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भारत सरकारमत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय (पशुपालन एवं डेयरी विभाग)सक्रियअपडेट 3 अगस्त 2026

पशुपालन अवसंरचना विकास निधि

Animal Husbandry Infrastructure Development Fund (AHIDF)

परियोजना लागत के 90% तक बैंक ऋण पर 3% ब्याज छूट — डेयरी प्रसंस्करण इकाई, मांस प्रसंस्करण इकाई, या पशु आहार संयंत्र स्थापित करने के लिए।

संशोधित राशि
₹29,110.25 करोड़, वित्त वर्ष 2025-26 तक
योजना स्थिति
सक्रिय
ब्याज छूट
सभी पात्र इकाइयों के लिए 3%
ऋण कवर
परियोजना लागत का 90% तक
चुकौती
8 साल तक, 2 साल की मोहलत सहित
आवेदन माध्यम
उद्यमी मित्र पोर्टल (सिडबी)
क्रेडिट गारंटी
₹750 करोड़ का फंड, नाबार्ड द्वारा प्रबंधित
मंत्रालय
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी

परिचय

एएचआईडीएफ़ की घोषणा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत ₹15,000 करोड़ के मूल कोष के साथ हुई थी, जिसे अनुसूचित बैंकों द्वारा 2020-21 से वितरित किया गया। बाद में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे उसी डिज़ाइन के साथ ₹29,110.25 करोड़ की संशोधित राशि पर वित्त वर्ष 2025-26 तक जारी रखने की मंज़ूरी दी।

सीधे लाभार्थी को भुगतान करने वाली योजना के विपरीत, एएचआईडीएफ़ बैंकिंग प्रणाली के ज़रिए काम करती है: पात्र इकाई किसी स्वीकृत परियोजना की लागत का 90% तक ऋण अनुसूचित बैंक से लेती है, और पशुपालन एवं डेयरी विभाग उस ऋण पर 8 साल तक (2 साल की मोहलत सहित) 3% ब्याज छूट सीधे बैंक को देता है। यह निधि ज़मीन ख़रीद, कार्यशील पूंजी, या पुरानी मशीनरी/वाहन की ख़रीद को कवर नहीं करती।

यह तीन तरह की अवसंरचना को लक्षित करती है: डेयरी प्रसंस्करण व मूल्य-वर्धित डेयरी उत्पाद (आइसक्रीम, चीज़, यूएचटी दूध, दूध/मट्ठा पाउडर), भेड़/बकरी/मुर्गी/सुअर/भैंस के लिए मांस प्रसंस्करण व मूल्य-वर्धित मांस उत्पाद, और पशु आहार निर्माण (मिनी/मध्यम/बड़े आहार संयंत्र, टीएमआर ब्लॉक, बाइपास प्रोटीन इकाई, खनिज मिश्रण संयंत्र, साइलेज इकाई व आहार परीक्षण प्रयोगशाला)।

योजना की मुख्य बातें

  • 3% ब्याज छूट

    डीएएचडी द्वारा सीधे ऋणदाता बैंक को दी जाती है, 8 साल तक जिसमें मूलधन पर 2 साल की मोहलत शामिल है।

  • परियोजना लागत का 90% तक ऋण

    सूक्ष्म/लघु इकाइयों को केवल 10% मार्जिन मनी देनी होती है; मध्यम उद्यमों को 15% तक; अन्य श्रेणियों को 25% तक।

  • क्रेडिट गारंटी फंड

    नाबार्ड द्वारा प्रबंधित ₹750 करोड़ का फंड, एमएसएमई-सीमा में आने वाली परियोजनाओं के लिए ऋण सुविधा का 25% तक कवर करता है।

  • सिर्फ़ डेयरी/मांस नहीं, आहार संयंत्र भी

    मिनी, मध्यम व बड़े पशु आहार संयंत्र, टीएमआर ब्लॉक इकाई, बाइपास-प्रोटीन इकाई, खनिज मिश्रण संयंत्र व साइलेज इकाई — सभी पात्र हैं।

  • एक ही ऑनलाइन आवेदन

    डीपीआर व ब्याज-छूट आवेदन दोनों सिडबी द्वारा बनाए "उद्यमी मित्र" पोर्टल से होते हैं।

