प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY)
सामान्य लाभार्थियों को परियोजना लागत का 40% पूंजीगत सब्सिडी (SC/ST और महिलाओं को 60%) — तालाब, हैचरी, केज कल्चर, कोल्ड चेन और मत्स्य अवसंरचना पर — भारत की ब्लू रिवोल्यूशन की छत्र योजना।
- कुल परिव्यय
- ₹20,050 करोड़ (2020-21 से 2024-25)
- योजना की स्थिति
- सक्रिय, 2025-26 तक विस्तारित
- शुरुआत
- 10 सितंबर 2020
- पूंजीगत सब्सिडी
- 40% सामान्य / 60% SC-ST-महिला
- आवेदन का तरीका
- राज्य / ज़िला मत्स्य कार्यालय
- घटक
- केंद्रीय क्षेत्र + केंद्र प्रायोजित
- मंत्रालय
- मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी
- श्रेणी
- मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि
परिचय
पीएमएमएसवाई भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र — अंतर्देशीय मात्स्यिकी, जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) और समुद्री मात्स्यिकी — के सतत और उत्तरदायी विकास की छत्र योजना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 20 मई 2020 को मंज़ूरी दी, प्रधानमंत्री ने 10 सितंबर 2020 को इसे शुरू किया, और यह वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक कुल ₹20,050 करोड़ के परिव्यय से चलती है — जिसे मौजूदा स्वरूप और वित्त-पोषण ढांचे पर वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़ा दिया गया है।
इसके दो घटक हैं: केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme), जो राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए पूरी तरह केंद्र द्वारा वित्त-पोषित है, और केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme), जिसमें केंद्र और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की साझी भागीदारी होती है। केंद्र प्रायोजित योजना की लाभार्थी-केंद्रित गतिविधियों के तहत कोई व्यक्ति या समूह — मछली किसान, मछुआरा, मत्स्य कर्मी, मछली विक्रेता, सहकारी समिति, FPO, स्वयं सहायता समूह या उद्यमी — तालाब निर्माण, हैचरी, बायोफ्लॉक और केज कल्चर इकाइयों, मछली पकड़ने की नौकाओं और उपकरणों, कोल्ड चेन, आइस प्लांट और मछली बाज़ारों जैसी गतिविधियों पर परियोजना/इकाई लागत का 40% पूंजीगत सब्सिडी (SC/ST और महिला लाभार्थियों के लिए 60%) पा सकता है।
लाभार्थी को वास्तव में कितना मिलेगा, यह तीन बातों पर निर्भर करता है: गतिविधि किस घटक के अंतर्गत आती है, आवेदक किस श्रेणी (सामान्य या SC/ST/महिला) का है, और प्रस्ताव सही कार्यालय से भेजा गया है या नहीं — केंद्र प्रायोजित योजना की गतिविधियों के लिए ज़िला मत्स्य अधिकारी या राज्य मत्स्य विभाग, और केंद्रीय क्षेत्र योजना के प्रस्तावों के लिए नई दिल्ली स्थित मत्स्यपालन विभाग।
योजना की मुख्य बातें
पूरे क्षेत्र के लिए छत्र योजना
अंतर्देशीय मात्स्यिकी, जलीय कृषि और समुद्री मात्स्यिकी को तालाब से बाज़ार तक, एक ही योजना में शामिल करती है।
60% तक पूंजीगत सब्सिडी
सामान्य लाभार्थियों के लिए परियोजना/इकाई लागत का 40%, SC/ST और महिला लाभार्थियों के लिए 60%।
ब्लू रिवोल्यूशन अवसंरचना
तालाब, हैचरी, बायोफ्लॉक इकाइयाँ, केज कल्चर, RAS, कोल्ड चेन, आइस प्लांट और मछली बाज़ारों को वित्त-पोषित करती है।
मछुआरों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड
KCC मछुआरों और मछली किसानों तक बढ़ाया गया — रियायती दर पर ₹2 लाख तक का कार्यशील पूंजी ऋण।
मछुआरों के लिए सामूहिक दुर्घटना बीमा
पीएमएमएसवाई के मत्स्यपालक कल्याण घटक के तहत मृत्यु या स्थायी पूर्ण अपंगता पर ₹5 लाख का कवर।
