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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
मध्यमअपडेट 22 जुलाई 2026

नारियल

Cocos nucifera

कल्पवृक्ष — एक बार लगाओ, दशकों तक फल दे, दक्षिण के तटीय इलाक़ों की रीढ़। यह धैर्य व लगातार नमी का इनाम देता है, और असली मुनाफ़ा कच्चे नारियल से नहीं, बल्कि पूरी तरह फलने पर डाभ, खोपरा व जटा के मूल्यवर्धन से आता है।

A bunch of green coconuts hanging from a palm tree, ready for harvest
फसल प्रकार
बारहमासी ताड़ (60+ वर्ष)
रोपाई
जून–जुल (मानसून)
उपयुक्त राज्य
10+ प्रमुख राज्य
पहला फलन
5–7 साल (बौना/संकर 4–5)
जल आवश्यकता
अधिक पर अच्छी निकासी
तापमान
27–32°C, नम तटीय
मिट्टी
अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट/लेटराइट
कठिनाई स्तर
मध्यम
अपेक्षित उपज
80–120 नारियल/ताड़/वर्ष
मुख्य तरीक़ा
निकासी + मूल्यवर्धन

परिचय

नारियल ताड़ (Cocos nucifera), “कल्पवृक्ष” या हज़ार उपयोगों का पेड़, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश की तटीय खेती की रीढ़ है, पूर्वी तट व द्वीपों में बढ़ते रक़बे सहित। हर भाग उपयोग होता — पानी, गिरी, खोपरा तेल, जटा, खोल व लकड़ी।

यह सबसे लंबी-अवधि फसल है: एक बार लगाओ, 60 साल या अधिक फलती, पर लंबा ताड़ शुरू होने में 6–8 साल लेता व पूरी उपज बाद में पहुँचता। यह लंबा क्षितिज रोपाई फ़ैसलों — सही पौध, सही स्थान, अच्छी निकासी व शुरुआती वर्षों में समान नमी — को ताड़ के पूरे जीवन को निर्णायक बनाता।

नारियल की अर्थव्यवस्था कच्चे नारियल बेचने से मूल्यवर्धन की ओर निर्णायक रूप से खिसकी है: डाभ पानी, गुणवत्ता खोपरा व तेल, जटा, व कुछ राज्यों में नीरा/शक्कर खेत-द्वार पर नारियल से कहीं अधिक कमाते। यह गाइड पौध-चयन से पूर्ण फलन तक ताड़ का अनुसरण करती, निकासी, नमी, गैंडा भृंग व लाल ताड़ घुन, तथा मूल्यवर्धन को मुनाफ़ा तय करने वाले लीवर मानकर।

फसल की समयरेखा, बुवाई से कटाई तक

पूरे सीज़न की एक झलक — हर अवस्था की पूरी जानकारी के लिए नीचे संबंधित सेक्शन पर जाएँ।

  1. वर्ष 0

    रोपाई

    अच्छी चुनी 9–12 माह पौध मानसून की शुरुआत में गोबर-खाद सहित बड़े गड्ढे में 7.5 × 7.5 मी पर लगाएँ।

  2. वर्ष 1–3

    जमाव

    युवा ताड़ जड़-तंत्र व पत्ती-मुकुट बनाता; थाले, मल्च व समान नमी अब अहम।

  3. वर्ष 4–5

    पहला फूल

    बौने व संकर वर्ष 4–5 के आसपास फूलने लगते; लंबे 6–8 साल लेते।

  4. वर्ष 6–8

    फलन शुरू

    ताड़ नियमित घौद उत्पादन में बैठता, हर पत्ती-कक्ष से एक पुष्पगुच्छ निकलता।

  5. निरंतर

    घौद चक्र

    हर घौद फूल से परिपक्व नारियल तक लगभग एक साल लेती; अलग-उम्र घौदें साथ लटकतीं।

  6. ~7 माह

    डाभ अवस्था

    डाभ (पानी) को नारियल लगभग 7 माह पर काटे जाते जब पानी सबसे मीठा होता।

  7. ~11–12 माह

    परिपक्व-नारियल कटाई

    खोपरा व बीज को नारियल पूरी तरह परिपक्व, हर 30–45 दिन, साल भर काटे जाते।

उपयुक्त राज्य

जिन राज्यों में यह फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, वे नीचे हाइलाइट हैं। आपके खेत के लिए अंतिम सलाह हमेशा आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही देगा।

