उड़द
Vigna mungo
एक छोटी अवधि की खरीफ़ दलहन जो महज़ 70–90 दिन में खेत खाली कर देती है — इसीलिए यह दो मुख्य सीज़नों के बीच कैच क्रॉप के तौर पर बैठ जाती है। पीला मोज़ेक वायरस ही फसल का भाग्य तय करता है, इसलिए रोग-रोधी किस्म पहला चुनाव है, आख़िरी नहीं।
- फसल प्रकार
- दलहन (फलीदार)
- सीज़न
- खरीफ़ व ज़ायद
- उपयुक्त राज्य
- 10+ प्रमुख राज्य
- बढ़त अवधि
- 70–90 दिन
- जल आवश्यकता
- कम (बारानी / 2–3 सिंचाई)
- तापमान
- 25–35°C
- मिट्टी
- अच्छी जल-निकास वाली दोमट
- कठिनाई स्तर
- आसान
- अपेक्षित उपज
- 8–12 क्विंटल/हेक्टेयर
- एमएसपी (केएमएस 2026–27)
- ₹8,200 / क्विंटल
परिचय
उड़द, या काला चना नहीं — काला उड़द (Vigna mungo), भारत की सबसे अहम दलहनों में से एक है — दाल मखनी, इडली और पापड़ का आधार — जो मुख्यतः खरीफ़ में, पर बची नमी पर वसंत/गर्मी की कैच क्रॉप के तौर पर भी उगाई जाती है।
इसका बड़ा फ़ायदा तेज़ी है: 70–90 दिन में यह ऐसे अंतरालों में बैठ जाती है जहाँ कोई और दलहन नहीं आती, और हर फलीदार की तरह अपनी नाइट्रोजन ख़ुद बनाकर अगली फसल के लिए मिट्टी और उपजाऊ छोड़ जाती है।
उड़द की फसल एक ही चीज़ तय करती है — सफ़ेद मक्खी से फैलने वाला पीला मोज़ेक वायरस। रोग-रोधी किस्म चुनना और सफ़ेद मक्खी को जल्दी रोकना किसी भी खाद की मात्रा से ज़्यादा मायने रखता है — इसीलिए यह गाइड बार-बार इसी पर लौटती है।
फसल की समयरेखा, बुवाई से कटाई तक
पूरे सीज़न की एक झलक — हर अवस्था की पूरी जानकारी के लिए नीचे संबंधित सेक्शन पर जाएँ।
- दिन 0
बुवाई
उपचारित बीज मानसून की शुरुआत में नम क्यारी में 30×10 सेमी, 4–5 सेमी गहरा ड्रिल करें।
- दिन 7–10
अंकुरण
समान जमाव पौध-संख्या तय करता है; भारी बारिश के बाद सतह पर पपड़ी ही गैप वाले खेत का सबसे आम कारण है।
- दिन 25–30
शाखाएँ बनना
यहीं वानस्पतिक ढाँचा बनता है; इस दौरान खेत खरपतवार-मुक्त रखें और पहली सफ़ेद मक्खी पर नज़र रखें।
- दिन 35–45
फूल आना
छोटे पीले फूल खिलते हैं; अभी नमी का तनाव फूल गिरा देता है और फली-संख्या सीधे घटाता है।
- दिन 50–60
फली बनना
फलियाँ बनकर लंबी होती हैं — यही अवस्था मानसून टूटने पर जीवनरक्षक सिंचाई का सबसे ज़्यादा फल देती है।
- दिन 60–75
फली भरना
दाने भरते हैं; देर से आने वाला फली-छेदक और फली-बग सिकुड़े दाने के रूप में दिखते हैं।
- दिन 75–90
पकाव व कटाई
फलियाँ असमान रूप से काली पड़ती हैं; ज़्यादा सूखी फलियाँ चटकने से पहले, क़रीब 80% काली होते ही 2–3 बार में तोड़ें।
उपयुक्त राज्य
जिन राज्यों में यह फसल बड़े पैमाने पर उगाई जाती है, वे नीचे हाइलाइट हैं। आपके खेत के लिए अंतिम सलाह हमेशा आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही देगा।
