तंबाकू
Nicotiana tabacum
एक ऊँचे दाम वाली, नर्सरी से तैयार होने वाली पत्ती फ़सल जो आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और पूर्वी राज्यों की हल्की व काली मिट्टी पर उगती है। फ़्लू-क्योर्ड वर्जीनिया (FCV) सिर्फ़ तंबाकू बोर्ड की नीलामी में बिकता और उसका रकबा लाइसेंस से तय होता; बीड़ी, चबाने, हुक़्क़ा व सिगार क़िस्में खुले बाज़ार में जाती हैं। पूरी कमाई क्योरिंग के समय पत्ती की गुणवत्ता पर टिकी है — इसलिए नर्सरी देखभाल, सही क्लोराइड-रहित खाद खुराक, समय पर टॉपिंग, और ब्लैक शैंक व तंबाकू इल्ली का नियंत्रण फ़सल तय करते हैं।
त्वरित सारांश
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त्वरित सारांश
तंबाकू (Nicotiana tabacum) भारत में एक नहीं, कई अलग-अलग फ़सलें हैं। फ़्लू-क्योर्ड वर्जीनिया (FCV) निर्यात वाली क़िस्म है, जो कर्नाटक की हल्की मिट्टी (मैसूर पट्टी) और आंध्र प्रदेश की हल्की व काली मिट्टी पर उगती है, बार्न में गर्मी से क्योर होती है, और सिर्फ़ तंबाकू बोर्ड की नीलामी में बिकती है — बोर्ड यह भी तय करता है कि हर किसान कितना रकबा लगा सकता है। बीड़ी तंबाकू मुख्यतः गुजरात (खेड़ा/आणंद पट्टी) और कर्नाटक–महाराष्ट्र सीमा पर निपानी के आसपास उगता है, धूप में क्योर होता, और बीड़ी बनाने वालों को बिकता। चबाने व सुगंधित तंबाकू तमिलनाडु, बिहार (मोतिहारी) और पश्चिम बंगाल से आता; हुक़्क़ा तंबाकू उत्तर भारत से; सिगार व चेरूट लपेट तमिलनाडु और गोदावरी डेल्टा से।
हर क़िस्म एक ही तरह शुरू होती है — धूल जैसा बारीक बीज उठी नर्सरी क्यारी पर बोया जाता, छह-सात हफ़्ते बढ़ाया जाता, सख़्त किया जाता, और पेंसिल-मोटी पौध के रूप में अच्छे तैयार, अच्छी-निकासी खेत में रोपा जाता। इसके बाद फ़सल का पूरा काम सही तरह की पत्ती बनाना है। टॉपिंग (फूल-सिर हटाना) और बार-बार सकर निकालना पौधे की बढ़वार पत्तियों में मोड़ देते और उनमें शरीर, वज़न व निकोटीन भरते हैं। FCV को मामूली, क्लोराइड-रहित खाद खुराक जल्दी चाहिए, क्योंकि क्लोराइड पत्ती की जलन व रंग बिगाड़ता है और देर की नाइट्रोजन गहरी, मोटी, घटिया पत्ती देती है; बीड़ी व चबाने वाला तंबाकू शरीर के लिए उगाया जाता और कहीं ज़्यादा नाइट्रोजन लेता है।
कटाई पकाव से होती है, कैलेंडर से नहीं। FCV पत्तियाँ नीचे से ऊपर की ओर कई दौरों में थोड़ी-थोड़ी करके तोड़ी ("प्राइम") जाती हैं जैसे-जैसे हर सेट पीला होता है, और हर बैच को बार्न में लगभग एक हफ़्ते नियंत्रित तापमान बढ़ाकर फ़्लू-क्योर किया जाता है। बीड़ी व देसी तंबाकू पूरा पौधा काटकर रैक या ज़मीन पर क्योर किया जाता है। फ़सल की निर्णायक समस्याएँ हैं ब्लैक शैंक (एक मृदा जल-फफूँद जो गीले हिस्सों में पौधे मुरझाकर मार देती), तंबाकू इल्ली, वायरस फैलाने वाला माहू, और काली मिट्टी पर परजीवी खरपतवार ओरोबंकी (मार्गोझा/भूई फोड़)।
तंबाकू की कोई एमएसपी नहीं है। FCV को नीलामी का दाम मिलता है जो ग्रेड, फ़सल के आकार और निर्यात माँग के साथ घटता-बढ़ता है, और लाइसेंस से ज़्यादा रकबा लगाने पर पत्ती बिना बिके रह सकती है। नीचे का पेज नर्सरी तरीक़ा, रोपाई व दूरी, खाद व टॉपिंग अनुसूची, क्योरिंग, ब्लैक-शैंक व कीट प्रबंधन, और अपेक्षित उपज देता है।
- फ़सल प्रकार
- नर्सरी से तैयार पत्ती / व्यावसायिक फ़सल (FCV, बीड़ी, चबाने, हुक़्क़ा, सिगार)
- सीज़न
- रबी — नर्सरी जुलाई–सितंबर, रोपाई सितंबर–नवंबर
- उपयुक्त राज्य
- आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल
- फ़सल अवधि
- रोपाई से 120–150 दिन (और ~7 हफ़्ते नर्सरी)
- पानी की ज़रूरत
- कम–मध्यम — काली मिट्टी पर बारानी, हल्की मिट्टी पर बार-बार हल्की सिंचाई
- तापमान
- 20–30°C; पकने के समय गर्म दिन व ठंडी रातें गुणवत्ता के लिए अच्छी
- मिट्टी
- हल्की बलुई दोमट (FCV) या अच्छी-निकासी काली मिट्टी; FCV के लिए pH 5.0–6.5
- कठिनाई स्तर
- कठिन
- अपेक्षित उपज
- FCV क्योर्ड पत्ती 1,800–2,500 किग्रा/हे.; बीड़ी 1,200–1,800 किग्रा/हे.
- कोई एमएसपी नहीं
- FCV तंबाकू बोर्ड नीलामी में; बाक़ी क़िस्में खुले बाज़ार में
परिचय
तंबाकू (Nicotiana tabacum) भारत में एक फ़सल नहीं बल्कि कई हैं, हर एक की अपनी पट्टी, क्योरिंग तरीक़ा और बाज़ार। फ़्लू-क्योर्ड वर्जीनिया (FCV) बड़ी व्यावसायिक व निर्यात क़िस्म है, जो कर्नाटक की हल्की मिट्टी (हुनसूर, पेरियापटना, हासन के आसपास की "मैसूर" पट्टी) और तटीय व भीतरी आंध्र प्रदेश की हल्की व काली मिट्टी पर उगती है। इसे ख़ास बने बार्न में गर्मी से क्योर किया जाता, और यही अकेला तंबाकू है जो तंबाकू बोर्ड की नीलामी में बिकता — बोर्ड वाणिज्य मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है जो किसानों व बार्न का पंजीकरण भी करती और हर किसान का रकबा तय करती है।
बाक़ी क़िस्में घरेलू बाज़ार के लिए उगाई जातीं और बोर्ड के बाहर बिकती हैं। बीड़ी तंबाकू मुख्यतः गुजरात के खेड़ा व आणंद ज़िलों से और कर्नाटक–महाराष्ट्र सीमा पर निपानी के आसपास से आता; यह धूप व हवा में क्योर होता और बीड़ी बनाने वालों को बिकता। चबाने व सुगंधित तंबाकू तमिलनाडु, बिहार (मोतिहारी–चंपारण पट्टी) और पश्चिम बंगाल (कूचबिहार, दिनहाटा) में उगता। हुक़्क़ा तंबाकू उत्तर की फ़सल है; सिगार-लपेट, चेरूट व "लंका" तंबाकू तमिलनाडु (डिंडीगुल, वेदसंदूर) और गोदावरी डेल्टा से। कुल मिलाकर सबसे ज़्यादा तंबाकू आंध्र प्रदेश उगाता है, फिर कर्नाटक व गुजरात।