  • जम्मू और कश्मीर
  • हिमाचल प्रदेश
  • पंजाब
  • उत्तराखंड
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • उत्तर प्रदेश
  • राजस्थान
  • बिहार
  • झारखंड
  • पश्चिम बंगाल
  • सिक्किम
  • असम
  • अरुणाचल प्रदेश
  • मेघालय
  • नागालैंड
  • मणिपुर
  • मिज़ोरम
  • त्रिपुरा
  • गुजरात
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • गोवा
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक
  • केरल
  • तमिलनाडु
  • पुदुचेरी
  • लद्दाख
  • चंडीगढ़

यहाँ उगाई जाती है

जलवायु की ज़रूरतें

नारियल नम तटीय उष्ण-कटिबंध का ताड़ है — गरम, नम व समान गीला, पर हमेशा अच्छी निकासी। इसे भरपूर पानी चाहिए फिर भी ऊँचा जलस्तर नहीं झेल सकता, तो जलवायु व स्थान नियम मिलकर है “भरपूर नमी, कभी खड़ा पानी नहीं”। जहाँ वर्षा मौसमी, सूखे महीनों में सिंचाई उपज तेज़ी से बढ़ाती।

  • आदर्श तापमान

    27–32°C अधिक आर्द्रता सहित आदर्श; नारियल नम-उष्ण ताड़ है व जहाँ बहुत ठंडा, बहुत सूखा या बहुत मौसमी हो वहाँ ख़राब फलता

  • वर्षा

    1,500–2,500 मिमी अच्छी बँटी चाहती; इसे बहुत पानी चाहिए पर अच्छी निकासी वाली ज़मीन पर — यह ऊँचा जलस्तर या जलभराव नहीं झेलेगा

  • नमी

    अधिक, तटीय आर्द्रता सबसे उपयुक्त; लंबे सूखे, कम-आर्द्रता दौर बटन-झड़न व छोटे नारियल करते, जब तक सिंचित न हो

  • धूप

    उत्पादक मुकुट को भरपूर धूप; ताड़ प्रकाश-चाहक है व भीड़ या भारी छाया में ख़राब फलता

मिट्टी की ज़रूरतें

नारियल तटीय रेत से लेटराइट तक विस्तृत मिट्टी-श्रेणी को अनुकूल, पर हमेशा गहराई व निकासी चाहता। क्लासिक ग़लती ऊँचा या जलभराव जलस्तर है, जो जड़ें सड़ाता व ताड़ ह्रास करता। थाले में जैविक पदार्थ बनाना व खोल दफ़नाना उन हल्की मिट्टियों में नमी रखने का मानक तरीक़ा जो यह पसंद करता।

  • उपयुक्त मिट्टी

    गहरी, अच्छी निकासी वाली बलुई दोमट, लेटराइट, तटीय बलुई व जलोढ़ मिट्टी; अनुकूलनीय पर हमेशा गहराई व निकासी चाहिए

  • pH स्तर

    5.2–8.0 (विस्तृत)

  • जल निकासी

    अच्छी निकासी, जलस्तर सतह के बहुत पास नहीं — ताड़ को नमी चाहिए पर ऊँचे या उतार-चढ़ाव वाले जलस्तर से सड़ता व ह्रास करता

  • जैविक तत्व

    जैविक पदार्थ, थाले में खोल-दफ़न व हरी खाद पर ज़ोरदार प्रतिक्रिया, जो उन बलुई मिट्टियों में नमी रखते जिन पर यह अक्सर उगता

खेत की तैयारी

क्षेत्र चाहे जो हो, चार कदम वही रहते हैं — बस समय बुवाई के अनुसार बदलता है।

  1. 1

    गड्ढे व खोल-दफ़न

    बड़े गड्ढे खोदें, ऊपरी मिट्टी, गोबर-खाद व दफ़नाई खोल/जटा-पिथ से आंशिक भरें ताकि नमी रहे, ख़ासकर बलुई या लेटराइट मिट्टी पर।

  2. 2

    निकासी व दूरी

    स्थान की निकासी सुनिश्चित करें व 7.5 × 7.5 मी (लगभग 175 ताड़/हेक्टेयर) पर बिछाएँ; जहाँ जलस्तर ऊँचा वहाँ निकासी नाले दें।

