प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम)
Pradhan Mantri Janjatiya Vikas Mission (PMJVM)
आदिवासी लघु वनोपज संग्राहकों को वन धन विकास केंद्रों में जोड़कर प्रशिक्षण, प्रसंस्करण व बाज़ार पहुँच देती है, 87 अधिसूचित वनोपज वस्तुओं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ, ताकि तय दर से नीचे मजबूरी में बेचना कभी न पड़े।
- परिव्यय
- ₹1,612 करोड़ (2021-22 से 2025-26)
- मंज़ूर वन धन विकास केंद्र
- 4,712+
- VDVK ढाँचा
- ~15 SHG (न्यूनतम 60% ST सदस्य)
- MSP अधिसूचित
- 87 वनोपज वस्तुओं पर
- MSP ख़रीद (संचयी)
- ~2.68 लाख टन, ₹693.98 करोड़ मूल्य की
- क्रियान्वयन एजेंसी
- ट्राइफेड, राज्य नोडल विभागों के ज़रिए
- कवरेज
- 25 राज्य व 3 केंद्र शासित प्रदेश
त्वरित सारांश
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त्वरित सारांश
प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) जनजातीय कार्य मंत्रालय की वह योजना है जो एक आदिवासी लघु वनोपज (MFP) संग्राहक — जो जंगल से महुआ, तेंदू पत्ता, साल बीज, शहद, बांस, औषधीय जड़ी-बूटी वगैरह इकट्ठा करता है — को बिचौलिए को मजबूरी में बेचने वाले के बजाय एक छोटा उद्यमी बनाती है। इसका मुख्य उपकरण वन धन विकास केंद्र (VDVK) है: क़रीब 15 वन धन स्वयं सहायता समूहों से बना क्लस्टर, हर एक में 20 सदस्य तक, कम से कम 60% अनुसूचित जनजाति के, जो साथ मिलकर सदस्यों की जुटाई उपज को बेचने से पहले साफ़ करते, ग्रेड करते, प्राथमिक प्रसंस्करण करते, पैक करते व ब्रांड करते हैं। एक अलग हिस्सा 87 अधिसूचित वनोपज वस्तुओं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करता है, ताकि खुला बाज़ार उस दर से नीचे गिरते ही राज्य एजेंसी को उसी मूल्य पर ख़रीदना पड़े।
पीएमजेवीएम के लिए आप व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदक के रूप में आवेदन नहीं करते। एक संग्राहक अपने इलाक़े में बने वन धन स्वयं सहायता समूह का सदस्य बनकर जुड़ता है — आमतौर पर ज़िला प्रशासन, ट्राइफेड या राज्य जनजातीय कल्याण/वन विभाग द्वारा संगठित — और वह SHG अन्य के साथ मिलकर एक वन धन विकास केंद्र बनाता है, जिसे प्रशिक्षण, कार्यशील पूँजी व प्रसंस्करण उपकरण मिलते हैं। 2013-14 में शुरू हुई पूर्ववर्ती MSP-वनोपज व्यवस्था के बाद से, राज्य सरकारों ने इस न्यूनतम-मूल्य सुरक्षा तहत क़रीब 2.68 लाख टन वनोपज ख़रीदी है, जिसकी क़ीमत ₹693.98 करोड़ है। मिशन 2021-22 से 2025-26 तक का पाँच-वर्षीय चक्र चलाता है, ₹1,612 करोड़ के मंज़ूर परिव्यय के साथ, राज्य नोडल विभागों व राज्य क्रियान्वयन एजेंसियों के ज़रिए 25 राज्यों व 3 केंद्र शासित प्रदेशों में लागू।
परिचय
पीएमजेवीएम 2021-22 में दो पहले की योजनाओं को मिलाकर शुरू हुई: वन धन विकास योजना, जो क्लस्टर-स्तर पर प्रसंस्करण व विपणन क्षमता बनाती है, और न्यूनतम समर्थन मूल्य के ज़रिए लघु वनोपज विपणन तंत्र, जो संग्राहक की क़ीमत की रक्षा करता है। मिश्रित मिशन एक ही श्रृंखला की तरह काम करने के लिए बनाया गया है — बाज़ार गिरने पर संग्राहक की उपज को तय दर पर सुरक्षा मिलती है, और साथ ही उसे वन धन विकास केंद्र से गुज़ारा जाता है ताकि कम से कम कुछ हिस्सा बेचने से पहले साफ़ हो, ग्रेड हो व मूल्य-वर्धित हो, कच्चा माल सबसे कम दाम पर बेचने के बजाय।
