प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)
Pradhan Mantri Annadata Aay SanraksHan Abhiyan (PM-AASHA)
एक छत्र योजना जो तभी सक्रिय होती है जब बाज़ार किसान को धोखा दे — दलहन, तिलहन व खोपरा MSP पर ख़रीदती है, तिलहन किसानों को दाम का अंतर सीधे देती है, और बंपर फ़सल से टमाटर-प्याज़-आलू के दाम गिरने पर नुक़सान भरती है।
- कुल राशि (2025-26 तक)
- ₹35,000 करोड़
- ख़रीद गारंटी राशि
- ₹45,000 करोड़
- निरंतरता मंज़ूर
- 18 सितंबर 2024
- मूल शुरुआत
- सितंबर 2018
- PSS कवरेज
- राष्ट्रीय उत्पादन का 25%
- PDPS कवरेज
- तिलहन उत्पादन का 40%, 4 महीने
- MIS कवरेज
- उत्पादन का 25% (टमाटर-प्याज़-आलू)
- क्रियान्वयन एजेंसियाँ
- नाफेड, एनसीसीएफ, FCI, राज्य एजेंसियाँ
त्वरित सारांश
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त्वरित सारांश
पीएम-आशा कोई एक तय लाभ नहीं है, बल्कि एक सुरक्षा-जाल है जो तभी सक्रिय होता है जब बाज़ार किसान को धोखा दे — यानी जब फ़सल का असली बिकने वाला दाम उसके न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे गिर जाए। हर किसान को मंडी में जो भी हो, एक तय राशि देने के बजाय यह मौसम के हिसाब से प्रतिक्रिया करती है: अगर दलहन, तिलहन या खोपरा MSP से नीचे बिक रहे हों, तो सरकारी एजेंसियाँ ख़ुद MSP पर ख़रीद लेती हैं; अगर किसी तिलहन जैसी फ़सल के लिए, जो लाखों छोटे खेतों में फैली है, यह व्यावहारिक न हो, तो किसान बाज़ार में जो भी दाम मिले उस पर बेच देता है और MSP तक का अंतर सीधे बैंक खाते में आ जाता है; और टमाटर, प्याज़, आलू जैसी सब्ज़ियों के लिए, जिनका कोई MSP ही नहीं होता, एक अलग व्यवस्था तब सीधे भुगतान करती है जब बंपर फ़सल दाम गिरा दे।
यही प्रतिक्रियात्मक बनावट है जो बाहर से पीएम-आशा को उलझा हुआ बना देती है: तुअर दाल उगाने वाले किसान का अनुभव सरसों उगाने वाले से बिल्कुल अलग होता है, और टमाटर उगाने वाले किसान का अनुभव इन दोनों से भी अलग। इन सबको जोड़ने वाली कड़ी ₹45,000 करोड़ की गारंटी राशि है, जो सरकारी ख़रीद एजेंसियों को दाम गिरने पर हर बार नई बजट मंज़ूरी का इंतज़ार किए बिना बड़े पैमाने पर ख़रीद करने देती है। फिर भी किसी व्यक्तिगत किसान के लिए यह अपने-आप शुरू नहीं होता — दलहन, तिलहन और खोपरा के लिए पहला व्यावहारिक क़दम है मौसम शुरू होने से पहले नाफेड के ई-समृद्धि या एनसीसीएफ के ई-संयुक्ति पोर्टल पर पूर्व-पंजीकरण कराना, क्योंकि ख़रीद केंद्र पहले से पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता देते हैं। सही कवरेज प्रतिशत, मुआवज़े की सीमा और मौजूदा घटक-ढाँचा नीचे दिया गया है, क्योंकि यह हर मौसम की अधिसूचना के साथ बदलता है।
परिचय
