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आसानअपडेट 5 सितंबर 2026

इमली (टैमरिंड)

Tamarindus indica

एक मज़बूत, बहुत लंबी उम्र वाला सदाबहार पेड़ जो ख़राब, सूखी, यहाँ तक कि लवणीय ज़मीन पर भी उगता है जिसे बाक़ी फल-पेड़ ठुकरा देते — भारत दुनिया का सबसे बड़ा इमली उत्पादक है, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व महाराष्ट्र आगे — जहाँ सब कुछ बदल देने वाला एक फ़ैसला है बीज-पेड़ के बजाय एक कलमी उन्नत किस्म (PKM-1, योगेश्वरी आदि) लगाना, जो फल का इंतज़ार 10–12 साल से घटाकर लगभग 4–5 कर देता और पेड़ को छिड़काव व तुड़ाई लायक़ छोटा रखता है।

A cluster of brown, curved tamarind pods hanging on the tree among green leaves

त्वरित सारांश

इस पेज की मुख्य बातें लगभग दो मिनट में — पढ़ें या सुनें।

त्वरित सारांश

इमली एक बड़ा, मज़बूत सदाबहार पेड़ है जो अपने भूरे, खट्टे फली-गूदे के लिए उगाया जाता, जो लगभग हर भारतीय रसोई में इस्तेमाल होता और गूदा, सांद्र (concentrate) व इमली बीज पाउडर के रूप में बिकता है। भारत किसी भी अन्य देश से ज़्यादा इमली उगाता है, ज़्यादातर तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में, लगभग पूरी बारानी।

यह पेड़ अपनी कम माँग के लिए मशहूर है। यह उथली, कंकड़ीली, सूखी व हल्की नमक-प्रभावित ज़मीन पर उगता है जहाँ बाक़ी फल-पेड़ नाकाम रहते, फलियाँ अच्छी तरह पकाने को एक लंबा सूखा दौर चाहिए, और जमने के बाद बहुत कम पानी या देखभाल माँगता है। यह सिर्फ़ छोटा रहते पाला-संवेदनशील है, और एक परिपक्व पेड़ सौ साल या उससे ज़्यादा फल देता रह सकता है।

सबसे ज़्यादा मायने रखने वाला एक फ़ैसला है रोपण-सामग्री। बीज से उगी इमली फल देने में 10–15 साल लेती और एक विशाल पेड़ बन जाती जिसे छिड़कना या काटना मुश्किल है। एक उन्नत किस्म का कलमी पौधा — तमिलनाडु से PKM-1 व PKM-2, महाराष्ट्र से योगेश्वरी, प्रतिष्ठान व अजंता, धारवाड़ से DTS-1, गुजरात से गोमा प्रतीक — लगभग 4–5 साल में फल देता, छोटा रहता, और एक ज्ञात गूदा-रंग व स्वाद देता जिसके लिए ख़रीदार भुगतान करते हैं।

मुख्य समस्याएँ फूल के समय व फलियों पर आतीं: कली-वेबर व फली-छेदक पेड़ पर फ़सल को नुक़सान पहुँचाते, और इमली बीज भृंग भंडारित फलियों पर हमला करता। फूल के समय सही छिड़काव, छिलका कुरकुरा होते ही समय पर तुड़ाई, और सही सुखाई व हवाबंद भंडारण अधिकांश मूल्य बचा लेते हैं।

फसल प्रकार
बारहमासी अर्ध-सदाबहार फलदार पेड़
सीज़न
मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में रोपाई; तुड़ाई जनवरी–अप्रैल
उपयुक्त राज्य
तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश
फलन तक
4–5 साल (कलमी); 10–15 साल (बीज-पेड़)
जल आवश्यकता
कम; जमने के बाद बारानी, फलियाँ पकाने को एक सूखा दौर चाहिए
तापमान
उष्ण–उपोष्ण; परिपक्व पेड़ 0–47°C सहते, युवा पौध पाला-संवेदनशील
मिट्टी
गहरी दोमट सबसे अच्छी पर उथली, कंकड़ीली, सूखी व हल्की लवणीय मिट्टी भी सहती; pH 5.5–8.5
कठिनाई स्तर
आसान (फूल पर कली-वेबर व फली-छेदक, भंडारण में बीज भृंग)
अपेक्षित उपज
प्रति परिपक्व कलमी पेड़ प्रति साल 150–500 किग्रा फलियाँ
मुख्य जोखिम
कलमी उन्नत किस्म के बजाय बीज-पौधा लगाना

परिचय

इमली (Tamarindus indica) एक बड़ा, मज़बूत, अर्ध-सदाबहार पेड़ है जो अपने भूरे, खट्टे फली-गूदे के लिए उगाया जाता। भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, फ़सल तमिलनाडु (आगे रहने वाला राज्य), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व ओडिशा में केंद्रित। लगभग पूरी बारानी उगाई जाती, खेत की मेड़ों, बंजर ज़मीन, सड़क किनारे व बग़ीचों में।