एक वन धन विकास केंद्र वन धन स्वयं सहायता समूहों (VDSHG) से बनता है — हर एक में 20 सदस्य तक, न्यूनतम अनुसूचित जनजाति हिस्सेदारी के साथ, और अध्यक्ष व सचिव जैसे प्रमुख पद ST सदस्यों के लिए आरक्षित। क़रीब 15 ऐसे SHG, कुल मिलाकर लगभग 300 सदस्य, मिलकर एक VDVK बनाते हैं, जिसे प्राथमिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग व विपणन का प्रशिक्षण, साथ ही कार्यशील पूँजी व बुनियादी प्रसंस्करण उपकरण मिलते हैं। क़ीमत के पक्ष में, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने, ट्राइफेड में स्थित लघु वनोपज मूल्य निर्धारण आयोग की सिफ़ारिश पर, 87 ग़ैर-राष्ट्रीयकृत, ग़ैर-लकड़ी वनोपज वस्तुओं पर MSP अधिसूचित किया है। हर राज्य क्रियान्वयन एजेंसी के पास एक रिवॉल्विंग फंड रखा जाता है ताकि जब भी बाज़ार दाम MSP से नीचे गिरे, वह संग्राहकों से MSP पर वनोपज ख़रीद सके — ख़रीद व भुगतान ख़ुद राज्य एजेंसी के ज़रिए होते हैं, सीधे ट्राइफेड से नहीं।
मिशन हाट बाज़ार (आवधिक आदिवासी बाज़ार) व गोदामों को भी सहारा देता है ताकि स्थानीय बिक्री अवसंरचना मज़बूत हो। बताए गए आँकड़ों के अनुसार अब तक 4,712 से ज़्यादा वन धन विकास केंद्र मंज़ूर हो चुके हैं, उस हिस्से के लिए ₹642 करोड़ के परिव्यय के साथ, और 2013-14 में व्यवस्था शुरू होने के बाद से संचयी MSP ख़रीद क़रीब 2.68 लाख टन, ₹693.98 करोड़ मूल्य की है। मौजूदा पीएमजेवीएम चक्र 2021-22 से 2025-26 तक चलता है, कुल ₹1,612 करोड़ के मंज़ूर परिव्यय के साथ, राज्य नोडल विभागों व राज्य क्रियान्वयन एजेंसियों (राज्य जनजातीय विकास सहकारी समितियाँ या वन विकास निगम) के ज़रिए 25 राज्यों व 3 केंद्र शासित प्रदेशों में दिया जाता है।
योजना की मुख्य बातें
वन धन स्वयं सहायता समूह के इर्द-गिर्द बनी
एक संग्राहक 20 सदस्यों तक के समूह में जुड़ता है, कम से कम 60% अनुसूचित जनजाति — यही SHG, कोई व्यक्ति नहीं, वह इकाई है जिसे प्रशिक्षण, कार्यशील पूँजी व उपकरण मिलते हैं।
बेचने से पहले मूल्य जोड़ने वाला केंद्र
क़रीब 15 SHG मिलकर साझा प्रसंस्करण उपकरण वाला वन धन विकास केंद्र बनाते हैं — महुआ, तेंदू पत्ता, शहद, बांस व औषधीय जड़ी-बूटी वहाँ साफ़, ग्रेड व पैक होते हैं, पहले ख़रीदार को कच्चा बेचने के बजाय।
87 वनोपज वस्तुओं पर तय न्यूनतम दर
लघु वनोपज का MSP ट्राइफेड के लघु वनोपज मूल्य निर्धारण आयोग की सिफ़ारिश पर अधिसूचित होता है — जब बाज़ार उससे नीचे गिरे, राज्य क्रियान्वयन एजेंसी को उसी दर पर ख़रीदना ज़रूरी है।
सिर्फ़ अधिसूचित दर नहीं, असली ख़रीद का रिकॉर्ड
व्यवस्था शुरू होने के बाद से MSP सुरक्षा तहत क़रीब 2.68 लाख टन वनोपज, ₹693.98 करोड़ मूल्य की, असल में ख़रीदी जा चुकी है — तय दर सिर्फ़ घोषित नहीं, असल में चुकाई गई है।
स्थानीय बिक्री के लिए हाट बाज़ार व गोदाम