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) केंद्र सरकार की वह छत्र योजना है जो दलहन, तिलहन, खोपरा और चुनिंदा शीघ्र-नष्ट होने वाली बाग़वानी फ़सलों पर किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए सितंबर 2018 में शुरू की गई थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को इसकी निरंतरता को 15वें वित्त आयोग चक्र के तहत 2025-26 तक के लिए ₹35,000 करोड़ के कुल व्यय के साथ मंज़ूरी दी — साथ ही ₹45,000 करोड़ की नवीनीकृत व बढ़ाई गई सरकारी गारंटी भी दी, जो बाज़ार भाव MSP से नीचे गिरने पर ख़रीद एजेंसियों को हर बार नई मंज़ूरी का इंतज़ार किए बिना असल में MSP पर ख़रीद करने देती है।
यह योजना अब चार घटकों के ज़रिए चलती है। मूल्य समर्थन योजना (PSS) अधिसूचित दलहन, तिलहन व खोपरा को सीधे MSP पर ख़रीदती है — 2024-25 से राष्ट्रीय उत्पादन के 25% को कवर करते हुए, और 2024-25 सीज़न के लिए तुअर, उड़द व मसूर की 100% ख़रीद के विशेष अपवाद के साथ, ताकि किसान दलहन की ओर मुड़ें। मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF), जो अब क्रियान्वयन के लिए PSS के साथ मिला दिया गया है, दलहन व प्याज़ का बफ़र स्टॉक बनाए रखता है ताकि जमाख़ोरी रुके और उपभोक्ता क़ीमतें स्थिर रहें। मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) तिलहन के लिए भौतिक ख़रीद को पूरी तरह छोड़ देती है — किसान हमेशा की तरह खुले बाज़ार में बेचता है, और MSP व असली बिक्री दाम के बीच का अंतर (MSP के 15% तक सीमित) सीधे उसके बैंक खाते में जमा हो जाता है, अब यह किसी राज्य के तिलहन उत्पादन के 40% को 4 महीने की अवधि में कवर करती है। बाज़ार हस्तक्षेप योजना (MIS) वह घटक है जो शीघ्र-नष्ट होने वाली फ़सलों — अक्सर टमाटर, प्याज़ व आलू — के लिए बना है, जो उत्पादन के 25% को सीधी ख़रीद या, बढ़ते तौर पर, सीधे अंतर-भुगतान से कवर करती है, साथ ही केंद्र परिवहन व भंडारण लागत का हिस्सा भी वहन करता है।
किसान के लिए असली शुरुआत पूरी तरह फ़सल पर निर्भर करती है। PSS व PDPS के लिए, व्यावहारिक पहला क़दम है फ़सल कटने से पहले नाफेड के ई-समृद्धि पोर्टल (esamridhi.in) या एनसीसीएफ के ई-संयुक्ति पोर्टल (esamyukti.in) पर पूर्व-पंजीकरण करना — ख़रीद केंद्र पहले से पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता देते हैं, और पंजीकरण सीधे या प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS) या FPO के ज़रिए किया जा सकता है। MIS इसके उलट, कोई ऐसी योजना नहीं जिसके लिए व्यक्तिगत किसान पहले से आवेदन करे — राज्य सरकार किसी विशेष फ़सल, क्षेत्र व अवधि के लिए केंद्र से मंज़ूरी तभी माँगती है जब दाम असल में गिर चुके हों, और उसके बाद उस अधिसूचित अवधि के लिए ख़रीद या भुगतान शुरू होता है। नाफेड व एनसीसीएफ मुख्य केंद्रीय क्रियान्वयन एजेंसियाँ हैं, जो भारतीय खाद्य निगम व राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती हैं।
योजना की मुख्य बातें
एक छत्र के नीचे चार घटक
PSS (ख़रीद), PSF (बफ़र स्टॉक), PDPS (मूल्य-न्यूनता भुगतान) व MIS (शीघ्र-नष्ट फ़सलें) पीएम-आशा के तहत बंडल हैं, हर एक अलग बाज़ार स्थिति पर सक्रिय होता है।
