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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
सहजन (मोरिंगा)सभी सीज़नलंबी-आयु पेड़ किस्मअपडेट किया गया 30 अगस्त 2026

CO 1

वार्षिक पीकेएम-शैली फसल के बजाय पारंपरिक, ज़्यादा दूरी वाली पेड़-प्रणाली — उन किसानों के लिए जो एक ही रोपाई से सालों की उपज चाहते।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिएक बार जमने पर लगभग 8–10 साल फल देती; साल में दो फली-चक्र
अपेक्षित उपजलंबी फली, लगभग 45–60 सेमी, कई साल के पेड़-जीवन में साल में दो फ्लश में तोड़ी जातीं
उपयुक्त मिट्टीअच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
लंबी-आयु पेड़ किस्म
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
एक बार जमने पर लगभग 8–10 साल फल देती; साल में दो फली-चक्र
बीज दर
सालाना प्रणाली से कुल में कम, क्योंकि दूरी ज़्यादा है और पेड़ दोबारा रोपे जाने के बजाय सालों खड़े रहते
अपेक्षित उपज
लंबी फली, लगभग 45–60 सेमी, कई साल के पेड़-जीवन में साल में दो फ्लश में तोड़ी जातीं
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट
जारी
कोयंबटूर की किस्म, तमिलनाडु के पारंपरिक मोरिंगा क्षेत्रों में उगाई जाती

इस किस्म के बारे में

सीओ 1 (कोयंबटूर 1) वार्षिक फसल के बजाय एक लंबी-आयु पेड़ के तौर पर उगाई जाती — ज़्यादा दूरी पर व लगभग आठ से दस साल खड़ी रखी जाती, साल में दो फली-देने वाले फ्लश के साथ, न कि पीकेएम 1 या पीकेएम 2 की तरह हर साल दोबारा रोपी जाती। इसकी फली ख़ासतौर पर लंबी होती, आमतौर 45–60 सेमी, जो उसे लंबी ड्रमस्टिक पसंद करने वाले बाज़ारों के लिए उपयुक्त बनाती। चूँकि पेड़ सालों खड़ा रहता, शुरुआती स्थल-चयन व जल-निकासी सामान्य से भी ज़्यादा मायने रखतीं — तीसरे साल मिली जलभराव समस्या रोपाई से पहले पकड़ी गई से कहीं ज़्यादा महँगी पड़ती।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारलंबी-आयु पेड़ किस्म
    अवधिएक बार जमने पर लगभग 8–10 साल फल देती; साल में दो फली-चक्र
    उपज क्षमतालंबी फली, लगभग 45–60 सेमी, कई साल के पेड़-जीवन में साल में दो फ्लश में तोड़ी जातीं
    रोग-प्रतिरोधकोई बड़ा रोग-प्रतिरोध विशेष रूप से प्रलेखित नहीं
    मिट्टीअच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयजून–जुलाई (मानसून, बारानी) या फ़रवरी–मार्च (सिंचित)
  • बीज दरसालाना प्रणाली से कुल में कम, क्योंकि दूरी ज़्यादा है और पेड़ दोबारा रोपे जाने के बजाय सालों खड़े रहते
  • दूरी2.5 मी × 2.5 मी या ज़्यादा, क्योंकि पेड़ हर साल दोबारा रोपने की बजाय सालों रखा जाता
  • बुवाई विधिसालों खड़े रहने वाले पेड़ के लिए अंतिम स्थल पर सीधी बुवाई बेहतर
  • सिंचाईजमाव तक हल्की, नियमित सिंचाई; जमा पेड़ को सूखे दौर में सिर्फ़ कभी-कभार पानी चाहिए, हर फूल-से-फली-बंधन खिड़की में स्थिर नमी के साथ
  • उर्वरकसाल के दोनों फूल/फली-चक्रों के आसपास एक मामूली सालाना रखरखाव खुराक (गोबर खाद प्लस हल्की बँटी N:P:K), उस भारी प्रति-चक्र खुराक के बजाय जो कड़ी-छंटाई वार्षिक प्रणाली को चाहिए
  • कटाईपेड़ जमने व फल देने पर साल में दो फली-फ्लश, 8–10 साल की उत्पादक आयु में जारी

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी जल-निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट
सिंचाई
लंबी-आयु पेड़ के लिए अहम — एक जल-निकासी ख़ामी जो वार्षिक प्रणाली में सिर्फ़ एक सीज़न की फसल गँवाती, बहु-वर्षीय सीओ 1 पेड़ को पूरी तरह मार सकती

जलवायु

जलवायु
अपनी लंबी आयु में गर्मी व सूखा अच्छी तरह सहती; सालों में जमा जोख़िम असामान्य भारी मानसून में जलभराव है, कोई एक सूखा दौर नहीं

उपज व अवधि

पकने की अवधि

एक बार जमने पर लगभग 8–10 साल फल देती; साल में दो फली-चक्र

अपेक्षित उपज

लंबी फली, लगभग 45–60 सेमी, कई साल के पेड़-जीवन में साल में दो फ्लश में तोड़ी जातीं

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य कीट

प्रबंधन सुझाव

  • रोपाई से पहले स्थल जल-निकासी सही करें — सीओ 1 जैसे लंबी-आयु पेड़ के साथ यह असल में एक दशक के लिए एक बार लिया फ़ैसला है।
  • मृत या भीड़भरी लकड़ी हटाने को हल्की सालाना छंटाई बहु-वर्षीय पेड़ को उत्पादक रखती, उसे कड़ी-छंटाई वार्षिक प्रणाली में बदले बिना।

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • तमिलनाडु
  • केरल