सूक्ष्म व लघु उद्यमों के लिए PM-MKSSY
मत्स्यपालन सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक रूप देने वाली ₹6,000 करोड़ की केंद्रीय क्षेत्र उप-योजना (वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27)।
आपको क्या मिलता है
पूंजीगत सब्सिडी
स्वीकृत मत्स्यपालन गतिविधियों पर सामान्य लाभार्थियों के लिए परियोजना/इकाई लागत का 40%, SC/ST और महिलाओं के लिए 60%।
किसे लाभ मिलता है
व्यक्तिगत मछुआरे, मछली किसान, मत्स्य कर्मी और मछली विक्रेता, तथा समूह — FPO, सहकारी समितियाँ, स्वयं सहायता समूह, उद्यमी।
दो वित्त-पोषण मार्ग
केंद्रीय क्षेत्र योजना (राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए 100% केंद्र-वित्त-पोषित) और केंद्र प्रायोजित योजना (केंद्र + राज्य हिस्सा)।
ऋण और बीमा सहायता
पूंजीगत सब्सिडी के साथ-साथ कार्यशील पूंजी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और मछुआरों के लिए सामूहिक दुर्घटना बीमा।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- भारतीय नागरिक, या पंजीकृत मत्स्यपालन संस्था — FPO, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह, कंपनी, LLP या साझेदारी फर्म
- मछली पकड़ने, जलीय कृषि, प्रसंस्करण या विपणन में सीधे लगा मछुआरा, मछली किसान, मत्स्य कर्मी या मछली विक्रेता
- मत्स्यपालन या जलीय कृषि परियोजना शुरू करने वाला उद्यमी या स्टार्टअप
- परियोजना गतिविधि पीएमएमएसवाई की स्वीकृत सूची में है (तालाब, हैचरी, केज कल्चर, बायोफ्लॉक, RAS, कोल्ड चेन, मछली पकड़ने की नौकाएँ, मछली बाज़ार आदि)
- परियोजना के लिए भूमि या जलाशय आवेदक के स्वामित्व में है, पट्टे पर है, या वैध NOC है
- प्रस्ताव को ज़िला मत्स्य अधिकारी / राज्य मत्स्य विभाग, या केंद्रीय क्षेत्र योजना की गतिविधियों के लिए मत्स्यपालन विभाग के माध्यम से भेजा जा सकता है
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- ऐसी गतिविधि जो पीएमएमएसवाई की स्वीकृत सूची में नहीं है
- वही गतिविधि जिसे किसी अन्य केंद्रीय या राज्य योजना के तहत पहले से ही सब्सिडी/अनुदान मिल रहा हो — दोहरी सब्सिडी नहीं
- बिना वैध भूमि/जलाशय स्वामित्व, पट्टा-पत्र या NOC वाला प्रस्ताव
- ऐसा आवेदक या संस्था जो मत्स्यपालन या जलीय कृषि मूल्य-श्रृंखला में सीधे तौर पर शामिल नहीं है
- परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के बिना प्रस्ताव
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)
गतिविधि, लागत अनुमान, अपेक्षित उत्पादन और वित्त-पोषण ढांचे वाली परियोजना रिपोर्ट — हर प्रस्ताव के लिए अनिवार्य।
पहचान प्रमाण
आवेदक या संस्था के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का आधार या अन्य सरकारी फोटो पहचान-पत्र।
बैंक खाते का विवरण
सब्सिडी घटक जारी करने के लिए सक्रिय बैंक खाता और IFSC कोड।
भूमि / जलाशय के कागज़ात
स्वामित्व दस्तावेज़, पट्टा-अनुबंध, या भूस्वामी की ओर से NOC — जहाँ परियोजना स्थल आवेदक के स्वामित्व में न हो।
संस्था पंजीकरण प्रमाण-पत्र
समूह के रूप में आवेदन करने वाले FPO, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह, कंपनी या LLP के लिए पंजीकरण प्रमाण।
जाति प्रमाण-पत्र
SC/ST लाभार्थियों को उपलब्ध 60% की उच्च सब्सिडी दर के दावे के लिए ज़रूरी।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करें
DPR तैयार करें — गतिविधि, इकाई लागत, अपेक्षित उत्पादन, और आपके योगदान, किसी ऋण व पीएमएमएसवाई सब्सिडी के बीच वित्त-पोषण का विभाजन।