यह पेड़ ठीक इसलिए मूल्यवान है क्योंकि यह नख़रे नहीं करता। यह उथली, कंकड़ीली, सूखी व हल्की लवणीय-क्षारीय ज़मीन पर भी उगता है जहाँ आम या नींबू नाकाम रहेंगे, परिपक्व होने पर व्यापक तापमान-रेंज सहता, और अपनी फलियाँ ठीक से पकाने-सुखाने को एक अलग सूखा मौसम चाहिए। यह सिर्फ़ युवा पौधे के रूप में पाला-संवेदनशील है; परिपक्व पेड़ हवा-रोधी है और सौ साल से ज़्यादा फल दे सकता है।

बीज-पौधे व कलमी उन्नत किस्म के बीच चुनाव पूरी अर्थव्यवस्था बदल देता है। बीज-पेड़ फल देने में 10–15 साल लेता व बहुत बड़ा होता; PKM-1, PKM-2, योगेश्वरी, प्रतिष्ठान, अजंता, DTS-1 या गोमा प्रतीक जैसी जारी किस्म का कलमी पौधा लगभग 4–5 साल में फल देता, छिड़काव व तुड़ाई लायक़ आकार में रहता, और एक स्थिर गूदा-रंग व अम्लता देता जिसके लिए प्रसंस्करणकर्ता व व्यापारी ज़्यादा दाम देते हैं।

फसल की समयरेखा, बुवाई से कटाई तक

पूरे सीज़न की एक झलक — हर अवस्था की पूरी जानकारी के लिए नीचे संबंधित सेक्शन पर जाएँ।

  1. वर्ष 0

    रोपाई

    नामित किस्म का कलमी पौधा मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में बड़े गोबर-खाद-भरे गड्ढे में लगाएँ, हवा के विरुद्ध सहारा दें व बारिश सँभालने तक थाला-सिंचाई करें।

  2. वर्ष 1–3

    जमाव व साधना

    युवा पेड़ को लगभग 0.75–1 मी तक एक साफ़ तने पर साधें, फिर 3–4 अच्छी दूरी वाली मुख्य शाखाएँ रहने दें; इसे पाले व चराई से बचाएँ और हर गर्मी कुछ जीवन-रक्षक सिंचाई दें।

  3. वर्ष 4–5

    पहला फलन

    कलमी उन्नत किस्म फूलना व फलियों की छोटी फ़सल बंधना शुरू करती; बीज-पेड़ 10–15 साल तक कुछ काम का नहीं देता।

  4. अप्रैल–जून

    फूल

    हल्के पीले, लाल-धारीदार फूल कई हफ़्तों में खुलते; यह कली-वेबर नियंत्रण व किसी भी उपलब्ध सिंचाई के लिए मुख्य खिड़की है।

  5. जून–फ़रवरी

    फली-विकास

    फलियाँ पेड़ पर भरने व पकने में 8–10 महीने लेतीं, गूदा हरे व लसदार से भूरा व सख़्त होता जैसे-जैसे एक लंबा सूखा दौर उसे पकाता है।

  6. जनवरी–अप्रैल

    तुड़ाई

    फलियाँ तब तोड़ी जातीं जब छिलका कुरकुरा हो व गूदा पूरी तरह भूरा हो — आमतौर फ़रवरी से मार्च — या तो परिपक्व फलियाँ हाथ से चुनकर या पूरे पेड़ की एक बार हिलाकर तुड़ाई से।

उपयुक्त राज्य

जिन राज्यों में यह फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, वे नीचे हाइलाइट हैं। आपके खेत के लिए अंतिम सलाह हमेशा आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही देगा।

  • जम्मू और कश्मीर
  • हिमाचल प्रदेश
  • पंजाब
  • उत्तराखंड
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • उत्तर प्रदेश
  • राजस्थान
  • बिहार
  • झारखंड
  • पश्चिम बंगाल
  • सिक्किम
  • असम
  • अरुणाचल प्रदेश
  • मेघालय
  • नागालैंड
  • मणिपुर
  • मिज़ोरम
  • त्रिपुरा
  • गुजरात
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • महाराष्ट्र
  • ओडिशा
  • गोवा
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • कर्नाटक
  • केरल
  • तमिलनाडु
  • पुदुचेरी
  • लद्दाख
  • चंडीगढ़
  • लक्षद्वीप

यहाँ उगाई जाती है

जलवायु की ज़रूरतें

पेड़ की मज़बूती असली है पर सिर्फ़ जमाव के बाद काम करती — रोपाई के बाद के 2–3 साल फिर भी पाला-सुरक्षा, निराई व कुछ गर्मी-सिंचाई चाहते, इससे पहले कि पेड़ अपनी देखभाल ख़ुद कर सके।

