मुख्य सामग्री पर जाएँ
Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
उड़दखरीफ़खुली-परागितअपडेट किया गया 15 अगस्त 2026

IPU 94-1 (Uttara)

आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर से जारी — पुरानी (1999), व्यापक रूप से अपनाई गई किस्म, उत्तर-पश्चिम व उत्तर-पूर्व मैदानी क्षेत्र के लिए, काले दाने, आकर्षक पौध क़िस्म व लगभग 3.6 ग्राम के 100-दाना भार के साथ।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधि80–85 दिन
अपेक्षित उपज12–14 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
उड़द
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
80–85 दिन
अपेक्षित उपज
12–14 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
आईसीएआर-आईआईपीआर के मौजूदा किस्म डेटाबेस के अनुसार 1999 में उत्तर-पश्चिम व उत्तर-पूर्व मैदानी क्षेत्र के लिए जारी (अनुरोधकर्ता को बताया गया एक स्रोत 2000 बताता है — इस चरण में स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी)।

इस किस्म के बारे में

आईपीयू 94-1, जिसे व्यावसायिक रूप से 'उत्तरा' नाम से बेचा जाता है, आईसीएआर-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर), कानपुर द्वारा विकसित एक उड़द (ब्लैकग्राम) किस्म है। आईसीएआर-आईआईपीआर के अपने मौजूदा किस्म डेटाबेस — जिसे इस सुधार के लिए सीधे जाँचा गया — के अनुसार इसका रिलीज़ वर्ष 1999 है (अनुरोधकर्ता को बताया गया एक अलग स्रोत 2000 बताता है, जिसकी यहाँ स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी), यह उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश व अधिकांश राजस्थान) व उत्तर-पूर्व मैदानी क्षेत्र (पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम व झारखंड, मानक एआईसीआरपी दलहन-क्षेत्र परिभाषाओं के अनुसार) के लिए सिफ़ारिश की गई है, 80–85 दिन में 12–14 क्विंटल/हेक्टेयर पर पकती है, पीला मोज़ेक विषाणु (एमवाईएमवी) प्रतिरोध, आकर्षक पौध क़िस्म, काले दाने व लगभग 3.6 ग्राम के 100-दाना भार के साथ। 2026 के एक फ्रंटियर्स इन जेनेटिक्स अध्ययन में इसकी वंशावली NP 19 × T-9 बताई गई है, जो आईपीयू 02-43 की DPU88-31 × DUR-1 वंशावली से अलग है — यह स्वतंत्र पुष्टि है कि ये दो अलग किस्में हैं। इसके अच्छी तरह चरित्रित एमवाईएमवी प्रतिरोध के कारण ही 2022 के एक समर्पित अध्ययन ने इसका जीनोम-सीक्वेंस तैयार किया। एक अलग, नई किस्म आईपीयू 02-43 अपने अलग पेज पर बताई गई है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि80–85 दिन
    उपज क्षमता12–14 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधएमवाईएमवी (पीला मोज़ेक विषाणु) प्रतिरोधी, आकर्षक पौध क़िस्म
    मिट्टीदोमट
    सीज़नखरीफ़

उपज व अवधि

पकने की अवधि

80–85 दिन

अपेक्षित उपज

12–14 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • पीला मोज़ेक विषाणु (एमवाईएमवी) प्रतिरोध इतना अच्छी तरह चरित्रित है कि 2022 के एक समर्पित अध्ययन ने विशेष रूप से इस किस्म के लिए ड्राफ़्ट जीनोम तैयार किया।
  • आईपीयू 02-43 — एक अलग आईसीएआर-आईआईपीआर किस्म — से ज़्यादा उपज क्षमता (12–14 क्विंटल/हेक्टेयर), साथ ही उत्तर-पश्चिम व उत्तर-पूर्व मैदानी क्षेत्र के अनुकूल थोड़ी लंबी अवधि (80–85 दिन)।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • आईपीयू 94-1 (उत्तरा) व आईपीयू 02-43 आईसीएआर-आईआईपीआर के अपने किस्म डेटाबेस के अनुसार अलग-अलग रिलीज़ वर्ष, अवधि, उपज व सिफ़ारिश-क्षेत्र वाली दो अलग किस्में हैं — दूसरी किस्म के लिए 'आईपीयू 02-43' देखें।
  • आईसीएआर-आईआईपीआर का मौजूदा किस्म डेटाबेस 1999 रिलीज़ वर्ष बताता है; अनुरोधकर्ता को बताया गया एक स्रोत 2000 बताता है, पर इस चरण में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। किसी एक को चुपचाप प्राथमिकता देने की बजाय दोनों यहाँ बताए गए हैं।
  • सिफ़ारिश किए गए राज्य (पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार) मानक एआईसीआरपी दलहन-क्षेत्र परिभाषाओं के अनुसार इस रिकॉर्ड का अपना उत्तर-पश्चिम/उत्तर-पूर्व मैदानी क्षेत्र मानचित्रण है।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • पंजाब
  • हरियाणा
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या उत्तरा और आईपीयू 02-43 एक ही किस्म हैं?

नहीं। आईसीएआर-आईआईपीआर का अपना किस्म डेटाबेस आईपीयू 94-1, व्यावसायिक रूप से 'उत्तरा' नाम से बिकने वाली (1999, उत्तर-पश्चिम व उत्तर-पूर्व मैदानी क्षेत्र), व आईपीयू 02-43 (2008, दक्षिणी क्षेत्र) को दो अलग किस्मों के रूप में सूचीबद्ध करता है। 'उत्तरा' नाम केवल आईपीयू 94-1 का है; दूसरी किस्म के लिए 'आईपीयू 02-43' देखें।

आईपीयू 94-1 को जीनोम-सीक्वेंसिंग के लिए क्यों चुना गया?

2022 के एक अध्ययन ने इसे विशेष रूप से इसके अच्छी तरह दस्तावेज़ीकृत, मज़बूत मूंग पीला मोज़ेक रोग प्रतिरोध के कारण चुना, ताकि भविष्य के प्रजनन कार्यक्रमों को शामिल प्रतिरोध जीन ट्रैक करने में मदद के लिए एक ड्राफ़्ट जीनोम तैयार किया जा सके।

स्रोत: Varieties — ICAR-Indian Institute of Pulses Research (IIPR), Kanpur, Frontiers in Genetics (2026) — pedigree table for ICAR-IIPR blackgram releases, Data: Long-read-based draft genome sequence of Indian black gram IPU-94-1 'Uttara' — Dryad. संपादकीय नीति.