडी से आगे भी खरीदार और बेहतर दाम मिल सके।

एकीकृत मंडियाँ
1,656
राज्य व केंद्रशासित प्रदेश
23 राज्य + 4 केंद्रशासित प्रदेश
व्यापार योग्य जिंसें
247
पंजीकृत किसान
1.80 करोड़
पंजीकृत व्यापारी
2.72 लाख
जुड़े FPO
4,724
अब तक का दर्ज व्यापार
₹4,82,350 करोड़
शुरुआत
14 अप्रैल 2016

परिचय

ई-नाम एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है जो मौजूदा कृषि उपज मंडी समिति (APMC) की मंडियों को आपस में जोड़कर कृषि जिंसों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाज़ार बनाता है। यह आपकी स्थानीय मंडी की जगह नहीं लेता — बल्कि उसे बाकी सभी जगह के खरीदारों से जोड़ देता है।

14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया ई-नाम पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC) द्वारा क्रियान्वित किया जाता है। उपज की गुणवत्ता की मंडी में भौतिक जाँच (एसेइंग) होती है, फिर नेटवर्क में कहीं भी मौजूद खरीदार इलेक्ट्रॉनिक बोली लगाते हैं — यानी दाम उस दिन गेट पर मौजूद लोगों से नहीं, बल्कि पूरे देश की माँग से तय होता है।

यह कोई सब्सिडी या नकद-हस्तांतरण योजना नहीं है — इसमें दावा करने के लिए कोई निश्चित राशि नहीं है। यह जो बदलता है वह है आपके बेचने का तरीका: पारदर्शी नीलामी आधारित मूल्य निर्धारण, प्रति लॉट अधिक बोलीदाता, गुणवत्ता से जुड़ी कीमत, और सीधे आपके बैंक खाते में भुगतान।

योजना की मुख्य बातें

  • पारदर्शी मूल्य निर्धारण

    उपज खुली इलेक्ट्रॉनिक नीलामी से बिकती है, निजी सौदेबाज़ी से नहीं — हर बोली स्क्रीन पर दिखती है।

  • अपनी मंडी से आगे तक खरीदार

    पूरे एकीकृत नेटवर्क में पंजीकृत व्यापारी आपके लॉट पर बोली लगा सकते हैं, सिर्फ वे नहीं जो उस दिन मंडी में मौजूद हों।

  • गुणवत्ता जाँच (एसेइंग)

    बोली लगने से पहले उपज की जाँच लैब में होती है, ताकि दाम आपके लॉट की असली गुणवत्ता को दर्शाए।

  • सीधा ऑनलाइन भुगतान

    भुगतान RTGS, NEFT या BHIM UPI से सीधे आपके बैंक खाते में होता है — नकदी संभालने की ज़रूरत नहीं।

  • FPO ट्रेडिंग मॉड्यूल

    FPO अपने संग्रह केंद्र से ही उपज सूचीबद्ध कर सकते हैं और बेच सकते हैं, बिना मंडी तक ढोए।

  • गोदाम आधारित ट्रेडिंग (ई-NWR)

    WDRA-पंजीकृत गोदाम में रखी उपज को इलेक्ट्रॉनिक निगोशिएबल वेयरहाउस रसीद पर बेचा जा सकता है, बिना कहीं ले जाए।

आपको क्या मिलता है

  • बेहतर मूल्य प्राप्ति

    एक ही लॉट के लिए वास्तविक समय में कई बोलीदाता आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे आमतौर पर एकल-खरीदार सौदेबाज़ी से बेहतर दाम मिलता है।

  • स्थानीय मंडी से आगे पहुँच

    आपकी उपज पूरे एकीकृत नेटवर्क के पंजीकृत खरीदारों को दिखती है, सिर्फ स्थानीय व्यापारियों को नहीं।

  • सूचना की असमानता कम

    आसपास की मंडियों के दाम और आवक पोर्टल व ऐप पर प्रकाशित होते हैं, ताकि बेचने से पहले आपको अपनी उपज की कीमत का अंदाज़ा हो।