  • आदर्श तापमान

    एक उष्ण से उपोष्ण पेड़। परिपक्व इमली बहुत व्यापक रेंज सहती है, लगभग 0°C से लेकर लगभग 47°C तक, और गर्म सूखी हवाएँ झेल लेती है। पर युवा कलमी पौधे पाले से मर या पिछड़ जाते और उत्तर व मध्य भारत में अपनी पहली दो-तीन सर्दियों में सुरक्षा चाहते हैं।

  • वर्षा

    कम जल-ज़रूरत। पेड़ साल भर 500–1500 मिमी पर अच्छा करता और जमने के बाद लगभग पूरी बारानी उगाया जाता। इसे फलियाँ पकते समय एक लंबा, सूखा, बारिश-रहित दौर ख़ासतौर चाहिए — फूल के समय या तुड़ाई के पास भारी बारिश फूल-गिरन, ख़राब बंधन और गहरे, ख़राब-गुणवत्ता या फफूँदी गूदे का कारण बनती है।

  • नमी

    फली-परिपक्वता व तुड़ाई के दौरान सूखा वातावरण पसंद करती। फूल के समय ऊँची नमी कली-वेबर, चूर्णिल आसिता व काली फफूँद को बढ़ावा देती है।

  • धूप

    भरपूर धूप। इमली एक बड़ा, फैलने वाला पेड़ है जिसे भीड़ या छाया नहीं मिलनी चाहिए; जल्दी उपज के लिए नज़दीकी रोपाई को बाद में छाँटना पड़ता है वरना छतरी का अंदरूनी हिस्सा ख़ाली व निष्फल हो जाता है।

मिट्टी की ज़रूरतें

गहरी मिट्टी बड़ा, तेज़ पेड़ उगाती, पर इमली का असली मूल्य यह है कि यह उथली, सूखी, कम-मूल्य ज़मीन को फलदार बग़ीचे में बदल देती — इसे उस तरह की ज़मीन से मिलाना, अपने सबसे अच्छे खेत से नहीं, ही मक़सद है।

  • उपयुक्त मिट्टी

    बहुत व्यापक रेंज की मिट्टी पर उगती — गहरी जलोढ़ व लाल दोमट सबसे अच्छी बढ़त देती, पर इमली उथली, कंकड़ीली, पथरीली, सूखी व हल्की लवणीय-क्षारीय ज़मीन पर भी सच में अच्छा करती है जहाँ अधिकांश फल-पेड़ उगाए ही नहीं जा सकते। यही बड़ी वजह है कि इसे जहाँ लगाया जाता वहाँ लगाया जाता।

  • pH स्तर

    व्यापक सहनशीलता, लगभग pH 5.5–8.5, अपनी सूखे-क्षेत्र पट्टी भर आम हल्की क्षारीय मिट्टी सहित।

  • जल निकासी

    अच्छी जल-निकासी चाहिए। पेड़ सूखा-सहनशील है पर बाढ़-सहनशील नहीं — नीचा, जलभराव-प्रवण स्थल जड़-सड़न व डाइबैक का कारण बनता, इसलिए ऊँची, अच्छी जल-निकासी वाली ज़मीन पर लगाएँ।

  • जैविक तत्व

    कम ज़रूरत। रोपाई पर गोबर-खाद से अच्छी तरह भरा गड्ढा युवा पेड़ को तैयार कर देता; ख़राब ज़मीन पर परिपक्व पेड़ सिर्फ़ सालाना खाद-खुराक व हल्के NPK घेरे से फल देता रहता है।

खेत की तैयारी

क्षेत्र चाहे जो हो, चार कदम वही रहते हैं — बस समय बुवाई के अनुसार बदलता है।

  1. 1

    दूरी चिह्नित करें व गड्ढे खोदें

    बीज-पेड़ बग़ीचे 10–12 मी दूरी पर (लगभग 70–100 पेड़/हेक्टेयर); कलमी उन्नत किस्में 6–8 मी नज़दीक, या जल्दी घनी रोपाई को 5 × 5 मी जो बाद में छाँटी जाती। 1 मी घन गड्ढे एक महीना पहले खोदकर मौसम में खुले छोड़ें।

  2. 2

    गड्ढे गोबर-खाद से भरें

    हर गड्ढा ऊपरी मिट्टी में 15–20 किग्रा अच्छी सड़ी गोबर-खाद, लगभग 1 किग्रा सिंगल सुपर फ़ॉस्फ़ेट और, दीमक-प्रवण इलाक़ों में, एक अनुशंसित मृदा-कीटनाशी मिलाकर भरें।

  3. 3

    हवा व पाले की योजना

    खुले स्थलों पर एक वायुरोधक पंक्ति की योजना बनाएँ; उत्तर व मध्य भारत के पाला-प्रवण इलाक़ों में युवा पौधे की पहली दो-तीन सर्दियों को घास-पलवार, फूस की ओट या ट्री-गार्ड तैयार रखें।