VDVK से अलग, मिशन आवधिक आदिवासी बाज़ारों (हाट बाज़ार) व गोदामों को भी फंड करता है, ताकि उपज को जुटाई जगह के पास ही बेचा व भंडारित किया जा सके।
प्रमुख घटक
राज्य स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से इनमें से चुनाव करते हैं — हर घटक की अपनी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया है, जहाँ अलग पेज मौजूद है वहाँ पूरी जानकारी उसी पर है।
वन धन विकास केंद्र (VDVK)
~15 वन धन SHG से बनी क्लस्टर-स्तरीय प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग व विपणन अवसंरचना, प्रशिक्षण व कार्यशील पूँजी सहायता सहित।
अपने इलाक़े के वन धन SHG में संगठित आदिवासी वनोपज संग्राहक
लघु वनोपज के लिए MSP
87 वनोपज वस्तुओं पर अधिसूचित न्यूनतम दर, हर राज्य क्रियान्वयन एजेंसी के पास रिवॉल्विंग फंड के साथ, जब भी बाज़ार दाम MSP से नीचे जाए तब ख़रीद के लिए।
किसी अधिसूचित वस्तु को बेचने वाला कोई भी संग्राहक, चाहे VDVK का सदस्य हो या नहीं
हाट बाज़ार व गोदाम
आवधिक आदिवासी बाज़ारों व स्थानीय भंडारण अवसंरचना के लिए सहायता, ताकि उपज को बेचने या सुरक्षित रखने के लिए दूर न जाना पड़े।
किसी समर्थित हाट बाज़ार या गोदाम स्थल के पास के आदिवासी समुदाय
आपको क्या मिलता है
ऐसी दर जिससे नीचे मजबूर नहीं किया जा सकता
किसी अधिसूचित वनोपज वस्तु पर, बाज़ार MSP से नीचे गिरते ही राज्य एजेंसी को उसी दर पर ख़रीदना ज़रूरी है — आपको बिचौलिए की पेशकश पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
प्रसंस्करण के मुनाफ़े का हिस्सा
VDVK के ज़रिए साफ़, ग्रेडेड या हल्के प्रसंस्कृत उपज बेचना, वही वस्तु पहले गुज़रने वाले व्यापारी को कच्ची बेचने से ज़्यादा कमाई देता है।
प्रशिक्षण व उपकरण जो आगे भी काम आते हैं
VDVK को दिए गए प्रसंस्करण, पैकेजिंग व विपणन कौशल व उपकरण अगले सीज़नों के लिए भी समूह के पास रहते हैं, एकबारगी भुगतान नहीं।
सामूहिक सौदेबाज़ी की ताक़त
क़रीब 300 सदस्यों वाले केंद्र के रूप में बेचना, किसी एक अकेले संग्राहक की सौदेबाज़ी से थोक ख़रीदार पर ज़्यादा असर डालता है।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- आप अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं और महुआ, तेंदू पत्ता, साल बीज, शहद, बांस, लाख या औषधीय जड़ी-बूटी जैसा लघु वनोपज इकट्ठा करते हैं
- आप अपने इलाक़े में 20 सदस्यों तक के वन धन स्वयं सहायता समूह में जुड़ने (या बनाने में मदद करने) को तैयार हैं
- आप उन 25 राज्यों या 3 केंद्र शासित प्रदेशों में से किसी एक में रहते हैं जहाँ मिशन लागू है
- आप 87 MSP-अधिसूचित वनोपज वस्तुओं में से कोई एक बेचते हैं — औपचारिक VDVK के बाहर भी, अपनी राज्य क्रियान्वयन एजेंसी के ख़रीद केंद्र से तय दर पा सकते हैं
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- ग़ैर-आदिवासी संग्राहक या व्यापारी — वन धन SHG सदस्यता में न्यूनतम अनुसूचित जनजाति हिस्सेदारी ज़रूरी है, प्रमुख पद ST सदस्यों के लिए आरक्षित
- व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन की उम्मीद — नामांकन ज़िला/राज्य द्वारा संगठित SHG से होता है, किसी एक संग्राहक के लिए सीधे पोर्टल फॉर्म से नहीं