- जम्मू और कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- पंजाब
- उत्तराखंड
- हरियाणा
- दिल्ली
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- बिहार
- झारखंड
- पश्चिम बंगाल
- सिक्किम
- असम
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
- नागालैंड
- मणिपुर
- मिज़ोरम
- त्रिपुरा
- गुजरात
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- महाराष्ट्र
- ओडिशा
- गोवा
- तेलंगाना
- आंध्र प्रदेश
- कर्नाटक
- केरल
- तमिलनाडु
- पुदुचेरी
- लद्दाख
- चंडीगढ़
यहाँ उगाई जाती है
जलवायु की ज़रूरतें
उड़द एक गर्म-ऋतु फसल है जो पाला या रुका पानी सहन नहीं करती। फूल से फली भरने तक सूखा उपज-संवेदी ख़तरा है; वहीं पकाव के दौरान बारिश दाने को दाग़दार और अंकुरित कर देती है।
आदर्श तापमान
25–35°C; 20°C से नीचे और 40°C से ऊपर बढ़त धीमी
वर्षा
600–900 मिमी; जलभराव और पकाव पर बारिश के प्रति संवेदनशील
नमी
मध्यम; लंबी अधिक नमी पत्ती रोगों को बढ़ावा देती है
धूप
पूरा सूर्य; लघु-दिवसीय पौधा, इसलिए छोटे दिन फूल जल्दी लाते हैं
मिट्टी की ज़रूरतें
खारी, क्षारीय और जलभराव वाली मिट्टी से बचें। बारिश के बाद पानी रुकने वाला खेत उड़द के लिए ग़लत खेत है — जड़ें पानी में बैठते ही फसल कुछ ही दिनों में पीली पड़कर गिर जाती है।
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल-निकास वाली दोमट व चिकनी-दोमट; जल-निकास हो तो काली मिट्टी पर भी अच्छी
pH स्तर
6.5–7.8
जल निकासी
मुक्त जल-निकास — एक-दो दिन का जलभराव भी फसल मार देता है
जैविक तत्व
पिछली फसल की बची जैविक सामग्री पर अच्छा असर
खेत की तैयारी
क्षेत्र चाहे जो हो, चार कदम वही रहते हैं — बस समय बुवाई के अनुसार बदलता है।
- 1
एक जुताई और हैरोइंग
एक गहरी जुताई, फिर दो हैरोइंग और पाटा छोटे दलहन बीज के लिए बारीक, कसी क्यारी देते हैं। ढेलेदार क्यारी असमान जमाव कराती है।
- 2
जल-निकास सुनिश्चित करें
खरीफ़ में हर कुछ क्यारियों पर उथली नालियाँ खोलें — भूमि-तैयारी का सबसे अहम क़दम, क्योंकि उड़द रुके पानी में मर जाती है।
- 3
बेसल खाद मिलाना
फॉस्फोरस-पोटाश की पूरी बेसल मात्रा और थोड़ी शुरुआती नाइट्रोजन आख़िरी हैरोइंग पर ऊपरी 5–7 सेमी में मिलाएँ।
बीज की जानकारी
मुख्य किस्मों की तुलना — अवधि, उपज, रोग-प्रतिरोध या आप किस मक़सद से उगा रहे हैं, इसके आधार पर चुनें।
| किस्म | अवधि | उपज | रोग-प्रतिरोध | सर्वश्रेष्ठ राज्य | किसके लिए उपयुक्त |
|---|---|---|---|---|---|