बीज की जानकारी

मुख्य किस्मों की तुलना — अवधि, उपज, रोग-प्रतिरोध या आप किस मक़सद से उगा रहे हैं, इसके आधार पर चुनें।

किस्मअवधिउपजरोग-प्रतिरोधसर्वश्रेष्ठ राज्यकिसके लिए उपयुक्त

PKM-1

भारत में सबसे व्यापक रूप से लगाई गई उन्नत इमली, TNAU की बाग़बानी अनुसंधान केंद्र, पेरियाकुलम द्वारा जारी। एक जल्दी-फलने वाली, भरपूर उपज देने वाली, अर्ध-बौनी कलमी किस्म, लाल-भूरे गूदे के साथ, जो जल्दी फलन में आती और छोटे आकार के पेड़ पर बहुत भारी फ़सल देती है।

वर्ष 4–5 से फलबहुत ऊँची — परिपक्व पेड़ आमतौर साल में 250+ किग्रा फलियाँ देतेकोई विशेष प्रतिरोध दावा नहीं; सामान्य कली-वेबर व फली-छेदक निगरानीतमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेशरसोई गूदा, सांद्र, घनी कलमी बग़ीचे

PKM-2

TNAU पेरियाकुलम का एक बाद का चयन, एक कलमी उन्नत किस्म जो लंबी फलियों व अच्छी गूदा-प्राप्ति के लिए मूल्यवान, उसी पट्टी में PKM-1 के विकल्प या साथी के रूप में लगाई जाती।

वर्ष 4–5 से फलऊँची; लंबी फलियाँ अच्छा गूदा-से-फली अनुपात देतींअलग दर्ज नहींतमिलनाडु, कर्नाटकरसोई गूदा, टेबल उपयोग, प्रसंस्करण

उरीगम

एक तमिलनाडु चयन जो असामान्य रूप से लंबी फलियों व मीठे, कम-खट्टे गूदे के लिए जाना जाता, जो इसे मानक खट्टी किस्मों के साथ एक टेबल-फल व श्रेष्ठ-गूदा पहचान देता है।

वर्ष 5–6 से फल (कलमी)अच्छी; सरासर वज़न से ज़्यादा फली-लंबाई व स्वाद के लिए क़ीमतीअलग दर्ज नहींतमिलनाडुटेबल उपयोग, श्रेष्ठ मीठा-सा गूदा

योगेश्वरी

गहरे लाल गूदे व ऊँची, नियमित उपज वाली एक प्रमुख महाराष्ट्र किस्म, मराठवाड़ा में व्यापक रूप से उगाई जाती और प्रसंस्करणकर्ताओं द्वारा उस मज़बूत रंग के लिए पसंद की जाती जो यह सॉस व सांद्र को देती है।

वर्ष 4–5 से फल (कलमी)ऊँची व नियमितअलग दर्ज नहींमहाराष्ट्र, कर्नाटकऔद्योगिक गूदा व सांद्र, रसोई उपयोग

प्रतिष्ठान

एक अर्ध-बौनी महाराष्ट्र रिलीज़ (MPKV, राहुरी) जिसका गूदा खट्टा-मीठा और ढाँचा सघन है जो नज़दीकी रोपाई व आसान तुड़ाई को सूट करता है।

वर्ष 4–5 से फल (कलमी)सघन पेड़ पर अच्छीअलग दर्ज नहींमहाराष्ट्रनज़दीकी दूरी वाले कलमी बग़ीचे, रसोई गूदा

DTS-1 (धारवाड़ इमली चयन-1)

कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ का एक चयन जिसका गूदा मीठा-सा व अच्छी गुणवत्ता का है, कर्नाटक सूखे-पट्टी के लिए एक टेबल-व-गूदा किस्म के रूप में बढ़ावा दिया गया।

वर्ष 5–6 से फल (कलमी)अच्छी; उपज जितना ही गूदा-गुणवत्ता के लिए चुनी गईअलग दर्ज नहींकर्नाटकटेबल उपयोग, कर्नाटक सूखे क्षेत्र में गुणवत्ता गूदा

गोमा प्रतीक

गर्म अर्ध-शुष्क पश्चिम के लिए विकसित एक ICAR-CIAH (गोधरा) रिलीज़ — एक बौनी, जल्दी-फलने वाली, ऊँची-उपज कलमी किस्म जो जल्दी फल देती और ख़राब, सूखी ज़मीन पर छोटी रहती है।

वर्ष 3–4 से फल (कलमी)अर्ध-शुष्क ज़मीन पर बौने पेड़ के लिए ऊँचीअलग दर्ज नहींगुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेशगर्म अर्ध-शुष्क बारानी बग़ीचे, जल्दी प्रतिफल

