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भारत सरकारमत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (पशुपालन एवं डेयरी विभाग), एनडीडीबी व राज्य सहकारी डेयरी महासंघों के ज़रिए क्रियान्वितसक्रियअपडेट 6 सितंबर 2026

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी)

National Programme for Dairy Development (NPDD)

एक केंद्रीय क्षेत्र योजना जो गाँव डेयरी सहकारी समितियों, ज़िला संघों व राज्य महासंघों को बल्क मिल्क कूलर, ठंडा करने के प्लांट, दूध-जाँच मशीनें व गुणवत्ता प्रयोगशालाएँ लगाने और नई डेयरी सहकारी समितियाँ बनाने के लिए फंड देती है — ताकि छोटे डेयरी किसान को उचित, गुणवत्ता से जुड़ा दाम मिले।

कुल परिव्यय (संशोधित)
₹2,790 करोड़ (15वाँ वित्त आयोग चक्र)
किसमें फंड जाता है
बल्क मिल्क कूलर, ठंडा करने के प्लांट, जाँच प्रयोगशालाएँ
किसे मिलता है
गाँव डेयरी समितियाँ, ज़िला संघ, राज्य महासंघ
नई सहकारी समितियों का लक्ष्य
~10,000 (पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ज़ोर)
हिस्सा B (JICA)
₹1,568.28 करोड़, 9 राज्य
अवधि
2021-22 से 2025-26, 2027-28 तक जारी
क्रियान्वयन एजेंसी
DAHD, एनडीडीबी व राज्य दूध महासंघों के ज़रिए
जोड़ी गई अतिरिक्त संग्रह क्षमता
~1 करोड़ लीटर/दिन

त्वरित सारांश

इस पेज की मुख्य बातें लगभग दो मिनट में — पढ़ें या सुनें।

त्वरित सारांश

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम गाँव के डेयरी काम की वह छूटी हुई कड़ी बनाता है — भोर में दूध निकालने वाले किसान और साफ़, ठंडा दूध चाहने वाले ख़रीदार के बीच का ठंडा करने, जाँच व सहकारी ढाँचा। इसका पैसा किसान को नक़द नहीं मिलता; यह गाँव-स्तरीय डेयरी सहकारी समिति, ज़िला दूध संघ या राज्य महासंघ को जाता है, ताकि बल्क मिल्क कूलर, दूध ठंडा करने के प्लांट, तौलने व फैट जाँचने की मशीनें, मिलावट-जाँच किट व गुणवत्ता प्रयोगशालाएँ लगें और सदस्यों को प्रशिक्षण मिले। दूसरा हिस्सा, सहकारिता के ज़रिए डेयरी, जापानी (JICA) ऋण से वित्तपोषित है और नौ राज्यों में सहकारी नेटवर्क को गहरा करता है। संशोधित कार्यक्रम, जिसे केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मार्च 2025 में मंज़ूरी दी और कुल राशि बढ़ाकर ₹2,790 करोड़ की, लगभग 10,000 नई गाँव डेयरी सहकारी समितियाँ बनाने — ख़ासकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में — और दो नई दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ खड़ी करने के लिए भी अनुदान देता है।

तो एक अकेले डेयरी किसान को लाभ ऐसी सहकारी समिति का सदस्य होने से मिलता है जिसे यह अवसंरचना मिलती है: दूध मशीन पर पारदर्शी तरीक़े से तौला व फैट-जाँचा जाता है, कुछ घंटों में ठंडा हो जाता है ताकि ख़राब न हो, और बिचौलिये के दाम के बजाय उचित, गुणवत्ता से जुड़ी दर पर उसका भुगतान होता है। जहाँ कोई समिति नहीं है, वहाँ एनपीडीडी फंड एक बनाने में मदद करता है। योजना पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा एनडीडीबी (NDDB) व राज्य दूध महासंघों के ज़रिए क्रियान्वित होती है, 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए चलती है और 2027-28 तक जारी है। आवेदन राज्य के ज़रिए जाते हैं — एक गाँव समिति या संघ राज्य महासंघ को परियोजना प्रस्ताव देता है, जो उसे मंज़ूरी के लिए आगे भेजता है। आगे का पन्ना हिस्सों का बँटवारा, फंडिंग पैटर्न व समिति के आवेदन का तरीक़ा देता है।