  • तेज़, ट्रैक होने वाला भुगतान

    ऑनलाइन भुगतान तेज़ है और इसका रिकॉर्ड रहता है — जो ऋण के लिए आय दिखाने में काम आता है।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • कोई भी किसान जो ई-नाम से जुड़ी मंडी (APMC/RMC) में मुफ्त पंजीकरण करता है
  • अलग से पंजीकृत किसान उत्पादक संगठन (FPO), जो अपने संग्रह केंद्र से व्यापार कर सकते हैं
  • वे व्यापारी और खरीदार जिनके पास राज्यव्यापी एकल-लाइसेंस प्रणाली के तहत मान्य ट्रेडिंग लाइसेंस है
  • उन 247 जिंसों में से किसी की भी उपज, जिनके लिए व्यापार योग्य गुणवत्ता मानक अधिसूचित हैं
  • जो किसान अपनी उपज WDRA-पंजीकृत गोदाम (जिसे डीम्ड मार्केट घोषित किया गया हो) में रखते हैं, वे e-NWR के ज़रिए व्यापार कर सकते हैं

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • आपके इलाके की वह मंडी जो अभी तक ई-नाम से नहीं जुड़ी है — वहाँ व्यापार पारंपरिक, ऑफ़लाइन तरीके से ही होता रहेगा
  • वह जिंस जिसके लिए ई-नाम ने अभी तक व्यापार योग्य गुणवत्ता मानक अधिसूचित नहीं किए हैं
  • बिना अपने नाम के बैंक खाते के पंजीकरण की कोशिश — बिना खाते के भुगतान नहीं हो सकता
  • भविष्य निधि (PPF) खाते — भुगतान के लिए केवल बचत या चालू खाता ही स्वीकार्य है

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • आधार कार्ड

    पंजीकरण के समय पहचान प्रमाण के तौर पर, और ई-नाम 2.0 लागू होने के साथ ई-केवाईसी के लिए भी इस्तेमाल होगा।

  • बैंक पासबुक या रद्द चेक

    अपने नाम का बचत या चालू खाता — भुगतान सीधे इसी खाते में जमा होता है।

  • मोबाइल नंबर

    पंजीकरण, OTP, और लॉट बिकने पर दाम व मात्रा की SMS सूचना के लिए ज़रूरी।

  • पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो

    मंडी में या ऑनलाइन पंजीकरण के समय जमा करनी होती है।

  • कोई सरकारी पहचान प्रमाण

    पंजीकरण करने वाली मंडी में आधार के साथ पहचान सत्यापन के लिए स्वीकार्य।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    एकीकृत मंडी में पंजीकरण करें

    अपनी नज़दीकी ई-नाम एकीकृत APMC में मुफ्त पंजीकरण करें — मंडी गेट पर, ई-नाम पोर्टल पर, या मोबाइल ऐप के ज़रिए।

  2. 2

    लॉगिन प्राप्त करें

    APMC द्वारा पंजीकरण स्वीकृत होने पर आपको अपने पंजीकृत ईमेल पर स्थायी ई-नाम किसान लॉगिन आईडी और पासवर्ड मिलता है।

  3. 3

    उपज लेकर जाँच के लिए जाएँ

    अपनी उपज मंडी में लाएँ, जहाँ इसे तौला, नमूना लेकर और एसेइंग लैब में गुणवत्ता प्रमाणित किया जाता है, बोली लगने से पहले।

  4. 4

    लॉट ई-नीलामी के लिए सूचीबद्ध होता है

    आपके लॉट को एक ट्रैक करने योग्य आईडी मिलती है और यह ई-नाम पर सूचीबद्ध होता है, जहाँ नेटवर्क भर के पंजीकृत व्यापारी बोली लगाते हैं।

  5. 5

    बिक्री की पुष्टि होती है

    तय समय पर नीलामी बंद होती है; सबसे ऊँची बोली की पुष्टि होती है और आपको बिके दाम व मात्रा की जानकारी SMS से मिलती है।

  6. 6

    भुगतान बैंक खाते में पहुँचता है

    भुगतान ऑनलाइन — RTGS, NEFT या BHIM UPI से — सीधे आपके पंजीकृत बैंक खाते में जमा किया जाता है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • ई-नाम शुरू हुआ

    14 अप्रैल 2016

    प्रधानमंत्री द्वारा नई दिल्ली में शुभारंभ

  • FPO ट्रेडिंग मॉड्यूल व e-NWR शुरू

    2 अप्रैल 2020

    FPO संग्रह केंद्रों और गोदामों से व्यापार, बिना उपज को पहले मंडी ले जाए

  • प्लेटफ़ॉर्म ऑफ़ प्लेटफ़ॉर्म्स (PoP) शुरू

    14 जुलाई 2022

    पंजीकृत किसानों को राज्य की सीमा पार लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता जाँच, वेयरहाउसिंग जैसी सेवाओं तक पहुँच