क़िस्म चाहे जो हो, फ़सल एक ही तर्क पर चलती है: मज़बूत नर्सरी तैयार करो, अच्छी-निकासी मेड़दार ज़मीन पर रोपो, और फिर पौधे को इस तरह संभालो कि वह बाज़ार की माँग वाली ख़ास पत्ती बनाए। टॉपिंग व सकर निकालना बढ़वार को पत्तियों में मोड़ते और उनमें शरीर व निकोटीन भरते हैं। पोषण अंतिम उपयोग के हिसाब से तय होता — FCV चमकीली, आसानी से जलने वाली पत्ती के लिए मामूली, क्लोराइड-रहित खुराक जल्दी लेता, जबकि बीड़ी व चबाने वाला तंबाकू वज़न व शरीर के लिए कहीं ज़्यादा नाइट्रोजन पर उगता है। कटाई पत्ती के पकाव से तय होती, और FCV के लिए क्योरिंग बार्न खेत जितना ही अहम है: ख़राब संभाली क्योरिंग अच्छी फ़सल को घटिया पत्ती बना देती। यह पेज फ़सल को नर्सरी से नीलामी तक ले चलता है।
फसल की समयरेखा, बुवाई से कटाई तक
पूरे सीज़न की एक झलक — हर अवस्था की पूरी जानकारी के लिए नीचे संबंधित सेक्शन पर जाएँ।
- दिन −50 से −45 (नर्सरी)
नर्सरी बुवाई
धूल जैसा बारीक बीज रेत या राख में मिलाकर उठी, अच्छी-निकासी नर्सरी क्यारियों पर पतला बोएँ — लगभग 100 वर्ग मीटर नर्सरी एक हेक्टेयर भर की पौध तैयार करती है। महीन फुहारे से पानी दें, हल्की छाया करें, और आर्द्र-गलन व झींगुर से बचाएँ।
- दिन −20 से −7
नर्सरी सख़्त करना
आख़िरी दो-तीन हफ़्तों में पानी व छाया घटाएँ, और पौध के ऊपरी सिरे एक-दो बार कतरें, ताकि खेत में जाने वाला पौधा पतला-लंबा नहीं बल्कि मोटा, पेंसिल-मोटा और लगभग 15 सेमी ऊँचा हो।
- दिन 0
रोपाई
सख़्त की गई 6–7 हफ़्ते की पौध शाम को मेड़ों पर प्रति थान एक रोपें — FCV 100 × 55 सेमी, बीड़ी लगभग 90 × 60 सेमी — और पानी दें। बेसल खाद अभी दें। एक हफ़्ते में ख़ाली जगह भरें।
- दिन 10–25
जमाव व तेज़ बढ़वार
फ़सल जड़ पकड़कर तेज़ी से बढ़ती है। हल्की मिट्टी पर हल्की बार-बार सिंचाई; बारानी काली-मिट्टी फ़सल जमा नमी पर जीती है। अंतर-जुताई करें और मेड़ पर मिट्टी चढ़ाएँ।
- दिन 25–35
नाइट्रोजन टॉप-ड्रेसिंग
बची नाइट्रोजन रोपाई के लगभग 30 दिन बाद तक और उससे देर नहीं दें — पूरी नाइट्रोजन जल्दी जानी चाहिए ताकि पत्ती पके और चमकीले ग्रेड में क्योर हो।
- दिन 45–60
टॉपिंग व सकर निकालना
जब लगभग आधे पौधों में फूल-कलियाँ दिखें, ऊपरी फूल-सिर एक तय पत्ती-संख्या तक तोड़ दें, फिर हर 7–10 दिन पर बग़ली सकर हाथ से या सकर-रोधी रसायन से हटाएँ। टॉपिंग ही पत्ती में शरीर व निकोटीन भरती है।
- दिन 65–75
पत्ती का पकना
निचली पत्तियाँ पहले पीली व मोटी होती हैं। हल्की मिट्टी पर अभी नियंत्रित सुखाई पत्ती को क्योरिंग के लिए पकाती है; इस समय ज़्यादा पानी पतली, फीकी, ख़राब जलने वाली पत्ती देता है।
- दिन 70–130
प्राइमिंग / कटाई व क्योरिंग
FCV: हर पौधे से नीचे से ऊपर 2–3 पकी पत्तियाँ 5–7 दौरों में 6–8 हफ़्तों में तोड़ें, हर बैच को बार्न में लगभग एक हफ़्ते फ़्लू-क्योर करें। बीड़ी व देसी क़िस्में: पकने पर पूरा पौधा काटें और रैक या ज़मीन पर क्योर करें।
उपयुक्त राज्य
जिन राज्यों में यह फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, वे नीचे हाइलाइट हैं। आपके खेत के लिए अंतिम सलाह हमेशा आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही देगा।
- जम्मू और कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- पंजाब
- उत्तराखंड
- हरियाणा
- दिल्ली
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- बिहार
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
- सिक्किम
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
- नागालैंड
- मणिपुर
- मिज़ोरम
- त्रिपुरा
- गुजरात
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- महाराष्ट्र
- ओडिशा
- गोवा
- तेलंगाना
- आंध्र प्रदेश
- कर्नाटक
- केरल
- तमिलनाडु
- पुदुचेरी
- लद्दाख
- चंडीगढ़
यहाँ उगाई जाती है
जलवायु की ज़रूरतें
FCV के लिए आख़िरी महीने का मौसम — पत्ती का पकना व तोड़ना — पूरे बाक़ी सीज़न जितना ही मायने रखता है। सूखा, चमकीला, गर्म-दिन/ठंडी-रात दौर पत्ती को एकसमान पकाता और बार्न को अपना काम करने देता है; उस दौर में बेमौसम बारिश फ़सल को कई ग्रेड नीचे खींच सकती है, चाहे पहले कुछ भी किया गया हो।
आदर्श तापमान
20–30°C बढ़ती फ़सल के लिए ठीक है; पत्ती पकते समय गर्म धूप वाले दिन व ठंडी रातें चमकीली, अच्छी बनावट वाली FCV पत्ती देती हैं, जबकि गर्मी की लहर पतली, काग़ज़ जैसी पत्ती बनाती और लगातार बादल गहरी, मोटी पत्ती देते हैं। पाला फ़सल को मार देता है
वर्षा
बढ़वार के दौरान अच्छी तरह बँटी 500–700 मिमी आदर्श है। काली मिट्टी पर FCV लगभग पूरी तरह जमा मानसून नमी पर उगता है; पत्ती पकते व तोड़ते समय तेज़ बारिश गुणवत्ता बिगाड़ती, क्योरिंग में बार्न-सड़न करती, और ब्लैक शैंक व पत्ती-धब्बे फैलाती है
नमी
मध्यम नमी फ़सल के लिए ठीक है; लंबे नम, बादल भरे दौर मेंढक-आँख पत्ती-धब्बा, भूरा धब्बा व फफूँद को बढ़ावा देते, और किसी भी अवस्था पर गीला छत्र ब्लैक शैंक को खिलाता है
धूप
बढ़वार व पकने के दौरान पूरी धूप पत्ती में शरीर और क्योरिंग के लिए ज़रूरी शर्करा बनाती है; छायादार या अति-घनी फ़सल पतली, घटिया पत्ती बनाती और नमी रोककर रोग को बढ़ावा देती है
मिट्टी की ज़रूरतें
मिट्टी का चुनाव असल में क़िस्म-और-बाज़ार का चुनाव है: चमकीली FCV पत्ती के लिए हल्की, कम-उर्वर, अम्लीय, तेज़ निकासी वाली मिट्टी; भारी शरीर वाली बीड़ी या चबाने की पत्ती के लिए भारी, ज़्यादा उर्वर, अच्छी-निकासी काली या जलोढ़ मिट्टी। भरपूर काली मिट्टी पर FCV, या कमज़ोर रेत पर बीड़ी उगाने की कोशिश फ़सल से लड़ना है।
उपयुक्त मिट्टी
FCV को हल्की, भुरभुरी, अच्छी-निकासी बलुई दोमट या लाल दोमट चाहिए — जिस पत्ती गुणवत्ता के लिए यह उगाया जाता वह भारी मिट्टी पर नहीं बन सकती। बीड़ी, चबाने व देसी तंबाकू भारी जलोढ़ व अच्छी-निकासी काली (वर्टिसोल) मिट्टी पर उगते, जो बारानी फ़सल के लिए ज़रूरी नमी रखती और उन क़िस्मों वाला शरीर देती
pH स्तर
FCV pH 5.0–6.5 (हल्की अम्लीय) पर सबसे अच्छा; बीड़ी व काली-मिट्टी तंबाकू लगभग उदासीन से हल्की क्षारीय मिट्टी सहते। ऊँचे pH या चूना-भरपूर मिट्टी FCV को मोटी, गहरी पत्ती देती है