अजंता

राज्य की इमली पट्टी में योगेश्वरी के साथ उगाया जाने वाला एक महाराष्ट्र चयन, अच्छे रसोई गूदे की नियमित फ़सल देता।

वर्ष 4–5 से फल (कलमी)अच्छी व नियमितअलग दर्ज नहींमहाराष्ट्ररसोई व प्रसंस्करण गूदा
बीज दर
खेत की बीज-दर नहीं, रोपण-सामग्री से उगाई जाती: मानक बग़ीचे को 10–12 मी पर लगभग 70–100 कलमी पौधे प्रति हेक्टेयर, या घनी कलमी ब्लॉक को 5–8 मी पर 250–400 प्रति हेक्टेयर। बीज सिर्फ़ नर्सरी में मूलवृंत (rootstock) उगाने को इस्तेमाल होता — लगभग 400–500 ग्राम बीज एक हेक्टेयर कलम करने लायक़ पौध देता है।
प्रमाणित बीज
नामित, जारी किस्म के कलमी पौधे राज्य बाग़बानी विभाग नर्सरी, किसी ICAR संस्थान या पंजीकृत नर्सरी से ख़रीदें — यदि फल-बिक्री लक्ष्य है तो कभी अज्ञात बीज-पौधा न लगाएँ। बीज-पौधा देर से फल देता, प्रबंधन के लिए बहुत बड़ा होता, और अनिश्चित गूदा-रंग व स्वाद देता जो कम दाम पाता है।
दूरी
मानक बीज-पेड़ बग़ीचा 10–12 मी × 10–12 मी; कलमी उन्नत किस्में 6–8 मी; जल्दी घनी कलमी ब्लॉक 5 × 5 मी, छतरियाँ मिलते ही एक-एक पेड़ छोड़कर हटाए जाते।
बीज उपचार
मूलवृंत के लिए: नर्सरी में बोने से पहले बीज को 24 घंटे पानी में (या थोड़ी देर गुनगुने पानी में) भिगोएँ ताकि अंकुरण तेज़ व एक-समान हो। खेत-रोपाई पर, कलमी पौधे के जड़-गोले को ट्राइकोडर्मा या अनुशंसित जैव-फफूँदनाशी घोल में डुबोएँ और कलम-जोड़ मिट्टी से ऊपर रखें।

बुवाई गाइड

कलम-जोड़ को मिट्टी से मुक्त रखना और पहले दो साल मूलवृंत के फुटाव रगड़कर हटाना ही पक्का करता है कि जो पेड़ बढ़े वह वही किस्म हो जिसका आपने दाम दिया।

सबसे अच्छा समय
कलमी पौधे पहली पक्की मानसून बारिश, जून से जुलाई के साथ लगाएँ, ताकि पेड़ अपने पहले सूखे मौसम से पहले अच्छी जड़ पकड़े। पक्की-सिंचाई बग़ीचों में फ़रवरी-मार्च रोपाई भी होती है।
क़तार की दूरी
बीज-पेड़ को 10–12 मी; कलमी उन्नत किस्मों को 6–8 मी
पौधे की दूरी
पंक्ति-दूरी के बराबर (वर्गाकार रोपाई)
बुवाई की गहराई
पौधा इस तरह रखें कि जड़-कॉलर व कलम-जोड़ तैयार मिट्टी स्तर से ठीक ऊपर बैठें; मिट्टी दबाएँ और एक चौड़ा सिंचाई-थाला बनाएँ।
तरीक़ा
प्रति गड्ढा एक कलमी पौधा, हवा के विरुद्ध सहारा दें। कलम-जोड़ के नीचे से निकलने वाले किसी भी प्ररोह को दिखते ही हटाएँ, ताकि सारी बढ़वार उन्नत किस्म में जाए।

खाद कार्यक्रम

बुवाई के समय एक साथ पूरी खाद डालने से बँटी हुई मात्रा बेहतर है — खासकर नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या रिसकर बह जाता है।

  1. 1

    युवा पेड़ (फलन-पूर्व)

    वर्ष 1–4

    वर्ष 1 में प्रति पेड़ लगभग 100 ग्राम N, 50 ग्राम P व 75 ग्राम K, हर साल बढ़ाते हुए, मानसून की शुरुआत व अंत में दो खुराकों में बाँटकर, साथ में प्रति पेड़ प्रति साल 10–15 किग्रा गोबर-खाद थाले में मिलाकर।

  2. 2

    फलदार पेड़

    वर्ष 5 से, सालाना

    प्रति पूर्ण-विकसित फलदार पेड़ प्रति साल लगभग 500 ग्राम N, 250 ग्राम P व 500 ग्राम K, साथ में 25–50 किग्रा गोबर-खाद, फूल आने से ठीक पहले और फल-बंधन के बाद फिर से, छतरी-किनारे के नीचे एक घेरे में डालें।

