राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – पाम तेल
National Mission on Edible Oils – Oil Palm (NMEO-OP)
पाम तेल की खेती लगाने वाले किसानों को केंद्र सरकार की योजना — पौध सामग्री, ड्रिप सिंचाई और मशीनरी पर सब्सिडी, साथ ही एक मूल्य-सुरक्षा भुगतान (VGP) ताकि पाम तेल के दाम गिरने पर किसान की कमाई न डूबे।
- कुल लागत
- ₹11,040 करोड़
- योजना की स्थिति
- सक्रिय
- मंत्रिमंडल मंज़ूरी
- 18 अगस्त 2021
- मंत्रालय
- कृषि एवं किसान कल्याण
- क्षेत्र लक्ष्य
- 2025-26 तक 6.5 लाख हेक्टेयर नया
- मूल्य सुरक्षा
- वायबिलिटी गैप पेमेंट (VGP)
- विशेष फोकस
- पूर्वोत्तर एवं अंडमान-निकोबार
- फंडिंग पैटर्न
- 90:10 (पूर्वोत्तर) · 60:40 (अन्य राज्य)
परिचय
एनएमईओ-ओपी (NMEO-OP) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 अगस्त 2021 को एक नई केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में मंज़ूरी दी — कुल ₹11,040 करोड़ की लागत (₹8,844 करोड़ केंद्र + ₹2,196 करोड़ राज्य) से पाम तेल की खेती बढ़ाकर देश को आयातित खाद्य तेल पर निर्भरता कम करने के लिए।
इसमें पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को विशेष प्रोत्साहन मिलता है, लेकिन यह मिशन देश भर के चिन्हित पाम तेल उत्पादक राज्यों में चलाया जा रहा है — दक्षिण में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से लेकर पूर्वोत्तर में असम और मणिपुर तक।
यह मिशन पाम तेल का बगीचा लगाने, उसकी देखभाल करने, सिंचाई करने और मशीनरी की लागत में मदद देता है, और चूँकि पाम तेल 25-30 साल की लंबी प्रतिबद्धता है, इसलिए किसान को फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) के दाम गिरने पर एक वायबिलिटी गैप पेमेंट (VGP) देकर सुरक्षा भी देता है।
1 अक्टूबर 2024 से एनएमईओ-ओपी कृषोन्नति योजना के छाते के नीचे अपनी बहन योजना एनएमईओ-ऑयलसीड्स, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और अन्य के साथ आता है — फिर भी इसका अपना बजट और अपने किसान-लाभ पहले जैसे ही बने हुए हैं।
योजना की मुख्य बातें
वायबिलिटी गैप पेमेंट (VGP)
अगर मिल आपको फ्रेश फ्रूट बंच का जो दाम देती है वह सरकार द्वारा घोषित वायबिलिटी प्राइस से कम हो जाए, तो बचा हुआ फर्क सीधे आपके बैंक खाते में DBT से जमा होता है।
पौध सामग्री सहायता बढ़कर ₹29,000/हेक्टेयर
नया बगीचा लगाना सस्ता हो, इसलिए पौध सामग्री और देखभाल की सहायता ₹12,000/हेक्टेयर से बढ़ाकर ₹29,000/हेक्टेयर कर दी गई है।
खरीद की गारंटी
हर प्लांटेशन क्षेत्र किसी चिन्हित पाम तेल प्रोसेसिंग कंपनी से जुड़ा होता है, जो अनुबंध के तहत आपकी उपज खरीदने के लिए बाध्य है — खरीदार खुद ढूँढने की ज़रूरत नहीं।
ड्रिप सिंचाई एवं अंतर-फसल सहायता
ड्रिप सिंचाई पर सब्सिडी और बीच की खाली जगह में दूसरी फसल (इंटरक्रॉपिंग) लगाने की मदद से, फल आने के पहले 4 साल के इंतज़ार में भी कुछ कमाई हो सकती है।
पुराने बगीचे का पुनर्जीवन
पुराने, कम उपज देने वाले पाम तेल बगीचों को दोबारा लगाने या सुधारने के लिए ₹250 प्रति पौधा विशेष सहायता उपलब्ध है।
पूर्वोत्तर एवं अंडमान-निकोबार के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन
पूर्वोत्तर और हिल राज्यों के लिए केंद्र का हिस्सा 90:10 रखा गया है — मिशन की शुरुआत ही इन क्षेत्रों की पाम तेल क्षमता को इस्तेमाल करने के लिए हुई थी।
आपको क्या मिलता है