तुअर, उड़द, मसूर की 100% ख़रीद
2024-25 सीज़न के लिए इन तीन दलहनों की MSP पर उत्पादन के 100% तक ख़रीद होती है, सामान्य 25% PSS सीमा से कहीं ज़्यादा, ताकि किसान पानी-भारी फ़सलों की जगह दलहन की ओर मुड़ें।
₹45,000 करोड़ की गारंटी राशि
PSS व PDPS ख़रीद को सहारा देती है ताकि दाम गिरते ही एजेंसियाँ MSP पर ख़रीद सकें, न कि सीज़न के बीच नई बजट मंज़ूरी का इंतज़ार करें।
PDPS में सीधा बैंक हस्तांतरण
तिलहन के लिए, किसान हमेशा की तरह बाज़ार दाम पर बेचता है और MSP की कमी सीधे उसके पंजीकृत बैंक खाते में जमा हो जाती है — सरकारी बिक्री के लिए अलग मंडी जाने की ज़रूरत नहीं।
MIS में अब भुगतान का विकल्प भी
टमाटर, प्याज़, आलू जैसी फ़सलों के लिए, केंद्र अब सिर्फ़ फ़सल ख़रीदने के बजाय किसानों को सीधे दाम का अंतर भी दे सकता है, और परिवहन व भंडारण लागत में भी हिस्सा लेता है।
PSS व PSF को मिलाया गया
दलहन व प्याज़ के लिए मूल्य समर्थन व मूल्य स्थिरीकरण अब एक ही मिली-जुली प्रक्रिया के रूप में चलते हैं, ताकि ख़रीद व बफ़र-स्टॉक प्रबंधन एक-दूसरे से टकराएँ नहीं।
प्रमुख घटक
राज्य स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से इनमें से चुनाव करते हैं — हर घटक की अपनी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया है, जहाँ अलग पेज मौजूद है वहाँ पूरी जानकारी उसी पर है।
मूल्य समर्थन योजना (PSS)
नाफेड व एनसीसीएफ के ज़रिए अधिसूचित दलहन, तिलहन व खोपरा की MSP पर भौतिक ख़रीद — राष्ट्रीय उत्पादन का 25%, 2024-25 में तुअर, उड़द व मसूर के लिए 100%।
e-Samridhi/e-Samyukti पर पूर्व-पंजीकृत दलहन, तिलहन या खोपरा उगाने वाले किसान
मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF)
दलहन व प्याज़ का बफ़र स्टॉक बनाए रखता है, जिसे रणनीतिक रूप से छोड़ा जाता है ताकि जमाख़ोरी रुके और किसानों व उपभोक्ताओं दोनों के लिए दाम स्थिर रहें।
PSS के साथ चलती है; व्यक्तिगत किसान इसके लिए अलग से आवेदन नहीं करता
मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS)
तिलहन के लिए — किसान हमेशा की तरह खुले बाज़ार में बेचता है, और MSP व बिक्री दाम के बीच का अंतर, MSP के 15% तक सीमित, 4 महीने तक व राज्य के उत्पादन के 40% तक सीधे बैंक खाते में दिया जाता है।
उन राज्यों के तिलहन किसान जहाँ राज्य ने इस सीज़न PDPS अपनाया हो
बाज़ार हस्तक्षेप योजना (MIS)
बिना MSP वाली शीघ्र-नष्ट बाग़वानी फ़सलों — मुख्यतः टमाटर, प्याज़ व आलू — को ख़रीद या सीधे अंतर-भुगतान से कवर करती है, उत्पादन के 25% तक, केंद्र-साझा परिवहन व भंडारण लागत के साथ।
दाम गिरने के बाद जब राज्य MIS का अनुरोध करे, तब अधिसूचित शीघ्र-नष्ट फ़सलों के किसान
आपको क्या मिलता है
बाज़ार फेल होने पर दाम की न्यूनतम सीमा
सुनिश्चित करती है कि अधिसूचित दलहन, तिलहन या खोपरा उगाने वाला किसान सिर्फ़ इसलिए MSP से नीचे बेचने को मजबूर न हो क्योंकि उस हफ़्ते स्थानीय मंडी में यही दाम मिल रहा है।