जल निकासी
हर क़िस्म के लिए मुक्त निकासी ज़रूरी है। तंबाकू थोड़ी देर भी जल-जमाव नहीं सहता, और गीला, ख़राब-निकासी हिस्सा ठीक वहीं है जहाँ ब्लैक शैंक, पिथियम व कॉलर-सड़न जमते और फैलते हैं — मेड़ बनाना व खुली खेत-नालियाँ मानक हैं
जैविक तत्व
FCV जानबूझकर कम-से-मध्यम उर्वरता व कार्बनिक पदार्थ वाली मिट्टी पर उगाया जाता, क्योंकि भरपूर मिट्टी या ताज़ी खाद अति-मोटी, गहरी, घटिया पत्ती देती है। बीड़ी व चबाने वाला तंबाकू रोपाई से पहले मिलाई गोबर खाद व हरी खाद का अच्छा जवाब देता है
खेत की तैयारी
क्षेत्र चाहे जो हो, चार कदम वही रहते हैं — बस समय बुवाई के अनुसार बदलता है।
- 1
पहले उठी, साफ़ नर्सरी तैयार करें
रोपाई से छह-सात हफ़्ते पहले, साफ़ पानी के पास ताज़ी या सोलराइज़ की मिट्टी पर उठी नर्सरी क्यारियाँ (लगभग 100 वर्ग मीटर प्रति हेक्टेयर खेत) बनाएँ। महीन, अच्छी सड़ी कम्पोस्ट मिलाएँ, नन्हे बीज के लिए बहुत महीन भुरभुरे तल तक समतल करें, और नर्सरी कभी उस मिट्टी पर न बनाएँ जिस पर पिछले साल तंबाकू या मिर्च उगी हो।
- 2
मुख्य खेत को महीन, कसे तल तक जोतें
दो-तीन जुताई, हैरो व पाटा भुरभुरा बीज-तल देते हैं जो रोपाई को चाहिए। काली मिट्टी पर, गहरा काम तब पूरा करें जब मिट्टी में अब भी नमी हो।
- 3
खेत में मेड़ बनाएँ व नालियाँ खोलें
तय कतार दूरी पर मेड़ व नालियाँ बनाएँ और गहरी खेत-नालियाँ खोलें, ताकि पौधा हवादार मेड़ पर बैठे और पानी कभी खड़ा न रहे — ब्लैक शैंक के ख़िलाफ़ सबसे अहम क़दम।
- 4
कार्बनिक पदार्थ सिर्फ़ बीड़ी / चबाने की ज़मीन पर दें
बीड़ी, चबाने व हुक़्क़ा तंबाकू के लिए मेड़ बनाने से पहले गोबर खाद या हरी खाद मिलाएँ। FCV खेत में खाद न दें — यह पत्ती को मोटा व गहरा करती और ग्रेड घटाती है।
बीज की जानकारी
मुख्य किस्मों की तुलना — अवधि, उपज, रोग-प्रतिरोध या आप किस मक़सद से उगा रहे हैं, इसके आधार पर चुनें।
| किस्म | अवधि | उपज | रोग-प्रतिरोध | सर्वश्रेष्ठ राज्य | किसके लिए उपयुक्त |
|---|---|---|---|---|---|
आंध्र प्रदेश की हल्की व काली मिट्टी के लिए पुरानी FCV किस्म, मध्यम अवधि, अच्छी उपज व स्वीकार्य चमकीली-पत्ती गुणवत्ता के साथ; सालों तक उत्तरी हल्की मिट्टी का मुख्य आधार। | रोपाई के 110–120 दिन बाद | ऊँची | मध्यम; ब्लैक-शैंक फ़सल-चक्र पर उगाएँ | आंध्र प्रदेश | उत्तरी हल्की व काली मिट्टी पर FCV |
आंध्र व कर्नाटक दोनों पट्टियों में उगाई जाने वाली चौड़ी-अनुकूल CTRI FCV किस्म, स्थिर उपज और सही क्योरिंग में अच्छे ग्रेड-आउट के लिए क़ीमती। | रोपाई के 110–120 दिन बाद | ऊँची | मध्यम | आंध्र प्रदेश व कर्नाटक | FCV, चौड़ी अनुकूलता |
दक्षिणी हल्की मिट्टी और कर्नाटक पट्टी के लिए CTRI FCV किस्म, मध्यम अवधि, अच्छी क्योरिंग में चमकीली, पतली, अच्छी जलने वाली पत्ती देती। | रोपाई के 110–115 दिन बाद | मध्यम–ऊँची | मध्यम | कर्नाटक | हल्की मिट्टी पर FCV, चमकीली-पत्ती ग्रेड |
कर्नाटक हल्की मिट्टी के लिए सुझाई CTRI FCV किस्म, उपज व गुणवत्ता के लिए बनी, क्षेत्र के आम पत्ती-रोगों के प्रति ठीक-ठाक सहनशीलता के साथ। | रोपाई के 110–120 दिन बाद | ऊँची | मध्यम; पत्ती-धब्बों को कुछ सहनशीलता | कर्नाटक | FCV, मैसूर हल्की-मिट्टी पट्टी |
कर्नाटक हल्की मिट्टी के लिए CTRI की FCV हाइब्रिड, ऊँची उपज के साथ अच्छी शुरुआती ताक़त व चमकीली-पत्ती गुणवत्ता; जहाँ हाइब्रिड उगाए जाते वहाँ आम चुनाव। | रोपाई के 110–120 दिन बाद | बहुत ऊँची | मध्यम | कर्नाटक | FCV, हाइब्रिड उपज चाहने वाले किसान |
आंध्र काली मिट्टी (दक्षिणी व उत्तरी काली मिट्टी) के लिए क्लासिक FCV किस्म, भारी-शरीर वाली, मज़बूत फिलर-से-चमकीली पत्ती देती; जहाँ काली-मिट्टी फ़सल जमा नमी पर बारानी हो वहाँ उगाई जाती। | रोपाई के 115–125 दिन बाद | ऊँची | मध्यम | आंध्र प्रदेश | काली मिट्टी पर FCV, बारानी |
आंध्र उत्तरी काली मिट्टी के लिए FCV किस्म, मध्यम-से-देर, बारानी काली-मिट्टी व्यवस्था में उपज व शरीर के लिए क़ीमती। | रोपाई के 115–125 दिन बाद | ऊँची | मध्यम | आंध्र प्रदेश | उत्तरी काली मिट्टी पर FCV |
आणंद कार्यक्रम की गुजरात बीड़ी-तंबाकू किस्म, खेड़ा–आणंद पट्टी की भारी जलोढ़ मिट्टी पर भारी-शरीर, सुगंधित धूप-क्योर्ड पत्ती के लिए उगाई जाती। | रोपाई के 120–140 दिन बाद | ऊँची | मध्यम | गुजरात | बीड़ी तंबाकू, चरोतर पट्टी |
गुजरात व निपानी इलाक़ों की व्यापक रूप से उगाई जाने वाली बीड़ी-तंबाकू किस्म, बीड़ी लपेटने के लिए मज़बूत, पूर्ण-शरीर वाली पत्ती देती; भारी नाइट्रोजन लेती है। | रोपाई के 120–140 दिन बाद | ऊँची | मध्यम | गुजरात व कर्नाटक (निपानी) | बीड़ी तंबाकू |
उत्तरी व पूर्वी मैदानों की देसी (Nicotiana rustica) तंबाकू किस्म, हुक़्क़ा व चबाने के तंबाकू के लिए उगाई जाती — एक मज़बूत, कठोर, ऊँची-निकोटीन पत्ती। | रोपाई के लगभग 100–120 दिन बाद | मज़बूत, ऊँची-निकोटीन पत्ती की क्योर्ड पत्ती लगभग 1,500–2,200 किग्रा/हे. | मध्यम; FCV प्रकारों से ज़्यादा कठोर | Uttar Pradesh | — |
- बीज दर
- FCV / ज़्यादातर क़िस्में: लगभग 2.5–3 ग्राम बीज प्रति वर्ग मीटर नर्सरी क्यारी, और लगभग 100 वर्ग मीटर नर्सरी प्रति हेक्टेयर खेत — कुल मिलाकर सिर्फ़ कुछ सौ ग्राम प्रति हेक्टेयर। बीज धूल जैसा बारीक है और कभी खेत में सीधे नहीं बोया जाता।
- प्रमाणित बीज
- अपने तंबाकू प्रकार व मिट्टी वर्ग के लिए अधिसूचित किस्म का प्रमाणित बीज इस्तेमाल करें — FCV के लिए, आपके बोर्ड क्षेत्र (कर्नाटक हल्की मिट्टी, उत्तरी/दक्षिणी हल्की या काली मिट्टी) के लिए सुझाई CTRI-जारी किस्में; बीड़ी के लिए, आणंद / निपानी किस्में। FCV बीज व पौध किसानों तक तंबाकू बोर्ड, CTRI व राज्य चैनलों से पहुँचते हैं। तंबाकू या मिर्च उगे खेत से पौध या नर्सरी मिट्टी कभी न ले जाएँ, जो ब्लैक शैंक फैलाती है।
