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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
लोबिया (काउपी)खरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 2 सितंबर 2026

Pusa Sukomal

एक अर्ध-बौनी ICAR-IARI रिलीज़ जो इस सूची की किसी भी नामित लोबिया किस्म की सबसे तेज़ परिपक्वता को फ़सल की तीन सबसे बुरी समस्याओं — विषाणु, पर्ण-धब्बा व जीवाणु झुलसा — के प्रति एक साथ प्रतिरोध से जोड़ती है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि42–45 दिन (खरीफ); 55–60 दिन (गर्मी)
अपेक्षित उपज6.2–6.6 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
42–45 दिन (खरीफ); 55–60 दिन (गर्मी)
बीज दर
इसकी अर्ध-बौनी, सीधी बनावट के लिए 15–18 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
6.2–6.6 टन/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली — इस शोध-चरण में सटीक अधिसूचना-वर्ष पुष्ट नहीं हो सका

इस किस्म के बारे में

पूसा सुकोमल ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली की एक अर्ध-बौनी, सीधी बढ़ने वाली लोबिया किस्म है। इसकी फलियाँ हल्की हरी, गोल, मांसल व तुलनात्मक रूप से रेशा-रहित होतीं, लगभग 30 सेमी लंबी व 1 सेमी मोटी। यह असामान्य रूप से तेज़ पकती — खरीफ बुवाई में महज़ 42–45 दिन, व गर्मी-बुवाई में 55–60 दिन में तैयार — जो इसे उस किसान के लिए सबसे तेज़ लोबिया किस्मों में से एक बनाती जिसे प्लॉट जल्दी घुमाना हो। स्रोत-सामग्री इसे लगातार सुनहरे पीले चितेरी विषाणु व पर्ण-धब्बा रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी, और अतिरिक्त रूप से जीवाणु झुलसा के प्रति प्रतिरोधी बताती, जो साथ मिलकर उत्तर भारत में लोबिया के तीन सबसे नुक़सानदेह रोग-दबाव कवर करते। दर्ज उपज 6.2–6.6 टन/हेक्टेयर है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि42–45 दिन (खरीफ); 55–60 दिन (गर्मी)
    उपज क्षमता6.2–6.6 टन/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधसुनहरे पीले चितेरी विषाणु व पर्ण-धब्बा रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी; जीवाणु झुलसा के प्रति प्रतिरोधी
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयसबसे तेज़ 42–45 दिन चक्र के लिए खरीफ (जून–जुलाई), या 55–60 दिन चक्र के लिए गर्मी (फ़रवरी–मार्च)
  • बीज दरइसकी अर्ध-बौनी, सीधी बनावट के लिए 15–18 किग्रा/हेक्टेयर
  • दूरीइसकी सीधी, अर्ध-बौनी बनावट के लिए कतारों के बीच 40–45 सेमी, पौधों के बीच 15 सेमी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

42–45 दिन (खरीफ); 55–60 दिन (गर्मी)

अपेक्षित उपज

6.2–6.6 टन/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • उपलब्ध सबसे तेज़ पकने वाली नामित लोबिया किस्मों में से एक — खरीफ में 42–45 दिन — जो सीमित ज़मीन वाले किसान को एक अतिरिक्त फ़सल-चक्र बिठाने देती।
  • सुनहरे पीले चितेरी विषाणु, पर्ण-धब्बा व जीवाणु झुलसा तीनों के प्रति एक साथ ऊँचे प्रतिरोध का दुर्लभ संयोजन, न कि केवल एक रोग की सहनशीलता।
  • मांसल, कम-रेशे वाली फलियाँ जो अपनी खाने की गुणवत्ता अच्छी बनाए रखतीं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इसकी बहुत छोटी अवधि का मतलब तंग तुड़ाई-खिड़की — देर से तुड़ाई किसी लंबी-अवधि क़िस्म से ज़्यादा तेज़ी से ताज़गी गँवाती है।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • दिल्ली
  • उत्तर प्रदेश
  • हरियाणा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पूसा सुकोमल अन्य लोबिया किस्मों की तुलना में कितनी जल्दी पकती है?

यह सबसे तेज़ में से एक है — खरीफ बुवाई (जून–जुलाई) में महज़ 42–45 दिन, या गर्मी-बुवाई में 55–60 दिन में तैयार, अधिकांश झाड़ीदार लोबिया किस्मों से साफ़ तेज़ जो आमतौर 55–65 दिन या ज़्यादा लेतीं।