Pusa Komal
ICAR-IARI, नई दिल्ली की सबसे जानी-मानी झाड़ीदार (बुश-टाइप) लोबिया किस्म — छोटे, भरोसेमंद चक्र के लिए उत्तर व दक्षिण भारत भर उगाई जाने वाली दाना-सह-सब्ज़ी दोहरे-उपयोग की किस्म।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 55–65 दिन
- बीज दर
- सब्ज़ी-फ़सल के रूप में 15–20 किग्रा/हेक्टेयर; मुख्यतः दाना के लिए उगाने पर 20–25 किग्रा/हेक्टेयर तक
- अपेक्षित उपज
- 8–10 टन/हेक्टेयर हरी फली
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली — इस शोध-चरण में सटीक अधिसूचना-वर्ष पुष्ट नहीं हो सका
इस किस्म के बारे में
पूसा कोमल ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा जारी एक झाड़ीदार (बुश-टाइप) लोबिया किस्म है, और भारत की सबसे व्यापक रूप से उगाई जाने वाली नामित लोबिया किस्मों में से एक है — इसे मुलायम हरी फली के लिए जल्दी सब्ज़ी-फ़सल के रूप में और छोटी-अवधि की दाना दलहन के रूप में, दोनों तरह उगाया जाता है। कई कृषि-स्रोत इसे लगातार लगभग 55–65 दिन में पकने वाला एक जल्दी, सघन झाड़ीदार पौधा बताते हैं, जो सघन फ़सल-चक्र के लिए उपयुक्त है जहाँ अगली फ़सल के लिए खेत जल्दी खाली होना चाहिए। इसे आमतौर जीवाणु झुलसा व पत्ती-मरोड़/पीला-चितेरी रोग-समूह के प्रति सहनशील बताया जाता, जो अन्यथा असुरक्षित लोबिया की बुवाई तबाह कर देता, हालाँकि इस शोध-चरण में इस सहनशीलता के सटीक प्रजनन-स्रोत की किसी प्राथमिक IARI रिलीज़-अधिसूचना से पुष्टि नहीं हो सकी — इसे यहाँ स्वतंत्र रूप से पुष्ट के बजाय आमतौर रिपोर्ट किया गया गुण बताया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयमानसून के साथ खरीफ (जून–जुलाई); जहाँ सिंचाई उपलब्ध हो वहाँ फ़रवरी–मार्च की गर्मी-फ़सल के रूप में भी उगाई जाती
- बीज दरसब्ज़ी-फ़सल के रूप में 15–20 किग्रा/हेक्टेयर; मुख्यतः दाना के लिए उगाने पर 20–25 किग्रा/हेक्टेयर तक
- दूरीइसकी सघन झाड़ीदार बनावट के लिए कतारों के बीच 45 सेमी, पौधों के बीच 15–20 सेमी
उपज व अवधि
पकने की अवधि
55–65 दिन
अपेक्षित उपज
8–10 टन/हेक्टेयर हरी फली
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- छोटा 55–65 दिन का चक्र इसे सबसे तेज़ पकने वाली लोबिया किस्मों में से एक बनाता, जो दो मुख्य सीज़नों के बीच कैच-क्रॉप के रूप में आसानी से बैठ जाता है।
- दाना-सह-सब्ज़ी दोहरा उपयोग किसान को लचीलापन देता — उस सीज़न जो बाज़ार बेहतर भाव दे उसके अनुसार मुलायम फली बेचें या फ़सल को सूखे दाना तक पकने दें।
ध्यान रखने योग्य बातें
- इसकी बताई गई जीवाणु झुलसा व पत्ती-मरोड़/पीला चितेरी सहनशीलता द्वितीयक कृषि-स्रोतों में आमतौर उद्धृत एक गुण है; ज़्यादा रोग-दबाव वाले क्षेत्र के किसान को अकेले सहनशीलता पर भरोसा करने के बजाय फ़सल की निगरानी जारी रखनी चाहिए।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- तमिलनाडु
- कर्नाटक
- दिल्ली
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पूसा कोमल दाना के लिए उगाई जाती या सब्ज़ी के रूप में?
दोनों — यह एक दोहरे-उपयोग की झाड़ीदार लोबिया किस्म है। किसान फली को मुलायम व हरी अवस्था में सब्ज़ी-बाज़ार के लिए तोड़ते, या फ़सल को पूरा पकने देकर सूखे दाना (दाल) के लिए गहाई करते, यह उस सीज़न किस उपयोग में बेहतर भाव मिलता उस पर निर्भर करता।
