मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
भारत सरकारकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयसक्रियअपडेट 9 अगस्त 2026

सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइज़ेशन

Sub-Mission on Agricultural Mechanization (SMAM)

खेती के औज़ार ख़रीदने के लिए आर्थिक सहायता, और कस्टम हायरिंग सेंटर व फार्म मशीनरी बैंक बनाने के लिए सहायता — ताकि जो किसान मशीन ख़रीद नहीं सकते वे उसे पास ही किराए पर ले सकें।

मशीनरी सब्सिडी
श्रेणी अनुसार लागत का 40%–50%
ड्रोन सब्सिडी (व्यक्तिगत)
50% अधि. ₹5 लाख / 40% अधि. ₹4 लाख
CHC (व्यक्तिगत आवेदक)
प्रोजेक्ट लागत का 40%, ₹60 लाख तक
CHC (FPO / सहकारी / समूह)
80% ₹10 लाख तक (पूर्वोत्तर में 95%)
फंडिंग पैटर्न
60:40 केंद्र:राज्य (पूर्वोत्तर/पहाड़ी में 90:10)
चल रही है
2014-15 से, कृषोन्नति योजना के तहत
शुरुआत से अब तक वितरित
₹9,404.47 करोड़, 21.6 लाख+ किसान
आवेदन यहाँ करें
agrimachinery.nic.in

परिचय

सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइज़ेशन (SMAM) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो 2014-15 से चल रही है, और अब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) की कृषोन्नति योजना के तहत लागू की जाती है। यह एक साथ दो रास्तों पर काम करती है: अपनी मशीन ख़रीदने वाले व्यक्तिगत किसान को सीधी सब्सिडी, और कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) व फार्म मशीनरी बैंक (FMB) — यानी स्थानीय किराया केंद्र — बनाने के लिए सब्सिडी, जहाँ से ट्रैक्टर, पावर टिलर या हार्वेस्टर ख़रीद न सकने वाला किसान उसे घंटे या एकड़ के हिसाब से किराए पर ले सके।

व्यक्तिगत मशीन ख़रीद पर सब्सिडी किसान की श्रेणी और मशीन के अनुसार लागत का 40% से 50% होती है — अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु व सीमांत, महिला और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को 50% की ऊँची दर मिलती है, बाक़ी किसानों को 40%। किसान ड्रोन को अपनी अलग मशीन श्रेणी के रूप में शामिल किया गया है: व्यक्तिगत ख़रीद पर प्राथमिकता श्रेणी को लागत का 50% अधिकतम ₹5 लाख तक, बाक़ी किसानों को 40% अधिकतम ₹4 लाख तक मिलता है, और कृषि स्नातक द्वारा चलाए जा रहे कस्टम हायरिंग सेंटर को प्रति ड्रोन 50% अधिकतम ₹5 लाख तक मिलता है। CHC लगाने पर व्यक्तिगत आवेदक को प्रोजेक्ट लागत का 40% (₹60 लाख तक की परियोजना पर) मिलता है, जबकि किसी FPO, सहकारी समिति या स्वयं सहायता समूह को मिलकर आवेदन करने पर 80% (₹10 लाख तक की परियोजना पर, और पूर्वोत्तर राज्यों के समूहों को 95%) मिलता है।

सब्सिडी सिर्फ़ उन्हीं मशीन मॉडलों पर मिलती है जिनका फार्म मशीनरी ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (FMTTI), किसी निर्धारित राज्य कृषि विश्वविद्यालय या ICAR संस्थान में परफ़ॉर्मेंस टेस्ट हो चुका हो — हर मशीन की सटीक सब्सिडी सीमा सहित मौजूदा टेस्टेड-एंड-अप्रूव्ड सूची SMAM पोर्टल agrimachinery.nic.in पर प्रकाशित है। फंडिंग ज़्यादातर राज्यों में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में 90:10 में, और केंद्रशासित प्रदेशों में पूरी तरह केंद्र द्वारा साझा की जाती है। शुरुआत से अब तक इस योजना के तहत लगभग ₹9,404.47 करोड़ बाँटे जा चुके हैं और 21.6 लाख से ज़्यादा किसानों को मशीनरी हासिल करने में मदद मिली है।

योजना की मुख्य बातें

  • प्राथमिकता श्रेणियों को ऊँची दर

    SC, ST, लघु व सीमांत, महिला और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को मशीन लागत का 50% सब्सिडी मिलती है; बाक़ी किसानों को 40% — सटीक सीमा हर मशीन पर अलग-अलग तय होती है।