- 2
सही कार्यालय से संपर्क करें
केंद्र प्रायोजित योजना की गतिविधियों के लिए DPR अपने ज़िले के ज़िला मत्स्य अधिकारी या राज्य मत्स्य विभाग को दें। केंद्रीय क्षेत्र योजना के प्रस्तावों के लिए भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग को भेजें।
- 3
राज्य-स्तरीय जाँच
राज्य/केंद्रशासित प्रदेश का मत्स्य विभाग प्रस्ताव की पीएमएमएसवाई परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार जाँच करता है और स्वीकृति के लिए आगे भेजता है।
- 4
स्वीकृति और केंद्रीय हिस्से की रिहाई
स्वीकृति मिलने पर केंद्रीय हिस्सा राज्य/केंद्रशासित प्रदेश को (केंद्र प्रायोजित योजना) या सीधे लाभार्थी/एजेंसी को (केंद्रीय क्षेत्र योजना) जारी किया जाता है।
- 5
क्रियान्वयन और सब्सिडी जारी होना
इकाई बनाई जाती है या गतिविधि शुरू की जाती है; स्वीकृत DPR के अनुसार पूर्ण कार्य के सत्यापन पर सब्सिडी जारी होती है।
- 6
निगरानी
प्रगति और उपयोगिता की निगरानी राज्य मत्स्य विभाग और मत्स्यपालन विभाग द्वारा पीएमएमएसवाई MIS पोर्टल के माध्यम से की जाती है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
मंत्रिमंडल की मंज़ूरी
20 मई 2020
योजना का शुभारंभ
10 सितंबर 2020
प्रधानमंत्री द्वारा डिजिटल रूप से शुभारंभ
मूल योजना अवधि
वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25
कुल परिव्यय ₹20,050 करोड़
विस्तार
वित्त वर्ष 2025-26 तक विस्तारित
वही योजना स्वरूप और वित्त-पोषण ढांचा
PM-MKSSY उप-योजना स्वीकृत
8 फरवरी 2024
मत्स्यपालन सूक्ष्म व लघु उद्यमों के लिए ₹6,000 करोड़, वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27
तथ्य अंतिम बार जाँचे गए
13 जुलाई 2026
dof.gov.in और pib.gov.in के अनुसार
अपनी पात्रता जाँचें
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यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
डाउनलोड
केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।
पीएमएमएसवाई परिचालन दिशानिर्देश
नियम-पुस्तिका — घटक, सब्सिडी ढांचा, स्वीकृत गतिविधियाँ और जाँच प्रक्रिया।
राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए पीएमएमएसवाई का मूल ढांचा
योजना राज्य-वार कैसे लागू होती है, यह बताने वाला अनुबंध।
FIDF योजना पुस्तिका
मात्स्यिकी एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष — रियायती वित्त-पोषण वाला कोष जो पीएमएमएसवाई का पूरक है।
आधिकारिक लिंक और हेल्पलाइन
पोर्टल को ही बुकमार्क करें — कोई भी तीसरी वेबसाइट भुगतान न जारी कर सकती है, न रोक सकती है, न तेज़ कर सकती है।
- आधिकारिक पीएमएमएसवाई पोर्टलpmmsy.dof.gov.in — योजना की आधिकारिक वेबसाइट
- पीएमएमएसवाई पेज, मत्स्यपालन विभागमत्स्यपालन विभाग की वेबसाइट पर योजना का विवरण
- पीएमएमएसवाई MIS पोर्टलराज्य मत्स्य विभागों द्वारा उपयोग किया जाने वाला परियोजना निगरानी व रिपोर्टिंग पोर्टल
- FIDF (संबंधित अवसंरचना कोष)मात्स्यिकी एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष — रियायती ऋण जो पीएमएमएसवाई सब्सिडी का पूरक हैं
- PM-MKSSY (उप-योजना)प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना — पीएमएमएसवाई के अंतर्गत सूक्ष्म उद्यम उप-योजना
- ताज़ा पीएमएमएसवाई स्थिति अपडेटयोजना के क्रियान्वयन और प्रगति पर PIB प्रेस विज्ञप्ति
हेल्पलाइन
24×7 IVRS और हेल्प डेस्क, मंत्रालय चलाता है — अटके भुगतान की जाँच का सबसे तेज़ तरीका फोन ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीएमएमएसवाई क्या है?