IPU 94-1 (उत्तरा) उत्तर भारत के लिए व्यापक रूप से उगाई जाने वाली वाईएमवी-रोधी किस्म। | 75–80 दिन | उच्च | पीला मोज़ेक वायरस रोधी | उत्तर प्रदेश | खरीफ़, एक-सा पकाव |
पंत उड़द-31 अगेती, वाईएमवी-रोधी, उत्तर भारत के मैदानों के लिए। | 70–75 दिन | मध्यम–उच्च | पीला मोज़ेक वायरस रोधी | उत्तराखंड | खरीफ़ व वसंत |
माश 338 उत्तर-पश्चिम में लोकप्रिय; वाईएमवी सहनशील और मोटा दाना। | 85–90 दिन | उच्च | पीला मोज़ेक वायरस सहनशील | पंजाब | खरीफ़, मोटा दाना |
टी-9 पुरानी, व्यापक अनुकूलित किस्म — अधिक उपज पर वाईएमवी के प्रति संवेदनशील, इसलिए कम सफ़ेद मक्खी वाले क्षेत्रों में बेहतर। | 70–75 दिन | मध्यम | पीला मोज़ेक वायरस संवेदनशील | उत्तर प्रदेश | दोहरी (खरीफ़ व गर्मी) |
शेखर-3 वाईएमवी और लीफ क्रिंकल रोधी सुधरी किस्म, पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए। | 75–80 दिन | मध्यम–उच्च | वाईएमवी व लीफ क्रिंकल रोधी | उत्तर प्रदेश | खरीफ़ |
- बीज दर
- खरीफ़ में 15–20 किग्रा/हेक्टेयर; पास-पास बोई गर्मी की फसल में 20–25 किग्रा/हेक्टेयर
- प्रमाणित बीज
- किसी मान्य स्रोत से वाईएमवी-रोधी किस्म का प्रमाणित बीज लें। संवेदनशील किस्म का बचाया बीज ही वह सबसे आम कारण है जिससे उड़द की फसल पीले मोज़ेक की चपेट में आती है।
- दूरी
- 30 सेमी कतार × 10 सेमी पौधा (खरीफ़); गर्मी में 22–25 सेमी कतार
- बीज उपचार
- बीज को पहले थीरम या कार्बेन्डाज़िम (2 ग्राम/किग्रा) से बीज-जनित फफूँद के विरुद्ध, फिर बुवाई से ठीक पहले राइज़ोबियम और पीएसबी कल्चर से — मुफ़्त नाइट्रोजन और बेहतर फॉस्फोरस उपलब्धता के लिए — उपचारित करें।
बुवाई गाइड
नमी में बोएँ। गर्मी में बुवाई-पूर्व सिंचाई और पास-पास बुवाई भरा-पूरा छत्र देती है जो मिट्टी छाया कर नमी बचाता है। बहुत गहरा न बोएँ — 4–5 सेमी सही है; इससे गहरी बुवाई पतले जमाव का आम कारण है।
- सबसे अच्छा समय
- खरीफ़: जून–जुलाई मानसून के साथ। गर्मी/वसंत: फ़रवरी–मार्च।
- क़तार की दूरी
- 30 सेमी (खरीफ़), 22–25 सेमी (गर्मी)
- पौधे की दूरी
- कतार में 10 सेमी
- बुवाई की गहराई
- 4–5 सेमी
- तरीक़ा
- समान गहराई के लिए सीड-ड्रिल या हल के पीछे बोएँ; छिटकवाँ बुवाई बीज बर्बाद करती है और असमान जमाव देती है
खाद कार्यक्रम
बुवाई के समय एक साथ पूरी खाद डालने से बँटी हुई मात्रा बेहतर है — खासकर नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या रिसकर बह जाता है।
- 1
बेसल (बुवाई पर)
दिन 0
शुरुआती 15–20 किग्रा नाइट्रोजन, पूरी 40–50 किग्रा P₂O₅ और 20 किग्रा K₂O प्रति हेक्टेयर, बीज के नीचे। फॉस्फोरस वह पोषक है जिस पर उड़द सबसे ज़्यादा असर देती है।
- 2
राइज़ोबियम
बुवाई पर
