सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा
हल्के धूसर केंद्र व गहरे लाल-भूरे किनारों वाले गोल-से-कोणीय धब्बे जो गर्म, नम मौसम में पत्तियाँ पीली कर गिराते हैं।
- रोगजनक
- फफूँद (Cercospora)
- फैलाव
- हवा व बारिश-छींटे बीजाणु; बीज व मलबा
- अनुकूल
- गर्म, नम, गीला मौसम
- मुख्य जोखिम
- पत्ती-धब्बा, गिरना व पत्ती-नाश
परिचय
सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा दलहन (मूँग, उड़द व अन्य), तिल, कोल फसलों व कई खेत व सब्ज़ी फसलों का एक आम फफूँद रोग है। यह छोटे गोल से कोणीय धब्बों के रूप में दिखता है, आमतौर पर हल्के धूसर या भूरे केंद्र और एक स्पष्ट गहरे लाल-भूरे से बैंगनी किनारे के साथ, कभी पीले प्रभामंडल के साथ।
धब्बे बढ़ने व मिलने के साथ पत्तियाँ पीली पड़तीं, सूखतीं व गिरतीं, इसलिए भारी हमला पौधे को पुरानी पत्तियों से ऊपर पत्ती-रहित करता, उसे कमज़ोर कर फली/बीज-भराव व उपज घटाता है। यह गर्म, नम, गीले मौसम से अनुकूल, हवा व बारिश-छींटे बीजाणुओं से फैलता, और संक्रमित फसल-मलबे व (कई फसलों में) बीज पर बचाव करता है। प्रबंधन मानक पर्ण-धब्बा पैकेज है: साफ़/उपचारित बीज, फसल-चक्र, सफ़ाई व सुरक्षात्मक फफूँदनाशी।
कैसे पहचानें
- हल्के धूसर या भूरे केंद्र और गहरे लाल-भूरे से बैंगनी किनारे वाले छोटे गोल से कोणीय धब्बे, अक्सर पीले प्रभामंडल के साथ।
- धब्बे जो बढ़ते व मिलते, ख़ासकर पुरानी पत्तियों पर, इसलिए पत्ती पीली पड़तीं, सूखतीं व गिरतीं।
- भारी हमले में नीचे-से-ऊपर पत्ती-नाश, पौधा कमज़ोर कर फली/बीज-भराव घटाता।
- गर्म, नम, गीले मौसम में और घने, कम-हवादार फसलों में अनुकूल।
कारण व कब
- Cercospora फफूँद, हवा व बारिश-छींटे बीजाणुओं से फैलती और संक्रमित फसल-मलबे व (कई फसलों में) बीज पर ले जाई जाती।
- पत्ती-गीलेपन वाले गर्म, नम, गीले मौसम से, और घने, बंद छत्रों से अनुकूल।
- सीज़न भर बढ़ता है, इसलिए अक्सर फसल की बाद की अवस्थाओं में सबसे बुरा।
- अलग Cercospora प्रजातियाँ अलग फसलों पर आतीं, पर एक-सा व्यवहार व प्रबंधन।
सांस्कृतिक व जैविक नियंत्रण
- साफ़, स्वस्थ (और जहाँ प्रासंगिक उपचारित) बीज इस्तेमाल करें और सहनशील किस्में उगाएँ।
- ग़ैर-आश्रयी फसलों से चक्र करें, और फफूँद ले जाते संक्रमित फसल-मलबा हटाकर नष्ट करें।
- खुली दूरी व अच्छी हवा दें ताकि छत्र सूखे, और ज़्यादा नाइट्रोजन व घनी फसल से बचें।
- जहाँ सलाह हो बीज को अनुशंसित जैव-कारक (जैसे Trichoderma) से उपचारित करें।
रासायनिक नियंत्रण
- पहले धब्बों से सुरक्षात्मक छिड़कें, भारी धब्बा व पत्ती-गिरना शुरू होने से पहले।
- फसल के लिए CIB&RC-पंजीकृत फफूँदनाशी (जैसे मैंकोज़ेब व अन्य अनुशंसित सुरक्षात्मक/प्रणालीगत) इस्तेमाल व बदल-बदलकर, प्रतिरोध से बचने को।
- पत्तियाँ ढकें, ख़ासकर पुरानी नीचे की, और कटाई-पूर्व अंतराल मानें।
- अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मौजूदा सिफ़ारिश स्थानीय KVK से पक्की करें।
दोबारा न हो, इसके लिए
- साफ़/उपचारित बीज, सहनशील किस्में व फसल-चक्र इस्तेमाल करें, और संक्रमित मलबा नष्ट करें।
- सूखे, कम-अनुकूल छत्र को दूरी, हवा व नाइट्रोजन सँभालें।
- मध्य-सीज़न से नीचे की पत्तियाँ निगरानी करें और सुरक्षात्मक छिड़कें, फफूँदनाशी समूह बदलते।
सबसे ज़्यादा जोखिम वाली फसलें
हमारी फसल गाइडों में जहाँ यह समस्या बताई गई है — पूरी पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ के लिए कोई फसल खोलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरी दलहन/तिल पत्तियों पर धूसर केंद्र व गहरे किनारों वाले धब्बे हैं। यह क्या है?
हल्के धूसर या भूरे केंद्र और गहरे लाल-भूरे किनारों (अक्सर पीले प्रभामंडल के साथ) वाले वे गोल-से-कोणीय धब्बे सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा हैं। बढ़ने पर पत्तियाँ पीली पड़तीं, सूखतीं व गिरतीं, पौधे को नीचे-से-ऊपर पत्ती-रहित करतीं। साफ़/उपचारित बीज इस्तेमाल करें, फसल-चक्र करें, छत्र खोलें, और पहले धब्बों से सुरक्षात्मक छिड़कें।
सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा कितनी उपज घटाता है?
यह इस पर निर्भर कि यह कितनी जल्दी व कितना भारी पत्ती-रहित करता है। हल्का धब्बा मामूली है, पर भारी हमला जो पत्तियाँ पीली कर गिराए — ख़ासकर फली/बीज-भराव से पहले व दौरान — उपज काफ़ी घटाता है, क्योंकि पौधा वह पत्ती-क्षेत्र खोता है जो फली व बीज भरने को चाहिए। पहले धब्बों से, भारी पत्ती-नाश से पहले कार्रवाई सबसे ज़्यादा उपज बचाती है।
इसे हर सीज़न लौटने से कैसे रोकूँ?
चूँकि यह संक्रमित मलबे व बीज पर बचाव करता है, अहम कदम हैं साफ़ या उपचारित बीज, ग़ैर-आश्रयों से फसल-चक्र, और कटाई के बाद संक्रमित फसल-मलबा नष्ट करना। सहनशील किस्में, सूखे छत्र को खुली दूरी व हवा, और पहले धब्बों से सुरक्षात्मक छिड़काव जोड़ें। मिलकर ये बचाव तोड़ते व हर सीज़न रोग घटाते हैं।
लक्षण और नियंत्रण उपाय ICAR, KVK और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की पैकेज-ऑफ-प्रैक्टिसेज़ पर आधारित हैं; नाम लिया गया हर रसायन पंजीकृत उपयोग है। हमेशा उत्पाद का लेबल पढ़ें और अपनी फसल व क्षेत्र के लिए मात्रा पक्की करें। संपादकीय नीति.