  3. 3

    पौध-चयन

    ज्ञात माँ-ताड़ से जल्दी फूटने, अधिक पत्तियों व मोटे कॉलर वाली ओजस्वी 9–12 माह पौध चुनें।

बीज की जानकारी

मुख्य किस्मों की तुलना — अवधि, उपज, रोग-प्रतिरोध या आप किस मक़सद से उगा रहे हैं, इसके आधार पर चुनें।

किस्मअवधिउपजरोग-प्रतिरोधसर्वश्रेष्ठ राज्यकिसके लिए उपयुक्त

वेस्ट कोस्ट टॉल (WCT)

पश्चिम तट का मज़बूत, दीर्घजीवी लंबा — देर से फलदार पर टिकाऊ, सूखा-मज़बूत व आधार किस्म।

6–8 साल में फलदारअधिक (दीर्घकालीन)काफ़ी मज़बूतकेरल/कर्नाटकखोपरा व तेल, बारानी

ईस्ट कोस्ट टॉल (ECT)

पूर्वी तट का लंबा, तमिलनाडु व आंध्र स्थितियों को अनुकूल।

6–8 साल में फलदारअधिक (दीर्घकालीन)काफ़ी मज़बूततमिलनाडुखोपरा, पूर्वी तट

चौघाट ऑरेंज ड्वार्फ (COD)

मीठे डाभ पानी को मूल्यवान अगेता-फलदार बौना; कम-जीवी पर जल्दी उपज।

4–5 साल में फलदारअधिक (डाभ)रोग-प्रवणकेरलडाभ (पानी)

केरा शंकर / D×T व T×D संकर

बौना × लंबा (व उलट) संकर, अगेते फलन को अधिक उपज व बड़े नारियल से जोड़ते — आधुनिक व्यावसायिक विकल्प।

4–5 साल में फलदारबहुत अधिकमध्यमकेरल/कर्नाटकअधिक-उपज व्यावसायिक

मलायन/गंगा बोंडम बौने

डाभ व घरेलू उपयोग को उगाए बौने प्रकार, जल्दी फलदार व तोड़ने में आसान।

4–5 साल में फलदारअधिक (डाभ)परिवर्तनशीलदक्षिण भारतडाभ, घरेलू
बीज दर
7.5 × 7.5 मी (वर्ग) पर लगभग 175 पौध/हेक्टेयर; प्रणाली व किस्म अनुसार समायोजित करें
प्रमाणित बीज
पौध 60 साल की पूरी फसल है, तो इसे अच्छा चुनें: 9–12 माह पौध चुनें जो जल्दी अंकुरित हुई, अधिक पत्तियाँ व मोटा कॉलर हो, ऊँची-उपज, स्वस्थ माँ-ताड़ या भरोसेमंद नर्सरी से। ख़राब पौध बाद ठीक नहीं हो सकती — यह नारियल का सबसे परिणामी फ़ैसला।
दूरी
लंबे/संकर को 7.5 × 7.5 मी वर्ग (लगभग 175 ताड़/हेक्टेयर); बौनों को नज़दीक
बीज उपचार
खेत-अर्थ में बीज फसल नहीं — सबसे अच्छी-अंकुरित, ओजस्वी पौध चुनें व रोपाई से पहले कमज़ोर या देर वाली अस्वीकृत करें।

बुवाई गाइड

मानसून की शुरुआत में लगाएँ ताकि युवा ताड़ प्राकृतिक नमी पर जमे, व पहले दो-तीन साल थाला मल्च व सुरक्षित रखें, जो सबसे संवेदनशील हैं। ऊँचे जलस्तर पर टीले पर लगाएँ। अभी चुनी पौध व स्थान अगली आधी-सदी को ताड़ की उपज तय करते।

सबसे अच्छा समय
पौध मानसून की शुरुआत (जून–जुलाई) में, या नम इलाक़ों में पक्की सिंचाई के साथ अन्य महीनों में लगाएँ
क़तार की दूरी
कतारों के बीच 7.5 मी
पौधे की दूरी
कतार में 7.5 मी
बुवाई की गहराई
ऐसे लगाएँ कि कॉलर ज़मीन-स्तर पर हो; ऊँचे जलस्तर पर टीले पर लगाएँ व कली मुक्त रखें
तरीक़ा
चुनी पौध ऊपरी मिट्टी, गोबर-खाद व दफ़नाई खोल से आंशिक भरे गड्ढे में लगाएँ, दबाएँ व थाला मल्च करें