बीज पर राइज़ोबियम टीकाकरण अधिकांश नाइट्रोजन की जगह लेता है — अच्छी गाँठ वाली फसल को टॉप-ड्रेस नाइट्रोजन नहीं चाहिए।
- 3
पर्णीय छिड़काव
फूल (35–45 दिन)
फूल पर 2% डीएपी या यूरिया छिड़काव, 10 दिन बाद दोहराएँ, फली-बनना बढ़ाता है — ख़ासकर ख़राब मिट्टी या कमज़ोर नोड्यूलेशन पर उपयोगी।
- 4
सल्फर (कमी हो तो)
बेसल
सल्फर-कमी वाली मिट्टी पर जिप्सम से 20 किग्रा S/हेक्टेयर दाने की गुणवत्ता सुधारता है; उड़द भी हर दलहन की तरह सल्फर-संवेदी है।
सिंचाई कार्यक्रम
1. खरीफ़ फसल
पूरा सीज़न
आमतौर पर बारानी। भारी बारिश में जल-निकास दें और सूखा फूल या फली-भराव पर पड़े तभी एक जीवनरक्षक सिंचाई।
2. फूल-पूर्व
30–35 दिन
गर्मी या सूखे खरीफ़ में पहली सिंचाई शाखा-बनने से फूल-पूर्व अवस्था पर।
3. फली बनना
50–60 दिन
सबसे उपज-संवेदी सिंचाई — यहाँ नमी का तनाव दाना सिकोड़ देता है।
महत्वपूर्ण अवस्थाएँ
- फूल आना (35–45 दिन)
- फली बनना व भरना (50–65 दिन)
पानी बचाने के तरीक़े
- अच्छी मानसून नमी में बोएँ ताकि खरीफ़ फसल को सिंचाई की ज़रूरत ही न पड़े।
- पिछली फसल के अवशेष की हल्की पलवार गर्मी की फसल में नमी बचाती है।
- कभी अधिक सिंचाई न करें — उड़द सूखे से कहीं ज़्यादा जलभराव से नष्ट होती है।
खरपतवार प्रबंधन
जैविक नियंत्रण
- फसल की छोटी अवधि को देखते हुए 20–25 दिन पर एक हाथ-निराई या गुड़ाई अक्सर काफ़ी होती है।
- जल्दी ढकने वाला घना छत्र (सही बीज दर व दूरी) देर की खरपतवार अपने आप दबा देता है।
रासायनिक नियंत्रण
- बुवाई के 2 दिन के भीतर पेंडिमेथालिन 1.0 किग्रा a.i./हेक्टेयर (प्री-इमर्जेंस) अधिकांश घास और छोटी चौड़ी-पत्ती खरपतवार रोकता है।
- इमेज़ेथापायर 15–20 दिन पर अगेती पोस्ट-इमर्जेंस छिड़काव उड़द में मिश्रित खरपतवार नियंत्रित करता है।
पोषक तत्व की कमी की पहचान
हर पोषक तत्व की कमी पौधे पर असल में कैसी दिखती है — ताकि ग़लत स्प्रे करने से पहले आप कमी और रोग में फ़र्क़ कर सकें।
नाइट्रोजन (कमज़ोर नोड्यूलेशन)
दिखने वाला लक्षण
राइज़ोबियम गाँठ न बना पाए तो पुरानी पत्तियाँ एक-सी हल्की हरी से पीली और बढ़वार बौनी।
फॉस्फोरस
दिखने वाला लक्षण
फीकी, गहरी नीली-हरी पत्तियाँ, कमज़ोर जड़ें और देर से फूल — उड़द को अक्सर मिलने वाली हल्की मिट्टी पर आम।
सल्फर
दिखने वाला लक्षण
(नाइट्रोजन से उलट) सबसे नई पत्तियाँ पहले पीली, तने पतले और दाना ख़राब भरता है।
लोहा (आयरन)
दिखने वाला लक्षण
ऊपरी पत्तियों में शिराओं के बीच पीलापन जबकि शिराएँ हरी — चूनेदार, उच्च-pH मिट्टी पर।
ज़िंक
दिखने वाला लक्षण
ज़िंक-कमी वाली मिट्टी पर काँसे जैसी रंगत, छोटी कटोरीनुमा पत्तियाँ और छोटे पर्व।
ध्यान देने योग्य रोग
