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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
लोबिया (काउपी)खरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 2 सितंबर 2026

Bundel Lobia-2

ICAR के शुष्क-दलहन प्रजनन-कार्यक्रम की एक दाना-सह-चारा लोबिया किस्म, उत्तर-पश्चिम क्षेत्र को अनुशंसित, जितनी दाना के लिए उतनी ही अपने तेज़, ऊँची-उपज हरे चारे के लिए उगाई जाती है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधिअलग दर्ज नहीं; मुख्यतः दाना-परिपक्वता के बजाय जल्दी-काटी जाने वाली चारा फ़सल के रूप में उगाई जाती
अपेक्षित उपज35–40 टन/हेक्टेयर हरा चारा
उपयुक्त मिट्टीकई तरह की मिट्टी के अनुकूल, मध्यम नमी-तनाव सहनशील

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
अलग दर्ज नहीं; मुख्यतः दाना-परिपक्वता के बजाय जल्दी-काटी जाने वाली चारा फ़सल के रूप में उगाई जाती
बीज दर
चारा-फ़सल के रूप में घनी बुवाई को 30–35 किग्रा/हेक्टेयर; दाना भी चाहने पर कतार बुवाई को 20–25 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
35–40 टन/हेक्टेयर हरा चारा
उपयुक्त मिट्टी
कई तरह की मिट्टी के अनुकूल, मध्यम नमी-तनाव सहनशील
जारी
ICAR शुष्क-दलहन प्रजनन-कार्यक्रम — आधिकारिक शुष्क दलहन किस्म-रजिस्टर में दर्ज; सटीक संस्थान व अधिसूचना-वर्ष इस शोध-चरण में आगे पुष्ट नहीं हो सके

इस किस्म के बारे में

बंदेल लोबिया-2 एक दोहरे-उपयोग (दाना व चारा) लोबिया किस्म है, जो ICAR के आधिकारिक शुष्क-दलहन किस्म-रजिस्टर में अपनी पूर्ववर्ती बंदेल लोबिया-1 के साथ दर्ज है। जहाँ बंदेल लोबिया-1 को 30–35 टन/हेक्टेयर हरे-चारे उपज के साथ पूरे देश भर खेती को अनुशंसित किया जाता, बंदेल लोबिया-2 को ख़ासतौर उत्तर-पश्चिम क्षेत्र को अनुशंसित व 35–40 टन/हेक्टेयर की ऊँची हरे-चारे उपज के साथ दर्ज किया जाता है। इस तरह का लोबिया चारा एक तेज़ी से बढ़ने वाले, प्रोटीन-भरपूर हरे चारे के रूप में मूल्यवान माना जाता, जिसे सीज़न भर एक या ज़्यादा बार काटा जा सकता, जो पशु-चारा कार्यक्रम में मुख्य चारा-फ़सलों के बीच का अंतर भरता है। बंदेल लोबिया-2 के लिए विस्तृत दाना-उपज व रोग-प्रतिक्रिया आँकड़े इस शोध-चरण में किसी प्राथमिक स्रोत से पुष्ट नहीं हो सके; इसकी दर्ज ख़ासियत ख़ासतौर उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए एक ऊँची-उपज चारा-क़िस्म के रूप में है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधिअलग दर्ज नहीं; मुख्यतः दाना-परिपक्वता के बजाय जल्दी-काटी जाने वाली चारा फ़सल के रूप में उगाई जाती
    उपज क्षमता35–40 टन/हेक्टेयर हरा चारा
    रोग-प्रतिरोधअलग दर्ज नहीं
    मिट्टीकई तरह की मिट्टी के अनुकूल, मध्यम नमी-तनाव सहनशील
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयअपने अनुशंसित उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में, मानसून के साथ खरीफ (जून–जुलाई)
  • बीज दरचारा-फ़सल के रूप में घनी बुवाई को 30–35 किग्रा/हेक्टेयर; दाना भी चाहने पर कतार बुवाई को 20–25 किग्रा/हेक्टेयर
  • दूरीचारा-कटाई को क़रीबी, लगभग-छिड़काव दूरी; दाना भी काटने पर चौड़ी कतार-दूरी (30 सेमी)

उपज व अवधि

पकने की अवधि

अलग दर्ज नहीं; मुख्यतः दाना-परिपक्वता के बजाय जल्दी-काटी जाने वाली चारा फ़सल के रूप में उगाई जाती

अपेक्षित उपज

35–40 टन/हेक्टेयर हरा चारा

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • अलग दर्ज नहीं

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए 35–40 टन/हेक्टेयर की ऊँची दर्ज हरे-चारे उपज, पूरे-देश की बंदेल लोबिया-1 के 30–35 टन/हेक्टेयर आँकड़े से आगे।
  • दाना-सह-चारा दोहरा उपयोग पशुपालक किसान को वह लचीलापन देता जो एक शुद्ध-सब्ज़ी या शुद्ध-दाना लोबिया किस्म नहीं दे सकती।
  • तेज़ बढ़वार व कटाई इसे हरे-चारे के खिलाने-कैलेंडर में अंतर भरने को सूट करतीं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इस किस्म के लिए विस्तृत सूखा-दाना उपज व नामित रोग-प्रतिरोध आँकड़े इस शोध-चरण में नहीं मिले — दाना मुख्य लक्ष्य होने पर, इसकी तुलना पूसा कोमल या पूसा सुकोमल जैसी दाना-केंद्रित रिलीज़ से करें।
  • इसकी अनुशंसा ख़ासतौर उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए है; उस पट्टी से बाहर, स्थानीय KVK से जाँचें कि बंदेल लोबिया-1 की पूरे-देश अनुशंसा बेहतर बैठती है या नहीं।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • पंजाब
  • हरियाणा
  • राजस्थान
  • उत्तर प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बंदेल लोबिया-2 दाना के लिए उगाई जाती या चारे के लिए?

इसे दाना-सह-चारा दोहरे-उपयोग की लोबिया दर्ज किया गया, पर इसकी सबसे स्पष्ट दर्ज ख़ासियत चारा है — इसके अनुशंसित उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए 35–40 टन/हेक्टेयर की ऊँची हरे-चारे उपज। दाल के लिए सूखा दाना मुख्य लक्ष्य वाले किसान को इसकी तुलना किसी समर्पित दाना-क़िस्म से करनी चाहिए।