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भारत सरकारकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयसक्रियअपडेट 10 अगस्त 2026

10,000 कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन एवं संवर्धन

Formation and Promotion of 10,000 Farmer Producer Organisations (FPOs)

केंद्रीय क्षेत्र की योजना, जो किसानों के समूह को अपना उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने में मदद करती है, फिर उसे इक्विटी अनुदान, बिना गारंटी के ऋण-गारंटी और पाँच साल के पेशेवर सहयोग से मज़बूत करती है — यह किसी एक किसान को सीधा नकद भुगतान नहीं है।

योजना का प्रकार
केंद्रीय क्षेत्र की योजना
कुल परिव्यय
₹6,865 करोड़ (2019-20 से 2027-28)
लक्ष्य
10,000 एफपीओ — फ़रवरी 2025 में पूरा
शुभारंभ
29 फ़रवरी 2020, चित्रकूट (उ.प्र.)
इक्विटी अनुदान
प्रति एफपीओ अधिकतम ₹15 लाख
ऋण गारंटी
प्रति एफपीओ अधिकतम ₹2 करोड़
सहयोग अवधि
प्रति एफपीओ 5 वर्ष (सीबीबीओ के ज़रिए)
कार्यान्वयन एजेंसियाँ
एसएफएसी, नाबार्ड, एनसीडीसी

परिचय

यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना नई कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) — यानी किसानों की अपनी कंपनी या सहकारी समिति — बनाने में मदद करती है, और बनने के बाद पहले पाँच साल तक उसे सहारा देती है। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने 19 फ़रवरी 2020 को ₹6,865 करोड़ के परिव्यय के साथ इसे मंज़ूरी दी; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 फ़रवरी 2020 को चित्रकूट, उत्तर प्रदेश से इसका शुभारंभ किया।

तीन कार्यान्वयन एजेंसियाँ — एसएफएसी (SFAC), नाबार्ड और एनसीडीसी — को मंत्रालय अलग-अलग क्लस्टर आवंटित करता है, ज़्यादातर "एक ज़िला, एक उत्पाद" के आधार पर। हर क्लस्टर में एजेंसी एक क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठन (सीबीबीओ) नियुक्त करती है — एक पेशेवर संस्था जो किसानों को जोड़ती है, व्यवसाय योजना बनाती है, और एफपीओ का पंजीकरण करवाती है — या तो उत्पादक कंपनी के रूप में, या सहकारी समिति के रूप में, जिसमें किसान ही शेयरधारक-सदस्य होते हैं।

यह योजना किसी एक किसान के बैंक खाते में सीधे कुछ नहीं भेजती। जो मिलता है वह एफपीओ नामक संस्था को मिलता है — मिलान इक्विटी अनुदान, उसके लिए गए कर्ज़ पर ऋण-गारंटी, और पहले तीन साल का प्रबंधन-लागत सहयोग, साथ ही पाँच साल का सीबीबीओ सहयोग। किसान को फ़ायदा तब होता है जब वह शेयरधारक-सदस्य बनकर सस्ते दाम पर इनपुट खरीदता है और उपज को सामूहिक रूप से बेहतर भाव पर बेचता है — किसी किस्त से नहीं।

योजना की मुख्य बातें

  • सीबीबीओ के ज़रिए गठन

    एक पेशेवर क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठन किसानों को जोड़ता है और एफपीओ का पंजीकरण करवाता है — कागज़ी काम आपको अकेले नहीं करना पड़ता।

  • मिलान इक्विटी अनुदान

    प्रति किसान-सदस्य ₹2,000 तक, प्रति एफपीओ अधिकतम ₹15 लाख — एफपीओ को उसकी पूँजी मज़बूत करने के लिए दिया जाता है।

  • बिना गारंटी के ऋण-गारंटी

    प्रति एफपीओ ₹2 करोड़ तक के प्रोजेक्ट लोन पर कवर, ताकि बैंक बिना ज़मीन या अन्य गारंटी के एफपीओ को कर्ज़ दें।

  • प्रबंधन-लागत सहयोग

    पहले तीन साल में प्रति एफपीओ अधिकतम ₹18 लाख (या वास्तविक लागत, जो भी कम हो) — सीईओ/मैनेजर का वेतन और दफ़्तर चलाने के लिए।