लक्षण, संभावित कारण और असल में क्या इलाज करता है — सिर्फ़ किसी स्प्रे का नाम नहीं।
पीला मोज़ेक वायरस (वाईएमवी)
- लक्षण
- पत्तियों पर चटक पीले-हरे मोज़ेक धब्बे, फैलते-फैलते पूरी पत्ती पीली; रोगग्रस्त पौधे बौने और कम, छोटी फलियाँ देते हैं।
- कारण
- मूंगबीन येलो मोज़ेक वायरस, सफ़ेद मक्खी से फैलता है — बीज-जनित नहीं।
- इलाज
- संक्रमित पौधे का इलाज नहीं; रोगग्रस्त पौधे जल्दी उखाड़ें और आगे फैलने से पहले सफ़ेद मक्खी वाहक को गिराने के लिए (जैसे थायामेथोक्सम जैसा सिस्टेमिक) छिड़कें।
- बचाव
- वाईएमवी-रोधी किस्म उगाएँ — यही सबसे कारगर क़दम है। समय पर बोएँ, पुराने संक्रमित खेतों के पास अलग-अलग समय की बुवाई से बचें, और अंकुरण से ही सफ़ेद मक्खी रोकें।
सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा
- लक्षण
- पत्तियों पर गोल लाल-भूरे धब्बे जिनका केंद्र भूरा; भारी संक्रमण में पत्तियाँ पीली पड़कर गिरती हैं।
- कारण
- Cercospora canescens, गर्म-नम मौसम में अनुकूल।
- इलाज
- पहले लक्षण पर कार्बेन्डाज़िम या मैंकोज़ेब छिड़कें, बना रहे तो 12–15 दिन बाद दोहराएँ।
- बचाव
- दलहन से हटकर फ़सल-चक्र, सहनशील किस्में और अधिक बुवाई से बने घने-नम छत्र से बचाव।
चूर्णिल फफूँदी
- लक्षण
- पत्तियों-तनों पर सफ़ेद चूर्ण-सी वृद्धि, मुख्यतः सीज़न के अंत में, जिससे पत्तियाँ जल्दी गिरती हैं।
- कारण
- Erysiphe polygoni, सूखे मौसम व ठंडी रातों में सबसे बुरी।
- इलाज
- पहले लक्षण पर घुलनशील सल्फर या हेक्साकोनाज़ोल जैसा सिस्टेमिक छिड़कें।
- बचाव
- सहनशील किस्में उगाएँ और बुवाई में देर न करें, जो फसल को रोग-अनुकूल अंत के मौसम में धकेलती है।
वेब ब्लाइट / जड़ सड़न
- लक्षण
- नम मौसम में पत्तियों को बाँधते जाल-से धागे, या छोटे पौधों का अचानक मुरझाना और कॉलर पर सड़न।
- कारण
- Rhizoctonia और Macrophomina, क्रमशः घने-नम छत्र और गर्म-सूखी मिट्टी में अनुकूल।
- इलाज
- जल-निकास व हवा सुधारें; प्रभावित हिस्सों पर कार्बेन्डाज़िम ड्रेंच या छिड़काव।
- बचाव
- बीज फफूँदनाशी से उपचारित करें, अधिक भीड़ से बचें और जलभराव वाली ज़मीन में कभी न बोएँ।
ध्यान देने योग्य कीट
नुक़सान दिखने से पहले क्या देखें, और रसायन से पहले जैविक विकल्प क्या हैं।
सफ़ेद मक्खी
- पहचान
- छोटे सफ़ेद पंख वाले कीट जो छत्र हिलाने पर बादल की तरह उड़ते हैं; शिशु पत्ती की निचली सतह पर रस चूसते हैं।
- नुक़सान
- सीधा रस-नुक़सान, पर उससे कहीं ज़रूरी — पीले मोज़ेक वायरस का वाहक; कम संख्या भी विनाशकारी वाईएमवी फैला सकती है।
- जैविक नियंत्रण
- पीले चिपचिपे जाल, नीम तेल (1500 ppm) छिड़काव और आने वाली मक्खी रोकने को मक्का की बॉर्डर कतारें।
