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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
मध्यमअपडेट 22 जुलाई 2026

बैंगन

Solanum melongena

एक कठोर सब्ज़ी जो एक बार लगाने पर कई तुड़ाइयों तक उपज देती है — और ठीक इसीलिए तना-व-फल छेदक, जो चुपचाप तने और फल में सुरंग बनाता है, फसल का भाग्य सबसे ज़्यादा तय करता है। यहाँ सब कुछ फल कोमल रहते तोड़ने और उस एक कीट को हराने के इर्द-गिर्द बुना है।

A pile of glossy dark-purple brinjals (eggplant) with green stem caps
फसल प्रकार
सब्ज़ी (फल)
सीज़न
खरीफ़, रबी व गर्मी
उपयुक्त राज्य
15+ प्रमुख राज्य
बढ़वार अवधि
150–180 दिन (कई तुड़ाई)
जल आवश्यकता
मध्यम व नियमित
तापमान
20–30°C
मिट्टी
अच्छी जल-निकासी वाली दोमट, अधिक जैविक
कठिनाई स्तर
मध्यम
अपेक्षित उपज
250–400 क्विंटल/हेक्टेयर
मुख्य कीट
तना व फल छेदक

परिचय

बैंगन (Solanum melongena), जिसे एगप्लांट या ऑबर्जीन भी कहते हैं, भारत की सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली और भरोसेमंद सब्ज़ियों में है — हर राज्य में, मैदान व पहाड़ में, खरीफ़, रबी और गर्मी में उगाई जाती है।

इसका बड़ा लाभ यह है कि एक बार लगाने पर यह चार से छह महीने तक कई तुड़ाइयों में उपज देती रहती है, जिससे फसल और आमदनी दोनों फैल जाती हैं। पर यही लंबा खेत-जीवन तना-व-फल छेदक को इतना गंभीर कीट बना देता है — उसके पास सुरंग बनाने को महीनों भर फल होते हैं, और हर छेदा फल बिकने लायक नहीं रहता।

यह गाइड फसल को नर्सरी से आख़िरी तुड़ाई तक ले चलती है, पर दो बातें इसमें गूँथी हैं: छेदक को कैलेंडर से नहीं, शाखा काटकर व निगरानी से संभालें, और फल कोमल-चमकदार रहते ही तोड़ें — फीका, बीजदार फल अपना बाज़ार पहले ही खो चुका होता है।

फसल की समयरेखा, बुवाई से कटाई तक

पूरे सीज़न की एक झलक — हर अवस्था की पूरी जानकारी के लिए नीचे संबंधित सेक्शन पर जाएँ।

  1. दिन 0

    रोपाई

    4–5 सप्ताह की पौध 60×60 सेमी पर अच्छी खाद वाली, अच्छी जल-निकासी वाली क्यारी में लगाएँ।

  2. दिन 7–10

    स्थापन

    जड़ें पकड़ती हैं; मरी पौध की जगह भरें और शुरू से ही छेदक-ग्रस्त शाखाएँ काट कर हटाएँ।

  3. दिन 25–40

    वानस्पतिक ढाँचा

    झाड़ी वह शाखा-ढाँचा बनाती है जो कई तुड़ाइयों तक फल संभालेगा — यहाँ नाइट्रोजन व साफ़ निराई उपज की सीमा तय करती है।

  4. दिन 45–60

    फूल

    पहले फूल खिलते हैं; छेदक व हरे तेले का दबाव शुरू होता है — कैलेंडर से नहीं, निगरानी से नियंत्रित करें।

  5. दिन 60–75

    पहली तुड़ाई

    सबसे पहले फल चमकदार, कोमल, बाज़ार-योग्य आकार पाते हैं — कई तुड़ाइयों में से पहली शुरू।

  6. दिन 75–150

    बार-बार तुड़ाई

    पौधा फूलता-फलता रहता है; हर 3–5 दिन में तुड़ाई और नियमित खुराक इसे महीनों उत्पादक रखती है।

  7. दिन 150–180

    फसल का अंत

    पौधा थकते ही उपज घटती है; अच्छी संभाली रैटून या नई रोपाई इसकी जगह लेती है।

उपयुक्त राज्य

जिन राज्यों में यह फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, वे नीचे हाइलाइट हैं। आपके खेत के लिए अंतिम सलाह हमेशा आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही देगा।