खाद कार्यक्रम

बुवाई के समय एक साथ पूरी खाद डालने से बँटी हुई मात्रा बेहतर है — खासकर नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या रिसकर बह जाता है।

  1. 1

    युवा ताड़ (वर्ष 1–3)

    साल में बँटा

    थाले में क्रमिक गोबर-खाद व NPK, साल भर बँटा, ताड़ बढ़ते बढ़ाते; नारियल को मैग्नीशियम और, तटीय रेत पर, पोटैशियम व क्लोरीन भी चाहिए।

  2. 2

    फलदार ताड़

    वार्षिक

    प्रति ताड़ गोबर-खाद व NPK (Mg सहित) की पूरी वार्षिक खुराक, थाले में रखकर मिलाई, निरंतर घौद उत्पादन बनाए रखने को।

  3. 3

    सूक्ष्म पोषक व जैविक

    ज़रूरत अनुसार

    खोल-दफ़न, हरी खाद व कमियाँ (Mg, B, S) ठीक करना बलुई मिट्टी उपजाऊ व नमी-धारक रखते।

सिंचाई कार्यक्रम

  1. 1. जमाव

    वर्ष 1–3

    सूखे महीनों में नियमित थाला-सिंचाई व भारी मल्चिंग — युवा ताड़ बहुत सूखा-संवेदी।

  2. 2. सूखा सीज़न (फलदार)

    गर्मी

    फलदार ताड़ सूखे महीनों में सिंचें (ड्रिप आदर्श) — सूखे-दौर तनाव बटन-झड़न व छोटे नारियल करता।

  3. 3. मानसून

    बारिश

    बारिश पर निर्भर पर थाले बहते रखें; ताड़ के आसपास पानी कभी न खड़ा होने दें।

महत्वपूर्ण अवस्थाएँ

  • जमाव (वर्ष 1–3)
  • सूखा-सीज़न फलन

पानी बचाने के तरीक़े

  • मल्च थाले सहित ड्रिप सिंचाई पानी की खपत तेज़ी से घटाती व सूखे-सीज़न उपज बढ़ाती।
  • थाले में नारियल खोल दफ़नाना महीनों नमी-स्पंज का काम करता — क्लासिक नारियल पानी-बचत तरीक़ा।
  • थाला मल्च वह नमी बचाता जो सूखे सीज़न में नारियल-संख्या तय करती।

खरपतवार प्रबंधन

आम खरपतवार

दूब घास (Cynodon)मोथा (Cyperus)माइकेनिया (मील-ए-मिनट)क्रोमोलेनामौसमी चौड़ी-पत्ती खरपतवार

जैविक नियंत्रण

  • विस्तृत अंतर-स्थान में अंतर-फसल व आवरण-फसलें (केला, अनानास, कोको, चारा, दलहन) उगाएँ — वे खरपतवार दबातीं व आय जोड़तीं।
  • खोल व पत्तों से थाला मल्च खरपतवार दबाता व नमी रखता।

रासायनिक नियंत्रण

  • ताड़-थाला साफ़ रखें; यदि अंतर-फसल व आवरण-फसलें जगह घेरें तो शाकनाशी शायद ही ज़रूरी।
  • युवा ताड़ ढकने वाली आक्रामक लताएँ जैसे माइकेनिया स्पॉट-नियंत्रित करें।

पोषक तत्व की कमी की पहचान

हर पोषक तत्व की कमी पौधे पर असल में कैसी दिखती है — ताकि ग़लत स्प्रे करने से पहले आप कमी और रोग में फ़र्क़ कर सकें।

ध्यान देने योग्य रोग

लक्षण, संभावित कारण और असल में क्या इलाज करता है — सिर्फ़ किसी स्प्रे का नाम नहीं।

ध्यान देने योग्य कीट

नुक़सान दिखने से पहले क्या देखें, और रसायन से पहले जैविक विकल्प क्या हैं।

आम ग़लतियाँ जिनसे बचें

जो ग़लतियाँ किसानों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती हैं, खेत में जितनी बार दिखती हैं उसी क्रम में — हमेशा वैसे नहीं जैसा आप सोचें।