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भारत सरकार की मत्स्यपालन क्षेत्र — अंतर्देशीय मात्स्यिकी, जलीय कृषि और समुद्री मात्स्यिकी — के सतत और उत्तरदायी विकास की छत्र योजना है, जिसे मंत्रिमंडल ने 20 मई 2020 को मंज़ूरी दी और 10 सितंबर 2020 को शुरू किया गया, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 (वित्त वर्ष 2025-26 तक विस्तारित) के लिए कुल ₹20,050 करोड़ के परिव्यय के साथ।
पीएमएमएसवाई का कुल परिव्यय कितना है?
वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के पाँच वर्षों के लिए ₹20,050 करोड़, जिसमें ₹9,407 करोड़ केंद्रीय हिस्सा, ₹4,880 करोड़ राज्य हिस्सा, और ₹5,763 करोड़ अपेक्षित लाभार्थी योगदान शामिल है। योजना को मौजूदा स्वरूप और वित्त-पोषण ढांचे पर वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़ाया जा चुका है।
पीएमएमएसवाई के घटक क्या हैं?
पीएमएमएसवाई के दो घटक हैं: केंद्रीय क्षेत्र योजना, जो राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए 100% केंद्र द्वारा वित्त-पोषित है, और केंद्र प्रायोजित योजना, जो केंद्र और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा संयुक्त रूप से वित्त-पोषित है और अधिकांश व्यक्तिगत व समूह लाभार्थी-केंद्रित गतिविधियों को कवर करती है।
पीएमएमएसवाई में कितनी सब्सिडी मिलती है?
पीएमएमएसवाई के लाभार्थी-केंद्रित घटकों की स्वीकृत गतिविधियों पर सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए परियोजना/इकाई लागत का 40% पूंजीगत सब्सिडी, और SC/ST व महिला लाभार्थियों के लिए 60%। यह परियोजना लागत पर प्रतिशत सब्सिडी है, कोई निश्चित सालाना नकद भुगतान नहीं।
पीएमएमएसवाई के तहत कौन-कौन सी गतिविधियाँ शामिल हैं?
तालाब निर्माण व नवीनीकरण, हैचरी व नर्सरी, बायोफ्लॉक व रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) इकाइयाँ, जलाशयों व समुद्र में केज कल्चर, मछली पकड़ने की नौकाएँ व उपकरण, कोल्ड चेन व आइस प्लांट, आधुनिक मछली बाज़ार, फिश लैंडिंग सेंटर, फिश फीड मिल, ब्रूड बैंक, और परिचालन दिशानिर्देशों में सूचीबद्ध अन्य अवसंरचना।
पीएमएमएसवाई के लिए कौन पात्र है?
मत्स्यपालन मूल्य-श्रृंखला में सीधे तौर पर लगे मछुआरे, मछली किसान, मत्स्य कर्मी और मछली विक्रेता, तथा फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन (FFPO), सहकारी समितियाँ, स्वयं सहायता समूह और पंजीकृत उद्यमी/कंपनियाँ जैसे समूह — बशर्ते प्रस्तावित गतिविधि पीएमएमएसवाई की स्वीकृत सूची में हो और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट द्वारा समर्थित हो।
पीएमएमएसवाई के लिए कौन पात्र नहीं है, या क्या बाहर रखा गया है?
पीएमएमएसवाई की स्वीकृत सूची में न होने वाली गतिविधियाँ; ऐसी गतिविधि के प्रस्ताव जिसे किसी अन्य केंद्रीय या राज्य योजना से पहले ही सब्सिडी मिल रही हो; बिना वैध भूमि/जलाशय स्वामित्व, पट्टा या NOC वाले प्रस्ताव; और ऐसे आवेदक जो मत्स्यपालन या जलीय कृषि मूल्य-श्रृंखला में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं।
पीएमएमएसवाई के लिए आवेदन कैसे करें?
केंद्र प्रायोजित योजना की गतिविधियों के लिए, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अपने ज़िले के ज़िला मत्स्य अधिकारी या राज्य मत्स्य विभाग को दें। केंद्रीय क्षेत्र योजना के प्रस्तावों के लिए, ज़िला मत्स्य अधिकारी की सलाह से भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग को भेजें। व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए कोई सीधा ऑनलाइन स्व-पंजीकरण नहीं है — प्रस्तावों की जाँच व अग्रेषण इन्हीं कार्यालयों के माध्यम से होता है।
पीएमएमएसवाई प्रस्ताव के लिए कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, पहचान प्रमाण, बैंक खाते का विवरण, भूमि या जलाशय के स्वामित्व/पट्टे/NOC के कागज़ात, और समूह आवेदकों के लिए संस्था का पंजीकरण प्रमाण-पत्र। SC/ST लाभार्थियों के लिए 60% की उच्च सब्सिडी दर पाने हेतु जाति प्रमाण-पत्र ज़रूरी है।
PM-MKSSY क्या है, और यह पीएमएमएसवाई से कैसे जुड़ी है?