  • जम्मू और कश्मीर
  • हिमाचल प्रदेश
  • पंजाब
  • उत्तराखंड
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • उत्तर प्रदेश
  • राजस्थान
  • बिहार
  • झारखंड
  • पश्चिम बंगाल
  • सिक्किम
  • असम
  • अरुणाचल प्रदेश
  • मेघालय
  • नागालैंड
  • मणिपुर
  • मिज़ोरम
  • त्रिपुरा
  • गुजरात
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • गोवा
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक
  • केरल
  • तमिलनाडु
  • पुदुचेरी
  • लद्दाख
  • चंडीगढ़

यहाँ उगाई जाती है

जलवायु की ज़रूरतें

बैंगन गरम ऋतु की फसल है जो ठंड और अत्यधिक गर्मी दोनों नापसंद करती है। इसका लंबा खेत-जीवन कई मौसम-चरणों से गुज़रता है — रोपाई ऐसी योजना से करें कि मुख्य तुड़ाई का समय आपके क्षेत्र की सबसे तेज़ गर्मी या सबसे भारी मानसून से बचे।

  • आदर्श तापमान

    20–30°C आदर्श; 17°C से नीचे बढ़वार धीमी और 35°C से ऊपर फल-बंधन घटता है

  • वर्षा

    मुख्यतः सिंचाई पर; फूल के समय भारी बारिश से फूल झड़ते और फल सड़ते हैं

  • नमी

    मध्यम; लंबे समय की अधिक नमी फोमोप्सिस फल-सड़न व जीवाणु उकठा को बढ़ाती है

  • धूप

    लगातार फूल व फल के लिए पूरे सीज़न भरपूर धूप

मिट्टी की ज़रूरतें

चूँकि बैंगन खेत को महीनों घेरता है, यह मिट्टी से भारी खुराक खींचता है — भरपूर सड़ी एफ़वाईएम से शुरू करें। बैंगन के बाद बैंगन, टमाटर, मिर्च या आलू कभी न लगाएँ, जो सभी जीवाणु उकठा साझा करते हैं; रोग-चक्र तोड़ने को अनाज या दलहन से फ़सल-चक्र अपनाएँ।

  • उपयुक्त मिट्टी

    अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट से चिकनी दोमट, जैविक पदार्थ से भरपूर

  • pH स्तर

    5.5–6.6 आदर्श; अच्छी मिट्टी पर थोड़ी अधिक सीमा भी सहती है

  • जल निकासी

    अच्छी जल-निकासी ज़रूरी — जलभराव जीवाणु उकठा व जड़-सड़न को न्योता देता है

  • जैविक तत्व

    अधिक; 20–25 टन/हेक्टेयर एफ़वाईएम का आधार लंबी फसल अवधि संभालता है

खेत की तैयारी

क्षेत्र चाहे जो हो, चार कदम वही रहते हैं — बस समय बुवाई के अनुसार बदलता है।

  1. 1

    गहरी, खाद वाली भुरभुरी मिट्टी

    दो-तीन जुताई में 20–25 टन/हेक्टेयर सड़ी एफ़वाईएम मिलाएँ, हैरो चलाकर बारीक, समतल, अच्छी निकासी वाली क्यारी बनाएँ।

  2. 2

    स्वस्थ नर्सरी

    ऊँची नर्सरी क्यारी पर पौध तैयार करें, आर्द्र-गलन के विरुद्ध ड्रेंच करें, और मज़बूत 4–5 सप्ताह की पौध उखाड़ने से पहले उन्हें कड़ा करें।

  3. 3

    आधारीय खाद व मेड़

    आधारीय फ़ॉस्फ़ोरस, पोटाश व नाइट्रोजन का एक हिस्सा दें, और सिंचाई विधि अनुसार मेड़ या समतल क्यारी बनाएँ।

बीज की जानकारी

मुख्य किस्मों की तुलना — अवधि, उपज, रोग-प्रतिरोध या आप किस मक़सद से उगा रहे हैं, इसके आधार पर चुनें।