  3. 3

    ख़राब ज़मीन पर सूक्ष्म-पोषक

    ज़रूरत अनुसार

    उथली, क्षारीय या बहुत ख़राब मिट्टी पर, फूल आने से पहले ज़िंक व बोरॉन का पर्ण-छिड़काव फूल-रुकाव व फली-बंधन सुधारता; मात्रा अपने KVK से पक्की करें।

सिंचाई कार्यक्रम

  1. 1. जमाव

    पहले 2–3 साल

    पहली दो-तीन गर्मियों में सूखे महीनों भर हर 10–15 दिन पानी दें; यही अकेली अवस्था है जब इमली को सच में सिंचाई चाहिए।

  2. 2. फलदार पेड़

    वर्ष 4 से

    ज़्यादातर बारानी। जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो, फूल व शुरुआती फली-बंधन पर एक-दो सिंचाई उपज बढ़ाती, पर फिर फलियाँ पकते समय पेड़ को सूखा छोड़ना चाहिए।

महत्वपूर्ण अवस्थाएँ

  • रोपाई के बाद पहले 2–3 साल
  • फूल व शुरुआती फली-बंधन

पानी बचाने के तरीक़े

  • इमली ख़ासतौर इसलिए उगाई जाती क्योंकि जमने के बाद इसे सिंचाई नहीं चाहिए — परिपक्व पेड़ के चारों ओर सिंचाई-समय-सारणी बनाना इसे बारानी ज़मीन पर लगाने का मक़सद ही हरा देता है।
  • पत्तियों या फ़सल-अवशेष की थाला-पलवार पेड़ को मिली थोड़ी बारिश रोकती और ज़रूरी जमाव-सिंचाइयों की संख्या घटाती है।
  • फलियाँ पकना शुरू होने से काफ़ी पहले सारी सिंचाई बंद करें — उस अवस्था में पानी गूदे को गहरा करता और उसकी बाज़ार-श्रेणी घटाता है।

खरपतवार प्रबंधन

जैविक नियंत्रण

  • पहले तीन साल हर युवा पेड़ के चारों ओर 1 मी घेरा साल में 2–3 बार गुड़ाई करके खरपतवार-मुक्त रखें; छतरी बंद होते ही यह अधिकांश खरपतवार ख़ुद छाँट देती है।
  • पहले 4–6 साल चौड़ी पंक्तियों के बीच एक छोटी अंतर-फ़सल — दलहन, मूँगफली, सब्ज़ी या चारा — उगाएँ ताकि ज़मीन से कमाई हो और पेड़ों के छोटे रहते खरपतवार दबे रहें।
  • लैंटाना व पार्थेनियम को बीज बनने से पहले काटें और कटी सामग्री थाला-पलवार के रूप में इस्तेमाल करें।

रासायनिक नियंत्रण

  • पहले 3–4 साल, बड़े बग़ीचे के अंतर-पंक्ति में एक लक्षित पोस्ट-इमरजेंस खरपतवारनाशी इस्तेमाल हो सकती, युवा पेड़ों से दूर रखकर; अधिकांश किसान हाथ व यांत्रिक निराई पर निर्भर करते हैं।
  • युवा कलमी पेड़ों के पास छिड़काव से पहले किसी भी खरपतवारनाशी को अपने स्थानीय KVK से पक्का करें।

पोषक तत्व की कमी की पहचान

हर पोषक तत्व की कमी पौधे पर असल में कैसी दिखती है — ताकि ग़लत स्प्रे करने से पहले आप कमी और रोग में फ़र्क़ कर सकें।

ध्यान देने योग्य रोग

लक्षण, संभावित कारण और असल में क्या इलाज करता है — सिर्फ़ किसी स्प्रे का नाम नहीं।

ध्यान देने योग्य कीट

नुक़सान दिखने से पहले क्या देखें, और रसायन से पहले जैविक विकल्प क्या हैं।

आम ग़लतियाँ जिनसे बचें

जो ग़लतियाँ किसानों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती हैं, खेत में जितनी बार दिखती हैं उसी क्रम में — हमेशा वैसे नहीं जैसा आप सोचें।

  1. 1

    कलमी उन्नत किस्म के बजाय एक अज्ञात बीज-पौधा लगाना।

    नुक़सान क्यों होता है

    बीज-पौधा फल देने में 10–15 साल लेता, छिड़काव या सुरक्षित तुड़ाई के लिए बहुत बड़ा पेड़ बनता, और अनिश्चित गूदा-रंग व अम्लता देता जो कम दाम बिकती — एक कलमी PKM-1 या योगेश्वरी छोटे पेड़ पर 4–5 साल में फल देती।