  • कस्टम हायरिंग सेंटर

    व्यक्ति, ग्रामीण उद्यमी, कृषि स्नातक, FPO और सहकारी समितियाँ CHC लगा सकते हैं जो आस-पास के किसानों को मशीनरी किराए पर देता है — अकेले आवेदक की तुलना में पंजीकृत समूह को सेंटर लगाने पर कहीं ज़्यादा सब्सिडी मिलती है।

  • फार्म मशीनरी बैंक

    गाँव-स्तर पर रोटावेटर, सीड ड्रिल, स्प्रेयर जैसे औज़ारों का समूह, जिसे लघु व सीमांत किसान ख़रीदने के बजाय किराए पर ले सकते हैं — साल में कुछ ही दिन काम आने वाली मशीन पर क़र्ज़ का बोझ घटता है।

  • अब किसान ड्रोन भी शामिल

    फसल पर छिड़काव के लिए ड्रोन अपनी अलग पात्र श्रेणी है, जिसमें व्यक्तिगत किसान के लिए तय सब्सिडी सीमा है और कृषि स्नातक द्वारा लगाए CHC को और भी बेहतर दर मिलती है।

  • सिर्फ़ टेस्टेड मशीनें पात्र

    सब्सिडी सिर्फ़ उन्हीं मॉडलों पर मिलती है जिनका FMTTI, राज्य कृषि विश्वविद्यालय या ICAR संस्थान में परफ़ॉर्मेंस टेस्ट हो चुका हो — ख़रीदने से पहले मौजूदा अप्रूव्ड सूची ज़रूर देखें।

  • पूर्वोत्तर के लिए अतिरिक्त सहायता

    पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में 60:40 की जगह केंद्र-राज्य फंडिंग 90:10 है, और वहाँ समूह CHC को 80% की जगह 95% सब्सिडी मिलती है — छोटी जोत और कमज़ोर डीलर नेटवर्क को देखते हुए।

आपको क्या मिलता है

  • आर्थिक लाभ

    एक तय रुपये की रक़म नहीं, बल्कि मशीन या प्रोजेक्ट लागत का एक प्रतिशत — ख़रीद के बाद डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफ़र से भेजा जाता है, इसलिए असल लाभ आपकी श्रेणी और चुनी गई मशीन या CHC/FMB परियोजना पर निर्भर करता है।

  • किसे मिलता है

    व्यक्तिगत किसान (SC/ST, लघु व सीमांत, महिला और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को ऊँची दर के साथ), और CHC या FMB लगाने वाले FPO, सहकारी समितियाँ, स्वयं सहायता समूह, पंजीकृत ग्रामीण उद्यमी व कृषि स्नातक।

  • किस काम के लिए

    अपना ट्रैक्टर, पावर टिलर, हार्वेस्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, स्प्रेयर या ड्रोन ख़रीदने के लिए — या अगर अपनी जोत के हिसाब से मालिकाना समझ न आए, तो सब्सिडी वाले CHC या FMB से पास ही किराए पर लेने के लिए।

  • कैसे मिलता है

    आप पंजीकृत डीलर से टेस्टेड, सूचीबद्ध मशीन मॉडल ख़रीदते हैं, विभाग ख़रीद का भौतिक सत्यापन करता है, और सब्सिडी आधार-लिंक्ड बैंक खाते में DBT से जमा होती है — CHC/FMB परियोजना की सब्सिडी भी स्वीकृत प्रोजेक्ट लागत के आधार पर इसी तरह जारी होती है।

कौन पात्र है

दोनों सूचियाँ अधिसूचित परिचालन दिशानिर्देशों से हैं — बाईं सूची पूरी करना काफ़ी नहीं है, अगर दाईं सूची की कोई भी बात आपके परिवार पर लागू होती है।

आप पात्र हैं अगर

  • आप एक व्यक्तिगत भारतीय किसान हैं और मौजूदा SMAM-टेस्टेड व अप्रूव्ड सूची में शामिल मशीन ख़रीद रहे हैं
  • आप SC, ST, लघु व सीमांत, महिला या पूर्वोत्तर राज्य के किसान वर्ग से हैं — आप 50% की ऊँची सब्सिडी दर के पात्र हैं
  • आप पंजीकृत FPO, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह, ग्रामीण उद्यमी या कृषि स्नातक हैं और CHC या FMB लगाने के लिए आवेदन कर रहे हैं
  • DBT सब्सिडी पाने के लिए आपके पास आधार से जुड़ा बैंक खाता है
  • आपने SMAM या किसी अन्य केंद्रीय योजना के तहत इसी श्रेणी की मशीन पर पहले से सब्सिडी नहीं ली है

