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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
लोबिया (काउपी)खरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 2 सितंबर 2026

Pusa Komal

ICAR-IARI, नई दिल्ली की सबसे जानी-मानी झाड़ीदार (बुश-टाइप) लोबिया किस्म — छोटे, भरोसेमंद चक्र के लिए उत्तर व दक्षिण भारत भर उगाई जाने वाली दाना-सह-सब्ज़ी दोहरे-उपयोग की किस्म।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि55–65 दिन
अपेक्षित उपज8–10 टन/हेक्टेयर हरी फली
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
55–65 दिन
बीज दर
सब्ज़ी-फ़सल के रूप में 15–20 किग्रा/हेक्टेयर; मुख्यतः दाना के लिए उगाने पर 20–25 किग्रा/हेक्टेयर तक
अपेक्षित उपज
8–10 टन/हेक्टेयर हरी फली
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली — इस शोध-चरण में सटीक अधिसूचना-वर्ष पुष्ट नहीं हो सका

इस किस्म के बारे में

पूसा कोमल ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा जारी एक झाड़ीदार (बुश-टाइप) लोबिया किस्म है, और भारत की सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली नामित लोबिया किस्मों में से एक है — इसे मुलायम हरी फली के लिए जल्दी सब्ज़ी-फ़सल के रूप में और छोटी-अवधि की दाना दलहन के रूप में, दोनों तरह उगाया जाता है। कई कृषि-स्रोत इसे लगातार लगभग 55–65 दिन में पकने वाला एक जल्दी, सघन झाड़ीदार पौधा बताते हैं, जो सघन फ़सल-चक्र के लिए उपयुक्त है जहाँ अगली फ़सल के लिए खेत जल्दी खाली होना चाहिए। इसे आमतौर जीवाणु झुलसा व पत्ती-मरोड़/पीला-चितेरी रोग-समूह के प्रति सहनशील बताया जाता, जो अन्यथा असुरक्षित लोबिया की बुवाई तबाह कर देता, हालाँकि इस शोध-चरण में इस सहनशीलता के सटीक प्रजनन-स्रोत की किसी प्राथमिक IARI रिलीज़-अधिसूचना से पुष्टि नहीं हो सकी — इसे यहाँ स्वतंत्र रूप से पुष्ट के बजाय आमतौर रिपोर्ट किया गया गुण बताया गया है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि55–65 दिन
    उपज क्षमता8–10 टन/हेक्टेयर हरी फली
    रोग-प्रतिरोधआमतौर जीवाणु झुलसा व पत्ती-मरोड़/पीला चितेरी विषाणु के प्रति सहनशील बताई जाती
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयमानसून के साथ खरीफ (जून–जुलाई); जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो वहाँ फ़रवरी–मार्च की गर्मी-फ़सल के रूप में भी उगाई जाती
  • बीज दरसब्ज़ी-फ़सल के रूप में 15–20 किग्रा/हेक्टेयर; मुख्यतः दाना के लिए उगाने पर 20–25 किग्रा/हेक्टेयर तक
  • दूरीइसकी सघन झाड़ीदार बनावट के लिए कतारों के बीच 45 सेमी, पौधों के बीच 15–20 सेमी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

55–65 दिन

अपेक्षित उपज

8–10 टन/हेक्टेयर हरी फली

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • छोटा 55–65 दिन का चक्र इसे सबसे तेज़ पकने वाली लोबिया किस्मों में से एक बनाता, जो दो मुख्य सीज़नों के बीच कैच-क्रॉप के रूप में आसानी से बैठ जाता है।
  • दाना-सह-सब्ज़ी दोहरा उपयोग किसान को लचीलापन देता — उस सीज़न जो बाज़ार बेहतर भाव दे उसके अनुसार मुलायम फली बेचें या फ़सल को सूखे दाना तक पकने दें।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इसकी बताई गई जीवाणु झुलसा व पत्ती-मरोड़/पीला चितेरी सहनशीलता द्वितीयक कृषि-स्रोतों में आमतौर उद्धृत एक गुण है; ज़्यादा रोग-दबाव वाले क्षेत्र के किसान को अकेले सहनशीलता पर भरोसा करने के बजाय फ़सल की निगरानी जारी रखनी चाहिए।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • तमिलनाडु
  • कर्नाटक
  • दिल्ली

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पूसा कोमल दाना के लिए उगाई जाती या सब्ज़ी के रूप में?

दोनों — यह एक दोहरे-उपयोग की झाड़ीदार लोबिया किस्म है। किसान फली को मुलायम व हरी अवस्था में सब्ज़ी-बाज़ार के लिए तोड़ते, या फ़सल को पूरा पकने देकर सूखे दाना (दाल) के लिए गहाई करते, यह उस सीज़न किस उपयोग में बेहतर भाव मिलता उस पर निर्भर करता।