  • 5 साल का सहयोग

    एफपीओ बनने के बाद पाँच साल तक सीबीबीओ जुड़ा रहता है — व्यवसाय योजना, इनपुट टाई-अप, बाज़ार से जुड़ाव और कर्ज़ तक पहुँच में मदद करता है।

  • एक ज़िला, एक उत्पाद

    ज़्यादातर क्लस्टर ज़िले की खास फ़सल/उपज के इर्द-गिर्द बनते हैं, ताकि बेहतर प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात हो सके।

आपको क्या मिलता है

  • एफपीओ को इक्विटी अनुदान

    प्रति किसान-सदस्य ₹2,000 तक का मिलान अनुदान, प्रति एफपीओ अधिकतम ₹15 लाख — यह कंपनी को मिलता है, किसी एक सदस्य को नहीं।

  • एफपीओ के कर्ज़ पर गारंटी

    प्रति एफपीओ ₹2 करोड़ तक का प्रोजेक्ट लोन कवर; ₹1 करोड़ से ऊपर और ₹2 करोड़ तक के लोन पर कवर लोन का 75%, अधिकतम ₹1.5 करोड़ तक।

  • प्रबंधन-लागत सहयोग

    पहले तीन साल में प्रति एफपीओ अधिकतम ₹18 लाख (या वास्तविक लागत, जो भी कम हो), मुख्यतः वेतन और चालू खर्च के लिए।

  • पेशेवर सहयोग

    एक सीबीबीओ पाँच साल तक एफपीओ के साथ रहता है — बोर्ड को प्रशिक्षण देता है, व्यवसाय योजना बनाता है, इनपुट और खरीदार जुटाता है।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • आप एक प्राथमिक उत्पादक हैं — किसान, उत्पादक या पशुपालन/मत्स्य उत्पादक, केवल व्यापारी या इनपुट डीलर नहीं
  • आप ग्राहक बनने के बजाय उत्पादक संगठन के शेयरधारक-सदस्य बनने के इच्छुक हैं
  • आपके ब्लॉक/क्लस्टर में कोई सक्रिय सीबीबीओ या पहले से पंजीकृत एफपीओ काम कर रहा है, या आपका क्षेत्र नए क्लस्टर के रूप में एसएफएसी/नाबार्ड/एनसीडीसी को प्रस्तावित किया जा सकता है
  • नए एफपीओ के लिए: मैदानी क्षेत्र के क्लस्टर में कम से कम 300 उत्पादक (पहाड़ी, पूर्वोत्तर, आदिवासी या रेगिस्तानी क्षेत्रों में 100), जैसा योजना का क्लस्टर मानदंड कहता है
  • एफपीओ कंपनी अधिनियम के तहत उत्पादक कंपनी या सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत है या पंजीकृत होगा, जिसके शेयरधारक प्राथमिक उत्पादक हों

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • ऐसे समूह जिनके सदस्य प्राथमिक उत्पादक नहीं हैं — केवल व्यापार, प्रसंस्करण या इनपुट-डीलर समूह
  • ऐसा एफपीओ जिसे इस योजना के तहत इक्विटी अनुदान और/या ऋण-गारंटी पहले एक बार मिल चुकी है (हर एफपीओ को यह लाभ केवल एक बार मिलता है)
  • अनौपचारिक, गैर-पंजीकृत किसान समूह — वित्तीय सहायता तभी मिलती है जब उत्पादक कंपनी/सहकारी समिति के रूप में औपचारिक पंजीकरण हो चुका हो
  • ऐसा क्लस्टर जहाँ कोई कार्यान्वयन एजेंसी आवंटित नहीं है और कोई सीबीबीओ नियुक्त नहीं है (पहचाने गए क्लस्टर के बाहर अनुदान के लिए आवेदन का कोई रास्ता नहीं है)

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • आधार कार्ड

    एफपीओ के पंजीकरण या बाद में शेयर हस्तांतरण के समय शेयरधारक-सदस्य बनने के लिए पहचान प्रमाण।

  • भूमि रिकॉर्ड या खेती का प्रमाण

    दिखाता है कि आप क्लस्टर के उत्पादन क्षेत्र में असली प्राथमिक उत्पादक हैं — इसी आधार पर सीबीबीओ सदस्य बनाता है।