परिचय

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) फ़रवरी 2014 से पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाया जा रहा है और जुलाई 2021 में 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए इसका पुनर्गठन हुआ। यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है: लाभ गाँव व ज़िला स्तर पर डेयरी अवसंरचना व सहकारी क्षमता है, अकेले किसानों को नक़द भुगतान नहीं।

हिस्सा A दूध संग्रह व गुणवत्ता अवसंरचना बनाने व मज़बूत करने के लिए फंड देता है — बल्क मिल्क कूलर, प्राथमिक ठंडा करने की सुविधाएँ, दूध ठंडा करने के प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक दूध तौल व फैट-जाँच इकाइयाँ, मिलावट-जाँच उपकरण, गुणवत्ता-नियंत्रण प्रयोगशालाएँ व प्रमाणन प्रणालियाँ — राज्य सहकारी डेयरी महासंघों, ज़िला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों, स्वयं सहायता समूहों, दुग्ध उत्पादक कंपनियों व किसान उत्पादक संगठनों के लिए। यह सहकारी सदस्यों के प्रशिक्षण और कम सेवा वाले क्षेत्रों में नई गाँव डेयरी सहकारी समितियों के गठन का भी समर्थन करता है। हिस्सा B, "सहकारिता के ज़रिए डेयरी" (DTC), जापान सरकार व जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के समर्थन से जारी है, कुल परिव्यय ₹1,568.28 करोड़ (JICA ऋण ₹924.56 करोड़, भारत सरकार अनुदान ₹475.54 करोड़, भाग लेने वाली संस्थाएँ ₹168.18 करोड़), और नौ राज्यों में चलता है: आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पश्चिम बंगाल।

केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मार्च 2025 में संशोधित एनपीडीडी को मंज़ूरी दी, ₹1,000 करोड़ जोड़कर कुल राशि 15वें वित्त आयोग चक्र के लिए ₹2,790 करोड़ कर दी। संशोधन का लक्ष्य है पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ज़ोर के साथ लगभग 10,000 नई डेयरी सहकारी समितियाँ, अनुदान समर्थन के साथ दो नई दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ, और अनुमानित 3.2 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार, जिसमें महिलाएँ — जो डेयरी कार्यबल का लगभग 70% हैं — मुख्य लक्षित लाभार्थी हैं। एनपीडीडी अब तक लगभग 18.7 लाख किसानों पर असर, 30,000 से ज़्यादा रोज़गार और प्रतिदिन 1 करोड़ लीटर अतिरिक्त दूध संग्रह क्षमता की सूचना दे चुका है।

योजना की मुख्य बातें

  • दूध जो ख़राब होने से पहले ठंडा हो जाता है

    गाँव के संग्रह केंद्र पर फंडेड बल्क मिल्क कूलर व प्राथमिक ठंडा करने की इकाइयाँ दूध निकालने के कुछ घंटों में उसे भंडारण तापमान तक ला देती हैं, जिससे छोटे डेयरी किसान का खट्टे दूध का नुक़सान घटता है।

  • पारदर्शी तौल व फैट-जाँच

    समिति पर इलेक्ट्रॉनिक दूध तौल व फैट/SNF-जाँच मशीनें मतलब सदस्य को मापी गई गुणवत्ता पर भुगतान, संग्राहक के अंदाज़े पर नहीं — गाँव में दूध बिक्री का सबसे बड़ा झगड़ा यहीं से मिटता है।

  • गुणवत्ता प्रयोगशालाएँ व मिलावट जाँच

    एनपीडीडी संघों व महासंघों पर दूध-जाँच उपकरण, मिलावट-जाँच किट व गुणवत्ता-नियंत्रण प्रयोगशालाएँ फंड करता है, जिससे सहकारी समिति प्रमाणित साफ़ दूध बेहतर दर पर बेच सकती है।

  • जहाँ कोई समिति नहीं थी, वहाँ एक

    संशोधित योजना पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ज़ोर के साथ लगभग 10,000 नई गाँव डेयरी सहकारी समितियाँ बनाने के लिए अनुदान देती है, ताकि बिना सेवा वाले गाँवों के किसानों को पहली बार एक संगठित ख़रीदार मिले।