मजबूरी में बेचना नहीं
PDPS तिलहन किसान को जहाँ सुविधाजनक हो वहाँ बेचने देती है और फिर भी MSP की कमी अलग से मिलती है, न कि किसी ख़ास ख़रीद केंद्र तक जाने की मजबूरी।
शीघ्र-नष्ट फ़सलों में अधिक उत्पादन से सुरक्षा
MIS ख़ास तौर पर टमाटर-प्याज़-आलू की समस्या के लिए बनी है — जहाँ बंपर फ़सल दिनों में दाम इतना गिरा देती है कि तुड़ाई की लागत भी न निकले।
हर साल की जद्दोजहद नहीं, एक स्थायी गारंटी
₹45,000 करोड़ की राशि का मतलब है कि ख़रीद एजेंसियों को MSP पर ख़रीद शुरू करने से पहले सीज़न के बीच नई मंज़ूरी का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- अधिसूचित दलहन, तिलहन या खोपरा उगाने वाले किसान, जो नाफेड के ई-समृद्धि या एनसीसीएफ के ई-संयुक्ति पोर्टल पर पूर्व-पंजीकृत हों, ऐसे सीज़न में जब बाज़ार दाम MSP से नीचे गिर चुका हो
- उन राज्यों के तिलहन किसान जहाँ राज्य ने इस सीज़न PDPS अपनाया हो, और जो सामान्य रूप से खुले बाज़ार में बेच रहे हों
- टमाटर, प्याज़, आलू या किसी अन्य अधिसूचित शीघ्र-नष्ट फ़सल के किसान, उस क्षेत्र व अवधि में जिसके लिए राज्य सरकार ने विशेष रूप से MIS सहायता माँगी हो
- वे किसान जिनके अपने नाम पर बचत या चालू बैंक खाता हो, क्योंकि पीएम-आशा का हर भुगतान — ख़रीद हो या न्यूनता भुगतान — ऑनलाइन ही होता है
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- वह फ़सल जो सीज़न की MSP-अधिसूचित सूची में न हो, या जिसके लिए संबंधित राज्य ने उस साल केंद्र से ख़रीद की मंज़ूरी न माँगी हो
- वह किसान जिसने ख़रीद अवधि शुरू होने से पहले e-Samridhi/e-Samyukti पर पूर्व-पंजीकरण न कराया हो — ख़रीद केंद्र पर बिना पंजीकरण सीधे बेचने की गारंटी नहीं है
- ऐसे बाज़ार दाम जो अब भी MSP के बराबर या ऊपर हों — पीएम-आशा के घटक तभी सक्रिय होते हैं जब दाम असल में समर्थन स्तर से नीचे गिरें
- MIS सहायता उस विशेष मात्रा, अवधि व क्षेत्र से बाहर, जिसके लिए राज्य को मंज़ूरी मिली हो — यह PSS जैसी खुली, स्थायी योजना नहीं है
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
आधार कार्ड
e-Samridhi/e-Samyukti पंजीकरण व आधार-आधारित ई-केवाईसी के दौरान पहचान सत्यापन के लिए।
ज़मीन का रिकॉर्ड
खसरा/खतौनी या समकक्ष अधिकार अभिलेख, ख़रीद के लिए पंजीकृत क्षेत्र व फ़सल सत्यापित करने हेतु।
बैंक पासबुक या रद्द चेक
किसान के अपने नाम का बचत या चालू खाता — ख़रीद भुगतान व PDPS न्यूनता भुगतान दोनों यहीं जमा होते हैं।
आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर
पंजीकरण के दौरान OTP सत्यापन व ख़रीद/भुगतान की स्थिति की SMS सूचना के लिए ज़रूरी।
बिक्री रसीद / गेट पास
PSS या MIS के तहत उपज बेचने पर ख़रीद केंद्र पर मिलती है, भुगतान ट्रैक व पुष्टि करने के लिए ज़रूरी।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
सीज़न की MSP-अधिसूचित फ़सल सूची देखें