  2. 2

    कलमी पौधे पर मूलवृंत के फुटाव छोड़ना।

    नुक़सान क्यों होता है

    कलम-जोड़ के नीचे से आए प्ररोह जंगली मूलवृंत हैं, उन्नत किस्म नहीं; बढ़ने दिए तो वे क़ब्ज़ा कर लेते और पेड़ एक धीमे, विशाल बीज-पौधे में लौट जाता है।

  3. 3

    फलियाँ पकते समय सिंचाई करना।

    नुक़सान क्यों होता है

    इमली को फलियाँ पकाने को एक सूखा दौर चाहिए — परिपक्वता अवस्था पर पानी गूदे को गहरा करता, फफूँद को बढ़ावा देता और फ़सल को नीची दाम-श्रेणी में गिरा देता है।

  4. 4

    कली-वेबर के लिए फूल-अवस्था छिड़काव चूकना।

    नुक़सान क्यों होता है

    कली-वेबर फूलों को अपने जाल के अंदर फली बंधने से पहले नष्ट कर देता; यदि फूल शुरू होते ही इसे नियंत्रित न किया जाए तो उस फुटाव की अधिकांश फ़सल बस चली जाती है।

  5. 5

    फलियाँ बिना सही सुखाई व हवाबंद डिब्बों के भंडारित करना।

    नुक़सान क्यों होता है

    इमली बीज भृंग कम-सूखी, ढीली भंडारित फलियों में बढ़ता और महीनों में लॉट का बड़ा हिस्सा नष्ट कर सकता — धूप-सुखाई, बीज निकालना व हवाबंद भंडारण ही तुड़ाई बचाते हैं।

  6. 6

    उन्नत कलमी पेड़ बहुत नज़दीक लगाना और कभी न छाँटना।

    नुक़सान क्यों होता है

    एक 5 × 5 मी ब्लॉक अच्छी जल्दी उपज देता पर छतरियाँ जल्द मिल जातीं, हर पेड़ का अंदरूनी हिस्सा ख़ाली व निष्फल हो जाता, और रोग बढ़ता — शाखाएँ छूते ही एक-एक पेड़ छोड़कर हटाने पड़ते हैं।

कटाई

तब तुड़ाई करें जब फली-छिलका कुरकुरा हो व आसानी से चटके और अंदर गूदा पूरी तरह भूरा व सख़्त हो — आमतौर जनवरी से अप्रैल, फ़रवरी-मार्च में चरम पर। लंबे भंडारण की पूरी पकी फलियाँ तब तक छोड़ी जातीं जब छिलका सूखा व ढीला हो; ताज़े खट्टे बाज़ार की फलियाँ थोड़ा पहले तोड़ी जातीं।

तैयार होने के संकेत

  • दबाने पर फली-छिलका कुरकुरा व चटकता
  • गूदा पूरी तरह भूरा, हरा या लसदार नहीं
  • फलियाँ हल्के से खड़खड़ातीं और हल्की व सूखी लगतीं
  • कुछ फलियाँ स्वाभाविक रूप से गिरना शुरू

उपकरण

  • ऊँचे पेड़ों को हुक या कटर वाले लंबे तुड़ाई-डंडे
  • कलमी, नीचे-सिर वाले पेड़ों को सीढ़ियाँ व तुड़ाई-थैले
  • हिलाकर तुड़ाई को पेड़ के नीचे बिछाई तिरपाल
  • दस्ताने — फली-छिलके की धूल कुछ तोड़ने वालों की त्वचा में जलन करती है

अपेक्षित उपज

एक परिपक्व कलमी उन्नत पेड़ साल में लगभग 150–500 किग्रा फलियाँ देता है (PKM-1 आमतौर 250+ किग्रा); एक पूर्ण-विकसित बीज-पेड़ 150–200 किग्रा देता पर सिर्फ़ लगभग 12–15 साल से। सूखा, बीज-रहित गूदा ताज़े फली-वज़न का लगभग 30–40% होता है।

कटाई के बाद व भंडारण

  • भंडारण

    तुड़ाई बाद फलियाँ कई दिन धूप में सुखाएँ, फिर छिलका उतारकर रेशा हटाएँ। गूदा बीज सहित या बीज-रहित भंडारित किया जा सकता; बीज-रहित गूदा बेहतर टिकता है। इसे कड़े केक या गोलों में दबाएँ, लंबे भंडारण को थोड़ा नमक मिलाएँ, और इसे साफ़, सूखे, हवाबंद डिब्बों में पिछले सीज़न के माल से दूर रखें ताकि बीज भृंग बाहर रहे।

  • पैकेजिंग

    दबाए गूदा-केक खाद्य-श्रेणी लाइनदार बोरों या डिब्बों में पैक करें; नमी बाहर रखें। इमली बीज पाउडर व बीज अपने औद्योगिक ख़रीदारों को अलग बोरों में।