  • सहकारिता के ज़रिए डेयरी (JICA)

    हिस्सा B, ₹1,568.28 करोड़ के परिव्यय में ₹924.56 करोड़ के JICA ऋण से समर्थित, नौ राज्यों में सहकारी नेटवर्क — उत्पादन, प्रसंस्करण व विपणन — को मज़बूत करता है।

  • महिला डेयरी किसानों के इर्द-गिर्द बना

    महिलाएँ डेयरी कार्यबल की लगभग 70% हैं और संशोधित कार्यक्रम की मुख्य लक्षित लाभार्थी, जो लगभग 3.2 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार का अनुमान लगाता है।

प्रमुख घटक

राज्य स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से इनमें से चुनाव करते हैं — हर घटक की अपनी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया है, जहाँ अलग पेज मौजूद है वहाँ पूरी जानकारी उसी पर है।

  • हिस्सा A — दूध संग्रह व गुणवत्ता अवसंरचना

    बल्क मिल्क कूलर, प्राथमिक ठंडा करने की सुविधाएँ, दूध ठंडा करने के प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक तौल व फैट-जाँच इकाइयाँ, मिलावट-जाँच उपकरण, गुणवत्ता प्रयोगशालाएँ व प्रमाणन, साथ ही सदस्य प्रशिक्षण व नई गाँव डेयरी सहकारी समितियों का गठन।

    गाँव डेयरी समितियों, ज़िला दूध संघों, स्वयं सहायता समूहों, दुग्ध उत्पादक कंपनियों व डेयरी FPO के सदस्य

  • हिस्सा B — सहकारिता के ज़रिए डेयरी (DTC)

    JICA-समर्थित डेयरी सहकारी समितियों की मज़बूती — उत्पादन, प्रसंस्करण व विपणन अवसंरचना — नौ राज्यों (आंध्र, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल) में ₹1,568.28 करोड़ के परिव्यय के साथ।

    नौ DTC राज्यों में डेयरी सहकारी समितियाँ व उनके सदस्य

आपको क्या मिलता है

  • उचित, गुणवत्ता से जुड़ा दाम

    समिति पर मशीन से तौला व फैट-जाँचा गया दूध सहकारी समिति द्वारा तय पारदर्शी दर पर ख़रीदा जाता है, जो आम तौर पर निजी दूध व्यापारी की पेशकश से ऊँची व ज़्यादा भरोसेमंद होती है।

  • ख़राबी का कम नुक़सान

    गाँव स्तर पर ठंडा करने का मतलब है दूध डेयरी तक जाते हुए खट्टा नहीं होता, इसलिए गर्मी में अस्वीकृत या ख़राब दूध पर किसान का पैसा नहीं कटता।

  • गाँव के पास एक पक्का ख़रीदार

    चालू सहकारी समिति या नई बनी समिति हर सुबह-शाम तय जगह पर दूध ख़रीदती है, जिससे छोटे डेयरी किसान को ख़रीदार ढूँढने के बजाय एक स्थिर बाज़ार मिलता है।

  • प्रशिक्षण व बेहतर तरीक़े

    एनपीडीडी समिति सदस्यों व कर्मचारियों को साफ़ दूध उत्पादन, पशु आहार व सहकारी प्रबंधन का प्रशिक्षण फंड करता है, जिससे उपज और दूध का दाम दोनों बढ़ते हैं।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • आप गाँव डेयरी सहकारी समिति, ज़िला दूध संघ या राज्य सहकारी डेयरी महासंघ के सदस्य हैं या बन सकते हैं
  • आप दूध पूलिंग में लगे स्वयं सहायता समूह, दुग्ध उत्पादक कंपनी या किसान उत्पादक संगठन से जुड़े हैं
  • आपके गाँव में अभी कोई डेयरी सहकारी समिति नहीं है — एनपीडीडी अनुदान समर्थन एक बनाने में मदद कर सकता है, ख़ासकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में
  • आपकी सहकारी समिति या संघ को दूध ठंडा करने, जाँच या गुणवत्ता प्रयोगशाला अवसंरचना चाहिए और वह राज्य महासंघ के ज़रिए परियोजना प्रस्ताव दे सकता है