पुष्टि करें कि आपकी फ़सल मौजूदा MSP सूची में है और आपके राज्य ने इस सीज़न इसके लिए ख़रीद संचालन की केंद्रीय मंज़ूरी माँगी है।
- 2
e-Samridhi या e-Samyukti पर पूर्व-पंजीकरण करें
दलहन, तिलहन व खोपरा के लिए, कटाई से पहले esamridhi.in (नाफेड) या esamyukti.in (एनसीसीएफ) पर, सीधे या अपने PACS/FPO के ज़रिए पंजीकरण करें — ख़रीद केंद्र पहले से पंजीकृत किसानों को प्राथमिकता देते हैं।
- 3
मंडी दाम को MSP से तुलना करते रहें
पीएम-आशा के घटक तभी सक्रिय होते हैं जब आपकी फ़सल का प्रचलित बाज़ार दाम असल में MSP से नीचे गिर जाए — दाम MSP के बराबर या ऊपर रहने पर दावा करने को कुछ नहीं होता।
- 4
ख़रीद केंद्र पर, या खुले बाज़ार में बेचें
PSS/MIS के तहत, उपज तय ख़रीद केंद्र पर लाएँ जहाँ गुणवत्ता जाँच के बाद MSP पर ख़रीद होती है। PDPS के तहत, हमेशा की तरह खुले बाज़ार में बेचें।
- 5
भुगतान या न्यूनता राशि प्राप्त करें
PSS/MIS की ख़रीद राशि, या PDPS में MSP व आपके असली बिक्री दाम के बीच का अंतर (MSP के 15% तक सीमित), आपके पंजीकृत बैंक खाते में जमा होता है।
- 6
MIS के लिए, राज्य की अधिसूचना का इंतज़ार करें
MIS किसी फ़सल, क्षेत्र व अवधि के लिए तभी खुलती है जब दाम गिरने के बाद आपके राज्य ने केंद्र से मंज़ूरी माँगी व पाई हो — इसके लिए कोई अग्रिम पंजीकरण नहीं होता।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
मूल शुरुआत
सितंबर 2018
मूल्य-समर्थन तंत्रों को जोड़ने वाली नई छत्र योजना के रूप में
निरंतरता मंज़ूर
18 सितंबर 2024
15वें वित्त आयोग चक्र के लिए, 2025-26 तक, केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी
PSS व PSF मिलाए गए
2024
दलहन व प्याज़ पर बेहतर क्रियान्वयन के लिए संयुक्त किए गए
तथ्य अंतिम जाँच
2026-09-02
pib.gov.in व pmindia.gov.in की 2024 निरंतरता संबंधी प्रेस विज्ञप्तियों और नाफेड के आधिकारिक e-Samridhi/हेल्पलाइन विवरण के अनुसार
अपनी पात्रता जाँचें
सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।
5 में से 0 जवाब दिए
यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
डाउनलोड
केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।
आधिकारिक लिंक और हेल्पलाइन
पोर्टल को ही बुकमार्क करें — कोई भी तीसरी वेबसाइट भुगतान न जारी कर सकती है, न रोक सकती है, न तेज़ कर सकती है।
- कृषि एवं किसान कल्याण विभागagriwelfare.gov.in — पीएम-आशा का संचालन करने वाला मंत्रालय
- e-Samridhi पोर्टल (नाफेड)दलहन, तिलहन व खोपरा के लिए किसान पंजीकरण व ख़रीद
- e-Samyukti पोर्टल (एनसीसीएफ)एनसीसीएफ का समानांतर पंजीकरण व ख़रीद मंच
- नाफेड किसान हेल्पलाइनख़रीद संबंधी सवालों के लिए टोल-फ्री नंबर व ईमेल
हेल्पलाइन
24×7 IVRS और हेल्प डेस्क, मंत्रालय चलाता है — अटके भुगतान की जाँच का सबसे तेज़ तरीका फोन ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीएम-आशा क्या है?
