मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
लोबिया (काउपी)खरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 2 सितंबर 2026

Kashi Kanchan

ICAR-IIVR, वाराणसी की 2007 रिलीज़ — एक बौनी, जल्दी पकने वाली, रोग-प्रतिरोधी झाड़ीदार लोबिया, गंगा के मैदान भर वसंत-गर्मी व बरसाती दोनों सब्ज़ी-खेती के लिए विकसित।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि50–55 दिन में पहली तुड़ाई
अपेक्षित उपज150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी फली
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
50–55 दिन में पहली तुड़ाई
बीज दर
सब्ज़ी-फली खेती को 15–20 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी फली
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
2007 में जारी · ICAR-भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी

इस किस्म के बारे में

काशी कंचन एक बौनी, झाड़ीदार सब्ज़ी लोबिया किस्म है, जिसे ICAR-भारतीय सब्ज़ी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने 2007 में जारी किया। यह लगभग 50–60 सेमी के सघन क़द तक बढ़ती व फ़ोटो-असंवेदनशील है, यानी दिन की लंबाई चाहे जो हो, भरोसे से फूलती व फलती है — फूल लगभग बुवाई के 40–45 दिन बाद शुरू होते, पहली तुड़ाई 50–55 दिन तक तैयार, इसलिए यह वसंत-गर्मी व बरसाती दोनों बुवाइयों को सूट करती। इसकी फलियाँ लंबी (लगभग 30–35 सेमी), गहरे हरे, मुलायम व मांसल होतीं, बिना रेशेदार परत के, जो इसे एक पसंदीदा बाज़ार-किस्म बनाता है। इस रिलीज़ में काउपी पीला चितेरी विषाणु व Pseudocercospora cruenta — काउपी के आम सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा के पीछे की फफूँद — दोनों के प्रति दर्ज प्रतिरोध है, जो अन्यथा दोनों के प्रति संवेदनशील फ़सल के लिए एक असली, काम का विषाणु व फफूँद-रोग सुरक्षा संयोजन है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि50–55 दिन में पहली तुड़ाई
    उपज क्षमता150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी फली
    रोग-प्रतिरोधकाउपी पीला चितेरी विषाणु व Pseudocercospora cruenta (सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा) के प्रति प्रतिरोधी
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयवसंत-गर्मी (फ़रवरी–मार्च) या बरसाती (जून–जुलाई) — किस्म फ़ोटो-असंवेदनशील होने से दोनों समय काम करते
  • बीज दरसब्ज़ी-फली खेती को 15–20 किग्रा/हेक्टेयर
  • दूरीइसकी सघन झाड़ी के लिए कतारों के बीच 45–50 सेमी, पौधों के बीच 20–25 सेमी

उपज व अवधि

पकने की अवधि

50–55 दिन में पहली तुड़ाई

अपेक्षित उपज

150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी फली

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • काउपी पीला चितेरी विषाणु व सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा दोनों के प्रति दर्ज प्रतिरोध, एक ही किस्म में, लोबिया सब्ज़ी-किसान के दो सबसे बड़े रोग-जोखिम कवर करता है।
  • फ़ोटो-असंवेदनशील, जल्दी फूलने व जल्दी तुड़ाई वाली होने से, वसंत-गर्मी व बरसाती दोनों सीज़न में तेज़, भरोसेमंद फ़सल-चक्र देती है।
  • बिना रेशे की मांसल 30–35 सेमी फलियाँ, 150–175 क्विंटल/हेक्टेयर हरी-फली उपज के साथ, इसे एक मज़बूत बाज़ार-किस्म बनातीं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • सूखे-दाना क़िस्म के बजाय एक सब्ज़ी (हरी-फली) लोबिया के रूप में विकसित व उपज-परखी गई — मुख्यतः दाल चाहने वाले किसान को इसकी तुलना किसी दाना-केंद्रित रिलीज़ से करनी चाहिए।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • झारखंड

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

काशी कंचन किन रोगों के प्रति प्रतिरोधी है?

इसमें काउपी पीला चितेरी विषाणु (सफ़ेद-मक्खी-जनित) व Pseudocercospora cruenta फफूँद से होने वाले सर्कोस्पोरा पर्ण-धब्बा, दोनों के प्रति दर्ज प्रतिरोध है — साथ मिलकर वे दो सबसे नुक़सानदेह रोग-दबाव जो एक लोबिया सब्ज़ी-फ़सल आमतौर झेलती।

क्या काशी कंचन गर्मी व बरसात दोनों में बोई जा सकती है?

हाँ — यह फ़ोटो-असंवेदनशील है, इसलिए दिन की लंबाई चाहे जो हो भरोसे से फूलती व फलियाँ बनाती, और इसे वसंत-गर्मी (फ़रवरी–मार्च) बुवाई व मानक बरसाती खरीफ (जून–जुलाई) दोनों खिड़कियों को अनुशंसित किया जाता है।