CO 2
तमिलनाडु भर में लोकप्रिय एक अधिक-उपज कोयंबटूर किस्म, अपनी मोटी, गठीली फली व प्रति पेड़ भारी फली-गिनती के लिए।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- बीज-प्रसारित, कम-चक्र किस्म
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- उत्पादक आयु लगभग 3–4 साल; वार्षिक से कम-चक्र खेती
- बीज दर
- सीधी बुवाई को लगभग 2–3 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- छोटी, मोटी फली (लगभग 25–35 सेमी), प्रति पेड़ ज़्यादा फली-गिनती के साथ — अपने भार व उपज के लिए लोकप्रिय
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट
- जारी
- कोयंबटूर की किस्म, तमिलनाडु के व्यावसायिक मोरिंगा क्षेत्रों में लोकप्रिय
इस किस्म के बारे में
सीओ 2 (कोयंबटूर 2) एक कम-आयु, अधिक-उपज कोयंबटूर किस्म है, तमिलनाडु भर में अपनी मोटी, गठीली फली के लिए लोकप्रिय — आमतौर 25–35 सेमी, सीओ 1 से साफ़ छोटी पर भारी और अक्सर प्रति पेड़ ज़्यादा गिनती में। इसकी उत्पादक आयु सीओ 1 के आठ से दस साल के बजाय छोटी तीन से चार साल चलती, जो तेज़-चक्र, ज़्यादा-टर्नओवर फली ब्लॉक चाहने वाले किसानों के लिए उपयुक्त है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयजून–जुलाई (मानसून, बारानी) या फ़रवरी–मार्च (सिंचित)
- बीज दरसीधी बुवाई को लगभग 2–3 किग्रा/हेक्टेयर
- दूरीमानक व्यावसायिक फली उत्पादन को 2.5 मी × 2.5 मी
- बुवाई विधिरोपाई की बजाय अंतिम स्थल पर सीधी बुवाई बेहतर
- सिंचाईजमाव तक नियमित हल्की सिंचाई; किस्म के प्रति-पेड़ भारी फली-भार को देखते हुए फूल व फली-बंधन में स्थिर नमी
- उर्वरकपीकेएम 1/पीकेएम 2 जैसी — साल में दो बार बँटी मामूली N:P:K खुराक प्लस गोबर खाद, इस किस्म के लिए अलग से नहीं
- कटाईलगभग 3–4 साल की उत्पादक आयु में छोटी, मोटी फली नरम रहते तोड़ी जातीं
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट
- सिंचाई
- इस छोटी पेड़-आयु में भी बेहतरीन जल-निकासी ज़रूरी बनी रहती
जलवायु
- जलवायु
- गर्मी व सूखा मौसम अच्छी तरह सहती; भारी मानसून दौर में जलभराव मुख्य जलवायु-जुड़ा जोख़िम बना रहता
उपज व अवधि
पकने की अवधि
उत्पादक आयु लगभग 3–4 साल; वार्षिक से कम-चक्र खेती
अपेक्षित उपज
छोटी, मोटी फली (लगभग 25–35 सेमी), प्रति पेड़ ज़्यादा फली-गिनती के साथ — अपने भार व उपज के लिए लोकप्रिय
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
प्रबंधन सुझाव
- प्रति पेड़ भारी फली-गिनती को देखते हुए नियमित व समय पर तुड़ाई करें — बहुत देर छोड़ी फली तेज़ी से लकड़ी जैसी बनती और सब्ज़ी-बाज़ार मूल्य खोती।
- सीओ 1 जैसा दशक भर का पेड़ मानने के बजाय 3–4 साल के चक्र पर दोबारा रोपाई की योजना बनाएँ।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- तमिलनाडु