- रासायनिक नियंत्रण
- थायामेथोक्सम या एसिटामिप्रिड जैसा सिस्टेमिक, फसल के शुरू में प्राथमिकता से जब वाईएमवी फैलाव सबसे मायने रखता है।
फली छेदक (Maruca / चना फली छेदक)
- पहचान
- फूल-फलियों को जाल से बाँधती इल्लियाँ, या फली में साफ़ छेद कर बनते दाने खातीं।
- नुक़सान
- फली के भीतर दाने का सीधा नुक़सान; फूल से फली-भराव पर भारी।
- जैविक नियंत्रण
- बीटी या एनपीवी छिड़काव, फेरोमोन ट्रैप, और अगेती व्यापक छिड़काव से बचकर प्राकृतिक शत्रुओं को बढ़ावा।
- रासायनिक नियंत्रण
- दहलीज़ पार हो तो फूल पर क्लोरएंट्रानिलिप्रोल या इमामेक्टिन बेंज़ोएट छिड़कें।
फली-चूसक बग
- पहचान
- पकती फलियों पर हरे या भूरे ढाल-नुमा बग; इनके चूसने से दाना सिकुड़ा, बदरंग हो जाता है।
- नुक़सान
- गुणवत्ता-हानि — दाना सिकुड़कर बीज या अच्छी बिक्री लायक नहीं रहता।
- जैविक नियंत्रण
- छोटे खेतों में हाथ से बीनें; नीम छिड़काव संख्या घटाता है।
- रासायनिक नियंत्रण
- फली बनने पर बग ज़्यादा हों तभी अनुशंसित कीटनाशक छिड़कें।
रोमिल इल्ली
- पहचान
- झुंड में रहने वाली रोमिल इल्लियाँ जो फसल के शुरू में पत्तियाँ पैच में जालीदार करती हैं, फिर बिखरती हैं।
- नुक़सान
- छोटे पौधों की पर्ण-हानि; गंभीर अगेता हमला जमाव पतला करता है।
- जैविक नियंत्रण
- अंडे के समूह और झुंड की छोटी इल्लियाँ हाथ से या प्रभावित पत्तियाँ हटाकर नष्ट करें।
- रासायनिक नियंत्रण
- इल्लियों के बिखरने से पहले प्रभावित पैच पर क्विनालफ़ॉस या क्लोरपायरीफ़ॉस स्पॉट-स्प्रे।
आम ग़लतियाँ जिनसे बचें
जो ग़लतियाँ किसानों को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचाती हैं, खेत में जितनी बार दिखती हैं उसी क्रम में — हमेशा वैसे नहीं जैसा आप सोचें।
- 1
बीज बचाने के लिए बचाई हुई, वाईएमवी-संवेदनशील किस्म बोना।
नुक़सान क्यों होता है
सफ़ेद-मक्खी वाला एक सीज़न और पीला मोज़ेक आधी फसल ले जाता है — प्रमाणित रोधी बीज उस नुक़सान का अंश भर लागत में मिल जाता।
- 2
बारिश के बाद पानी रुकने वाले खेत में बोना।
नुक़सान क्यों होता है
रुके पानी में उड़द कुछ ही दिनों में मर जाती है; फसल पीली पड़ती है, जड़ें सड़ती हैं और जमाव गिर जाता है।
- 3
पौधे हरे दिखने भर से सफ़ेद मक्खी को अनदेखा करना।
नुक़सान क्यों होता है
हानिरहित लगती कम संख्या भी वाईएमवी फैला रही होती है — लक्षण दिखने तक रोकना बहुत देर हो चुकी होती है।
- 4
अनाज की तरह भारी नाइट्रोजन देना।
नुक़सान क्यों होता है
अधिक नाइट्रोजन हरी-भरी पत्ती देता है, पकाव टालता है और मुफ़्त नाइट्रोजन बनातीं गाँठें दबाता है — उपज घटाने पर ख़र्च किया पैसा।