- दूरी
- FCV: 100 × 55 सेमी (लगभग 18,000 पौधे/हे.)। बीड़ी: 90 × 60 सेमी। चबाने / हुक़्क़ा क़िस्में: 75–90 × 60 सेमी। पत्ती का आकार व शरीर क़ाबू रखने को भरपूर मिट्टी पर चौड़ी दूरी, कमज़ोर मिट्टी पर पास-पास।
- बीज उपचार
- नर्सरी सोलराइज़ की या ताज़ी मिट्टी पर तैयार करें और आर्द्र-गलन व पिथियम के विरुद्ध सुझाए फफूँदनाशी से ड्रेंच करें। पौध की जड़ें सुझाए फफूँदनाशी (ब्लैक शैंक के लिए) में डुबोएँ और, जहाँ पत्ती-मरोड़ या मोज़ेक समस्या हो, नर्सरी में माहू व सफ़ेद मक्खी वाहकों को क़ाबू करें। मौजूदा नर्सरी उपचार CTRI या अपने KVK से पुष्ट करें।
बुवाई गाइड
रोपाई के समय सबसे अहम दो फ़ैसले हैं रोपाई की तारीख़ (इस तरह तय करें कि पकना सूखे मौसम में पड़े) और पौध की गुणवत्ता (साफ़ नर्सरी की मोटी, सख़्त, पेंसिल-मोटी पौध तेज़ व एकसमान जमती है; अधिक-सिंचित या संक्रमित नर्सरी की पतली-लंबी पौध धीमी, ख़ाली-ख़ाली, रोग-प्रवण फ़सल देती है)।
- सबसे अच्छा समय
- इलाक़े के अनुसार नर्सरी जुलाई से सितंबर में बोएँ, और सख़्त की गई 6–7 हफ़्ते की पौध लगभग मध्य सितंबर से नवंबर तक रोपें, इस तरह कि पत्ती का पकना सूखे, चमकीले मौसम में पड़े। कर्नाटक हल्की-मिट्टी FCV आंध्र काली-मिट्टी फ़सल से पहले रोपा जाता है।
- क़तार की दूरी
- FCV के लिए 100 सेमी; बीड़ी के लिए लगभग 90 सेमी
- पौधे की दूरी
- FCV के लिए 55 सेमी; बीड़ी के लिए लगभग 60 सेमी
- बुवाई की गहराई
- पौध को उतनी ही गहराई पर रोपें जितनी वह नर्सरी में खड़ी थी, मेड़ पर जड़ों के आसपास मिट्टी दबाएँ; बढ़ने वाला बिंदु न दबाएँ
- तरीक़ा
- नर्सरी में तैयार करें, सख़्त करें, और शाम को मेड़ों पर प्रति थान एक पौध रोपें, फिर पानी दें। एक हफ़्ते में ख़ाली जगह भरें। सीधी बुवाई कभी नहीं होती — बीज बहुत बारीक है और फ़सल को शुरुआती बढ़त चाहिए।
खाद कार्यक्रम
बुवाई के समय एक साथ पूरी खाद डालने से बँटी हुई मात्रा बेहतर है — खासकर नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या रिसकर बह जाता है।
- 1
बेसल (रोपाई पर)
दिन 0
FCV: लगभग आधी नाइट्रोजन पूरे फॉस्फोरस व सल्फेट ऑफ़ पोटाश के साथ (हल्की-मिट्टी खुराक लगभग 60:60:90 किग्रा N:P2O5:K2O/हे.) — पोटाश सल्फेट के रूप में, कभी म्यूरेट नहीं, क्योंकि क्लोराइड पत्ती की जलन व रंग बिगाड़ता है। बीड़ी व चबाने वाला तंबाकू: गोबर खाद और कहीं ज़्यादा नाइट्रोजन खुराक (अक्सर 150–250 किग्रा N/हे.), भाग बेसल।
- 2
नाइट्रोजन टॉप-ड्रेसिंग
दिन 25–30
बची नाइट्रोजन रोपाई के लगभग 30 दिन बाद तक और उससे देर नहीं दें। पूरी नाइट्रोजन जल्दी ग्रहण होनी चाहिए ताकि पत्ती परिपक्व व पके; इस बिंदु के बाद दी नाइट्रोजन गहरी, मोटी, खुरदरी, घटिया पत्ती देती है जो ख़राब क्योर होती।
- 3
मैग्नीशियम / सूक्ष्म-पोषक सुधार
ज़रूरत अनुसार
सल्फेट-ऑफ़-पोटाश-मैग्नीशिया स्रोत या पर्ण मैग्नीशियम हल्की अम्लीय FCV मिट्टियों पर आम "सैंड-ड्राउन" (शिराओं के बीच पीलापन) ठीक करता है; बोरॉन व ज़िंक मिट्टी-जाँच के आधार पर।
- 4
देर से खिलाने से बचें
दिन 35 के बाद
फ़सल में देर से नाइट्रोजन या खाद न डालें। यह पकने में देरी करती, पत्ती गहरी करती, अवांछित नाइट्रोजन यौगिक बढ़ाती, और सीधे नीलामी ग्रेड व दाम घटाती है।
सिंचाई कार्यक्रम
1. जमाव
दिन 0–10
हल्की मिट्टी पर पौध जमने तक हर 4–7 दिन पर हल्की सिंचाई। बारानी काली-मिट्टी फ़सल जमा नमी व रोपाई की सिंचाई पर निर्भर करती है।
2. टॉपिंग तक तेज़ बढ़वार
दिन 15–50
सिंचित हल्की मिट्टी पर, टॉपिंग तक तेज़ पत्ती बढ़वार बनाए रखने को 8–12 दिन के अंतराल पर पानी दें — यह फ़सल का मुख्य जल-माँग दौर है।
3. पकना (नियंत्रित सुखाई)
दिन 60 से आगे
निचली पत्तियाँ पकते ही पानी घटा दें। अभी हल्का नमी-तनाव पत्ती को गाढ़ा करता और चमकीली क्योरिंग के लिए तैयार करता है; फ़सल गीली रखने से पतली, फीकी, ख़राब जलने वाली पत्ती मिलती है।
महत्वपूर्ण अवस्थाएँ
- रोपाई का जमाव
- टॉपिंग तक तेज़ पत्ती बढ़वार
- प्राइमिंग से पहले पत्ती का पकना (पानी नहीं, नियंत्रित सुखाई चाहिए)
पानी बचाने के तरीक़े
- काली मिट्टी पर FCV लगभग पूरी तरह जमा मानसून नमी पर उगता है — हुनर सिंचाई जोड़ने में नहीं, समय पर अंतर-जुताई व मिट्टी-मल्च से नमी बचाने में है।
- हल्की मिट्टी पर, टॉपिंग तक बार-बार हल्की सिंचाई और फिर सोची-समझी सुखाई फ़सल को अंत तक गीला रखने से कम पानी लेती और बेहतर ग्रेड देती है।
- मेड़-नाली रोपाई एक हल्की सिंचाई को नाली में तेज़ी से बहने व निकलने देती है, जड़-क्षेत्र भिगोकर पर तने को जल-जमाव में डाले बिना।
खरपतवार प्रबंधन
आम खरपतवार
जैविक नियंत्रण
- पहले छह हफ़्तों में दो-तीन अंतर-जुताई व हाथ निराई, अंत में मेड़ पर मिट्टी चढ़ाकर, फ़सल को उसके अहम दौर में साफ़ रखती है।
- ओरोबंकी के लिए: ग़ैर-मेज़बान (अनाज, ज्वार) की ओर फ़सल-चक्र, ऐसी फंदा फ़सल उगाएँ जो ओरोबंकी को तंबाकू मेज़बान के बिना अँकुरा कर मार दे, और हर कलगी उसके धूल जैसे बीज बनने से पहले हाथ से उखाड़ें — एक पौधा खेत को सालों तक बीज देता है।
- खेत मेड़ें व नर्सरी के आसपास खरपतवार-मुक्त रखें ताकि वे फ़सल को बीज न दें।
रासायनिक नियंत्रण
- CTRI पैकेज के अनुसार रोपाई-पूर्व या पूर्व-अंकुरण खरपतवारनाशी (जैसे ऑक्सीफ़्लोरफ़ेन या पेंडिमेथालिन) शुरुआती खरपतवार लहर रोकता है; फ़सल फिर अंतर-जुताई से साफ़ रखी जाती है।
- ओरोबंकी सामान्य निराई से क़ाबू नहीं होती — इसे तंबाकू से लंबे फ़सल-चक्र, जाल या फंदा फ़सल, बीज बनने से पहले कलगियाँ हाथ से उखाड़ने, और जहाँ सुझाया हो वहाँ कम-मात्रा दिशात्मक खरपतवारनाशी कार्यक्रम से संभाला जाता है।