किस्मअवधिउपजरोग-प्रतिरोधसर्वश्रेष्ठ राज्यकिसके लिए उपयुक्त

पूसा पर्पल लॉन्ग

कोमल, चमकदार फल और व्यापक अनुकूलन वाली लोकप्रिय लंबी बैंगनी किस्म।

150–160 दिनमध्यम–उच्चमध्यमउत्तर प्रदेशताज़ा बाज़ार, लंबा फल

पूसा क्रांति

मैदानों के लिए अगेती, बौनी किस्म, अंडाकार-गोल बैंगनी फल।

140–150 दिनमध्यममध्यमदिल्लीअगेती फसल, गोल फल

अर्का निधि

जीवाणु-उकठा रोधी बनी आईआईएचआर किस्म — जहाँ उकठा समस्या हो वहाँ बहुमूल्य।

150–160 दिनउच्चजीवाणु उकठा रोधीकर्नाटकउकठा-प्रवण क्षेत्र, लंबा फल

अर्का शिरीष

लंबे हल्के-हरे फल वाली आईआईएचआर किस्म, उकठा-रोधी और दक्षिण के लिए उपयुक्त।

150–160 दिनउच्चजीवाणु उकठा रोधीकर्नाटकउकठा-प्रवण क्षेत्र, हरा फल

पूसा हाइब्रिड 6 / क्षेत्रीय F1

क्षेत्रों भर में बैंगनी व गोल प्रकार के ओजस्वी, अधिक उपज हाइब्रिड।

150–170 दिनउच्चहाइब्रिड अनुसार भिन्नमहाराष्ट्रव्यावसायिक, अधिक उपज
बीज दर
एक हेक्टेयर की नर्सरी के लिए 400–500 ग्राम/हेक्टेयर
प्रमाणित बीज
जीवाणु-उकठा-प्रवण मिट्टी में अर्का निधि या अर्का शिरीष जैसी उकठा-रोधी किस्म चुनें — यही एक चुनाव फसल बचा सकता है। रोगग्रस्त खेत का बीज बचाने के बजाय प्रतिष्ठित स्रोत से ताज़ा प्रमाणित बीज लें।
दूरी
कतारों के बीच 60 सेमी × कतार में 60 सेमी (फैलने वाली किस्मों के लिए अधिक)
बीज उपचार
बीज को थायरम या कार्बेन्डाज़िम से आर्द्र-गलन हेतु उपचारित करें, और रोपाई पर पौध की जड़ें कीटनाशी-सह-फफूँदनाशी घोल में डुबोएँ ताकि अगेते छेदक व मृदा रोग से बचाव हो।

बुवाई गाइड

मज़बूत, कड़ी की गई पौध जल्दी जमती और जल्दी फल देने लगती है। पौधे पूरे 60×60 सेमी पर लगाएँ — लंबी अवधि की झाड़ी फसल को भीड़ में लगाना छत्र की नमी बढ़ाता है और छेदक व फल-सड़न दोनों को मदद करता है।

सबसे अच्छा समय
हल्के क्षेत्रों में साल भर रोपाई; मुख्य सीज़न जून–जुलाई (खरीफ़) और अक्टूबर–नवंबर (रबी), साथ फ़रवरी–मार्च की गर्मी फसल
क़तार की दूरी
60 सेमी
पौधे की दूरी
कतार में 60 सेमी
बुवाई की गहराई
पौध को उसी गहराई पर लगाएँ जितनी वह नर्सरी में उगी थी
तरीक़ा
मज़बूत 4–5 सप्ताह की पौध शाम को लगाएँ और तुरंत पानी दें

खाद कार्यक्रम

बुवाई के समय एक साथ पूरी खाद डालने से बँटी हुई मात्रा बेहतर है — खासकर नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या रिसकर बह जाता है।

  1. 1

    आधारीय (रोपाई पर)

    दिन 0

    पूरा फ़ॉस्फ़ोरस व पोटाश और एक-तिहाई नाइट्रोजन, 20–25 टन/हेक्टेयर एफ़वाईएम के आधार पर — लगभग 50 N : 50 P₂O₅ : 50 K₂O किग्रा/हेक्टेयर आधारीय।

  2. 2

    पहली टॉप-ड्रेसिंग

    सक्रिय बढ़वार (25–30 दिन)

    शाखा-ढाँचा बढ़ने पर एक-तिहाई नाइट्रोजन, सिंचाई व मिट्टी चढ़ाई के साथ।

  3. 3

    दूसरी टॉप-ड्रेसिंग

    फूल (45–55 दिन)