  • 9 नई जिंसें अधिसूचित

    8 अक्तूबर 2025

    इससे कुल व्यापार योग्य जिंसें 247 हो गईं

  • तथ्य अंतिम बार जाँचे गए

    13 जुलाई 2026

    enam.gov.in और pib.gov.in के आधार पर; मंडी/व्यापार आँकड़े फरवरी 2026 अंत तक प्रकाशित

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आपके ज़िले में या आसपास कोई ई-नाम एकीकृत मंडी (APMC) है जहाँ आप पंजीकरण कर सकें?
  2. 2.क्या आपके अपने नाम पर बचत या चालू बैंक खाता है?
  3. 3.क्या आप जो जिंस बेचना चाहते हैं, वह ई-नाम पर अभी अधिसूचित 247 जिंसों में शामिल है?
  4. 4.क्या आप एक FPO के रूप में अपने संग्रह केंद्र से बेच रहे हैं, न कि व्यक्तिगत किसान के रूप में?
  5. 5.क्या आपकी उपज किसी WDRA-पंजीकृत गोदाम में रखी है जिसे डीम्ड मार्केट घोषित किया गया हो?
  6. 6.क्या आप एक व्यापारी/खरीदार के रूप में मान्य मंडी ट्रेडिंग लाइसेंस के साथ पंजीकरण कर रहे हैं?
  7. 7.क्या आप बोली लगने से पहले अपनी उपज की गुणवत्ता जाँच (एसेइंग) कराने को तैयार हैं?

7 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ई-नाम क्या है?

ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है जो मौजूदा APMC मंडियों को आपस में जोड़कर कृषि जिंसों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाज़ार बनाता है। इसे 14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया था और यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC) द्वारा क्रियान्वित किया जाता है।

क्या ई-नाम कोई सब्सिडी या नकद योजना है?

नहीं। ई-नाम किसानों को सीधे कोई पैसा नहीं देता — यह एक ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म है। यह जो देता है वह है बाज़ार तक पहुँच: पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक नीलामी, प्रति लॉट अधिक खरीदार, गुणवत्ता से जुड़ी कीमत, और बेची गई उपज का सीधा ऑनलाइन भुगतान।

ई-नाम से कितनी मंडियाँ जुड़ी हैं?

फरवरी 2026 के अंत तक कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आधिकारिक रूप से प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार, 23 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों की 1,656 मंडियाँ ई-नाम से जुड़ी हैं। योजना के एकीकरण मानदंड पूरे करने के बाद समय-समय पर और मंडियाँ जोड़ी जाती हैं।

ई-नाम पर कितनी जिंसों का व्यापार हो सकता है?

अक्तूबर 2025 में 9 नई जिंसें जोड़े जाने के बाद, ई-नाम पर 247 जिंसों के लिए व्यापार योग्य गुणवत्ता मानक अधिसूचित हैं। खाद्यान्न, तिलहन, फल, सब्ज़ी और मसालों को समेटने वाली यह सूची enam.gov.in पर प्रकाशित है और समय-समय पर बढ़ाई जाती है।

किसान ई-नाम पर असल में उपज कैसे बेचता है?

अपनी नज़दीकी ई-नाम एकीकृत मंडी में मुफ्त पंजीकरण करें (मंडी में जाकर, पोर्टल पर, या ऐप के ज़रिए)। अपनी उपज मंडी में लाएँ, जहाँ इसे तौला और गुणवत्ता जाँची जाती है। फिर यह ई-नाम पर सूचीबद्ध होती है, जहाँ नेटवर्क भर के पंजीकृत व्यापारी इलेक्ट्रॉनिक बोली लगाते हैं। नीलामी बंद होने पर विजेता बोली की पुष्टि होती है और भुगतान सीधे आपके बैंक खाते में जमा होता है।

क्या ई-नाम पर पंजीकरण या व्यापार के लिए कोई शुल्क देना होता है?

किसानों के लिए ई-नाम पर पंजीकरण मुफ्त है। राज्य अपने APMC अधिनियम के अनुसार सामान्य मंडी/बाज़ार शुल्क लेते हैं — ई-नाम इसके ऊपर कोई अलग प्लेटफ़ॉर्म शुल्क नहीं जोड़ता।

किसान के तौर पर ई-नाम पर पंजीकरण के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

आधार या कोई अन्य सरकारी पहचान प्रमाण, बचत या चालू बैंक खाता (पासबुक या रद्द चेक), मोबाइल नंबर, और पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो। भुगतान के लिए भविष्य निधि (PPF) खाते स्वीकार नहीं होते — केवल बचत या चालू खाता ही मान्य है।

क्या मैं बिना गुणवत्ता जाँच (एसेइंग) के ई-नाम पर उपज बेच सकता हूँ?