  • पासपोर्ट साइज़ फोटो

    सदस्यता रजिस्टर और एफपीओ द्वारा जारी शेयर प्रमाणपत्र के लिए ज़रूरी।

  • बैंक पासबुक

    शेयर-राशि के भुगतान और एफपीओ से सदस्यों को होने वाले उपज-बिक्री भुगतान के लिए।

  • मेमोरेंडम व आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन (नए एफपीओ के लिए)

    सीबीबीओ किसानों के प्रवर्तक समूह के साथ मिलकर तैयार करता है, और रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़/सहकारी समितियों में दाखिल करता है।

  • सीबीबीओ आधार-सर्वेक्षण/व्यवहार्यता रिपोर्ट (नए एफपीओ के लिए)

    नए एफपीओ के पंजीकरण से पहले सीबीबीओ जो क्लस्टर सर्वेक्षण और व्यवसाय-योजना दस्तावेज़ तैयार करता है।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    क्लस्टर आवंटन

    मंत्रालय (डीए एंड एफडब्ल्यू) किसी उत्पादन क्लस्टर/ज़िले को तीन कार्यान्वयन एजेंसियों — एसएफएसी, नाबार्ड या एनसीडीसी — में से किसी एक को आवंटित करता है, जो उसके लिए एक सीबीबीओ नियुक्त करती है।

  2. 2

    सामुदायिक जुड़ाव

    सीबीबीओ क्लस्टर में गाँव-गाँव बैठकें और आधार-सर्वेक्षण करता है, एफपीओ क्या है यह समझाता है और इच्छुक किसानों को पहचानता है।

  3. 3

    प्रवर्तक समूह और व्यवसाय योजना

    प्रतिबद्ध किसानों का एक समूह प्रवर्तक निकाय बनाता है; सीबीबीओ क्लस्टर की चुनी हुई उपज के इर्द-गिर्द व्यवसाय योजना तैयार करता है।

  4. 4

    पंजीकरण

    एफपीओ को उत्पादक कंपनी (रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़) या सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत किया जाता है, जिसमें किसान संस्थापक शेयरधारक होते हैं।

  5. 5

    सदस्य के रूप में जुड़ना

    आप (या क्लस्टर का कोई भी किसान) शेयर खरीदकर जुड़ सकते हैं — या तो पंजीकरण के समय संस्थापक सदस्य के रूप में, या बाद में एफपीओ के बोर्ड के ज़रिए।

  6. 6

    सहायता शुरू होती है

    पंजीकरण के बाद एफपीओ इक्विटी अनुदान ले सकता है, ऋण-गारंटी वाले कर्ज़ के लिए आवेदन कर सकता है, और पाँच साल तक सीबीबीओ का सहयोग पा सकता है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • सीसीईए मंज़ूरी

    19 फ़रवरी 2020

  • योजना का शुभारंभ

    29 फ़रवरी 2020

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चित्रकूट, उत्तर प्रदेश से शुभारंभ

  • मूल गठन अवधि

    2019-20 से 2023-24

    गठन के लिए ₹4,496 करोड़ परिव्यय, साथ ही 2024-25 से 2027-28 तक 5-वर्षीय सहयोग के लिए ₹2,369 करोड़ की अतिरिक्त प्रतिबद्धता

  • 10,000 एफपीओ का लक्ष्य पूरा

    24 फ़रवरी 2025

    10,000वाँ एफपीओ बिहार के खगड़िया ज़िले में पंजीकृत (मक्का, केला, धान)

  • वित्तीय सहायता/सहयोग जारी रहेगा

    2027-28 तक

    हर एफपीओ के गठन वर्ष से पाँच साल का सीबीबीओ सहयोग

  • तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए

    10 अगस्त 2026

    sfacindia.com और pib.gov.in से

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आप एक प्राथमिक कृषि उत्पादक हैं — किसान, उत्पादक, या पशुपालन/मत्स्य उत्पादक — न कि केवल व्यापारी या इनपुट डीलर?
  2. 2.क्या आपके ब्लॉक या क्लस्टर में कोई सक्रिय सीबीबीओ, या पहले से पंजीकृत एफपीओ काम कर रहा है?
  3. 3.अगर आप नया एफपीओ बनाना चाहते हैं, तो क्या मैदानी क्षेत्र में कम से कम 300 किसानों (पहाड़ी/पूर्वोत्तर/आदिवासी/रेगिस्तानी क्षेत्रों में 100) को जोड़ा जा सकता है?
  4. 4.क्या आप कम से कम एक शेयर खरीदकर पंजीकृत शेयरधारक-सदस्य बनने के इच्छुक हैं — न कि केवल बाहरी व्यक्ति के रूप में एफपीओ से इनपुट खरीदना या उपज बेचना?
  5. 5.क्या एफपीओ उत्पादक कंपनी (कंपनी अधिनियम) या सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत है या होगा, जिसके शेयरधारक प्राथमिक उत्पादक हों?
  6. 6.क्या इस एफपीओ को इस योजना या पहले की किसी एसएफएसी योजना के तहत पहले एक बार इक्विटी अनुदान और/या ऋण-गारंटी मिल चुकी है?