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) पीएमएमएसवाई के अंतर्गत एक केंद्रीय क्षेत्र उप-योजना है, जिसे मंत्रिमंडल ने 8 फरवरी 2024 को मंज़ूरी दी — वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक ₹6,000 करोड़ के परिव्यय के साथ (आधा सार्वजनिक वित्त, जिसमें विश्व बैंक/AFD का सहयोग शामिल है, और आधा अपेक्षित लाभार्थी/निजी निवेश)। यह मत्स्यपालन सूक्ष्म व लघु उद्यमों को औपचारिक रूप देने पर केंद्रित है।
FIDF क्या है, और क्या यह पीएमएमएसवाई का हिस्सा है?
मात्स्यिकी एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) एक अलग कोष है, जो वित्त वर्ष 2018-19 से ₹7,522.48 करोड़ की राशि के साथ चल रहा है, और फिशिंग हार्बर, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट व आधुनिक मछली बाज़ार जैसी मत्स्य अवसंरचना के लिए रियायती ऋण (3% प्रति वर्ष तक ब्याज सहायता के साथ) देता है। यह पीएमएमएसवाई की अनुदान-आधारित पूंजीगत सब्सिडी का पूरक है, न कि उसका घटक।
क्या मछुआरे और मछली किसान किसान क्रेडिट कार्ड पा सकते हैं?
हाँ। किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा 2018-19 से मछुआरों और मछली किसानों तक बढ़ाई गई है, कार्यशील पूंजी की ज़रूरतों के लिए, जनवरी 2025 से बिना गिरवी के ऋण सीमा बढ़ाकर ₹2 लाख की गई है, और समय पर चुकाने वालों के लिए ब्याज सहायता से प्रभावी दर लगभग 4% प्रति वर्ष तक आ जाती है। यह पीएमएमएसवाई की पूंजीगत सब्सिडी के साथ-साथ चलती है, उसकी जगह नहीं लेती।
क्या पीएमएमएसवाई मछुआरों को बीमा देती है?
हाँ। अपने मत्स्यपालक कल्याण घटक के तहत, पीएमएमएसवाई सामूहिक दुर्घटना बीमा कवर देती है — मृत्यु या स्थायी पूर्ण अपंगता पर ₹5 लाख, स्थायी आंशिक अपंगता पर ₹2.5 लाख, और अस्पताल में भर्ती होने के खर्च के लिए ₹25,000 तक।
क्या पीएमएमएसवाई में महिला लाभार्थियों को कोई विशेष सहायता मिलती है?
हाँ। महिला लाभार्थियों को लाभार्थी-केंद्रित गतिविधियों पर 60% की उच्च पूंजीगत सब्सिडी दर मिलती है (SC/ST लाभार्थियों के बराबर), और पीएमएमएसवाई परियोजना स्वीकृतियों में लघु व सीमांत मछली किसानों, SC/ST और महिलाओं को शामिल करने पर विशेष ध्यान देती है।
पीएमएमएसवाई की हेल्पलाइन क्या है?
मत्स्यपालन विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-1660 है, जो सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक काम करती है। प्रस्ताव से जुड़े सवालों के लिए सीधे अपने ज़िला मत्स्य अधिकारी या राज्य मत्स्य विभाग से संपर्क करें।
पीएमएमएसवाई की प्रगति कैसे ट्रैक होती है?
मत्स्यपालन विभाग और राज्य मत्स्य विभाग स्वीकृत परियोजनाओं, धनराशि जारी होने और उपयोगिता की निगरानी पीएमएमएसवाई MIS पोर्टल (pmmsymis.dof.gov.in) के माध्यम से करते हैं, जिसका उपयोग क्रियान्वयन एजेंसियां करती हैं, न कि व्यक्तिगत लाभार्थी।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन 1800-425-1660 ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
