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अश्वगंधाखरीफ़किसानी स्थानीय किस्म, कोई औपचारिक रूप से जारी किस्म नहींअपडेट किया गया 26 अगस्त 2026

Nagori

राजस्थान के नागौर ज़िले के नाम पर बिकने वाली स्थानीय अश्वगंधा किस्म "नागौरी" — अपनी स्टार्च भरी जड़ के लिए प्रसिद्ध, पर कोई औपचारिक रूप से जारी ICAR या राज्य-विश्वविद्यालय किस्म नहीं।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधिअलग से दर्ज नहीं — प्रजाति-स्तर के 150–180 दिन मानें
अपेक्षित उपजकोई अलग से दर्ज उपज आँकड़ा नहीं; बताई उपज-बढ़त की बजाय अपनी स्टार्च भरी जड़ की गुणवत्ता पर बिकती
उपयुक्त मिट्टीबलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी, pH 7.5–8.0

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
किसानी स्थानीय किस्म, कोई औपचारिक रूप से जारी किस्म नहीं
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
अलग से दर्ज नहीं — प्रजाति-स्तर के 150–180 दिन मानें
बीज दर
सीधी छिड़काव बुवाई के लिए 5–12 किग्रा/हेक्टेयर (2–5 किग्रा/एकड़) — यह प्रजाति-मानक दर है; नागौरी बीज आमतौर हर साल नया ख़रीदने की बजाय पिछले सीज़न की फ़सल से बचाया जाता
अपेक्षित उपज
कोई अलग से दर्ज उपज आँकड़ा नहीं; बताई उपज-बढ़त की बजाय अपनी स्टार्च भरी जड़ की गुणवत्ता पर बिकती
उपयुक्त मिट्टी
बलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी, pH 7.5–8.0
जारी
किसानी स्थानीय किस्म, नागौर ज़िला (राजस्थान) — कोई ICAR/राज्य-विश्वविद्यालय जारी-किस्म नहीं

इस किस्म के बारे में

नागौरी, राजस्थान के नागौर ज़िले से जुड़ी एक स्थानीय अश्वगंधा (Withania somnifera) किस्म का जाना-पहचाना व्यापारिक नाम है, जिसे सरकारी खेती-साहित्य में "स्टार्च भरी जड़ों वाली एक स्थानीय किस्म" के तौर पर दर्ज किया गया। JA-20, JA-134, पोषिता, रक्षिता या WSR के उलट, नागौरी कोई ICAR- या राज्य-विश्वविद्यालय-जारी किस्म नहीं जिसका औपचारिक प्रजनन-रिकॉर्ड हो — यह किसान-बचाया व स्थानीय बाज़ार का बीज है, जिसने दवा-बाज़ार कारोबार में अपनी ख़ास जड़-गुणवत्ता के लिए नाम कमाया। भारत में उगाई व बेची जाने वाली ज़्यादातर अश्वगंधा — ख़ासकर नागौर के आसपास — किसी औपचारिक जारी लाइन की बजाय इसी तरह की है, जो तब जानना ज़रूरी है जब कोई ख़रीदार या बीज-स्रोत बिना आगे किसी काग़ज़ात के "नागौरी" नाम इस्तेमाल करे।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारकिसानी स्थानीय किस्म, कोई औपचारिक रूप से जारी किस्म नहीं
    अवधिअलग से दर्ज नहीं — प्रजाति-स्तर के 150–180 दिन मानें
    उपज क्षमताकोई अलग से दर्ज उपज आँकड़ा नहीं; बताई उपज-बढ़त की बजाय अपनी स्टार्च भरी जड़ की गुणवत्ता पर बिकती
    रोग-प्रतिरोधकोई रेटिंग मौजूद नहीं — नागौरी किसान-बचाया स्थानीय बीज है जो कभी किसी औपचारिक किस्म-परीक्षण से नहीं गुज़रा
    मिट्टीबलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी, pH 7.5–8.0
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयसीधी बुवाई: जुलाई का दूसरा हफ़्ता, मानसून-पूर्व बारिश से मिट्टी भुरभुरी होने के बाद।
  • बीज दरसीधी छिड़काव बुवाई के लिए 5–12 किग्रा/हेक्टेयर (2–5 किग्रा/एकड़) — यह प्रजाति-मानक दर है; नागौरी बीज आमतौर हर साल नया ख़रीदने की बजाय पिछले सीज़न की फ़सल से बचाया जाता
  • दूरीसीधी बुवाई वाली फ़सल 25–30 दिन पर विरल कर लगभग 20,000–25,000 पौधे/हेक्टेयर पर लाई जाती
  • बुवाई विधिसीधे खेत में छिड़कें — नागौरी लगभग पूरी तरह सीधी बुवाई से ही उगाई जाती, राजस्थान की हल्की, कम-बारिश वाली मिट्टी पर, रोपाई से नहीं
  • सिंचाईमानसून समय पर हो तो लगभग कोई सिंचाई नहीं; सिर्फ़ सच्चे सूखे दौर में जीवन-रक्षक सिंचाई — अश्वगंधा के इलाक़े के सबसे सूखे हिस्सों में से एक में उगाई जाती
  • उर्वरकजान-बूझकर कोई नहीं — बची उर्वरता पर उगाई जाती, राजस्थान की परंपरागत कम-इनपुट अश्वगंधा खेती के अनुरूप
  • कटाईजनवरी–मार्च में, पत्तियाँ सूखने व फल पीले-लाल पड़ने पर कटाई करें — नागौरी की पहचान वाली स्टार्च भरी जड़ भी बाक़ी अश्वगंधा की तरह मोटाई व सफ़ाई पर ग्रेड होती।