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • अकेले किसान को सीधी नक़द सब्सिडी या प्रति-लीटर भुगतान की उम्मीद करना — एनपीडीडी संस्थाओं को फंड करता है, व्यक्तियों को नहीं
  • बिना किसी सहकारी या उत्पादक-समूह ढाँचे वाला पूरी तरह निजी डेयरी व्यवसाय
  • सीधे केंद्र को आवेदन करना — प्रस्ताव राज्य दूध महासंघ व राज्य सरकार के ज़रिए जाने चाहिए
  • डेयरी प्लांट या पशु शेड के लिए ऋण चाहना — वह AHIDF या डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष है, एनपीडीडी नहीं

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR)

    समिति, संघ या महासंघ द्वारा दूध-क्षेत्र सर्वेक्षण के आधार पर तैयार, जिसमें माँगी गई अवसंरचना, लागत, क्षमता व अपेक्षित सदस्य कवरेज दी हो।

  • सहकारी / उत्पादक-निकाय पंजीकरण

    सबूत कि आवेदक एक पंजीकृत डेयरी सहकारी समिति, दूध संघ, राज्य महासंघ, दुग्ध उत्पादक कंपनी, स्वयं सहायता समूह या FPO है।

  • बैंक व वित्तीय विवरण

    संस्था के खाते का विवरण और, जहाँ फंडिंग पैटर्न ज़रूरी हो, भाग लेने वाली संस्था के अपने योगदान का सबूत।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    दूध-क्षेत्र सर्वेक्षण व DPR

    राज्य, एनडीडीबी के समर्थन से, दूध-क्षेत्र का सर्वेक्षण करता है और समिति/संघ ठंडा करने, जाँच या समिति-गठन समर्थन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाता है।

  2. 2

    राज्य स्तरीय तकनीकी समिति समीक्षा

    DPR की जाँच राज्य स्तरीय तकनीकी प्रबंधन समिति तकनीकी मज़बूती व एनपीडीडी दिशा-निर्देशों से मेल के लिए करती है।

  3. 3

    परियोजना स्वीकृति समिति की मंज़ूरी

    सचिव, DAHD की अध्यक्षता वाली परियोजना स्वीकृति समिति परियोजना को मंज़ूरी देती है और क्रियान्वयन एजेंसी को धन जारी करती है।

  4. 4

    अवसंरचना लगती है व समिति मज़बूत होती है

    बल्क मिल्क कूलर, ठंडा करने के प्लांट, जाँच मशीनें व प्रयोगशालाएँ लगती हैं; नई डेयरी सहकारी समितियाँ पंजीकृत होती हैं व सदस्य जुड़ते हैं।

  5. 5

    किसान जुड़ता है व दूध डालता है

    एक अकेला डेयरी किसान समिति का सदस्य बनता है, संग्रह केंद्र पर दूध डालता है, और उसे पारदर्शी गुणवत्ता से जुड़ी दर पर भुगतान मिलता है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • एनपीडीडी शुरू

    फ़रवरी 2014

    पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा

  • पुनर्गठित

    जुलाई 2021

    2021-22 से 2025-26 में क्रियान्वयन के लिए

  • संशोधित एनपीडीडी मंज़ूर

    मार्च 2025

    कैबिनेट; ₹1,000 करोड़ जोड़ा गया, कुल ₹2,790 करोड़ 15वें वित्त आयोग चक्र के लिए

  • कार्यक्रम अवधि

    2021-22 से 2025-26

    DAHD के अनुसार 2027-28 तक जारी

  • तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए

    6 सितंबर 2026

    DAHD एनपीडीडी योजना पन्ने, मार्च 2025 कैबिनेट फ़ैसले पर पीएमओ/पीआईबी विज्ञप्ति, और संशोधित एनपीडीडी परिचालन दिशा-निर्देशों के आधार पर

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आप गाँव डेयरी सहकारी समिति, दूध संघ, स्वयं सहायता समूह, दुग्ध उत्पादक कंपनी या डेयरी FPO के सदस्य हैं — या जुड़ने / बनाने में मदद करने को तैयार हैं?
  2. 2.क्या ज़रूरत साझा अवसंरचना की है — बल्क मिल्क कूलर, ठंडा करने का प्लांट, दूध-जाँच मशीन, गुणवत्ता प्रयोगशाला — या नई समिति बनाने की, न कि व्यक्तिगत नक़द अनुदान की?
  3. 3.क्या प्रस्ताव सीधे केंद्र को नहीं, बल्कि आपके राज्य सहकारी डेयरी महासंघ / राज्य सरकार के ज़रिए दिया जा सकता है?