  1. 1

    ख़राब या यादृच्छिक चुनी पौध लगाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    पौध 60 साल की उपज तय करती व बाद ठीक नहीं हो सकती — हमेशा अच्छी माँ-ताड़ से अगेती-अंकुरित, ओजस्वी, अधिक पत्तियों व मोटे कॉलर वाली पौध चुनें।

  2. 2

    जहाँ जलस्तर ऊँचा या स्थान जलभरता हो वहाँ लगाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    नारियल को बहुत पानी चाहिए पर ऊँचे या उतार-चढ़ाव जलस्तर से सड़ता व ह्रास करता — निकासी सुनिश्चित करें, व जहाँ जलस्तर सतह पास हो टीले पर लगाएँ।

  3. 3

    पहले तीन साल ताड़ की उपेक्षा।

    नुक़सान क्यों होता है

    युवा ताड़ बहुत सूखा- व खरपतवार-संवेदी; वर्ष 1–3 में मल्च, नमी व सुरक्षा में कंजूसी इसे जीवन भर बौना करती — यह निर्णायक अवधि।

  4. 4

    पोटैशियम व मैग्नीशियम कम देना।

    नुक़सान क्यों होता है

    बलुई मिट्टी पर नारियल भारी पोटैशियम व मैग्नीशियम उपयोगकर्ता; इन्हें कम करें तो पत्तियाँ झुलसतीं, बटन झड़ते व नारियल-संख्या गिरती — पूरी वार्षिक खुराक Mg सहित दें।

  5. 5

    बाग़ान के आसपास खाद-गड्ढे व सड़ती लकड़ी छोड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    वे गैंडा भृंग के प्रजनन-स्थल हैं, जो फिर मुकुट बेधता व कली सड़न तथा लाल ताड़ घुन को रास्ता खोलता — बुनियादी स्वच्छता को प्रजनन-स्थल नष्ट करें।

  6. 6

    तना घायल करना व लाल ताड़ घुन अनदेखा करना।

    नुक़सान क्यों होता है

    घुन घावों से घुसता व ताड़ भीतर से सुरंगता, दिखने से पहले मारता — तना-चोट टालें, कट सील करें, व फेरोमोन से सामूहिक-पकड़ें।

  7. 7

    कली-सड़न इलाक़ों में मानसून-पूर्व मुकुट सुरक्षा छोड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    कली सड़न गीले सीज़न में बढ़ता बिंदु मारती; रोग-प्रवण इलाक़ों में मानसून से पहले निवारक मुकुट उपचार ताड़ खोने के विरुद्ध सस्ता बीमा।

  8. 8

    विस्तृत अंतर-स्थान खाली छोड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    युवा नारियल बाग़ान सालों खुली ज़मीन बर्बाद करता — अंतर-फसल (केला, अनानास, कोको, चारा, मसाले) व आवरण-फसलें ताड़ पकते आय कमातीं, खरपतवार दबातीं व मिट्टी सुधारतीं।

  9. 9

    केवल कच्चे नारियल बेचना।

    नुक़सान क्यों होता है

    खेत-द्वार कच्चे नारियल सबसे कम कमाते — डाभ पानी, गुणवत्ता खोपरा व तेल, जटा व नीरा कहीं अधिक मूल्य जोड़ते, और नारियल की पूरी आधुनिक अर्थव्यवस्था उसी मूल्यवर्धन पर टिकी।

  10. 10

    मृत या गैनोडर्मा-ग्रस्त ताड़ व ठूँठ न हटाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    मृत ताड़ व ठूँठ लाल ताड़ घुन पालते व बाक़ी को संक्रमित करने वाला गैनोडर्मा रखते — उन्हें स्वच्छता को तुरंत हटा-नष्ट करें।

कटाई

नारियल साल भर निरंतर काटा जाता। डाभ (पानी) को नारियल लगभग 7 माह पर काटें जब पानी की मात्रा व मिठास चरम पर। परिपक्व नारियल (खोपरा, तेल, बीज) को पूरी तरह परिपक्व — खोल भूरा होता व पानी हिलता/घटता — हर 30–45 दिन काटें, हर घौद पकते लेते। प्रशिक्षित चढ़ाई-कर्ता, यांत्रिक/लग्गी हार्वेस्टर या कुछ इलाक़ों में प्रशिक्षित बंदरों से काटें।