    फूल व फल शुरू होते ही बची नाइट्रोजन, ताकि लंबी तुड़ाई अवधि टिकी रहे।

  4. 4

    रख-रखाव खुराक

    तुड़ाई भर

    लंबी फसल में हर भारी तुड़ाई के बाद नाइट्रोजन व पोटाश की छोटी अतिरिक्त खुराक पौधे को फलता रखती है।

सिंचाई कार्यक्रम

  1. 1. रोपाई के बाद

    दिन 0–7

    पौध जमाने को हल्की, बार-बार सिंचाई।

  2. 2. वानस्पतिक बढ़वार

    20–45 दिन

    मज़बूत शाखा-ढाँचा बनाने को हर 7–10 दिन में सिंचाई।

  3. 3. फूल व फल

    45 दिन से आगे

    लंबी तुड़ाई अवधि भर नमी समान रखें; यहाँ तनाव से फूल झड़ते और फल छोटे रहते हैं।

महत्वपूर्ण अवस्थाएँ

  • फूल
  • फल विकास व हर तुड़ाई का दौर

पानी बचाने के तरीक़े

  • ड्रिप सिंचाई लंबी फसल भर समान नमी देती है और पत्ते सूखे रखकर रोग घटाती है।
  • पलवार महीनों की फसल भर नमी संभालती और खरपतवार दबाती है।
  • नमी के उतार-चढ़ाव से बचें — सूखे व भराव का बदलना फूल झड़ना और फल फटना करता है।

खरपतवार प्रबंधन

जैविक नियंत्रण

  • मेड़ों के बीच पलवार लंबी फसल भर खरपतवार दबाती और नमी बचाती है।
  • 25 व 45 दिन पर हाथ निराई व मिट्टी चढ़ाई फसल साफ़ रखती और झाड़ियाँ मज़बूत करती है।

रासायनिक नियंत्रण

  • रोपाई के बाद नम मिट्टी पर पेंडिमेथालिन 1.0 किग्रा a.i./हेक्टेयर पूर्व-अंकुरण अगेते खरपतवार रोकता है।
  • इसके बाद एक-दो हाथ निराई मिट्टी चढ़ाई के साथ करें।

पोषक तत्व की कमी की पहचान

हर पोषक तत्व की कमी पौधे पर असल में कैसी दिखती है — ताकि ग़लत स्प्रे करने से पहले आप कमी और रोग में फ़र्क़ कर सकें।

ध्यान देने योग्य रोग

लक्षण, संभावित कारण और असल में क्या इलाज करता है — सिर्फ़ किसी स्प्रे का नाम नहीं।

ध्यान देने योग्य कीट

नुक़सान दिखने से पहले क्या देखें, और रसायन से पहले जैविक विकल्प क्या हैं।

आम ग़लतियाँ जिनसे बचें

जो ग़लतियाँ किसानों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती हैं, खेत में जितनी बार दिखती हैं उसी क्रम में — हमेशा वैसे नहीं जैसा आप सोचें।

  1. 1

    तना व फल छेदक से तयशुदा साप्ताहिक कैलेंडर छिड़काव से लड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    छेदक जल्दी प्रतिरोधी हो जाता है, छिड़काव बेअसर, और हर कुछ दिन तोड़े फल पर अवशेष जमा — छेदी शाखाएँ काटना, फेरोमोन ट्रैप व निगरानी-आधारित छिड़काव कहीं बेहतर काम करते हैं।

  2. 2

    मुरझाई छेदी शाखाएँ काटकर नष्ट न करना।

    नुक़सान क्यों होता है

    शाखा के भीतर छोड़ी हर इल्ली आगे फल छेदती है; साप्ताहिक काट-कर-नष्ट दौर उन्हें फल तक पहुँचने से पहले हटा देता है।

  3. 3

    छेदे या अधिक पके फल पौधे पर छोड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    छेदा फल छेदक की अगली पीढ़ी को शरण देता है और अधिक पका फल फीका-बीजदार हो जाता है — दोनों फसल गिराते हैं; साफ़ व बार-बार तोड़ें।

  4. 4

    बैंगन के बाद बैंगन, टमाटर, मिर्च या आलू उगाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    जीवाणु उकठा व साझा मृदा रोग तब तक जमा होते हैं कि पौधे पैच में मुरझाकर मरते हैं — 2–3 साल अनाज या दलहन से फ़सल-चक्र लें।