- खरपतवारनाशी कभी पत्ती पर न उड़ने दें — तंबाकू पत्ती ही उत्पाद है और अवशेष व चोट के प्रति बहुत संवेदनशील।
पोषक तत्व की कमी की पहचान
हर पोषक तत्व की कमी पौधे पर असल में कैसी दिखती है — ताकि ग़लत स्प्रे करने से पहले आप कमी और रोग में फ़र्क़ कर सकें।
Nitrogen
दिखने वाला लक्षण
फीकी, पीली-हरी निचली पत्तियाँ, पतले पौधे और छोटी पत्तियाँ — पर FCV में हल्की देर की नाइट्रोजन कमी जानबूझकर सही मानी जाती, क्योंकि यह पत्ती पकने में मदद करती; बचने वाली ग़लती अधिकता है, कमी नहीं।
Potassium
दिखने वाला लक्षण
पुरानी पत्तियों के किनारों व नोकों पर झुलसन व भूरापन, चितकबरा रूप, और — FCV के लिए अहम — ऐसी पत्ती जो जलने पर आँच नहीं रोकती। यहाँ पोटाश (सल्फेट के रूप में) सिर्फ़ उपज नहीं, गुणवत्ता का पोषक है।
Magnesium
दिखने वाला लक्षण
"सैंड ड्राउन" — निचली व बीच की पत्तियों में शिराओं के बीच पीलापन फिर सफ़ेदी जबकि शिराएँ हरी रहतीं, हल्की, अम्लीय, बलुई FCV मिट्टियों पर आम, गीले दौर में सबसे बुरा।
Phosphorus
दिखने वाला लक्षण
बौने, गहरे नीले-हरे पौधे संकरी पत्तियों व देर पकने के साथ; N, K व Mg समस्याओं से कम आम पर फ़सल की शुरुआत में ठंडी, अम्लीय मिट्टी पर दिखता है।
Boron
दिखने वाला लक्षण
बढ़ने वाले बिंदु व सबसे ऊपरी नई पत्तियों की मौत ("टॉप सिकनेस"), भंगुर विकृत नई बढ़वार, और खोखला या कॉर्की तना — सूखे फिर गीले दौर के बाद हल्की बलुई मिट्टियों पर दिखता है।
ध्यान देने योग्य रोग
लक्षण, संभावित कारण और असल में क्या इलाज करता है — सिर्फ़ किसी स्प्रे का नाम नहीं।
ब्लैक शैंक (Phytophthora)
- लक्षण
- पूरे पौधे का अचानक मुरझाना, अक्सर पहले एक तरफ़; मिट्टी-रेखा पर व उसके ठीक ऊपर तने के आधार को घेरता मुलायम भूरा-से-काला सड़न; और मरे तने को लंबाई में चीरने पर गूदा गहरी, सूखी, तश्तरी जैसी पर्तों के ढेर में। मुरझान व मौत खेत के नीचे, गीले हिस्सों में धब्बों में फैलती, सिंचाई या बारिश के बाद सबसे तेज़।
- कारण
- मृदा-जनित जल-फफूँद Phytophthora nicotianae, जो मिट्टी में सालों बचती, गर्म गीली मिट्टी, जल-जमाव, भारी या दबी ज़मीन, और तंबाकू या मिर्च, टमाटर व बैंगन के साथ छोटे फ़सल-चक्र से अनुकूल।
- इलाज
- प्रभावित पौधे का कोई इलाज नहीं — उसे आसपास की मिट्टी सहित उखाड़कर खेत से बाहर ले जाएँ। पास के पौधों के आधार व उखाड़ी जगह को सुझाए ऊमाइसीट फफूँदनाशी (मेटालैक्सिल-M + मैंकोज़ेब या फ़ोसेटिल-Al) से ड्रेंच करें जहाँ तंबाकू के लिए पंजीकृत हो, और तेज़ बारिश के बाद दोहराएँ।
- बचाव
- ब्लैक-शैंक-प्रतिरोधी किस्म उगाएँ, 2–3 साल ग़ैर-मेज़बान अनाज या ज्वार से फ़सल-चक्र लें (उस चक्र से मिर्च/टमाटर/बैंगन बाहर), तेज़ खेत-निकासी वाली मेड़ों पर रोपें ताकि पानी कभी खड़ा न रहे, और पौध साफ़, अच्छी-निकासी, रोग-मुक्त नर्सरी मिट्टी पर तैयार करें।
तंबाकू मोज़ेक वायरस (TMV) व पत्ती-मरोड़
- लक्षण
- TMV: नई पत्तियों पर हल्की-गहरी हरी चितकबरी व धब्बेदारी, सिकुड़न, संकरापन व विकृति, और बौने पौधे — ऐसी पत्ती जो ख़राब ग्रेड व क्योर होती। तंबाकू पत्ती-मरोड़ (सफ़ेद मक्खी से आने वाला वायरस): ऊपर या नीचे मुड़ना, मोटी शिराएँ, नीचे की सतह पर पत्ती जैसी वृद्धि, और भारी बौनापन।
- कारण
- TMV बेहद स्थिर है और रस से फैलता है — हाथों, औज़ारों, कपड़ों और टॉपिंग व प्राइमिंग के दौरान पत्ती-से-पत्ती संपर्क से — और फ़सल अवशेष व तंबाकू उत्पादों में बचता है। पत्ती-मरोड़ व मोज़ेक जटिल नर्सरी से ही माहू व सफ़ेद मक्खी से आते।
- इलाज
- कोई इलाज नहीं। संक्रमित पौधे जल्दी उखाड़ें। TMV के लिए, काम रोकें, हाथ व औज़ार धोएँ, और फ़सल पर काम करते समय तंबाकू का सेवन न करें। वाहक-जनित वायरस के लिए, माहू व सफ़ेद मक्खी क़ाबू करें।
- बचाव
- नर्सरी में संक्रमित पौध उखाड़ें, टॉपिंग/प्राइमिंग से पहले व दौरान हाथ धोएँ व औज़ार मलाई-रहित दूध या कीटाणुनाशक में डुबोएँ, तंबाकू उत्पाद फ़सल से दूर रखें, माहू व सफ़ेद मक्खी क़ाबू करें, और खेत के आसपास ख़ुद उगे तंबाकू व खरपतवार मेज़बान हटाएँ।
मेंढक-आँख पत्ती-धब्बा व भूरा धब्बा
- लक्षण
- मेंढक-आँख (Cercospora): पीले-धूसर सफ़ेद केंद्र व गहरे भूरे छल्ले वाले छोटे गोल धब्बे, मुख्यतः निचली, पुरानी व पकती पत्तियों पर। भूरा धब्बा (Alternaria): बड़े भूरे निशाने जैसे धब्बे संकेंद्रित छल्लों के साथ, अक्सर पत्ती की नोकों व किनारों पर, पकी व टॉप की गई पौधों पर ज़्यादा। दोनों क्योर्ड पत्ती को छलनी कर उसका ग्रेड घटाते।
- कारण
- फफूँद Cercospora nicotianae व Alternaria alternata, नम, बादल भरे मौसम, ओस, घनी फ़सल और पकी या क्षीण, पोषक-कम फ़सल से अनुकूल; दोनों बीज- व अवशेष-जनित।
- इलाज
- पहले धब्बों से ही सुझाया फफूँदनाशी (मैंकोज़ेब या कॉपर फ़ॉर्मूलेशन) छिड़कें, ख़ासकर फ़सल पकते समय व नम मौसम के बाद, और पकी पत्तियाँ फ़ौरन प्राइम करें ताकि धब्बेदार पत्ती पौधे से हट जाए।
- बचाव
- साफ़ बीज व साफ़ नर्सरी इस्तेमाल करें, दूरी खुली रखें, पोषण संतुलित करें (पोटैशियम-कम फ़सल ज़्यादा धब्बे लेती), निचली क्षीण पत्तियाँ हटाएँ, और कटाई के बाद अवशेष जोत दें।
जीवाणु (ग्रैनविल) उकठा व काली जड़-सड़न
- लक्षण
- ग्रैनविल उकठा: गर्म मौसम में तेज़ी से एक तरफ़ा फिर पूरे पौधे का मुरझाना, तने पर भूरी धारी, और — तना काटकर पानी में खड़ा करने पर — दूधिया जीवाणु रिसाव। काली जड़-सड़न: बौने, कमज़ोर पौधे काली, सड़ी जड़ियों के साथ, ठंडी, गीली, लगभग उदासीन से क्षारीय मिट्टियों पर सबसे बुरी।
- कारण
- ग्रैनविल उकठा मृदा जीवाणु Ralstonia solanacearum है; काली जड़-सड़न फफूँद Thielaviopsis basicola। दोनों तंबाकू व अन्य सोलेनेसी फ़सलों के छोटे फ़सल-चक्रों और ख़राब-निकासी ज़मीन में बढ़ते।
- इलाज