आपको क्या मिलता है

  • ब्याज छूट

    सभी पात्र इकाइयों के लिए 3%, उधारकर्ता को नक़द ट्रांसफ़र के बजाय सीधे अनुसूचित बैंक को दी जाती है।

  • किसे लाभ

    व्यक्तिगत उद्यमी, निजी कंपनियाँ, एमएसएमई, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और धारा 8 कंपनियाँ।

  • तीन पात्र गतिविधियाँ

    डेयरी प्रसंस्करण/मूल्यवर्धन, मांस प्रसंस्करण/मूल्यवर्धन, और पशु आहार निर्माण — हर एक की अपनी परियोजना सूची।

  • एमएसएमई परियोजनाओं के लिए क्रेडिट गारंटी

    ब्याज छूट के अलावा, छोटे उद्यमी को कम गिरवी रखनी पड़ती है।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • व्यक्तिगत उद्यमी, निजी कंपनी, एमएसएमई, एफपीओ या धारा 8 कंपनी
  • परियोजना डेयरी प्रसंस्करण, मांस प्रसंस्करण, या पशु आहार निर्माण (टीएमआर ब्लॉक या खनिज मिश्रण संयंत्र जैसी उप-श्रेणियों सहित) के अंतर्गत आती हो
  • आवेदक के पास परियोजना के लिए ज़रूरी ज़मीन पहले से हो या वह उसे स्वामित्व या कम से कम 30 साल के पट्टे पर व्यवस्थित कर सके
  • ज़रूरी मार्जिन मनी दे सके: सूक्ष्म/लघु इकाइयों को 10%, मध्यम उद्यमों को 15%, अन्य को 25% तक
  • बैंक-मूल्यांकित, व्यावहारिक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर सके और अनुसूचित बैंक से स्वीकृत करा सके
  • जिस साल छूट का दावा किया जा रहा है उस साल किसी मौजूदा ऋण की चुकौती में चूककर्ता न हो

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • ज़मीन ख़रीद, कार्यशील पूंजी, या व्यक्तिगत उपयोग की पुरानी मशीनरी/वाहन के लिए मांगा गया ऋण — इनमें से कोई भी कवर नहीं होता
  • बिना बैंक-स्वीकृत ऋण या व्यावहारिक, मूल्यांकित डीपीआर वाली परियोजना
  • ऋण चुकौती में पहले से चूककर्ता इकाई उस साल के लिए छूट पात्रता खो देती है
  • स्वीकृति के 6 महीने के भीतर कोई निकासी न होने पर परियोजना गैर-शुरुआती मानी जाती है, और 12 महीने में परियोजना ज़मीन पर न उतरने पर स्वीकृति समाप्त हो जाती है

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर)

    घटक-वार लागत विभाजन, कुल व आवर्ती लागत, अनुमानित शुद्ध आय, और परियोजना व्यावहारिकता।

  • पहचान व पते का प्रमाण

    आवेदक का पैन/टीआईएन/आधार, और कॉर्पोरेट या व्यक्तिगत पते का प्रमाण।

  • ज़मीन स्वामित्व या पट्टा काग़ज़ात

    परियोजना स्थल के स्वामित्व, या कम से कम 30 साल के पट्टे का प्रमाण — एएचआईडीएफ़ ख़ुद ज़मीन ख़रीद को वित्तपोषित नहीं करती।

  • एमएसएमई प्रमाणपत्र

    लागू होने पर — यह मार्जिन-मनी प्रतिशत व क्रेडिट गारंटी फंड पात्रता तय करता है।

  • बैंक विवरण व टर्नओवर

    पिछले छह महीनों का बैंक विवरण, और इकाई का पिछले तीन साल का बैलेंस शीट।

  • लेआउट योजना व मशीनरी सूची

    पंजीकृत वास्तुकार द्वारा प्रमाणित सिविल व मशीनरी लेआउट, तथा ख़रीदे जाने वाले उपकरणों की पूरी सूची।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करें