तैयार होने के संकेत

  • डाभ: ~7 माह, अधिकतम मीठा पानी
  • परिपक्व: खोल भूरा, गिरी सख़्त, पानी घटा
  • घौदें बारी-बारी हर पकते ली जातीं

उपकरण

  • कटाई-चाकू सहित प्रशिक्षित चढ़ाई-कर्ता, या लग्गी/यांत्रिक हार्वेस्टर
  • गिरने पर नारियल-क्षति टालने को जाल/सावधानी
  • नियमित 30–45 दिन कटाई बार

अपेक्षित उपज

अच्छे प्रबंधन वाले फलदार बाग़ान में प्रति ताड़ 80–120 नारियल प्रति वर्ष (अच्छे संकर इससे अधिक), यानी लगभग 14,000–20,000+ नारियल/हेक्टेयर/वर्ष

कटाई के बाद व भंडारण

  • भंडारण

    परिपक्व नारियल हफ़्तों रहते; असली कटाई-बाद काम प्रसंस्करण है — गिरी को खोपरा में सुखाना (धूप या भट्ठी), व खोपरा से तेल पेरना। डाभ अत्यधिक नाशवान व जल्दी ताज़ा बिकता, या पानी बोतलबंद होता।

  • पैकेजिंग

    नारियल बोरे या थोक-हैंडल; खोपरा सूखा ग्रेड व बोरा; डाभ अक्सर ताज़ा व्यापार को छाँटा/ब्रांडेड। जटा व खोल अलग उत्पाद-धाराएँ।

  • परिवहन

    परिपक्व नारियल व खोपरा आसानी से परिवहन; डाभ जल्दी व ठंडा भेजना चाहिए क्योंकि इसका पानी ख़राब होता। मूल्यवर्धित उत्पाद (तेल, जटा) टिकाऊ माल के रूप में भेजे जाते।

  • भंडारण अवधि

    परिपक्व नारियल: कई हफ़्ते से महीने; खोपरा व तेल: ठीक सूखे/भंडारित पर महीने; डाभ: कुछ दिन ताज़ा।

मंडी भाव

सरकार के अपने एगमार्कनेट डेटा से, आपके नज़दीक का आज का मंडी भाव — लाइव।

सरकारी एगमार्कनेट डेटा से रोज़ाना लाइव मंडी भाव।

आज के भाव ला रहे हैं…

data.gov.in (एगमार्कनेट) से सिंक होता है। भाव ₹ प्रति क्विंटल हैं।

मौसम

आपके चुने गए स्थान की मौजूदा स्थिति और 5-दिन का पूर्वानुमान, फसल की अवस्था के अनुसार एक सलाह के साथ।

मौजूदा स्थिति और 5-दिन के पूर्वानुमान के लिए अपना राज्य चुनें।

मौसम की जानकारी ला रहे हैं…

Open-Meteo से लाइव डेटा

मुनाफ़ा कैलकुलेटर

आपकी अपनी लागत, अपेक्षित उपज और बिक्री भाव — हमारी नहीं।

पैसा कहाँ जाता है

नीचे कैलकुलेटर की डिफ़ॉल्ट लागत के अनुसार प्रति एकड़ कुल लागत में हर मद का हिस्सा — वहाँ अपने आँकड़े बदलने पर यह तस्वीर पूरी तरह आप पर लागू नहीं रहेगी, पर क्रम शायद ही बदलता है।

  • मज़दूरी26% (₹12,000)
  • ज़मीन का किराया22% (₹10,000)
  • खाद17% (₹8,000)
  • सिंचाई13% (₹6,000)
  • बीज7% (₹3,000)
  • कीटनाशक और खरपतवारनाशक7% (₹3,000)
  • मशीन4% (₹2,000)
  • ब्याज4% (₹2,000)

आधिकारिक डाउनलोड

केवल सरकार और ICAR के दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ किसी आधिकारिक सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नारियल ताड़ कितनी जल्दी फलने लगता, और कितना जीता है?