खेती-लागत सब्सिडी
पौध सामग्री, देखभाल, अंतर-फसल, ड्रिप सिंचाई और कृषि मशीनरी — पाम तेल का बगीचा लगाने की मुख्य लागतें इसमें शामिल हैं।
मूल्य सुरक्षा (VGP)
फ्रेश फ्रूट बंच का दाम अगर उस तेल-वर्ष (1 नवंबर से 31 अक्टूबर) की घोषित वायबिलिटी प्राइस से कम रह जाए, तो वायबिलिटी गैप पेमेंट से फर्क पूरा किया जाता है।
तय खरीद
चिन्हित प्रोसेसिंग कंपनी से पक्का अनुबंध होने के कारण आपकी उपज का खरीदार तय होता है, तय कीमत पर।
पुनर्रोपण सहायता
20-25 साल बाद उपज घटने पर पुराने बगीचे को दोबारा लगाने के लिए ₹250 प्रति पौधा मिलता है।
कौन पात्र है
दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।
आप पात्र हैं अगर
- ऐसे राज्य/ज़िले में खेती योग्य ज़मीन हो जिसे NMEO-OP के तहत पाम तेल विस्तार के लिए चिन्हित किया गया है
- ज़मीन को लंबे समय के लिए पाम तेल में लगाने की तैयारी हो — यह बारहमासी फसल है, फल 4-5वें साल से आना शुरू होता है और 25-30 साल तक मिलता रहता है
- उस क्षेत्र की चिन्हित प्रोसेसिंग कंपनी के साथ फ्रेश फ्रूट बंच (FFB) आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर करने को तैयार हों
- साल भर सिंचाई का पक्का इंतज़ाम हो या हो सके, क्योंकि पाम तेल को लगातार पानी चाहिए
- सब्सिडी और वायबिलिटी गैप पेमेंट के DBT के लिए आधार से जुड़ा बैंक खाता हो
ज़मीन होते हुए भी अपात्र
- ऐसी ज़मीन जो मिशन के पाम तेल विस्तार क्षेत्र में चिन्हित राज्य/ज़िले से बाहर हो
- ऐसी ज़मीन जहाँ पास में कोई प्रोसेसिंग कंपनी जुड़ी न हो — तय खरीद का पूरा मॉडल पास की मिल पर निर्भर करता है
- ऐसे किसान जो कई साल (फल आने तक का इंतज़ार + 25-30 साल की फसल अवधि) की प्रतिबद्धता के लिए तैयार न हों
यह योजना कहाँ लागू है
पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।
ज़रूरी दस्तावेज़
शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।
भूमि अभिलेख
जिस खेत में पौधे लगेंगे, उसका रिकॉर्ड ऑफ राइट्स / मालिकाना हक या लंबी अवधि का पट्टा दस्तावेज़।
आधार कार्ड
पहचान सत्यापन और सब्सिडी व वायबिलिटी गैप पेमेंट के DBT के लिए ज़रूरी।
बैंक पासबुक
पौध सामग्री सब्सिडी और VGP भुगतान के लिए आधार से जुड़ा खाता।
FFB आपूर्ति अनुबंध
आपके क्षेत्र की चिन्हित पाम तेल प्रोसेसिंग कंपनी के साथ हस्ताक्षरित अनुबंध।
आवेदन फॉर्म
जब आपके ज़िले में प्लांटेशन कार्यक्रम खुले, तब राज्य कृषि/बागवानी विभाग के कार्यालय में भरा जाता है।
आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम
चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।
- 1
देखें कि आपका क्षेत्र चिन्हित पाम तेल क्षेत्र है या नहीं
अपने ज़िला कृषि/बागवानी कार्यालय से संपर्क करके पता करें कि आपका ज़िला NMEO-OP में शामिल है या नहीं, और वहाँ कौन-सी प्रोसेसिंग कंपनी जुड़ी है।
- 2
राज्य विभाग में पंजीकरण करें
जब आपके क्षेत्र में प्लांटेशन कार्यक्रम की घोषणा हो, तो राज्य कृषि/बागवानी विभाग में आवेदन करें — साथ में भूमि अभिलेख, आधार और बैंक विवरण रखें।
- 3
FFB आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर करें
चिन्हित प्रोसेसिंग कंपनी के साथ खरीद अनुबंध पर हस्ताक्षर करें — पौधा लगाने से पहले ही आपका खरीदार तय हो जाता है।
- 4
पौध सामग्री एवं शुरुआती सहायता पाएँ
शुरुआती वर्षों में सब्सिडी वाले पौधे और देखभाल, ड्रिप सिंचाई व अंतर-फसल की सहायता कार्यान्वयन एजेंसी के ज़रिए मिलती है।