- अधिसूचित MSP सूची में न शामिल वनोपज वस्तु — दर-सुरक्षा गारंटी सिर्फ़ 87 अधिसूचित ग़ैर-राष्ट्रीयकृत, ग़ैर-लकड़ी वस्तुओं पर लागू होती है
- बिना समूह ढाँचे के नक़द अनुदान की उम्मीद — VDVK सहायता (प्रशिक्षण, उपकरण, कार्यशील पूँजी) स्वयं सहायता समूह/केंद्र को जाती है, किसी एक संग्राहक के खाते में नहीं
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र
वन धन SHG सदस्यता व प्रमुख पदों में आरक्षित ST हिस्सेदारी के लिए पात्रता स्थापित करता है।
वन धन SHG सदस्यता रिकॉर्ड
ज़िला/राज्य द्वारा संगठित स्वयं सहायता समूह में नामांकन का प्रमाण, जो VDVK प्रशिक्षण, उपकरण व कार्यशील पूँजी में प्रवेश का रास्ता है।
वनोपज संग्रहण/बिक्री रिकॉर्ड
जब आप कोई अधिसूचित वस्तु MSP पर बेचते हैं तो राज्य क्रियान्वयन एजेंसी के ख़रीद केंद्र पर रखा जाता है, ताकि भुगतान संग्राहक के रूप में आप तक वापस ट्रैक हो सके।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
अपने इलाक़े में वन धन SHG की जाँच करें
अपने ज़िला जनजातीय कल्याण कार्यालय, ग्राम पंचायत या स्थानीय ट्राइफेड संपर्क से पूछें कि क्या पास में पहले से कोई वन धन स्वयं सहायता समूह है।
- 2
SHG में जुड़ें या बनाने में मदद करें
20 सदस्यों तक, ज़रूरी अनुसूचित जनजाति हिस्सेदारी के साथ, एक वन धन SHG बनाते हैं; क़रीब 15 SHG मिलकर एक वन धन विकास केंद्र बनाते हैं।
- 3
प्रशिक्षण लें व उपकरण इस्तेमाल करें
VDVK प्राथमिक प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग व विपणन का प्रशिक्षण, साथ ही समूह के लिए कार्यशील पूँजी व बुनियादी उपकरण देता है।
- 4
केंद्र के ज़रिए प्रसंस्कृत उपज बेचें
साफ़, ग्रेडेड व पैक की गई उपज VDVK के ज़रिए सामूहिक रूप से विपणित व ब्रांडेड होती है, हर सदस्य अलग-अलग कच्चा माल बेचने के बजाय।
- 5
अधिसूचित वस्तुओं के लिए फिर भी MSP का फ़ायदा लें
VDVK बिक्री के बाहर भी, कोई अधिसूचित वनोपज वस्तु अपनी राज्य क्रियान्वयन एजेंसी के ख़रीद केंद्र पर ले जाएँ और खुले बाज़ार दाम MSP से नीचे होने पर तय दर पाएँ।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
पीएमजेवीएम शुरू (मिश्रित योजना)
2021-22
पहले की वन धन विकास योजना व MSP-वनोपज व्यवस्था को मिलाकर
मौजूदा मिशन चक्र
2021-22 से 2025-26
पाँच-वर्षीय अवधि के लिए ₹1,612 करोड़ का मंज़ूर परिव्यय
MSP-वनोपज व्यवस्था की शुरुआत
2013-14
तब से संचयी ख़रीद: ~2.68 लाख टन, ₹693.98 करोड़ मूल्य की
तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए
6 सितंबर 2026
पीएमजेवीएम परिचालन दिशा-निर्देशों (ट्राइफेड), पीएमजेवीएम प्रगति पर PIB विज्ञप्तियों, तथा वन धन विकास केंद्रों व MSP ख़रीद पर जनजातीय कार्य मंत्रालय के संसदीय जवाबों के आधार पर
अपनी पात्रता जाँचें
सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।
3 में से 0 जवाब दिए
यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीएमजेवीएम असल में किसके लिए है?