6 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) क्या है?

एफपीओ किसानों की अपनी कंपनी या सहकारी समिति है, जिसके शेयरधारक-सदस्य खुद किसान होते हैं। यह थोक में इनपुट खरीदती है, उपज इकट्ठा करती है, और सामूहिक रूप से बेचती है ताकि सदस्यों को अकेले बेचने से बेहतर दाम मिलें।

"10,000 एफपीओ के गठन एवं संवर्धन" योजना क्या है?

यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे कैबिनेट ने 19 फ़रवरी 2020 को मंज़ूरी दी और 29 फ़रवरी 2020 को शुभारंभ हुआ, ₹6,865 करोड़ के परिव्यय के साथ 10,000 नए एफपीओ बनाने और हर एक को पाँच साल तक सहारा देने के लिए। इसे एसएफएसी, नाबार्ड और एनसीडीसी क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठनों (सीबीबीओ) के ज़रिए लागू करते हैं।

सीबीबीओ क्या है?

क्लस्टर आधारित व्यवसाय संगठन (सीबीबीओ) एक पेशेवर संस्था है जिसे एसएफएसी, नाबार्ड या एनसीडीसी किसी खास क्लस्टर के लिए नियुक्त करती है। यह किसानों को जोड़ती है, व्यवसाय योजना बनाती है, एफपीओ का पंजीकरण करवाती है, और फिर पाँच साल तक साथ रहती है — बोर्ड को प्रशिक्षण देना, इनपुट आपूर्तिकर्ता जोड़ना और खरीदार ढूँढना।

एफपीओ को कितना इक्विटी अनुदान मिलता है?

प्रति किसान-सदस्य ₹2,000 तक का मिलान इक्विटी अनुदान, प्रति एफपीओ अधिकतम ₹15 लाख। यह एफपीओ को उसकी अपनी पूँजी मज़बूत करने के लिए दिया जाता है, किसी सदस्य के व्यक्तिगत बैंक खाते में नहीं।

ऋण-गारंटी क्या है और यह कितना कवर करती है?

यह किसी योग्य बैंक/ऋणदाता संस्था से लिए गए प्रति एफपीओ ₹2 करोड़ तक के प्रोजेक्ट लोन को कवर करती है, ताकि एफपीओ बिना गारंटी के कर्ज़ ले सके। ₹1 करोड़ से ऊपर और ₹2 करोड़ तक के लोन पर कवर लोन का 75% होता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹1.5 करोड़ है।

क्या एफपीओ के रोज़मर्रा के खर्च के लिए भी सहायता मिलती है?

हाँ। पहले तीन साल में प्रति एफपीओ अधिकतम ₹18 लाख (या वास्तविक लागत, जो भी कम हो) का प्रबंधन-लागत सहयोग मिलता है — मुख्यतः सीईओ/मैनेजर का वेतन देने और दफ़्तर चलाने के लिए, जब तक एफपीओ खुद कमाना शुरू न कर दे।

मौजूदा एफपीओ से कैसे जुड़ें?

अपने ब्लॉक या उत्पादन क्लस्टर में सक्रिय एफपीओ पता करें (स्थानीय सीबीबीओ, एसएफएसी/नाबार्ड/एनसीडीसी कार्यालय, या एफपीओ के बोर्ड से पूछें) और कम से कम एक शेयर खरीदकर शेयरधारक-सदस्य बनें। व्यक्तिगत सदस्यता के लिए कोई अलग ऑनलाइन "आवेदन" पोर्टल नहीं है — यह एफपीओ के बोर्ड के ज़रिए होता है।

अगर मेरे क्षेत्र में कोई एफपीओ नहीं है तो नया एफपीओ कैसे बनाएँ?