ज़मीन होते हुए भी अपात्र

  • आप जो मशीन मॉडल ख़रीदना चाहते हैं वह आपके राज्य की मौजूदा टेस्टेड-एंड-अप्रूव्ड सूची में नहीं है
  • आप SMAM पोर्टल से सूचीबद्ध न होने वाले डीलर से, या बिना सही टैक्स इनवॉइस के ख़रीद रहे हैं
  • आपने इसी श्रेणी की मशीन पर पहले ही सब्सिडी ली है और गाइडलाइंस में तय कूलिंग-ऑफ़ अवधि से पहले फिर आवेदन कर रहे हैं
  • आप CHC/FMB के लिए बिना पंजीकृत समूह के रूप में आवेदन कर रहे हैं — ऊँची समूह दर के लिए असली FPO, सहकारी समिति या SHG पंजीकरण ज़रूरी है
  • DBT आप तक पहुँचने के लिए आपके पास आधार से जुड़ा बैंक खाता नहीं है

यह योजना कहाँ लागू है

पूरे भारत में लागू केंद्रीय योजना — हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश के पात्र किसानों के लिए खुली है।

ज़रूरी दस्तावेज़

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें — कुछ भी न छूटे तो ऑनलाइन फॉर्म दस मिनट में भर जाता है।

  • आधार कार्ड

    बैंक खाते से जुड़ा हुआ — सब्सिडी सिर्फ़ डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रांसफ़र से ही मिलती है।

  • ज़मीन का रिकॉर्ड (खसरा / खतौनी / 7/12 उतारा)

    आप खेती करने वाले किसान हैं, इसका प्रमाण, आपके राज्य के प्रचलित प्रारूप में।

  • बैंक पासबुक (पहला पन्ना)

    यह पुष्टि करने के लिए कि DBT सब्सिडी किस खाते में जमा होगी।

  • जाति प्रमाण पत्र

    अगर आप SC/ST की ऊँची सब्सिडी दर का दावा कर रहे हैं।

  • डीलर कोटेशन / टैक्स इनवॉइस

    सूचीबद्ध डीलर से, जिस टेस्टेड-एंड-अप्रूव्ड मशीन मॉडल को ख़रीदना है उसके लिए।

आवेदन कैसे करें, कदम-दर-कदम

चाहे खुद ऑनलाइन पंजीकरण करें या CSC पर बैठकर — यही छह कदम लागू होते हैं।

  1. 1

    अपनी सब्सिडी दर और मशीन जाँचें

    agrimachinery.nic.in की प्राइस/कॉस्ट-नॉर्म्स सूची में अपनी श्रेणी (सामान्य, SC/ST, लघु व सीमांत, महिला, पूर्वोत्तर) और अपनी चुनी मशीन देखें — सब्सिडी सीमा हर मशीन मॉडल पर अलग तय होती है, एक जैसी नहीं।

  2. 2

    ऑनलाइन पंजीकरण व आवेदन करें

    SMAM पोर्टल (agrimachinery.nic.in) पर खाता बनाएँ, चुनें कि आप व्यक्तिगत किसान के रूप में आवेदन कर रहे हैं या CHC/FMB के लिए, और अपनी जानकारी भरें।

  3. 3

    दस्तावेज़ अपलोड करें

    आधार, ज़मीन का रिकॉर्ड, बैंक पासबुक, और लागू होने पर जाति प्रमाण पत्र व डीलर कोटेशन।

  4. 4

    शुरुआती मंज़ूरी लें, फिर मशीन ख़रीदें

    आवेदन को सैद्धांतिक मंज़ूरी मिलने के बाद, सूचीबद्ध डीलर से टेस्टेड-एंड-अप्रूव्ड मशीन मॉडल ख़रीदें और इनवॉइस संभाल कर रखें।

  5. 5

    भौतिक सत्यापन

    कृषि विभाग आपके आवेदन के मुक़ाबले असल में ख़रीदी गई मशीन की जाँच करता है।

  6. 6

    DBT से सब्सिडी जमा

    स्वीकृत सब्सिडी रक़म सीधे आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेज दी जाती है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • योजना चल रही है

    2014-15 से

    लगातार पंचवर्षीय योजना और कृषोन्नति योजना चक्रों में जारी

  • गाइडलाइंस आख़िरी बार संशोधित

    2025

    संशोधित परिचालन दिशानिर्देश, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग

  • आवेदन

    साल भर खुले

    हर राज्य के वार्षिक बजट आवंटन के अधीन

  • तथ्य आख़िरी बार जाँचे गए

    9 अगस्त 2026

    संशोधित SMAM गाइडलाइंस (2025) और agrimachinery.nic.in पोर्टल के अनुसार

अपनी पात्रता जाँचें

सवाल सीधे अधिसूचित मानदंडों से हैं। आपकी दी गई जानकारी आपके फोन से बाहर नहीं जाती।