आदिवासी लघु वनोपज संग्राहक — जो जंगल से महुआ, तेंदू पत्ता, साल बीज, शहद, बांस, लाख या औषधीय जड़ी-बूटी इकट्ठा करते हैं — वन धन स्वयं सहायता समूहों में संगठित, और 87 MSP-अधिसूचित वस्तुओं में से कोई एक बेचने वाला कोई भी वनोपज संग्राहक।
मैं वन धन विकास केंद्र में कैसे जुड़ूँ?
आप 20 सदस्यों तक के वन धन स्वयं सहायता समूह में जुड़ते हैं, जो अपने ज़िला जनजातीय कल्याण कार्यालय, ग्राम पंचायत या स्थानीय ट्राइफेड संपर्क के साथ बनता है। क़रीब 15 ऐसे SHG मिलकर एक VDVK बनाते हैं। VDVK सदस्यता के लिए कोई व्यक्तिगत ऑनलाइन आवेदन नहीं है।
वनोपज का MSP क्या है और मुझे कैसे मिलेगा?
87 लघु वनोपज वस्तुओं पर अधिसूचित न्यूनतम समर्थन मूल्य। अगर इनमें से किसी वस्तु का खुला बाज़ार दाम MSP से नीचे गिर जाए, तो आपकी राज्य क्रियान्वयन एजेंसी को अपने ख़रीद केंद्रों से आपसे MSP पर ख़रीदना ज़रूरी है — यह चाहे आप VDVK के सदस्य हों या नहीं, लागू होता है।
क्या पीएमजेवीएम संग्राहक को सीधे नक़द देती है?
MSP ख़रीद संग्राहक को तय दर पर बेची गई उपज के लिए सीधे भुगतान करती है। वन धन विकास केंद्र की सहायता — प्रशिक्षण, कार्यशील पूँजी, प्रसंस्करण उपकरण — एक इकाई के रूप में स्वयं सहायता समूह/केंद्र को जाती है, व्यक्तिगत नक़द अनुदान के रूप में नहीं।
क्या पीएमजेवीएम अब भी चल रही है?
हाँ। मौजूदा मिशन चक्र 2021-22 से 2025-26 तक चलता है, ₹1,612 करोड़ के मंज़ूर परिव्यय के साथ, और अब तक 4,712 से ज़्यादा वन धन विकास केंद्र मंज़ूर हो चुके हैं, कवर राज्यों में MSP ख़रीद जारी है।
वन धन विकास केंद्र व MSP व्यवस्था में क्या फ़र्क़ है?
VDVK मूल्य जोड़ने के बारे में है — स्वयं सहायता समूह क्लस्टर के ज़रिए वनोपज को साफ़, ग्रेड, पैक व सामूहिक रूप से विपणित करना। MSP व्यवस्था 87 अधिसूचित वस्तुओं पर एक अलग दर-सुरक्षा गारंटी है, जिसे राज्य एजेंसी को मानना ही है, चाहे बेचने वाला VDVK का सदस्य हो या नहीं।
मेरे गाँव में अभी वन धन केंद्र नहीं है — क्या मुझे फिर भी फ़ायदा मिल सकता है?
हाँ, MSP वस्तुओं के लिए: अपनी उपज नज़दीकी राज्य क्रियान्वयन एजेंसी ख़रीद केंद्र ले जाएँ और बाज़ार दाम MSP से नीचे होने पर तय दर पाएँ। VDVK-स्तरीय प्रशिक्षण व उपकरण के लिए, नया स्वयं सहायता समूह बनाने के बारे में अपने ज़िला जनजातीय कल्याण कार्यालय से पूछें।
हर वस्तु का MSP रेट कौन तय करता है?
जनजातीय कार्य मंत्रालय MSP को ट्राइफेड में स्थित लघु वनोपज मूल्य निर्धारण आयोग की सिफ़ारिश पर अधिसूचित करता है।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