- मौसम में कोई कारगर इलाज नहीं। मुरझाए पौधे उनकी मिट्टी सहित उखाड़ें, संक्रमित हिस्से से मिट्टी व पानी ले जाने से बचें, और निकासी सुधारें।
- बचाव
- ग़ैर-मेज़बानों (अनाज, ज्वार, घास) से लंबा फ़सल-चक्र, जहाँ उपलब्ध हों वहाँ प्रतिरोधी या सहनशील किस्में, साफ़ नर्सरी मिट्टी, अच्छी निकासी, और काली जड़-सड़न के लिए मिट्टी में ज़्यादा चूना डालने से बचें।
ध्यान देने योग्य कीट
नुक़सान दिखने से पहले क्या देखें, और रसायन से पहले जैविक विकल्प क्या हैं।
तंबाकू इल्ली (Spodoptera litura)
- पहचान
- पीली-हरी से गहरी भूरी सूँडियाँ किनारों पर गहरे निशानों के साथ, शुरू में समूह में खातीं — नर्सरी पौध व नई पत्तियाँ छिलका छोड़कर कुरेदतीं — फिर बढ़ते ही बिखरकर बड़े फटे छेद बनातीं और पत्ती की मध्य-शिरा व कली में घुसतीं। पत्ती की नीचे सतह पर कुरेदे, काग़ज़ जैसे धब्बे और भूरे रोम से ढँके पीले अंडों के समूह देखें।
- नुक़सान
- नर्सरी से टॉपिंग तक तंबाकू का नंबर एक कीट। भारी हमला नर्सरी को रातों में साफ़ कर सकता और खेत फ़सल का पत्ती-क्षेत्र व ग्रेड तेज़ी से घटा सकता; मध्य-शिरा व कली की खुराई ऊपरी पत्तियाँ बिगाड़ देती, जो क़ीमती होती हैं।
- जैविक नियंत्रण
- नर्सरी अवस्था से नज़र रखें, अंडे-समूह व शुरुआती समूह-सूँडियाँ पत्ती सहित हाथ से चुनकर नष्ट करें, कार्रवाई का समय तय करने व नर को पकड़ने को फेरोमोन ट्रैप लगाएँ, बसेरों से पक्षियों को बुलाएँ, और छोटी सूँडियों के विरुद्ध Bt या न्यूक्लियोपॉलीहेड्रोवायरस (SlNPV) या नीम फ़ॉर्मूलेशन छिड़कें।
- रासायनिक नियंत्रण
- जब अंडे-समूह व शुरुआती सूँडियाँ स्थानीय सीमा पार करें तब छोटी सूँडियों पर शाम को लक्षित सुझाया कीटनाशी (जैसे इमामेक्टिन, क्लोरैंट्रानिलिप्रोल या नोवाल्यूरॉन प्रकार CTRI पैकेज अनुसार) ज़रूरत अनुसार। कार्य-विधियाँ बदलते रहें — स्पोडोप्टेरा जल्दी प्रतिरोध बना लेती है।
तंबाकू माहू (Myzus persicae)
- पहचान
- बढ़ने वाले बिंदु और ऊपरी नई पत्तियों की नीचे सतह पर छोटे हरे से गुलाबी मुलायम कीड़ों की घनी बस्तियाँ, नीचे चिपचिपा हनीड्यू व काली फफूँद के साथ, नर्सरी से ही।
- नुक़सान
- रस चूसना ऊपरी पत्तियाँ मोड़ता व बौना करता और हनीड्यू व फफूँद से गंदा कर ग्रेड घटाता है — पर बड़ा नुक़सान वायरस वाहक के रूप में है: माहू मोज़ेक, पत्ती-मरोड़ व शिरा-पट्टी वायरस नर्सरी व खेत में ले जाता है।
- जैविक नियंत्रण
- वायरस-संक्रमित पौधे उखाड़ें, गुबरैला, लेसविंग व सिर्फ़िड मक्खियाँ बचाएँ, नर्सरी में पीले चिपचिपे ट्रैप इस्तेमाल करें, और शुरुआती बस्तियों पर नीम या कीट-साबुन फ़ॉर्मूलेशन छिड़कें।
- रासायनिक नियंत्रण
- सुझाए प्रणालीगत या संपर्क माहूनाशी का ज़रूरत अनुसार छिड़काव, नर्सरी से ही शुरू करके ताकि वायरस ढोने वाले माहू रोपाई से पहले गिरा दिए जाएँ; एक ही समूह का बार-बार उपयोग टालें।
भूमि भृंग, झींगुर व कटुआ (नर्सरी व शुरुआती खेत)
- पहचान
- नर्सरी में व रोपाई के तुरंत बाद पौध को मिट्टी-रेखा पर सुरंग बनाकर काटने वाले बिलनी व खेत झींगुर; रात में नई रोपाई काटकर गिरा देने वाली धूसर कटुआ सूँडियाँ; और बाद में फूल व कोमल पत्तियाँ चबाने वाले भूमि / छाला भृंग (Mylabris)।
- नुक़सान
- नर्सरी और नई रोपी खेत में जगह-जगह ख़ाली जो भरने में समय लेते; छाला भृंग ऊपरी पत्तियाँ नुक़सान करते और संभालने में भी ख़तरा हैं।
- जैविक नियंत्रण
- झींगुर निकालने को नर्सरी थोड़ी देर पानी में डुबोएँ, नर्सरी के आसपास साफ़ व घास-रहित रखें, ख़ाली जगहों के आसपास रात में कटुआ हाथ से इकट्ठा करें, और सुबह छाला भृंग (दस्ताने पहनकर) हाथ से चुनें।
- रासायनिक नियंत्रण
- नर्सरी में सुझाया मिट्टी या चारा प्रयोग और रोपाई की ख़ाली जगहों के आसपास धब्बा-ड्रेंच जहाँ झींगुर या कटुआ नुक़सान सीमा पार करे; फूल पर छाला भृंग के लिए ज़रूरत अनुसार छिड़काव।
आम ग़लतियाँ जिनसे बचें
जो ग़लतियाँ किसानों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती हैं, खेत में जितनी बार दिखती हैं उसी क्रम में — हमेशा वैसे नहीं जैसा आप सोचें।
- 1
फ़सल में देर से नाइट्रोजन या खाद डालना
नुक़सान क्यों होता है
देर की नाइट्रोजन FCV की क्लासिक ग़लती है — यह पकने में देरी करती और गहरी, मोटी, खुरदरी पत्ती देती जिसमें ज़्यादा नाइट्रोजन यौगिक होते, जो घटिया ग्रेड व कम नीलामी दाम पर क्योर होती है। पूरी नाइट्रोजन रोपाई के लगभग 30 दिनों के अंदर जानी चाहिए।
- 2
FCV पर क्लोराइड खाद (MOP / सस्ते कॉम्प्लेक्स) इस्तेमाल करना
नुक़सान क्यों होता है
क्लोराइड पत्ती को न जलने वाला बना देता है — वह आँच नहीं रोकती — और उसका रंग फीका करता है, जो ठीक वही है जो नीलामी ख़रीदार ठुकराता है। FCV पोटाश सल्फेट ऑफ़ पोटाश होना चाहिए, और कॉम्प्लेक्स क्लोराइड-रहित।
- 3
गीले या ख़राब-निकासी खेत में रोपाई
नुक़सान क्यों होता है
थोड़ी देर का जल-जमाव भी ब्लैक शैंक, पिथियम व कॉलर-सड़न भड़काता है, जो फिर धब्बों में फैलते हैं। खेत में मेड़ बनाएँ, नालियाँ खोलें, और वहाँ कभी न रोपें जहाँ पानी खड़ा हो।
- 4
एक ही ज़मीन पर लगातार तंबाकू
नुक़सान क्यों होता है
छोटे फ़सल-चक्र ब्लैक शैंक, ग्रैनविल उकठा, जड़-गाँठ सूत्रकृमि व परजीवी खरपतवार ओरोबंकी को तब तक बढ़ाते हैं जब तक खेत बेकार न हो जाए। ग़ैर-मेज़बान अनाज या ज्वार से 2–3 साल का फ़सल-चक्र ज़रूरी है।
- 5
टॉपिंग व सकर निकालना छोड़ना या देर करना
नुक़सान क्यों होता है
फूलने व सकर बनने के लिए छोड़ने पर पौधा पतली, हल्की, कम-निकोटीन पत्ती व कम उपज बनाता है। सही पत्ती-संख्या तक समय पर टॉपिंग, और हर 7–10 दिन पर सकर निकालना ही शरीर, वज़न व दाम बनाता है।
- 6
कच्ची या ज़्यादा पकी पत्ती काटना
नुक़सान क्यों होता है