  1. 1.क्या आप व्यक्तिगत किसान हैं, या CHC/FMB के लिए आवेदन करने वाले FPO/सहकारी/SHG/ग्रामीण उद्यमी/कृषि स्नातक हैं?
  2. 2.क्या सब्सिडी पाने के लिए आपके पास आधार से जुड़ा बैंक खाता है?
  3. 3.क्या आप जो मशीन मॉडल ख़रीदना चाहते हैं वह आपके राज्य की मौजूदा SMAM-टेस्टेड व अप्रूव्ड सूची में है?
  4. 4.क्या आपने हाल ही में इसी श्रेणी की मशीन पर पहले से सब्सिडी ली है?
  5. 5.क्या आप SMAM पोर्टल से सूचीबद्ध डीलर से, सही इनवॉइस के साथ ख़रीदेंगे?
  6. 6.अगर समूह CHC/FMB के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो क्या आपका FPO, सहकारी समिति या SHG औपचारिक रूप से पंजीकृत है?

6 में से 0 जवाब दिए

यह जाँच आधिकारिक परिचालन दिशानिर्देशों के मानदंड लागू करती है, पर यह मार्गदर्शन भर है — अंतिम फ़ैसला केवल राज्य सरकार का भूमि रिकॉर्ड सत्यापन है।

डाउनलोड

केवल आधिकारिक दस्तावेज़ — नीचे की हर चीज़ सरकार के अपने सर्वर पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइज़ेशन (SMAM) क्या है?

SMAM एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो 2014-15 से चल रही है और अब कृषोन्नति योजना के तहत लागू होती है, जिसमें किसानों को अपनी मशीन ख़रीदने के लिए सब्सिडी मिलती है, और व्यक्तियों, FPO, सहकारी समितियों व स्वयं सहायता समूहों को कस्टम हायरिंग सेंटर व फार्म मशीनरी बैंक लगाने के लिए सब्सिडी मिलती है जो आस-पास के किसानों को मशीनरी किराए पर देते हैं।

मशीन ख़रीदने पर मुझे कितनी सब्सिडी मिलेगी?

ज़्यादातर किसानों को मशीन की लागत का सामान्यतः 40%, और अगर आप SC, ST, लघु या सीमांत, महिला किसान, या पूर्वोत्तर राज्य से हैं तो 50%। सटीक रुपये की सीमा हर मशीन मॉडल के लिए SMAM प्राइस/कॉस्ट-नॉर्म्स सूची में अलग-अलग तय है, सभी मशीनों के लिए एक जैसी नहीं।

कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) क्या है?

CHC एक स्थानीय केंद्र है — व्यक्ति, ग्रामीण उद्यमी, कृषि स्नातक, FPO या सहकारी समिति द्वारा चलाया जाता है — जो ट्रैक्टर, हार्वेस्टर व अन्य मशीनरी उन किसानों को किराए पर देता है जो उसे ख़रीद नहीं सकते। CHC लगाने वाले व्यक्तिगत आवेदक को प्रोजेक्ट लागत का 40% (₹60 लाख तक की परियोजना पर) सब्सिडी मिलती है; पंजीकृत समूह को 80% (₹10 लाख तक की परियोजना पर, पूर्वोत्तर राज्यों में 95%) मिलता है।

फार्म मशीनरी बैंक (FMB) क्या है?

FMB गाँव-स्तर पर छोटे औज़ारों — रोटावेटर, सीड ड्रिल, स्प्रेयर व इसी तरह के उपकरणों — का समूह है, जिसे लघु व सीमांत किसान ज़रूरत के दिनों के लिए किराए पर ले सकते हैं, बजाय ऐसे उपकरण ख़रीदने के जो साल के ज़्यादातर समय बेकार पड़े रहेंगे।

क्या SMAM में ड्रोन भी शामिल हैं?