- 5
बीज उपचार और राइज़ोबियम टीकाकरण छोड़ना।
नुक़सान क्यों होता है
कमज़ोर नोड्यूलेशन यानी नाइट्रोजन-भूखी फसल, और अनुपचारित बीज पौध-रोग खेत में ले आता है।
- 6
ढेलेदार क्यारी में बहुत गहरा बोना।
नुक़सान क्यों होता है
पैचदार, गैप वाला जमाव जो न खेत भरता है, न खरपतवार दबाता है।
- 7
मानसून शुरू होने के बहुत बाद तक बुवाई टालना।
नुक़सान क्यों होता है
देर की फसल रोग-अनुकूल मौसम और अंतिम नमी-तनाव से मिलती है, और कम उपज देती है।
- 8
कटाई से पहले हर फली के सूखने का इंतज़ार करना।
नुक़सान क्यों होता है
उड़द असमान पकती है और आपके बाक़ी का इंतज़ार करते-करते सबसे पहली फलियाँ चटककर बीज ज़मीन पर गिरा देती हैं।
- 9
नम दाने की गहाई और बोरा-बंदी।
नुक़सान क्यों होता है
दाना भंडारण में फफूँद पकड़ता है और दलहन भृंग (घुन) से जल्दी बर्बाद हो जाता है।
- 10
दलहन भृंग से बचाव किए बिना भंडारण।
नुक़सान क्यों होता है
घुन कुछ ही हफ़्तों में रखे दाने को छेदकर बिक्री लायक दाल को धूल और छेदों में बदल देता है।
कटाई
जब क़रीब 80% फलियाँ काली पड़ जाएँ और पत्तियाँ पीली होकर झड़ने लगें — आमतौर पर बुवाई के 70–90 दिन बाद, 2–3 तुड़ाई में क्योंकि फलियाँ एक साथ नहीं पकतीं।
तैयार होने के संकेत
- फलियाँ काली या गहरी भूरी
- पत्तियाँ पीली पड़कर गिरतीं
- दाना सख़्त और फली में खड़खड़ाता
उपकरण
- पूरे पौधे काटने को हँसिया
- सबसे पहली फलियों को हाथ से बीनना
- गहाई को थ्रेशर या बैलों से दँवरी
अपेक्षित उपज
अच्छे प्रबंधन में 8–12 क्विंटल/हेक्टेयर दाना; कम देखभाल में बारानी 4–6 क्विंटल/हेक्टेयर
कटाई के बाद व भंडारण
भंडारण
भंडारण से पहले दाना क़रीब 9% नमी तक सुखाएँ। ठंडी, सूखी जगह रखें और दलहन भृंग (घुन) से बचाएँ — धूप में सुखाना और वायुरोधी बिन या अनुमोदित धूमन रखी दाल सुरक्षित रखते हैं।
पैकेजिंग
दाने के लिए साफ़ जूट या बुने बोरे; बीज और छोटे लॉट के लिए वायुरोधी डिब्बे।
परिवहन
ढुलाई में बोरे सूखे रखें — नमी लगते ही उड़द जल्दी फफूँद पकड़ती और बदरंग होती है।
भंडारण अवधि
अच्छी सूखी, घुन-मुक्त दाल 8–12 महीने चलती है; उपचारित बीज एक सीज़न अंकुरणक्षम रहता है।
मंडी भाव
सरकार के अपने एगमार्कनेट डेटा से, आपके नज़दीक का आज का मंडी भाव — लाइव।
सरकारी एगमार्कनेट डेटा से रोज़ाना लाइव मंडी भाव।
data.gov.in (एगमार्कनेट) से सिंक होता है। भाव ₹ प्रति क्विंटल हैं।
मौसम
आपके चुने गए स्थान की मौजूदा स्थिति और 5-दिन का पूर्वानुमान, फसल की अवस्था के अनुसार एक सलाह के साथ।
मौजूदा स्थिति और 5-दिन के पूर्वानुमान के लिए अपना राज्य चुनें।
Open-Meteo से लाइव डेटा