    लागत विभाजन, गुणवत्ता-प्रबंधन योजना व बाज़ार/रोज़गार अनुमान सहित डीपीआर बनाएँ — ज़रूरत पड़ने पर राज्य पशुपालन विभाग या सूचीबद्ध सहायता एजेंसी से तकनीकी मदद लें।

  2. 2

    ज़मीन व वैधानिक मंज़ूरी व्यवस्थित करें

    परियोजना ज़मीन (स्वामित्व या 30+ साल के पट्टे पर) और योजना के अनुबंध I में सूचीबद्ध मंज़ूरियाँ व्यवस्थित करें — एएचआईडीएफ़ ज़मीन अधिग्रहण को वित्तपोषित नहीं करती।

  3. 3

    उद्यमी मित्र पोर्टल से आवेदन करें

    सिडबी द्वारा बनाए उद्यमी मित्र पोर्टल से डीपीआर व स्व-निहित प्रस्ताव जमा करें, फिर ऋण स्वीकृति के लिए अनुसूचित बैंक से संपर्क करें।

  4. 4

    बैंक मूल्यांकन व स्वीकृति

    अनुसूचित बैंक परियोजना का मूल्यांकन कर परियोजना लागत का 90% तक ऋण स्वीकृत करता है, फिर उसे ब्याज-छूट स्वीकृति के लिए आगे भेजता है।

  5. 5

    ब्याज-छूट स्वीकृति

    परियोजना अनुमोदन समिति ₹50 करोड़ तक की परियोजनाएँ मंज़ूर करती है; बड़ी परियोजनाएँ परियोजना स्वीकृति समिति के पास जाती हैं। फिर डीएएचडी 3% छूट सीधे बैंक को देता है।

  6. 6

    क्रियान्वयन व निगरानी

    परियोजना का निर्माण होता है और पूर्णता तक परियोजना स्वीकृति समिति व डीएएचडी की परियोजना प्रबंधन एजेंसी द्वारा हर तिमाही निगरानी की जाती है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • घोषणा

    2020 (आत्मनिर्भर भारत पैकेज)

    मूल कोष ₹15,000 करोड़

  • वितरण शुरू

    2020-21

  • मंत्रिमंडल विस्तार

    निरंतरता मंज़ूर

    संशोधित राशि ₹29,110.25 करोड़, वित्त वर्ष 2025-26 तक

  • तथ्य अंतिम जाँच

    2026-08-03

    dahd.gov.in के परिचालन दिशानिर्देशों व एएचआईडीएफ़ विस्तार पर पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आप व्यक्तिगत उद्यमी, निजी कंपनी, एमएसएमई, एफपीओ या धारा 8 कंपनी हैं?
  2. 2.क्या आपकी परियोजना डेयरी प्रसंस्करण इकाई, मांस प्रसंस्करण इकाई, या पशु आहार संयंत्र (टीएमआर ब्लॉक या खनिज मिश्रण इकाई जैसी उप-श्रेणियों सहित) है?
  3. 3.क्या आपके पास परियोजना ज़मीन का स्वामित्व या 30+ साल का पट्टा पहले से है, या आप उसे व्यवस्थित कर सकते हैं?
  4. 4.क्या आप ज़रूरी मार्जिन मनी दे सकते हैं (सूक्ष्म/लघु के लिए 10%, मध्यम के लिए 15%, अन्य इकाइयों के लिए 25% तक)?
  5. 5.क्या आप प्रस्ताव के लिए बैंक-मूल्यांकित, व्यावहारिक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करा सकते हैं?
  6. 6.क्या आप फ़िलहाल किसी मौजूदा बैंक ऋण की चुकौती में चूककर्ता हैं?

6 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एएचआईडीएफ़ क्या है?

पशुपालन अवसंरचना विकास निधि भारत सरकार की एक योजना है जो डेयरी प्रसंस्करण, मांस प्रसंस्करण या पशु आहार निर्माण अवसंरचना स्थापित करने हेतु लिए बैंक ऋण पर 3% ब्याज छूट देती है — 2020 में ₹15,000 करोड़ के मूल कोष के साथ घोषित, अब ₹29,110.25 करोड़ की संशोधित राशि पर वित्त वर्ष 2025-26 तक विस्तारित।

एएचआईडीएफ़ के लिए कौन पात्र है?