हाँ, व्यापार के लिए जाँच अनिवार्य नहीं है, लेकिन इसे छोड़ने पर आमतौर पर बोलीदाता आपके लॉट पर सतर्कता से दाम लगाते हैं क्योंकि उन्हें प्रमाणित गुणवत्ता ग्रेड नहीं दिखता। जाँच कराने से आपकी उपज की असली गुणवत्ता के अनुसार दाम मिलने की संभावना बढ़ती है।

ई-नाम का FPO ट्रेडिंग मॉड्यूल क्या है?

यह किसी पंजीकृत किसान उत्पादक संगठन (FPO) को अपने सदस्यों की उपज सीधे अपने ही संग्रह केंद्र से ई-नीलामी के लिए सूचीबद्ध करने और बेचने देता है, बिना पहले उसे भौतिक मंडी तक ले जाए — जिससे परिवहन लागत घटती है और FPO की सौदेबाज़ी की ताकत बढ़ती है। इसे 2 अप्रैल 2020 को शुरू किया गया था।

ई-नाम पर गोदाम आधारित ट्रेडिंग (e-NWR) क्या है?

WDRA (वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी) से पंजीकृत गोदाम, जिसे डीम्ड मार्केट घोषित किया गया हो, में रखी उपज को इलेक्ट्रॉनिक निगोशिएबल वेयरहाउस रसीद (e-NWR) के आधार पर ई-नाम पर बेचा जा सकता है, बिना उसे मंडी तक भौतिक रूप से ले जाए। इसे FPO मॉड्यूल के साथ ही 2 अप्रैल 2020 को शुरू किया गया था।

ई-नाम पर बिक्री के बाद भुगतान कैसे होता है?

भुगतान ऑनलाइन, सीधे विक्रेता के पंजीकृत बैंक खाते में, RTGS, NEFT या BHIM UPI के ज़रिए किया जाता है — मंडी में नकदी संभालने की कोई ज़रूरत नहीं।

ई-नाम पर कितने किसान, व्यापारी और FPO जुड़े हैं?

फरवरी 2026 के अंत तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार: 1.80 करोड़ किसान और 2.72 लाख व्यापारी पंजीकृत हैं, और 4,724 FPO जुड़े हैं। शुरुआत से अब तक प्लेटफ़ॉर्म पर लगभग 13.22 करोड़ मीट्रिक टन उपज का व्यापार दर्ज हुआ है, जिसकी कीमत करीब ₹4,82,350 करोड़ है।

ई-नाम के तहत प्लेटफ़ॉर्म ऑफ़ प्लेटफ़ॉर्म्स (PoP) क्या है?

14 जुलाई 2022 को शुरू किया गया PoP पंजीकृत किसानों को लगभग 41 सूचीबद्ध सेवा प्रदाताओं की सेवाएँ — लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता जाँच, वेयरहाउसिंग, फिनटेक और बाज़ार जानकारी — ई-नाम ऐप के ज़रिए इस्तेमाल करने देता है, और अपनी उपज अपने राज्य की सीमा से बाहर भी बेचने देता है।

मेरी स्थानीय मंडी ई-नाम पर नहीं है, तो मैं क्या करूँ?

आप मंडी की सामान्य ऑफ़लाइन प्रक्रिया से बेच सकते हैं। एकीकरण इस पर निर्भर करता है कि आपके राज्य की APMC/नियंत्रित बाज़ार समिति ने ई-नाम द्वारा ज़रूरी सुधार व बुनियादी ढाँचा पूरा किया है या नहीं — enam.gov.in पर मौजूदा मंडी सूची देखें, और एकीकरण योजनाओं के बारे में अपनी APMC या राज्य कृषि विपणन विभाग से पूछें।

ई-नाम की हेल्पलाइन क्या है?

टोल-फ्री हेल्पडेस्क नंबर 1800-270-0224 है (लैंडलाइन: 011-26862367), और आप [email protected] या [email protected] पर ईमेल कर सकते हैं। लघु कृषक कृषि व्यापार संघ का कार्यालय NCUI ऑडिटोरियम भवन, 5वीं मंज़िल, अगस्त क्रांति मार्ग, हौज़ ख़ास, नई दिल्ली में है।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन 1800-270-0224 ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।