मुनाफ़ा कैलकुलेटर
आपकी अपनी लागत, अपेक्षित उपज और बिक्री भाव — हमारी नहीं।
पैसा कहाँ जाता है
नीचे कैलकुलेटर की डिफ़ॉल्ट लागत के अनुसार प्रति एकड़ कुल लागत में हर मद का हिस्सा — वहाँ अपने आँकड़े बदलने पर यह तस्वीर पूरी तरह आप पर लागू नहीं रहेगी, पर क्रम शायद ही बदलता है।
- ज़मीन का किराया38% (₹7,000)
- मज़दूरी19% (₹3,500)
- मशीन11% (₹2,000)
- बीज10% (₹1,800)
- कीटनाशक और खरपतवारनाशक8% (₹1,500)
- खाद7% (₹1,200)
- सिंचाई4% (₹800)
- ब्याज2% (₹400)
आधिकारिक डाउनलोड
केवल सरकार और ICAR के दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ किसी आधिकारिक सर्वर पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीले मोज़ेक से बचने को कौन-सी उड़द किस्म उगाऊँ?
अपने राज्य के अनुसार IPU 94-1 (उत्तरा), पंत उड़द-31 या शेखर-3 जैसी वाईएमवी-रोधी किस्म चुनें। रोग दिखने पर छिड़काव से निपटने की कोशिश की तुलना में रोधी किस्म कहीं ज़्यादा भरोसेमंद है।
उड़द और मूंग में क्या फ़र्क़ है?
दोनों क़रीबी रिश्तेदार हैं और लगभग एक जैसे उगते हैं, पर उड़द (काला उड़द) का बीज काला, अवधि थोड़ी लंबी और भारी मिट्टी पर बेहतर होती है, जबकि मूंग (हरा चना) का बीज हरा, पकाव थोड़ा तेज़ और हल्की, अच्छी जल-निकास वाली ज़मीन पसंद है।
क्या उड़द को नाइट्रोजन खाद चाहिए?
बहुत कम। हर दलहन की तरह यह बीज पर राइज़ोबियम टीकाकरण के बाद जड़-गाँठों से अपनी नाइट्रोजन ख़ुद बनाती है — बुवाई पर केवल थोड़ी शुरुआती मात्रा चाहिए। भारी नाइट्रोजन नोड्यूलेशन दबाकर उपज घटा देता है।
मेरे उड़द के पौधे पीले और बौने क्यों हैं?
सबसे आम कारण हैं — पीला मोज़ेक वायरस (चटक पीले मोज़ेक धब्बे, सफ़ेद मक्खी से फैलते), जलभराव (रुके पानी के बाद पूरे पौधे का पीलापन व गिरना), या कमज़ोर नोड्यूलेशन (एक-सा पीलापन)। कार्रवाई से पहले देखें कौन-सा पैटर्न मेल खाता है।
उड़द का एमएसपी क्या है?
केएमएस 2026–27 विपणन सीज़न के लिए सरकार ने उड़द का एमएसपी ₹8,200 प्रति क्विंटल घोषित किया। एमएसपी ख़रीद केंद्रों पर आश्वस्त न्यूनतम मूल्य है — बेचने से पहले वर्तमान आँकड़ा और अपनी स्थानीय मंडी दर ज़रूर जाँचें।
उड़द कब काटूँ?
पूरी फसल सूखने का इंतज़ार करने के बजाय, जैसे-जैसे क़रीब 80% फलियाँ काली पड़ें, 2–3 बार में काटें। उड़द असमान पकती है और देर करने पर सबसे पहली फलियाँ चटककर बीज गिरा देती हैं।
अब भी कोई सवाल है?
आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके खेत और मिट्टी से जुड़ी किसी भी ख़ास बात के लिए आपका नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र ही आधिकारिक जवाब है।