  5. 5

    लघु पर्ण को अनदेखा कर संक्रमित पौधे खेत में छोड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    फाइटोप्लाज़्मा फुदकों से स्वस्थ पौधों में फैलता है, हर संक्रमित पौधा बिलकुल फल नहीं देता — इन्हें जल्दी उखाड़ें और वाहक नियंत्रित करें।

  6. 6

    फल बहुत देर से तोड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    चमकदार, कोमल फल अच्छा दाम पाता है; कुछ दिन रुकते ही फीका पड़ता है, बीज सख़्त होते हैं और दाम गिर जाता है।

  7. 7

    ख़राब निकासी वाली ज़मीन पर उगाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    जलभराव उस फसल पर जीवाणु उकठा व जड़-सड़न भड़काता है जो महीनों ज़मीन में रहेगी — अच्छी निकासी वैकल्पिक नहीं है।

  8. 8

    पौधों को 60×60 सेमी से पास लगाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    घना छत्र नम व अँधेरा रहकर फल-सड़न व छेदक को भोजन देता है और छिड़काव बेअसर बनाता है।

  9. 9

    लंबी अवधि की फसल को पोषण से वंचित रखना।

    नुक़सान क्यों होता है

    तुड़ाई-दौर के बाद रख-रखाव खुराक बिना पौधा जल्दी थकता है और उत्पादक अवधि छोटी हो जाती है।

  10. 10

    रोगग्रस्त फसल का बचाया बीज उपयोग करना।

    नुक़सान क्यों होता है

    फोमोप्सिस बीज-जनित है — बचाया बीज झुलसा नई फसल में लाता है; ताज़ा उपचारित प्रमाणित बीज लें।

कटाई

फल कोमल, चमकदार, ठोस और किस्म अनुसार पूरे रंग का रहते ही तोड़ें — त्वचा फीकी पड़ने और बीज सख़्त होने से पहले। पहला फल रोपाई के 60–75 दिन बाद तैयार, और तुड़ाई हर 3–5 दिन में महीनों चलती है।

तैयार होने के संकेत

  • फल की त्वचा चमकदार व चटख
  • फल ठोस व स्प्रिंगदार अनुभव
  • भीतर बीज अब भी कोमल व सफ़ेद

उपकरण

  • छोटे डंठल सहित काटने को तेज़ चाकू या सेकेटर
  • कोमल हैंडलिंग को क्रेट
  • बाज़ार से पहले रखने को छाया

अपेक्षित उपज

अच्छी संभाली फसल में पूरी तुड़ाई अवधि में 250–400 क्विंटल/हेक्टेयर

कटाई के बाद व भंडारण

  • भंडारण

    बैंगन नाशवान और ठंड-संवेदनशील है — 8–10°C व अधिक आर्द्रता पर लगभग एक सप्ताह टिकता है और आसानी से चोटिल होता है। 7°C से नीचे न रखें, जिससे गड्ढेदार दाग व भूरापन होता है।

  • पैकेजिंग

    ठोस, चमकदार फल हवादार क्रेट में छोटे डंठल सहित पैक करें, कोमल त्वचा चोटिल करने वाले दबाव से बचाकर।

  • परिवहन

    जल्दी और ठंडा बाज़ार पहुँचाएँ; चोटिल या अधिक पके फल तेज़ी से ग्रेड खोते हैं।

  • भंडारण अवधि

    ठंडे भंडारण में लगभग एक सप्ताह; कुछ दिनों में ताज़ा बेचना सर्वोत्तम।

मंडी भाव

सरकार के अपने एगमार्कनेट डेटा से, आपके नज़दीक का आज का मंडी भाव — लाइव।

सरकारी एगमार्कनेट डेटा से रोज़ाना लाइव मंडी भाव।

आज के भाव ला रहे हैं…

data.gov.in (एगमार्कनेट) से सिंक होता है। भाव ₹ प्रति क्विंटल हैं।

मौसम

आपके चुने गए स्थान की मौजूदा स्थिति और 5-दिन का पूर्वानुमान, फसल की अवस्था के अनुसार एक सलाह के साथ।

मौजूदा स्थिति और 5-दिन के पूर्वानुमान के लिए अपना राज्य चुनें।

मौसम की जानकारी ला रहे हैं…

Open-Meteo से लाइव डेटा

मुनाफ़ा कैलकुलेटर

आपकी अपनी लागत, अपेक्षित उपज और बिक्री भाव — हमारी नहीं।

पैसा कहाँ जाता है

नीचे कैलकुलेटर की डिफ़ॉल्ट लागत के अनुसार प्रति एकड़ कुल लागत में हर मद का हिस्सा — वहाँ अपने आँकड़े बदलने पर यह तस्वीर पूरी तरह आप पर लागू नहीं रहेगी, पर क्रम शायद ही बदलता है।