हरी, कच्ची पत्ती मैली व गहरी क्योर होती; ज़्यादा पकी पत्ती पतली क्योर होकर टूट जाती। हर सेट अपने पकाव पर प्राइम होना चाहिए — जो पीलापन, चिपचिपे एहसास व नीचे झुकाव से पता चलता — तय तारीख़ पर नहीं।
- 7
फ़्लू-क्योर में जल्दबाज़ी या ग़लत संभाल
नुक़सान क्यों होता है
बार्न तापमान बहुत तेज़ बढ़ाने से पत्ती "झुलस" जाती और हरा रंग जम जाता; बहुत धीमा व नम से स्पंजी, बार्न-सड़ी पत्ती मिलती। अच्छी खेत फ़सल एक हफ़्ते में बार्न में घटिया पत्ती बन सकती — क्योर अनुसूची खेत जितनी ही अहम है।
- 8
लाइसेंस / अधिकृत रकबे से ज़्यादा लगाना
नुक़सान क्यों होता है
FCV के लिए, तंबाकू बोर्ड-अधिकृत फ़सल आकार व पंजीकृत बार्न क्षमता से ज़्यादा उगाने पर पत्ती बिना बिके रह सकती और सबके लिए नीलामी दाम गिरा देती है। रकबा लाइसेंस के हिसाब से तय करें।
कटाई
FCV: हर सेट पकते ही अलग-अलग पत्तियाँ नीचे से ऊपर की ओर, 6 से 8 हफ़्तों में 5 से 7 दौरों में प्राइम (तोड़) करें। पत्ती तब पकी है जब वह पीली-हरी हो जाए, चिपचिपी लगे, झुक जाए, और मध्य-शिरा सफ़ेद पड़े। बीड़ी, चबाने व देसी तंबाकू: जब ज़्यादातर पत्तियाँ परिपक्व हों तब पूरा पौधा आधार के पास काटें, आमतौर रोपाई के 100–130 दिन बाद।
तैयार होने के संकेत
- FCV पत्ती: पीली-हरी रंगत, चिपचिपा एहसास, नीचे झुकाव और सफ़ेद पड़ती मध्य-शिरा
- पकी पत्ती की सतह पर गोंद के धब्बे या "तंबाकू के आँसू"
- निचली पत्तियाँ पहले पकतीं; पौधा नीचे से ऊपर की ओर पकता है
- पूरे-पौधे वाली क़िस्में: पत्तियाँ मोटी, नोक पर भंगुर, और पौधा एकसमान पीला-हरा
उपकरण
- FCV पत्ती प्राइम करने को हाथ; पूरे-पौधे वाली क़िस्मों को काटने को चाकू या छोटा हँसिया
- FCV के लिए फ़्लू, रैक व थर्मामीटर वाला क्योरिंग बार्न; धूप/हवा-क्योर्ड क़िस्मों के लिए खुले रैक, रस्सियाँ या सुखाने का फ़र्श
- पत्ती बार्न में चढ़ाने को सुतली व बाँधने की डंडियाँ या क्लिप; जहाँ इस्तेमाल हो वहाँ बल्क-क्योरिंग सिस्टम
- गठरी बाँधने से पहले क्योर्ड पत्ती को बोर्ड ग्रेड में छाँटने को ग्रेडिंग टेबल व रोशनी
अपेक्षित उपज
अच्छी संभली FCV फ़सल लगभग 1,800–2,500 किग्रा क्योर्ड पत्ती प्रति हेक्टेयर देती है (लगभग 7–10 क्विंटल/एकड़); आंध्र व कर्नाटक पट्टी के औसत 2,000 किग्रा/हे. के आसपास। बीड़ी तंबाकू लगभग 1,200–1,800 किग्रा/हे. क्योर्ड पत्ती, चबाने वाला तंबाकू 1,500–2,500 किग्रा/हे. देता है। प्रति किलो दाम ऊँचा है और ग्रेड से बहुत बदलता है, इसलिए पत्ती गुणवत्ता कच्चे वज़न से कहीं ज़्यादा मायने रखती है।
कटाई के बाद व भंडारण
भंडारण
क्योर्ड पत्ती को सही "केस" (नमी) पर लाना चाहिए — मोड़ने लायक़, न सूखी-भंगुर न नम — फिर ग्रेड करके गठरी बाँधनी चाहिए। गठरियाँ सूखे, अच्छी हवादार गोदाम में फ़र्श से ऊपर रखें, हर उस गंध (मिट्टी का तेल, कीटनाशी, प्याज़) से दूर जो पत्ती सोख लेगी, और सिगरेट भृंग व तंबाकू पतंगे से बचाएँ, जो रखी पत्ती बर्बाद कर सकते। FCV आमतौर लंबे रखने के बजाय कुछ हफ़्तों में नज़दीकी नीलामी में बिक जाता है।
पैकेजिंग
ग्रेड की पत्ती FCV के लिए बोर्ड / व्यापार विनिर्देश के अनुसार गठरी या पैक की जाती; बीड़ी व चबाने की पत्ती ख़रीदार की माँग के अनुसार बंडल या बोरी में। ग्रेड अलग रखें — मिली-जुली गठरी उसकी सबसे ख़राब पत्ती के ग्रेड पर उतार दी जाती है।
परिवहन
गठरी बँधी पत्ती सूखी व ढँकी ले जाएँ, बारिश और तेज़ गंध वाले माल के संपर्क से बचाकर। नम पत्ती रास्ते में गर्म होकर फफूँदती है; गीली पत्ती नीलामी फ़र्श पर ठुकरा दी जाती है।
भंडारण अवधि
ठीक से क्योर की, ग्रेड की व रखी पत्ती एक से दो साल टिकती है और असल में कुछ समय की प्राकृतिक पकाई से सुधरती है, पर सिर्फ़ तभी जब सूखी, अच्छे केस में, और सिगरेट भृंग व तंबाकू पतंगे से मुक्त रखी जाए। ख़राब केस वाली पत्ती कुछ ही हफ़्तों में फफूँदती या सूखकर चूर हो जाती है।
मंडी भाव
सरकार के अपने एगमार्कनेट डेटा से, आपके नज़दीक का आज का मंडी भाव — लाइव।
सरकारी एगमार्कनेट डेटा से रोज़ाना लाइव मंडी भाव।
data.gov.in (एगमार्कनेट) से सिंक होता है। भाव ₹ प्रति क्विंटल हैं।
मौसम
आपके चुने गए स्थान की मौजूदा स्थिति और 5-दिन का पूर्वानुमान, फसल की अवस्था के अनुसार एक सलाह के साथ।
मौजूदा स्थिति और 5-दिन के पूर्वानुमान के लिए अपना राज्य चुनें।
Open-Meteo से लाइव डेटा
मुनाफ़ा कैलकुलेटर
आपकी अपनी लागत, अपेक्षित उपज और बिक्री भाव — हमारी नहीं।
पैसा कहाँ जाता है
नीचे कैलकुलेटर की डिफ़ॉल्ट लागत के अनुसार प्रति एकड़ कुल लागत में हर मद का हिस्सा — वहाँ अपने आँकड़े बदलने पर यह तस्वीर पूरी तरह आप पर लागू नहीं रहेगी, पर क्रम शायद ही बदलता है।
- मज़दूरी41% (₹21,000)
- ज़मीन का किराया20% (₹10,000)
- मशीन13% (₹6,500)
- खाद12% (₹6,000)
- कीटनाशक और खरपतवारनाशक7% (₹3,500)
- सिंचाई5% (₹2,500)
- ब्याज2% (₹1,200)
- बीज1% (₹500)
आधिकारिक डाउनलोड
केवल सरकार और ICAR के दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ किसी आधिकारिक सर्वर पर है।
तंबाकू बोर्ड, भारत
FCV तंबाकू के लिए वैधानिक संस्था — किसान व बार्न पंजीकरण, अधिकृत फ़सल आकार, नीलामी अनुसूची व दैनिक औसत दाम।
ICAR-केंद्रीय तंबाकू अनुसंधान संस्थान (CTRI), राजमुंदरी
हर भारतीय तंबाकू क़िस्म के लिए पैकेज ऑफ़ प्रैक्टिसेज़, जारी किस्में, क्योरिंग मार्गदर्शन व कीट/रोग सलाह।
तंबाकू विकास निदेशालय, चेन्नई
सरकारी तंबाकू-विकास योजनाएँ, आँकड़े व ग़ैर-FCV तंबाकू मार्गदर्शन।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल
ऊपर की अनुसूची तय करने से पहले अपने खेत के लिए मुफ़्त, फ़सल-वार खाद व सूक्ष्म-पोषक सिफ़ारिश लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
FCV तंबाकू क्या है, और यह बीड़ी तंबाकू से कैसे अलग है?