3 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

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केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या डेयरी किसान को एनपीडीडी से सीधे पैसा मिलता है?

नहीं। एनपीडीडी गाँव डेयरी सहकारी समिति, ज़िला दूध संघ या राज्य महासंघ को ठंडा करने, जाँच व गुणवत्ता अवसंरचना लगाने और नई समितियाँ बनाने के लिए फंड देता है। किसान को लाभ ऐसी समिति का सदस्य होने से मिलता है — उचित, गुणवत्ता से जुड़ा दूध दाम व कम ख़राबी।

योजना असल में किसका भुगतान करती है?

बल्क मिल्क कूलर, प्राथमिक ठंडा करने की सुविधाएँ, दूध ठंडा करने के प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक दूध तौल व फैट/SNF-जाँच मशीनें, मिलावट-जाँच किट, गुणवत्ता-नियंत्रण प्रयोगशालाएँ व प्रमाणन प्रणालियाँ, सदस्य प्रशिक्षण, और नई गाँव डेयरी सहकारी समितियाँ बनाने के लिए अनुदान समर्थन।

क्या एनपीडीडी अब भी चल रही है?

हाँ। केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मार्च 2025 में संशोधित एनपीडीडी को 15वें वित्त आयोग चक्र के लिए ₹2,790 करोड़ की कुल राशि के साथ मंज़ूरी दी। कार्यक्रम 2021-22 से 2025-26 को कवर करता है और 2027-28 तक जारी है।

मेरे गाँव में कोई दूध सहकारी समिति नहीं है — क्या एनपीडीडी एक शुरू करने में मदद कर सकता है?

हाँ। संशोधित कार्यक्रम पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ज़ोर के साथ लगभग 10,000 नई गाँव डेयरी सहकारी समितियाँ बनाने और दो नई दुग्ध उत्पादक कंपनियाँ खड़ी करने के लिए अनुदान समर्थन देता है। अपने राज्य सहकारी डेयरी महासंघ या एनडीडीबी से संपर्क करें।

हिस्सा B / "सहकारिता के ज़रिए डेयरी" क्या है?

₹1,568.28 करोड़ के परिव्यय (₹924.56 करोड़ के जापानी ऋण सहित) वाला एक JICA-समर्थित हिस्सा जो नौ राज्यों में डेयरी सहकारी समितियों का उत्पादन, प्रसंस्करण व विपणन मज़बूत करता है: आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पश्चिम बंगाल।

सहकारी समिति आवेदन कैसे करती है?

समिति, संघ या महासंघ दूध-क्षेत्र सर्वेक्षण के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाता है, उसे राज्य स्तरीय तकनीकी प्रबंधन समिति को देता है, और मंज़ूरी मिलने पर वह सचिव, DAHD की अध्यक्षता वाली परियोजना स्वीकृति समिति के पास मंज़ूरी व धन जारी करने के लिए जाता है।

एनपीडीडी, AHIDF व डेयरी प्रसंस्करण एवं अवसंरचना विकास कोष से कैसे अलग है?

AHIDF व DIDF ऋण कोष हैं — ब्याज छूट के साथ — डेयरी प्लांट, ठंडा करने की अवसंरचना व मूल्यवर्धन के लिए, आम तौर पर बड़ी संस्थाओं के लिए। एनपीडीडी एक अनुदान-आधारित योजना है जो गाँव व ज़िला स्तर पर सहकारी क्षमता बनाती है।

संशोधित योजना से सबसे ज़्यादा लाभ किसे?

महिलाओं को, जो डेयरी कार्यबल का लगभग 70% हैं, मुख्य लक्षित लाभार्थी हैं। संशोधन लगभग 3.2 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार और अभी कम सेवा वाले क्षेत्रों में ज़्यादा संगठित दूध संग्रह का अनुमान लगाता है।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।