- 5
देखभाल जारी रखें, फिर FFB बेचना शुरू करें
पाम तेल में फल आमतौर पर 4-5वें साल से आना शुरू होता है। फ्रेश फ्रूट बंच अपनी तय प्रोसेसिंग कंपनी को बेचें; दाम वायबिलिटी प्राइस से कम रहने पर VGP का फर्क DBT से जमा होता है।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
मंत्रिमंडल मंज़ूरी
18 अगस्त 2021
आत्मनिर्भर भारत के खाद्य-तेल अभियान का हिस्सा
मिशन अवधि (मंज़ूर के अनुसार)
2021-22 से 2025-26
नवीनतम वायबिलिटी प्राइस घोषित
1 जनवरी 2026
तेल-वर्ष 2025-26 के लिए (1 नवंबर 2025 - 31 अक्टूबर 2026)
तथ्य अंतिम बार जाँचे गए
18 अगस्त 2026
nmeo.dac.gov.in और pib.gov.in के अनुसार
अपनी पात्रता जाँचें
सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।
6 में से 0 जवाब दिए
यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।
डाउनलोड
केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।
आधिकारिक लिंक और हेल्पलाइन
पोर्टल को ही बुकमार्क करें — कोई भी तीसरी वेबसाइट भुगतान न जारी कर सकती है, न रोक सकती है, न तेज़ कर सकती है।
- आधिकारिक मिशन वेबसाइटnmeo.dac.gov.in — दिशा-निर्देश, आँकड़े, वायबिलिटी प्राइस घोषणाएँ, किसान पंजीकरण
- किसान पंजीकरण (NMEO-OP)मिशन पोर्टल पर पंजीकरण करें (राज्य कृषि/बागवानी विभाग से भी आवेदन कर सकते हैं)
- संपर्क / पाम तेल डेस्ककृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पाम तेल प्रभाग के संपर्क विवरण
- PIB — मंत्रिमंडल मंज़ूरी प्रेस विज्ञप्ति18 अगस्त 2021 की मूल मंत्रिमंडल मंज़ूरी सूचना
हेल्पलाइन
24×7 IVRS और हेल्प डेस्क, मंत्रालय चलाता है — अटके भुगतान की जाँच का सबसे तेज़ तरीका फोन ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
NMEO-OP क्या है?
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – पाम तेल (NMEO-OP) एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 18 अगस्त 2021 को ₹11,040 करोड़ की लागत से मंज़ूरी दी। यह किसानों को नई ज़मीन पर पाम तेल लगाने के लिए भुगतान करती है और उनकी कमाई को दाम में उतार-चढ़ाव से बचाती है।
NMEO-OP के लिए कौन पात्र है?
ऐसे किसान जिनके पास मिशन के चिन्हित पाम तेल विस्तार क्षेत्र में खेती योग्य, सिंचित ज़मीन है, जो लंबे समय के लिए ज़मीन देने को तैयार हैं (फल 4-5वें साल से आता है और 25-30 साल तक मिलता है) और उस क्षेत्र की जुड़ी प्रोसेसिंग कंपनी के साथ फ्रेश फ्रूट बंच आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर करने को तैयार हैं।
वायबिलिटी गैप पेमेंट (VGP) क्या है?
VGP एक मूल्य-सुरक्षा भुगतान है। हर तेल-वर्ष (1 नवंबर से 31 अक्टूबर) के लिए सरकार फ्रेश फ्रूट बंच की एक वायबिलिटी प्राइस घोषित करती है। अगर बाज़ार से जुड़ी जो कीमत आपको असल में मिलती है वह इससे कम रह जाए, तो सरकार वह फर्क सीधे DBT से आपके खाते में देती है — ताकि अंतरराष्ट्रीय पाम तेल के दाम गिरने पर भी आपकी कमाई न डूबे।
NMEO-OP में प्रति हेक्टेयर कितनी सहायता मिलती है?
पौध सामग्री और देखभाल की सहायता ₹12,000/हेक्टेयर से बढ़ाकर ₹29,000/हेक्टेयर कर दी गई है। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई, अंतर-फसल और कृषि मशीनरी के लिए अलग सहायता है, और पुराने बगीचे को दोबारा लगाने के लिए ₹250 प्रति पौधा मिलता है।
NMEO-OP किन राज्यों में लागू है?
