Kashi Kanchan
ICAR-IIVR, वाराणसी की 2007 रिलीज़ — एक बौनी, जल्दी पकने वाली, रोग-प्रतिरोधी झाड़ीदार लोबिया, गंगा के मैदान भर वसंत-गर्मी व बरसाती दोनों सब्ज़ी-खेती के लिए विकसित।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 50–55 दिन में पहली तुड़ाई
- बीज दर
- सब्ज़ी-फली खेती को 15–20 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- 150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी फली
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 2007 में जारी · ICAR-भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी
इस किस्म के बारे में
काशी कंचन एक बौनी, झाड़ीदार सब्ज़ी लोबिया किस्म है, जिसे ICAR-भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने 2007 में जारी किया। यह लगभग 50–60 सेमी के सघन क़द तक बढ़ती व फ़ोटो-असंवेदनशील है, यानी दिन की लंबाई चाहे जो हो, भरोसे से फूलती व फलती है — फूल लगभग बुवाई के 40–45 दिन बाद शुरू होते, पहली तुड़ाई 50–55 दिन तक तैयार, इसलिए यह वसंत-गर्मी व बरसाती दोनों बुवाइयों को सूट करती। इसकी फलियाँ लंबी (लगभग 30–35 सेमी), गहरे हरे, मुलायम व मांसल होतीं, बिना रेशेदार परत के, जो इसे एक पसंदीदा बाज़ार-किस्म बनाता है। इस रिलीज़ में काउपी पीला चितेरी विषाणु व Pseudocercospora cruenta — काउपी के आम सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा के पीछे की फफूँद — दोनों के प्रति दर्ज प्रतिरोध है, जो अन्यथा दोनों के प्रति संवेदनशील फ़सल के लिए एक असली, काम का विषाणु व फफूँद-रोग सुरक्षा संयोजन है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयवसंत-गर्मी (फ़रवरी–मार्च) या बरसाती (जून–जुलाई) — किस्म फ़ोटो-असंवेदनशील होने से दोनों समय काम करते
- बीज दरसब्ज़ी-फली खेती को 15–20 किग्रा/हेक्टेयर
- दूरीइसकी सघन झाड़ी के लिए कतारों के बीच 45–50 सेमी, पौधों के बीच 20–25 सेमी
उपज व अवधि
पकने की अवधि
50–55 दिन में पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज
150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी फली
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- काउपी पीला चितेरी विषाणु व सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा दोनों के प्रति दर्ज प्रतिरोध, एक ही किस्म में, लोबिया सब्ज़ी-किसान के दो सबसे बड़े रोग-जोखिम कवर करता है।
- फ़ोटो-असंवेदनशील, जल्दी फूलने व जल्दी तुड़ाई वाली होने से, वसंत-गर्मी व बरसाती दोनों सीज़न में तेज़, भरोसेमंद फ़सल-चक्र देती है।
- बिना रेशे की मांसल 30–35 सेमी फलियाँ, 150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी-फली उपज के साथ, इसे एक मज़बूत बाज़ार-किस्म बनातीं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- सूखे-दाना क़िस्म के बजाय एक सब्ज़ी (हरी-फली) लोबिया के रूप में विकसित व उपज-परखी गई — मुख्यतः दाल चाहने वाले किसान को इसकी तुलना किसी दाना-केंद्रित रिलीज़ से करनी चाहिए।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- झारखंड
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
काशी कंचन किन रोगों के प्रति प्रतिरोधी है?
इसमें काउपी पीला चितेरी विषाणु (सफ़ेद-मक्खी-जनित) व Pseudocercospora cruenta फफूँद से होने वाले सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा, दोनों के प्रति दर्ज प्रतिरोध है — साथ मिलकर वे दो सबसे नुक़सानदेह रोग-दबाव जो एक लोबिया सब्ज़ी-फ़सल आमतौर झेलती।
क्या काशी कंचन गर्मी व बरसात दोनों में बोई जा सकती है?
हाँ — यह फ़ोटो-असंवेदनशील है, इसलिए दिन की लंबाई चाहे जो हो भरोसे से फूलती व फलियाँ बनाती, और इसे वसंत-गर्मी (फ़रवरी–मार्च) बुवाई व मानक बरसाती खरीफ (जून–जुलाई) दोनों खिड़कियों को अनुशंसित किया जाता है।