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
बलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी, राजस्थान की नागौर पट्टी की सामान्य मिट्टी
सिंचाई
जल-निकासी बिल्कुल अच्छी होनी चाहिए — रुका पानी जड़ व कॉलर को सड़ाता

जलवायु

जलवायु
20–35°C, 500–750 मिमी बारिश — राजस्थान की अर्ध-शुष्क नागौर पट्टी इस दायरे के निचले सिरे के क़रीब

उपज व अवधि

पकने की अवधि

अलग से दर्ज नहीं — प्रजाति-स्तर के 150–180 दिन मानें

अपेक्षित उपज

कोई अलग से दर्ज उपज आँकड़ा नहीं; बताई उपज-बढ़त की बजाय अपनी स्टार्च भरी जड़ की गुणवत्ता पर बिकती

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • सरकारी खेती-नोट सामान्यतः तना छेदक व माइट को अश्वगंधा का मुख्य कीट बताते।
  • बुवाई के 25–30 दिन बाद एक हाथ-निराई आमतौर काफ़ी है।

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • अश्वगंधा बाज़ार में जाना-पहचाना, लंबे समय से बिकने वाला नाम, ख़ासतौर पर अपनी स्टार्च भरी जड़ की गुणवत्ता के लिए क़ीमती।
  • लंबे स्थानीय इस्तेमाल से राजस्थान की सूखी, कम-बारिश वाली खेती-स्थितियों के लिए अच्छी तरह ढली हुई।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह स्थानीय स्तर पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी बचाया किसानी बीज है, कोई ICAR- या राज्य-विश्वविद्यालय-जारी किस्म नहीं जिसका औपचारिक प्रजनन-रिकॉर्ड या दर्ज उपज/रोग-प्रतिरोध आँकड़ा हो — किसी जाने-पहचाने, भरोसेमंद स्थानीय उत्पादक से ही ख़रीदें, यह मान लेने की बजाय कि "नागौरी" नाम से बिकने वाला हर बीज आनुवंशिक रूप से एक-सा है।
  • हर अश्वगंधा की तरह, यह फ़सल भी सीधे दवा-बाज़ार ख़रीदारों को गुणवत्ता व ग्रेड पर बिकती, कोई एमएसपी या मंडी-शैली खुली बिक्री-व्यवस्था नहीं।

उपयुक्त क्षेत्र

राजस्थान के नागौर ज़िले के नाम पर व वहीं से कारोबार होता — यह एक स्थानीय-बाज़ार नाम है, कोई आधिकारिक राज्य-व्यापी सिफ़ारिश नहीं।

  • राजस्थान

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नागौरी अश्वगंधा क्या है?

राजस्थान के नागौर ज़िले के नाम पर बिकने वाली स्थानीय अश्वगंधा किस्म, अपनी स्टार्च भरी जड़ के लिए प्रसिद्ध — एक किसानी स्थानीय किस्म, कोई औपचारिक रूप से जारी ICAR या राज्य-विश्वविद्यालय किस्म नहीं।

क्या नागौरी एक आधिकारिक जारी किस्म है?

नहीं — यह किसान-बचाया, स्थानीय बाज़ार का बीज है, जिसका कोई ICAR या राज्य-विश्वविद्यालय प्रजनन-रिकॉर्ड नहीं। JA-20 व JA-134 ही ICAR-DMAPR की अपनी जारी-किस्मों की सूची में दर्ज एकमात्र दो अश्वगंधा किस्में हैं।

नागौरी जड़ की क़ीमत क्यों?

सरकारी खेती-साहित्य इसे ख़ासतौर पर स्टार्च भरी जड़ों वाली स्थानीय किस्म के तौर पर दर्ज करता — एक ऐसा गुण जिसे कारोबार क़ीमती मानता, हालाँकि JA-20/JA-134 जैसा कोई औपचारिक उपज या विथानोलाइड-सामग्री आँकड़ा इसके लिए दर्ज नहीं।

स्रोत: Odisha SMPB — Standard Cultivation Procedure for Ashwagandha. संपादकीय नीति.