मिशन पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को विशेष प्रोत्साहन देता है, लेकिन इसे देश भर के चिन्हित पाम तेल उत्पादक ज़िलों में लागू किया जा रहा है — जिनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्य शामिल हैं। अपना ज़िला चिन्हित है या नहीं, यह ज़िला कृषि कार्यालय से पक्का करें।
NMEO-OP के लिए आवेदन कैसे करें?
जब आपके ज़िले में प्लांटेशन कार्यक्रम शुरू हो, तब राज्य कृषि या बागवानी विभाग के ज़रिए आवेदन करें, या nmeo.dac.gov.in पोर्टल पर पंजीकरण करें। भूमि अभिलेख, आधार, बैंक विवरण चाहिए होंगे, और चिन्हित प्रोसेसिंग कंपनी के साथ आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर करने होंगे।
NMEO-OP का फंडिंग पैटर्न क्या है?
पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य 90:10 के अनुपात में लागत साझा करते हैं, बाकी सामान्य राज्यों में यह 60:40 है। केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय एजेंसियों को केंद्र 100% फंड देता है।
क्या NMEO-OP की सहायता लोन है, जिसे चुकाना पड़ेगा?
नहीं। पौध सामग्री, देखभाल, सिंचाई और मशीनरी की सहायता एक सब्सिडी/अनुदान है, और वायबिलिटी गैप पेमेंट एक मूल्य-सहायता भुगतान है — दोनों में से किसी को चुकाना नहीं पड़ता।
पाम तेल के बगीचे से कमाई शुरू होने में कितना समय लगता है?
पाम तेल में आमतौर पर लगाने के 4-5वें साल से फल आना शुरू होता है। इस इंतज़ार के दौरान मिशन कतारों के बीच दूसरी फसल (इंटरक्रॉपिंग) लगाने में मदद करता है ताकि खेत खाली न रहे, और ड्रिप सिंचाई में सहायता देता है ताकि पौधे अच्छे से जड़ पकड़ें।
पौधा लगाने के बाद अगर फ्रेश फ्रूट बंच का दाम गिर जाए तो?
यही स्थिति के लिए वायबिलिटी गैप पेमेंट बनाई गई है। अगर आपकी प्रोसेसिंग कंपनी जो दाम देती है वह उस तेल-वर्ष की सरकार-घोषित वायबिलिटी प्राइस से कम रह जाए, तो बचा हुआ फर्क DBT से आपके बैंक खाते में जमा होता है।
क्या मुझे अपनी उपज किसी खास कंपनी को ही बेचनी होगी?
हाँ। हर मिशन क्षेत्र किसी चिन्हित प्रोसेसिंग कंपनी से जुड़ा होता है, और पौधा लगाने से पहले ही आप उसके साथ आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हैं। इससे खरीदार की गारंटी तो मिलती है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि आप FFB कहीं और खुले बाज़ार में नहीं बेच सकते।
NMEO-OP, NMEO-ऑयलसीड्स से कैसे अलग है?
NMEO-OP (2021 में मंज़ूर) खासतौर पर पाम तेल के लिए है — यह एक बारहमासी वृक्ष फसल है। NMEO-ऑयलसीड्स (अक्टूबर 2024 में मंज़ूर, ₹10,103 करोड़, 2024-25 से 2030-31) सरसों, मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी वार्षिक तिलहन फसलों के लिए है। दोनों कृषोन्नति योजना के छाते के नीचे आते हैं और मिलकर 2030-31 तक भारत की खाद्य-तेल आत्मनिर्भरता को लगभग 72% तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन दोनों का अपना अलग बजट और नियम हैं।
NMEO-OP की हेल्पलाइन क्या है?
सामान्य कृषि योजना संबंधी सवालों के लिए किसान कॉल सेंटर पर 1800-180-1551 (टोल-फ्री) पर कॉल करें। पाम तेल से जुड़े खास सवालों के लिए nmeo.dac.gov.in के संपर्क पेज से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पाम तेल प्रभाग से संपर्क करें।
क्या NMEO-OP 2026 में भी चालू है?
हाँ। 1 अक्टूबर 2024 से यह मिशन कृषोन्नति योजना के छाते के नीचे चल रहा है। सरकार ने तेल-वर्ष 2025-26 के लिए फ्रेश फ्रूट बंच की वायबिलिटी प्राइस 1 जनवरी 2026 को घोषित की, जिससे साफ है कि मूल्य-सुरक्षा वाली व्यवस्था मौजूदा चक्र में भी चल रही है।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन 1800-180-1551 ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।