अपने राज्य के एसएफएसी, नाबार्ड या एनसीडीसी कार्यालय (जो भी आपके ज़िले को आवंटित हो) से संपर्क करें और पूछें कि क्या नया क्लस्टर व सीबीबीओ बनाया जा सकता है। सामान्यतः, नया एफपीओ बनाने से पहले योजना मैदानी क्षेत्र के क्लस्टर में कम से कम 300, या पहाड़ी/पूर्वोत्तर/आदिवासी/रेगिस्तानी क्षेत्रों में 100 इच्छुक किसान देखती है।

एफपीओ का सदस्य कौन बन सकता है?

क्लस्टर के उत्पादन क्षेत्र के प्राथमिक उत्पादक — किसान, उत्पादक, या पशुपालन/मत्स्य उत्पादक। अन्य पंजीकृत उत्पादक संस्थाएँ भी सदस्यता ले सकती हैं। व्यापारी और इनपुट डीलर, जो खुद उत्पादक नहीं हैं, इसके इच्छित सदस्य नहीं हैं।

क्या इक्विटी अनुदान या ऋण-गारंटी मुझे व्यक्तिगत रूप से मिलती है?

नहीं। दोनों एफपीओ को कंपनी/सहकारी समिति के रूप में मिलते हैं, किसी एक किसान के खाते में नहीं। इसीलिए इस योजना का किसान के लिए कोई तय सालाना नकद लाभ नहीं है — फ़ायदा एफपीओ की मज़बूत पूँजी, सस्ते कर्ज़ और बेहतर मोलभाव क्षमता के ज़रिए परोक्ष रूप से मिलता है।

मेरे राज्य में यह योजना कौन सी एजेंसी लागू करती है?

मंत्रालय क्लस्टर/ज़िले तीन कार्यान्वयन एजेंसियों — एसएफएसी, नाबार्ड और एनसीडीसी — के बीच बाँटता है। मुख्य योजना पृष्ठ पर हर ज़िले को उसकी एजेंसी से जोड़ती कोई एक सूची सार्वजनिक नहीं है; अपने नज़दीकी एसएफएसी, नाबार्ड या एनसीडीसी राज्य कार्यालय, या ज़िला कृषि कार्यालय से पूछें कि आपका क्षेत्र किसके अंतर्गत आता है।

क्या 10,000 एफपीओ का लक्ष्य पूरा हो चुका है?

हाँ। 10,000वाँ एफपीओ 24 फ़रवरी 2025 को बिहार के खगड़िया ज़िले में पंजीकृत हुआ, जो मक्का, केला और धान पर केंद्रित है। पहले बन चुके एफपीओ के लिए वित्तीय सहायता और पाँच साल का सीबीबीओ सहयोग 2027-28 तक जारी रहेगा।

यह पीएम-किसान से कैसे अलग है?

पीएम-किसान हर साल ₹6,000 सीधे किसी भूमिधारक किसान परिवार के बैंक खाते में भेजती है। यह योजना किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि सामूहिक इकाई — एफपीओ — को फ़ंड करती है; इक्विटी अनुदान, ऋण-गारंटी और प्रबंधन-लागत सहयोग सब पंजीकृत एफपीओ को मिलते हैं, और किसान को फ़ायदा उसका शेयरधारक-सदस्य बनकर परोक्ष रूप से मिलता है।

क्या एफपीओ से जुड़ने की कोई फ़ीस है?

सदस्य बनने के लिए आप जो शेयर खरीदते हैं उसका भुगतान करना होता है (आमतौर पर कुछ सौ रुपये, एफपीओ खुद तय करता है) — किसी भी सहकारी समिति में हिस्सेदारी खरीदने जैसा। सदस्यता के लिए सरकार या सीबीबीओ को कोई फ़ीस नहीं देनी होती।

5 साल के सीबीबीओ सहयोग के बाद क्या होता है?

सीबीबीओ का सघन सहयोग (व्यवसाय योजना, बाज़ार जुड़ाव, प्रशिक्षण) एफपीओ के गठन से पाँच साल तक रहता है, और प्रबंधन-लागत सहयोग पहले तीन साल तक सीमित है। उसके बाद एफपीओ को अपनी आय पर चलना होता है, हालाँकि वह किसी भी पंजीकृत उत्पादक कंपनी की तरह अन्य योजनाओं और बैंक कर्ज़ का लाभ ले सकता है।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन 011-26966017 ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।