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान केंद्र सरकार की छत्र योजना है, जो सितंबर 2018 में शुरू हुई थी, ताकि दलहन, तिलहन, खोपरा व चुनिंदा शीघ्र-नष्ट बाग़वानी फ़सलों पर बाज़ार दाम MSP से नीचे गिरने पर किसानों को लाभकारी मूल्य मिले। इसकी निरंतरता को मंत्रिमंडल ने 18 सितंबर 2024 को 15वें वित्त आयोग चक्र के लिए, 2025-26 तक, ₹35,000 करोड़ के कुल व्यय के साथ मंज़ूरी दी।
पीएम-आशा के चार घटक क्या हैं?
मूल्य समर्थन योजना (PSS) दलहन, तिलहन व खोपरा की MSP पर भौतिक ख़रीद करती है; मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF), जो अब PSS के साथ मिला दिया गया है, दलहन व प्याज़ का बफ़र स्टॉक रखता है; मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) तिलहन किसानों को MSP व उनके असली बिक्री दाम के बीच का अंतर सीधे बैंक खाते में देती है; और बाज़ार हस्तक्षेप योजना (MIS) टमाटर, प्याज़ व आलू जैसी फ़सलों को ख़रीद या सीधे भुगतान से कवर करती है।
PSS के तहत मेरी कितनी फ़सल ख़रीदी जा सकती है?
2024-25 सीज़न से किसी अधिसूचित दलहन, तिलहन या खोपरा फ़सल के राष्ट्रीय उत्पादन का 25% — साथ ही 2024-25 सीज़न के लिए तुअर, उड़द व मसूर की 100% ख़रीद का विशेष अपवाद, ताकि ज़्यादा किसान दलहन उगाने को प्रेरित हों।
पीएम-आशा के तहत बेचने के लिए मैं कैसे पंजीकरण करूँ?
दलहन, तिलहन व खोपरा के लिए, कटाई सीज़न से पहले नाफेड के e-Samridhi पोर्टल (esamridhi.in) या एनसीसीएफ के e-Samyukti पोर्टल (esamyukti.in) पर, सीधे या अपनी प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS) या FPO के ज़रिए पूर्व-पंजीकरण करें। ख़रीद केंद्र उन किसानों को प्राथमिकता देते हैं जिन्होंने सीज़न शुरू होने से पहले पंजीकरण कराया हो।
मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (PDPS) क्या है और यह PSS से कैसे अलग है?
PSS के तहत, सरकारी एजेंसी आपकी फ़सल MSP पर भौतिक रूप से ख़रीदती है। PDPS के तहत, जो मुख्यतः तिलहन के लिए है, आप हमेशा की तरह खुले बाज़ार में बेचते हैं, और सरकार अलग से MSP व आपके असली बिक्री दाम के बीच का अंतर — MSP के 15% तक सीमित — सीधे आपके बैंक खाते में भेजती है। PDPS फ़िलहाल किसी राज्य के तिलहन उत्पादन के 40% को 4 महीने की अवधि में कवर करती है।
बाज़ार हस्तक्षेप योजना (MIS) क्या कवर करती है?