FCV का मतलब फ़्लू-क्योर्ड वर्जीनिया — एक हल्का, चमकीला तंबाकू जो ज़्यादातर कर्नाटक व आंध्र प्रदेश की हल्की मिट्टी पर उगता और बंद बार्न में गर्मी से क्योर होता है ("फ़्लू" गर्मी ले जाते हैं)। यह मुख्य निर्यात क़िस्म है और सिर्फ़ तंबाकू बोर्ड की नीलामी फ़र्शों पर बिकता है। बीड़ी तंबाकू भारी, गहरी, ज़्यादा सुगंधित पत्ती है जो मुख्यतः गुजरात व निपानी के आसपास उगती, खुले में धूप व हवा में क्योर होती, और सीधे बीड़ी बनाने वालों को बिकती है। ये अलग किस्में हैं, अलग मिट्टी पर, अलग खाद व क्योरिंग के साथ, अलग बाज़ारों के लिए।
FCV तंबाकू उगाने के लिए क्या मुझे तंबाकू बोर्ड में पंजीकरण कराना होगा?
हाँ। FCV तंबाकू के लिए, किसानों और उनके क्योरिंग बार्न का तंबाकू बोर्ड में पंजीकरण ज़रूरी है, और बोर्ड हर मौसम एक अधिकृत फ़सल आकार तय करता और किसान-वार रकबा अनुमति देता है। पंजीकृत नीलामी व्यवस्था के बाहर FCV बेचना, या अपने अधिकृत रकबे से काफ़ी ज़्यादा उगाना अनुमत नहीं और पत्ती बिना बिके रहने का ख़तरा है। बीड़ी, चबाने, हुक़्क़ा व सिगार तंबाकू बोर्ड की नीलामी में नहीं जाते और खुले बाज़ार में बिकते हैं, हालाँकि अन्य नियम फिर भी लागू होते हैं।
क्या तंबाकू की एमएसपी है?
नहीं। तंबाकू CACP-अधिसूचित फ़सल नहीं है और इसकी कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं। FCV पत्ती को तंबाकू बोर्ड की नीलामी में जो दाम मिलता है वही मिलता है, जो ग्रेड, फ़सल के आकार, और घरेलू व निर्यात माँग के साथ बदलता है। बोर्ड दैनिक औसत नीलामी दाम प्रकाशित करता है। ग़ैर-FCV क़िस्में खुले बाज़ार में तय दामों पर बिकती हैं।
FCV तंबाकू की खाद क्लोराइड-रहित क्यों होनी चाहिए?
पौधे द्वारा लिए क्लोराइड आयन क्योर्ड पत्ती में रह जाते और उसे ठीक से जलने से रोकते हैं — ज़्यादा क्लोराइड वाली FCV पत्ती जलने पर आँच नहीं रोकती और उसका रंग फीका होता, जो ठीक वही है जो नीलामी ख़रीदार ठुकराते हैं। इसलिए FCV पोटाश म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (MOP) नहीं, सल्फेट ऑफ़ पोटाश (SOP) के रूप में दिया जाता, और इस्तेमाल कोई भी कॉम्प्लेक्स खाद क्लोराइड-रहित ग्रेड होनी चाहिए। बीड़ी व चबाने वाला तंबाकू इस मामले में कम संवेदनशील है।
टॉपिंग व सकर निकालना क्या है, और ये क्यों मायने रखते हैं?
टॉपिंग यानी जब लगभग आधे पौधों में फूल-कलियाँ आ जाएँ तब फूल-सिर (और अक्सर कुछ ऊपरी पत्तियाँ) तोड़ देना, ताकि पौधा बीज में ऊर्जा लगाना बंद करे। सकर निकालना यानी हर पत्ती की कोख से फिर फूटने वाले बग़ली अंकुर ("सकर") हटाना, हर 7–10 दिन पर हाथ से या सकर-रोधी रसायन से। दोनों मिलकर पौधे की बढ़वार पत्तियों में मोड़ते हैं, जो पत्ती में शरीर, वज़न, मोटाई व निकोटीन बनाता है — और इसलिए उपज व ग्रेड। फूलने व सकर बनने के लिए छोड़ी फ़सल पतली, हल्की, कम-दाम पत्ती देती है।
फ़्लू-क्योरिंग कैसे होती है?
प्राइम की गई FCV पत्ती बाँधकर या क्लिप करके बंद बार्न में लटकाई जाती है, और तापमान चरणों में धातु के फ़्लू से आने वाली गर्मी से बढ़ाया जाता है (ताकि धुआँ पत्ती को कभी न छुए)। पहले एक गर्म, नम "पीलापन" चरण (लगभग 32–38°C) पत्ती को हरे से पीला करता है; फिर बढ़ते तापमान पर "रंग जमाना" व "पत्ती सुखाना" पीलापन पक्का करते व फलक सुखाते हैं; अंत में लगभग 74–77°C तक "डंठल सुखाना" मध्य-शिरा सुखाता है। पूरी क्योरिंग हर बैच पर लगभग एक हफ़्ता लेती और उसकी अनुसूची खेत में किए किसी भी काम जितनी अहम है — जल्दबाज़ या नम क्योरिंग अच्छी पत्ती बर्बाद कर देती है।
ब्लैक शैंक क्या है और मैं इसे कैसे रोकूँ?
ब्लैक शैंक एक मृदा जल-फफूँद रोग (Phytophthora nicotianae) है जो जड़ें सड़ाता और तने का आधार काला करता है, तो पौधे धब्बों में मुरझाकर मरते हैं, खेत के गीले, ख़राब-निकासी हिस्सों में सिंचाई या बारिश के बाद सबसे तेज़। मरे तने को चीरें तो गूदा गहरी, तश्तरी जैसी पर्तों में होता है। यह मिट्टी में सालों बचता है। नियंत्रण है ब्लैक-शैंक-प्रतिरोधी किस्म, ग़ैर-मेज़बान जैसे अनाज या ज्वार से 2–3 साल का फ़सल-चक्र (चक्र में मिर्च, टमाटर या बैंगन नहीं), तेज़ निकासी वाली मेड़-रोपाई, साफ़ नर्सरी, और जहाँ रोग हो वहाँ सुझाए फफूँदनाशी से आधार-ड्रेंच।
एक एकड़ के लिए कितना तंबाकू बीज चाहिए?
बहुत कम। तंबाकू बीज धूल जैसा बारीक है — लगभग 2.5–3 ग्राम प्रति वर्ग मीटर नर्सरी क्यारी, और लगभग 100 वर्ग मीटर नर्सरी एक हेक्टेयर भर की पौध तैयार करती है (लगभग 40 वर्ग मीटर प्रति एकड़)। तो कुछ सौ ग्राम बीज पूरा हेक्टेयर ढँकता है। बीज कभी खेत में सीधे नहीं बोया जाता; फ़सल हमेशा नर्सरी से रोपी जाती है।
कौन-सी तंबाकू किस्म उगाऊँ?
यह पूरी तरह आपके तंबाकू प्रकार, आपके बाज़ार और, FCV के लिए, आपके तंबाकू बोर्ड क्षेत्र व मिट्टी वर्ग पर निर्भर। FCV के लिए, अपने क्षेत्र के लिए अधिसूचित CTRI-जारी किस्म उगाएँ — जैसे कर्नाटक हल्की मिट्टी, या आंध्र प्रदेश की उत्तरी/दक्षिणी हल्की या काली मिट्टी के लिए सुझाई किस्में — अगर वह रोग आपके खेत में है तो ब्लैक-शैंक सहनशीलता वाली चुनें। बीड़ी तंबाकू के लिए, चरोतर या निपानी इलाक़ों के लिए उपयुक्त आणंद या निपानी किस्में उगाएँ। हमेशा अधिसूचित किस्म का प्रमाणित बीज इस्तेमाल करें, बचाया या अनजान बीज नहीं।
FCV फ़सल से कितनी उपज की उम्मीद रखूँ?
अच्छी उगाई FCV फ़सल लगभग 1,800–2,500 किग्रा क्योर्ड पत्ती प्रति हेक्टेयर देती है, और आंध्र व कर्नाटक के औसत लगभग 2,000 किग्रा/हे. हैं (लगभग 8 क्विंटल प्रति एकड़)। पर चूँकि नीलामी दाम सबसे ऊँचे चमकीले ग्रेड और नीचे के ग्रेड के बीच कई गुना बदलता है, पैसा अतिरिक्त वज़न निचोड़ने से कहीं ज़्यादा पत्ती गुणवत्ता — नर्सरी, पोषण, टॉपिंग, पका प्राइमिंग व साफ़ क्योरिंग — पर निर्भर करता है।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके खेत और मिट्टी से जुड़ी किसी भी ख़ास बात के लिए आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही आधिकारिक जवाब है।