  • परिवहन

    सूखा गूदा बारिश व नमी से बचाकर भेजें। अधिकांश इमली कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश की APMC मंडियों से प्रसंस्करणकर्ताओं व व्यापारियों तक पहुँचती; श्रेणी (गूदा-रंग, सफ़ाई, नमी) दाम तय करती है।

  • भंडारण अवधि

    अच्छा सूखा, नमकीन, हवाबंद गूदा 8–12 महीने या उससे ज़्यादा टिकता; भंडारित लॉट में बीज-भृंग निकास-छेद जाँचें और नमी सोख चुके किसी भी लॉट को फिर धूप दें।

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मुनाफ़ा कैलकुलेटर

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पैसा कहाँ जाता है

नीचे कैलकुलेटर की डिफ़ॉल्ट लागत के अनुसार प्रति एकड़ कुल लागत में हर मद का हिस्सा — वहाँ अपने आँकड़े बदलने पर यह तस्वीर पूरी तरह आप पर लागू नहीं रहेगी, पर क्रम शायद ही बदलता है।

  • मज़दूरी30% (₹9,000)
  • ज़मीन का किराया23% (₹7,000)
  • खाद13% (₹4,000)
  • कीटनाशक और खरपतवारनाशक13% (₹4,000)
  • बीज7% (₹2,000)
  • सिंचाई7% (₹2,000)
  • मशीन4% (₹1,200)
  • ब्याज4% (₹1,200)

आधिकारिक डाउनलोड

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बीज से उगाने के बजाय कलमी इमली क्यों लगाएँ?

उन्नत किस्म का कलमी पौधा लगभग 4–5 साल में फल देता, छिड़काव व तुड़ाई लायक़ छोटा रहता, और एक ज्ञात गूदा-रंग व अम्लता देता जिसके लिए ख़रीदार ज़्यादा दाम देते हैं। बीज-पौधा फल देने में 10–15 साल लेता, बहुत बड़ा पेड़ बनता, और अनिश्चित फल देता — इमली बेचने वाले खेत के लिए कलमी उन्नत किस्में ही एकमात्र समझदार चुनाव हैं।

मुझे कौन-सी इमली किस्म चुननी चाहिए?

तमिलनाडु से PKM-1 (व PKM-2) सबसे व्यापक रूप से उगाई गई, भरपूर व जल्दी-फलने वाली हैं। योगेश्वरी, प्रतिष्ठान व अजंता महाराष्ट्र को सूट करतीं, योगेश्वरी अपने गहरे लाल गूदे के लिए प्रसंस्करणकर्ताओं द्वारा पसंद। DTS-1 कर्नाटक सूखे-पट्टी को सूट करती, और गोमा प्रतीक गर्म अर्ध-शुष्क गुजरात, राजस्थान व मध्य प्रदेश के लिए विकसित। स्थानीय सिफ़ारिश अपने बाग़बानी विभाग से पक्की करें।

क्या इमली बिना सिंचाई उगाई जा सकती है?

हाँ, जमने के बाद। इमली को सिर्फ़ अपनी पहली दो-तीन गर्मियों भर पानी चाहिए; उसके बाद यह लगभग पूरी बारानी उगाई जाती है, और इसे गूदा ठीक से पकाने को फलियाँ पकते समय एक लंबा सूखा दौर सच में चाहिए। फली-परिपक्वता पर पानी गूदे को गहरा करता और उसकी श्रेणी घटाता है।

इमली में सबसे बड़ी कीट-समस्या क्या है?

पेड़ पर, फूल के समय कली-वेबर और बनती फलियों पर फली-छेदक सबसे ज़्यादा नुक़सान करते। तुड़ाई बाद, इमली बीज भृंग मुख्य भंडारण-कीट है — यह कम-सूखी, ढीली भंडारित लॉट का बड़ा हिस्सा कुछ महीनों में नष्ट कर सकता। समय पर फूल-छिड़काव और सही सुखाई व हवाबंद भंडारण अधिकांश फ़सल बचाते हैं।

क्या इमली का MSP या मंडी भाव है?

इमली का कोई MSP नहीं है। हालाँकि यह सच में कारोबार होती है — Agmarknet "Tamarind Fruit" व "Tamarind Seed" सूचीबद्ध करता है, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश की मंडियों से नियमित रिकॉर्ड के साथ। दाम श्रेणी पर बहुत निर्भर करता है: गूदा-रंग, सफ़ाई व नमी।

इमली का पेड़ कितने समय तक फल देता रहता है?

बहुत लंबे समय तक। कलमी पेड़ 4–5 साल में फल देना शुरू करता, लगभग 12–15 साल तक पूरी उपज पर पहुँचता, और एक स्वस्थ पेड़ सौ साल से ज़्यादा फल देता रह सकता — इमली एक बार-लगाओ, पीढ़ियों-तक-काटो फ़सल है।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके खेत और मिट्टी से जुड़ी किसी भी ख़ास बात के लिए आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही आधिकारिक जवाब है।