MIS उन शीघ्र-नष्ट बाग़वानी फ़सलों के लिए है जिनका कोई MSP ही नहीं होता — अक्सर टमाटर, प्याज़ व आलू — जहाँ अधिक उत्पादन कुछ ही दिनों में दाम गिरा सकता है। यह उत्पादन के 25% को, या तो सीधी ख़रीद से या बढ़ते तौर पर किसान को सीधे अंतर-भुगतान से कवर करती है, साथ ही केंद्र परिवहन व भंडारण लागत में भी हिस्सा लेता है। PSS के उलट, MIS तभी खुलती है जब राज्य सरकार किसी फ़सल, क्षेत्र व अवधि के लिए विशेष रूप से इसका अनुरोध करे।
₹45,000 करोड़ की गारंटी राशि किसलिए है?
यह एक स्थायी सरकारी गारंटी है, जिसे 2024 की निरंतरता के तहत नवीनीकृत व बढ़ाया गया, जो PSS के तहत अधिसूचित दलहन, तिलहन व खोपरा की MSP पर ख़रीद को सहारा देती है। यह नाफेड व एनसीसीएफ को दाम MSP से नीचे गिरते ही पूर्व-पंजीकृत किसानों से असल में ख़रीद करने देती है, न कि हर बार दाम गिरने पर नई बजट मंज़ूरी का इंतज़ार करने देती है।
क्या पीएम-आशा पीएम-किसान की तरह हर साल तय राशि देती है?
नहीं। पीएम-आशा में प्रति किसान कोई तय सालाना भुगतान नहीं है — हर घटक तभी सक्रिय होता है जब किसी अधिसूचित फ़सल का बाज़ार दाम उस सीज़न असल में MSP से नीचे गिर जाए। जिस सीज़न दाम अच्छे रहते हैं, उसमें किसान को पीएम-आशा के तहत कुछ भी न मिलना सामान्य है, यह इसी तरह डिज़ाइन की गई है।
e-Samridhi या e-Samyukti पर पंजीकरण के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
आपका आधार कार्ड, OTP सत्यापन के लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर, फ़सल व क्षेत्र की पुष्टि के लिए ज़मीन का रिकॉर्ड (खसरा/खतौनी), और अपने नाम के बचत या चालू खाते के लिए बैंक पासबुक या रद्द चेक।
क्या पीएम-आशा मेरी हर उगाई गई फ़सल के लिए उपलब्ध है?
नहीं — केवल वे फ़सलें कवर होती हैं जो उस विशेष सीज़न के लिए PSS, PDPS या MIS के तहत औपचारिक रूप से अधिसूचित हों, और तब भी कवरेज राष्ट्रीय या राज्य उत्पादन के एक प्रतिशत तक सीमित होता है, असीमित नहीं। कोई फ़सल कवर है यह मानने से पहले मौजूदा सीज़न की अधिसूचित सूची देखें।
2024 की निरंतरता में पीएम-आशा में क्या बदला?
मूल्य समर्थन योजना व मूल्य स्थिरीकरण कोष को दलहन व प्याज़ के लिए एक ही क्रियान्वयन में मिला दिया गया, PDPS कवरेज राज्य के तिलहन उत्पादन के 25% से बढ़ाकर 40% किया गया व इसकी अवधि 3 से बढ़ाकर 4 महीने की गई, MIS कवरेज उत्पादन के 20% से बढ़ाकर 25% किया गया व सीधे भुगतान का विकल्प जोड़ा गया, और ख़रीद गारंटी राशि बढ़ाकर ₹45,000 करोड़ की गई — यह सब 15वें वित्त आयोग चक्र के लिए, 2025-26 तक।
अगर पीएम-आशा के तहत मेरा भुगतान देर से आए तो मैं किससे संपर्क करूँ?
नाफेड-संचालित ख़रीद (e-Samridhi) के लिए, किसान हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800-111-622 या [email protected] पर ईमेल करें। एनसीसीएफ-संचालित ख़रीद (e-Samyukti) के लिए, esamyukti.in पर दिए गए विवरण से एनसीसीएफ से संपर्क करें।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन 1800-111-622 ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
