Pusa Kranti
आईएआरआई से जारी — मोटे, अंडाकार फल, लगभग 15–20 सेमी लंबे, गहरे बैंगनी छिलके, चमकीले हरे कैलिक्स व अपेक्षाकृत कम बीज के साथ; उत्तर भारत में वसंत व पतझड़ दोनों बुवाई के लिए अनुशंसित।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- बैंगन
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- रोपाई से 70–75 दिन
- अपेक्षित उपज
- 140–160 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली द्वारा जारी — इस शोध चरण में सटीक अधिसूचना वर्ष नहीं मिला
इस किस्म के बारे में
पूसा क्रांति एक आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली की बैंगन किस्म है, जिसकी बौनी, फैलने वाली पौध बनावट है — उत्तर भारत में वसंत व पतझड़, दोनों बुवाई के लिए अनुशंसित। इसके फल मोटे, अंडाकार, लगभग 15–20 सेमी लंबे होते हैं, गहरे बैंगनी छिलके, चमकीले हरे कैलिक्स व अपेक्षाकृत कम बीज के साथ। उपयुक्त बढ़वार परिस्थितियों में औसत उपज लगभग 14–16 टन/हेक्टेयर (140–160 क्विंटल/हेक्टेयर) होती है।
मुख्य विशेषताएँ
उपज व अवधि
पकने की अवधि
रोपाई से 70–75 दिन
अपेक्षित उपज
140–160 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- इस चरण में जाँचे गए स्रोतों में पूसा क्रांति के लिए कोई विशेष रोग-प्रतिरोध गुण दर्ज नहीं है — यह इस रिकॉर्ड की अपनी "कोई अंतर्निहित प्रतिरोध नहीं" वाली बात से मोटे तौर पर मेल खाता है, हालाँकि यह इसकी पुष्टि नहीं है
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- बौनी, फैलने वाली पौध बनावट, सघन दूरी के लिए उपयुक्त
- मोटा, अंडाकार, गहरा-बैंगनी, कम-बीज वाला फल — पूसा पर्पल लॉन्ग जैसी पतली, लंबी किस्मों का एक मोटा-फल विकल्प
- उत्तर भारत में दो बुवाई खिड़कियों (वसंत व पतझड़) के लिए अनुशंसित
ध्यान रखने योग्य बातें
- पूसा क्रांति के लिए कोई अंतर्निहित रोग-प्रतिरोध दर्ज नहीं है — केवल किस्म पर भरोसा करने की बजाय नियमित निगरानी व, जहाँ दबाव ज़्यादा हो, तना-फल छेदक के लिए छिड़काव कार्यक्रम अपनाएँ
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- पंजाब
- दिल्ली
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूसा क्रांति का फल कैसा दिखता है?
मोटे, अंडाकार फल, लगभग 15–20 सेमी लंबे, गहरे बैंगनी छिलके, चमकीले हरे कैलिक्स व अपेक्षाकृत कम बीज के साथ — पूसा पर्पल लॉन्ग जैसी पतली, लंबी किस्मों से ज़्यादा मोटा।
पूसा क्रांति से कितनी उपज मिल सकती है?
उपयुक्त बढ़वार परिस्थितियों में औसत उपज लगभग 14–16 टन/हेक्टेयर (140–160 क्विंटल/हेक्टेयर) होती है। वास्तविक उपज मिट्टी, सिंचाई, दूरी व फ़सल प्रबंधन के अनुसार बदलती है।
स्रोत: Brinjal Varieties and Diseases Information — Agri Farming. संपादकीय नीति.