हाँ। किसान ड्रोन अपनी अलग मशीन श्रेणी है। व्यक्तिगत किसान को प्राथमिकता श्रेणी में होने पर ड्रोन की लागत का 50% अधिकतम ₹5 लाख तक, अन्यथा 40% अधिकतम ₹4 लाख तक मिलता है। कृषि स्नातक द्वारा लगाए गए ड्रोन-सेवा CHC को प्रति ड्रोन 50% अधिकतम ₹5 लाख तक मिलता है; सहकारी समिति, FPO या ग्रामीण उद्यमी द्वारा लगाए गए CHC को 40% अधिकतम ₹4 लाख तक मिलता है।

SMAM के लिए आवेदन कैसे करें?

agrimachinery.nic.in पर ऑनलाइन पंजीकरण व आवेदन करें, यह चुनते हुए कि आप व्यक्तिगत किसान हैं या CHC/FMB के लिए आवेदन कर रहे हैं। दस्तावेज़ अपलोड करें, मंज़ूरी का इंतज़ार करें, सूचीबद्ध डीलर से टेस्टेड-एंड-अप्रूव्ड मशीन ख़रीदें, और विभाग द्वारा ख़रीद सत्यापित होने के बाद सब्सिडी DBT से जमा होती है।

क्या मैं कोई भी ब्रांड या मॉडल ख़रीदकर सब्सिडी पा सकता हूँ?

नहीं — सिर्फ़ वे मशीन मॉडल पात्र हैं जिनका फार्म मशीनरी ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (FMTTI), किसी निर्धारित राज्य कृषि विश्वविद्यालय, या ICAR संस्थान में परफ़ॉर्मेंस टेस्ट हो चुका हो। ख़रीदने से पहले agrimachinery.nic.in पर मौजूदा अप्रूव्ड सूची देखें — जो मॉडल इस सूची में नहीं है उसे कोई सब्सिडी नहीं मिलती, चाहे वह कितना भी जाना-पहचाना ब्रांड क्यों न हो।

मुझे कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए?

बैंक खाते से जुड़ा आधार कार्ड, आप खेती करने वाले किसान हैं यह दिखाने वाला ज़मीन का रिकॉर्ड, बैंक पासबुक, अगर SC/ST दर का दावा कर रहे हैं तो जाति प्रमाण पत्र, और जिस मशीन के लिए आवेदन कर रहे हैं उसके लिए सूचीबद्ध डीलर का कोटेशन या टैक्स इनवॉइस।

SMAM में केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग कैसे बँटती है?

ज़्यादातर राज्यों में केंद्र और राज्य लागत 60:40 में साझा करते हैं, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में 90:10 में, और केंद्रशासित प्रदेशों में केंद्र पूरी फंडिंग करता है — यही एक वजह है कि कुछ राज्य किसी साल दूसरों से ज़्यादा आवेदन निपटा पाते हैं, यह उनके बजट आवंटन पर निर्भर करता है।

मैंने पिछले साल एक ट्रैक्टर पर सब्सिडी ले ली थी — क्या मुझे किसी दूसरी मशीन पर फिर मिल सकती है?

योजना हर मशीन को जीवनभर की एक-बार सीमा के तौर पर नहीं देखती — आप किसी दूसरी श्रेणी की मशीन पर सब्सिडी का दावा कर सकते हैं। जो मना है वह है गाइडलाइंस में तय कूलिंग-ऑफ़ अवधि के भीतर उसी मशीन श्रेणी पर दोबारा सब्सिडी लेना — दोबारा आवेदन करने से पहले agrimachinery.nic.in पर या अपने ज़िला कृषि कार्यालय से मौजूदा नियम जाँच लें।

अब तक SMAM से कितने किसानों को फ़ायदा हुआ है?

2014-15 में शुरुआत के बाद से, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार SMAM ने लगभग ₹9,404.47 करोड़ की आर्थिक सहायता बाँटी है और 21.6 लाख से ज़्यादा किसानों को कृषि मशीनरी हासिल करने में मदद की है।

क्या SMAM हर राज्य में उपलब्ध है?

हाँ, SMAM पूरे भारत में लागू होने वाली केंद्र प्रायोजित योजना है। केंद्र और हर राज्य का फंडिंग हिस्सा अलग-अलग होता है (आमतौर पर 60:40, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में 90:10, केंद्रशासित प्रदेशों में पूरी तरह केंद्र-वित्तपोषित), लेकिन योजना हर जगह चलती है, हर राज्य के वार्षिक आवंटन और अपने कार्यान्वयन नियमों के अधीन।

क्या SMAM की कोई हेल्पलाइन है?

मौजूदा SMAM पोर्टल पर कोई समर्पित टोल-फ़्री नंबर सूचीबद्ध नहीं है। किसी सवाल के लिए पोर्टल हेल्पडेस्क को [email protected] पर लिखें, या सीधे अपने ज़िला कृषि कार्यालय / कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।

अब भी कोई सवाल है?

आम सवालों के जवाब ऊपर FAQs में हैं। आपके अपने आवेदन से जुड़ी किसी भी बात के लिए मंत्रालय की हेल्पलाइन undefined ही आधिकारिक जवाब है — और सही दिशा दिखाने में हमें खुशी होगी।