व्यक्तिगत उद्यमी, निजी कंपनियाँ, एमएसएमई, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और धारा 8 कंपनियाँ, बशर्ते परियोजना डेयरी प्रसंस्करण इकाई, मांस प्रसंस्करण इकाई, या पशु आहार संयंत्र हो, और इकाई परियोजना ज़मीन व ज़रूरी मार्जिन मनी व्यवस्थित कर सके।

एएचआईडीएफ़ असल में कितना ऋण व सब्सिडी देती है?

अनुसूचित बैंक किसी स्वीकृत परियोजना की लागत का 90% तक उधार दे सकता है, और डीएएचडी उस ऋण पर 8 साल तक (मूलधन पर 2 साल की मोहलत सहित) 3% ब्याज छूट सीधे बैंक को देता है। यह ब्याज छूट है, नक़द अनुदान नहीं — लाभार्थी को पूरा मूलधन चुकाना ही होता है।

एएचआईडीएफ़ की राशि किस काम आ सकती है?

डेयरी प्रसंस्करण इकाइयों व मूल्य-वर्धित डेयरी उत्पाद संयंत्रों (आइसक्रीम, चीज़, यूएचटी दूध, दूध/मट्ठा पाउडर) की स्थापना या सुदृढ़ीकरण, भेड़, बकरी, मुर्गी, सुअर व भैंस के लिए मांस प्रसंस्करण व मूल्य-वर्धित मांस उत्पाद इकाइयाँ, और पशु आहार निर्माण — मिनी, मध्यम या बड़े आहार संयंत्र, टीएमआर ब्लॉक इकाई, बाइपास-प्रोटीन इकाई, खनिज मिश्रण संयंत्र, साइलेज इकाई व आहार परीक्षण प्रयोगशाला।

एएचआईडीएफ़ किसके लिए पात्र नहीं है?

किसी भी रूप में ज़मीन ख़रीद, कार्यशील पूंजी, और व्यक्तिगत उपयोग की पुरानी मशीनरी या वाहन — ये सभी स्पष्ट रूप से बाहर हैं। यह निधि बनी हुई अवसंरचना व नए उपकरण को वित्तपोषित करती है, न कि उसके नीचे की ज़मीन या रोज़मर्रा के ख़र्च को।

एएचआईडीएफ़ के लिए आवेदन कैसे करें?

सिडबी द्वारा बनाए "उद्यमी मित्र" पोर्टल से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट व स्व-निहित प्रस्ताव जमा करें, फिर ऋण मूल्यांकन व स्वीकृति के लिए अनुसूचित बैंक से संपर्क करें। बैंक द्वारा ऋण स्वीकृत होते ही मामला ब्याज-छूट स्वीकृति के लिए डीएएचडी को भेजा जाता है।

मुझे ख़ुद कितनी मार्जिन मनी लगानी होगी?

एमएसएमई मानकों के तहत परिभाषित सूक्ष्म व लघु इकाइयों के लिए परियोजना लागत का केवल 10%, मध्यम उद्यमों के लिए 15% तक, और अन्य श्रेणी की इकाइयों के लिए 25% तक — बाक़ी हिस्सा बैंक ऋण से, 90% की सीमा तक, पूरा होता है।

क्या एएचआईडीएफ़ के तहत कोई क्रेडिट गारंटी है?

हाँ — नाबार्ड द्वारा प्रबंधित ₹750 करोड़ का क्रेडिट गारंटी फंड, एमएसएमई-परिभाषित लागत सीमा में आने वाली परियोजनाओं के लिए ऋण सुविधा का 25% तक कवर करता है, जिससे छोटे उद्यमी को बैंक के पास कम गिरवी रखनी पड़ती है।

एएचआईडीएफ़ के तहत चुकौती अवधि क्या है?

परियोजना स्तर पर मूलधन पर 2 साल की मोहलत सहित 8 साल तक, और योजना पहली निकासी की तारीख़ से मोहलत सहित कुल चुकौती अवधि को 10 साल तक सीमित करती है — हालाँकि ऋणदाता बैंक परियोजना व उधारकर्ता की चुकौती क्षमता के आधार पर कम अवधि तय कर सकता है।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।