  • मज़दूरी35% (₹20,000)
  • ज़मीन का किराया18% (₹10,000)
  • कीटनाशक और खरपतवारनाशक14% (₹8,000)
  • खाद12% (₹7,000)
  • सिंचाई9% (₹5,000)
  • मशीन4% (₹2,500)
  • ब्याज4% (₹2,500)
  • बीज4% (₹2,000)

आधिकारिक डाउनलोड

केवल सरकार और ICAR के दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ किसी आधिकारिक सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लगातार छिड़काव के बिना बैंगन तना-व-फल छेदक कैसे नियंत्रित करूँ?

छेदक कैलेंडर छिड़काव से नहीं, कृषि-उपायों से सबसे अच्छा संभलता है। खेत में साप्ताहिक घूमें और किसी भी मुरझाई, झुकी शाखा (भीतर इल्ली है) को काट कर नष्ट करें; हर तुड़ाई पर छेदा फल हटाकर दबाएँ; और फेरोमोन ट्रैप लगाएँ। ताज़ा नुक़सान दहलीज़ पार करे तभी निगरानी-आधारित, बदली हुई कीटनाशी छिड़कें। तयशुदा साप्ताहिक छिड़काव प्रतिरोध पैदा करता है और हर कुछ दिन तोड़े फल पर अवशेष छोड़ता है।

मेरा बैंगन पौधा हरा रहते अचानक क्यों मुरझा गया?

यह जीवाणु उकठा का उत्कृष्ट लक्षण है — पौधा बिना पीले हुए मुरझाता है, और कटा तना पानी में दूधिया जीवाणु धारा छोड़ता है। यह मृदा-जनित और एक बार लगने पर असाध्य है। प्रभावित पौधे उखाड़ें, निकासी सुधारें, और अगले सीज़न अर्का निधि जैसी उकठा-रोधी किस्म उगाएँ व बैंगन, टमाटर, मिर्च, आलू से फ़सल-चक्र लें।

बैंगन में लघु पर्ण रोग क्या है?

लघु पर्ण फुदकों से फैलने वाला फाइटोप्लाज़्मा विकार है। पत्तियाँ छोटी, संकरी व पीली होकर झाड़ीदार शिखर में गुच्छित हो जाती हैं, और पौधा बिलकुल फल नहीं देता। इसका इलाज नहीं — दिखते ही संक्रमित पौधे उखाड़ कर नष्ट करें और फुदक वाहक नियंत्रित करें ताकि यह स्वस्थ पौधों में न फैले।

बैंगन फल कब तोड़ूँ?

फल कोमल, चमकदार व ठोस रहते, भीतर सफ़ेद कोमल बीज के साथ तोड़ें — तभी सबसे अच्छा दाम मिलता है। रुकने पर त्वचा फीकी पड़ती है, बीज सख़्त-काले होते हैं, और फल कड़वा व बिकने लायक नहीं रहता। स्वस्थ फसल में हर 3–5 दिन में तोड़ते हैं।

बैंगन फसल कितने समय तक उपज देती रहती है?

एक बार लगाने पर बैंगन लगभग चार से छह महीने कई तुड़ाइयों में फल देता है। उस लंबी उत्पादक अवधि को टिकाने के लिए नमी समान रखें, भारी तुड़ाई-दौर के बाद नाइट्रोजन व पोटाश की छोटी रख-रखाव खुराक दें, और तना-व-फल छेदक पर पूरे समय नियंत्रण रखें।

क्या बैंगन का एमएसपी है?

नहीं। बैंगन बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य वाली बाज़ार सब्ज़ी है — इसका दाम स्थानीय मंडी माँग-आपूर्ति से तय होता है और सीज़न व आवक से घटता-बढ़ता है। इस पृष्ठ के लाइव मंडी भाव और लाभ कैलकुलेटर से आँकें कि आपका फल कब बाज़ार ले जाने लायक है।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके खेत और मिट्टी से जुड़ी किसी भी ख़ास बात के लिए आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही आधिकारिक जवाब है।