यह किस्म पर निर्भर। बौने व बौना×लंबा संकर वर्ष 4–5 के आसपास फूलने लगते, जबकि मज़बूत लंबे शुरू होने में 6–8 साल लेते व पूरी उपज बाद में पहुँचते। पर एक बार फलने पर नारियल ताड़ 60 साल या अधिक उत्पादन करता रहता। यही बहुत लंबा जीवन है जिससे रोपाई फ़ैसले — पौध, स्थान, निकासी व शुरुआती देखभाल — इतने मायने रखते: वे आधी सदी को ताड़ की उपज गढ़ते।

अच्छी नारियल पौध कैसे चुनूँ?

यह नारियल का सबसे अहम फ़ैसला है, क्योंकि पौध अगले 60 साल की फसल है व बाद सुधारी नहीं जा सकती। 9–12 माह पौध चुनें जो जल्दी अंकुरित हुई (जल्दी फूटना शक्ति का संकेत), अपने भाई-बहनों से अधिक पत्तियाँ हों, पत्तियों का जल्दी विभाजन, व मोटा कॉलर हो, ऊँची-उपज, स्वस्थ माँ-ताड़ या भरोसेमंद नर्सरी से ली। कमज़ोर, देर-अंकुरित या पतली पौध चाहे सस्ती हो अस्वीकृत करें।

नारियल को बहुत पानी चाहिए — तो निकासी क्यों मायने रखती है?

क्योंकि नारियल को भरपूर नमी चाहिए पर वह ऊँचा या उतार-चढ़ाव जलस्तर या जलभराव नहीं झेल सकता, जो जड़ें सड़ाते व ताड़ धीरे ह्रास करते। नियम है “भरपूर नमी, कभी खड़ा पानी नहीं”। अच्छी-निकासी बलुई या लेटराइट मिट्टी पर यह स्वाभाविक; जहाँ जलस्तर ऊँचा वहाँ टीले पर लगाएँ व निकासी नाले दें। फिर थाले में खोल दफ़नाना बारिशों के बीच जलभराव बिना नमी रखता।

नारियल के सबसे ख़तरनाक कीट कौन-से हैं?

दो सबसे गंभीर हैं गैंडा भृंग व लाल ताड़ घुन, और वे जुड़े हैं। गैंडा भृंग मुकुट में बेधता, बढ़ते बिंदु व पत्तियाँ हानि करता व घाव खोलता; लाल ताड़ घुन फिर उन घावों (या छँटाई कट) से घुसता व ताड़ को भीतर से सुरंगता, अक्सर आपके देखने से पहले मारता। इन्हें साथ संभालें: भृंग के प्रजनन-स्थल (खाद-गड्ढे, सड़ती लकड़ी) नष्ट करें, तना-चोट टालें व सील करें, फेरोमोन जाल उपयोग करें, व घुन पालने वाले मृत ताड़ हटाएँ।

क्या केवल नारियल के लिए नारियल उगाना फ़ायदेमंद है?

बढ़ते हुए नहीं — खेत-द्वार कच्चे नारियल सबसे कम कमाते, और नारियल की आधुनिक अर्थव्यवस्था मूल्यवर्धन पर टिकी। डाभ पानी, गुणवत्ता खोपरा व तेल, खोल से जटा, व जहाँ अनुमति हो वहाँ नीरा या नारियल-शक्कर पूरे नारियल बेचने से कहीं अधिक कमाते। विस्तृत दूरी को केला, अनानास, कोको, मसाले या चारे से अंतर-फसल आगे आय जोड़ती, ख़ासकर जब तक ताड़ युवा हैं। शुरू से मूल्यवर्धन की योजना बनाएँ।

क्या नारियल का एमएसपी है?

खोपरा (सूखी नारियल गिरी) का हर साल घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य होता है, और NAFED/राज्य निकाय जैसी एजेंसियाँ मूल्य-समर्थन योजना के तहत इसे ख़रीदती हैं — पर ताज़ा नारियल ख़ुद बिना एमएसपी वाली बाज़ार वस्तु है, व इसका दाम सीज़न व माँग से घटता-बढ़ता। योजना बनाते इस पृष्ठ के लाइव मंडी भाव व लाभ कैलकुलेटर का उपयोग करें, और याद रखें कि मुनाफ़ा आमतौर पर खोपरा, तेल व जटा मूल्यवर्धन में बनता।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके खेत और मिट्टी से जुड़ी किसी भी ख़ास बात के लिए आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही आधिकारिक जवाब है।