Poshita
CSIR-CIMAP, लखनऊ द्वारा विकसित व बेची जाने वाली उच्च-उपज अश्वगंधा किस्म — बीज व रोपण-सामग्री की उपलब्धता के लिए सीधे संस्थान से संपर्क करें।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अश्वगंधा
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- जड़ पकने तक ~180 दिन (प्रजाति-स्तर की कटाई खिड़की; एक बहुवर्षीय-प्रकार की लाइन जिसे एक से ज़्यादा सीज़न भी रखा जा सकता)
- बीज दर
- सीधी छिड़काव बुवाई के लिए 5–12 किग्रा/हेक्टेयर (2–5 किग्रा/एकड़); रोपाई के लिए नर्सरी में बस लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर बीज — यह प्रजाति-मानक दर है, पोषिता के लिए अलग से तय नहीं
- अपेक्षित उपज
- लगभग 14 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज व लगभग 0.25% कुल विथानोलाइड सामग्री, CIMAP-प्रताप व अन्य CIMAP लाइनों के साथ बहु-वर्षीय किस्म-परीक्षणों में परखी गई
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी, pH 7.5–8.0
- जारी
- CSIR-CIMAP, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) द्वारा विकसित — एक बहुवर्षीय-प्रकार की लाइन; इस रिकॉर्ड के लिए विशेष जारी-वर्ष स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं
इस किस्म के बारे में
पोषिता, CSIR-केंद्रीय औषधीय व सुगंधित पादप संस्थान (CIMAP), लखनऊ द्वारा विकसित व बेची जाने वाली अश्वगंधा (Withania somnifera) लाइन है, जिसे संस्थान का अपना प्रजनन कार्यक्रम बहुवर्षीय-प्रकार की लाइन मानता — वार्षिक-प्रकार की JA-20, JA-134 व CIMAP-चेतक के उलट। CIMAP-प्रताप व अन्य CIMAP लाइनों के साथ हुए बहु-वर्षीय किस्म-मूल्यांकन परीक्षणों में पोषिता ने लगभग 14 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज व लगभग 0.25% कुल विथानोलाइड सामग्री दी। इस रिकॉर्ड के लिए विशेष जारी-वर्ष किसी प्राथमिक CIMAP स्रोत से पुष्ट नहीं हो सका, इसलिए इसे बिना वर्ष बताए CIMAP-विकसित के तौर पर दर्ज किया गया, अंदाज़े से नहीं।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयसीधी बुवाई: जुलाई का दूसरा हफ़्ता। नर्सरी बुवाई: मानसून जमने से थोड़ा पहले, 5–6 हफ़्ते बाद रोपाई।
- बीज दरसीधी छिड़काव बुवाई के लिए 5–12 किग्रा/हेक्टेयर (2–5 किग्रा/एकड़); रोपाई के लिए नर्सरी में बस लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर बीज — यह प्रजाति-मानक दर है, पोषिता के लिए अलग से तय नहीं
- दूरीरोपाई वाली फ़सल के लिए 60×60 सेमी; सीधी बुवाई 25–30 दिन पर विरल कर लगभग 20,000–25,000 पौधे/हेक्टेयर
- बुवाई विधिसीधे खेत में छिड़कें, या नर्सरी में पौध तैयार कर 5–6 हफ़्ते की उम्र पर 60 सेमी नालियों में रोपें
- सिंचाईमानसून समय पर हो तो लगभग कोई सिंचाई नहीं; सिर्फ़ सच्चे सूखे दौर में जीवन-रक्षक सिंचाई
- उर्वरकजान-बूझकर कोई नहीं — फ़सल पिछली फ़सल की बची उर्वरता पर चलती; सचमुच कमज़ोर मिट्टी पर कभी-कभार हल्की 20:20:0 किग्रा N:P:K/हेक्टेयर बेसल दी जाती
- कटाईबुवाई के लगभग 150–180 दिन बाद, जनवरी–मार्च में, पत्तियाँ सूखने व फल पीले-लाल पड़ने पर कटाई करें।
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी
- सिंचाई
- जल-निकासी बिल्कुल अच्छी होनी चाहिए — रुका पानी जड़ व कॉलर को सड़ाता
जलवायु
- जलवायु
- 20–35°C, 500–750 मिमी बारिश — मानसून की पूँछ पकड़ने के लिए बोई जाती व सूखे में ख़त्म होती
उपज व अवधि
पकने की अवधि
जड़ पकने तक ~180 दिन (प्रजाति-स्तर की कटाई खिड़की; एक बहुवर्षीय-प्रकार की लाइन जिसे एक से ज़्यादा सीज़न भी रखा जा सकता)
अपेक्षित उपज
लगभग 14 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज व लगभग 0.25% कुल विथानोलाइड सामग्री, CIMAP-प्रताप व अन्य CIMAP लाइनों के साथ बहु-वर्षीय किस्म-परीक्षणों में परखी गई
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- सरकारी खेती-नोट सामान्यतः तना छेदक व माइट को अश्वगंधा का मुख्य कीट बताते — फ़ेनवेलरेट छिड़काव (सुमीसिडिन) व नीम बीज गिरी अर्क मानक इलाज हैं।
- बुवाई/रोपाई के 25–30 दिन बाद एक हाथ-निराई आमतौर काफ़ी है।
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- CSIR-CIMAP, एक राष्ट्रीय औषधीय-पादप शोध संस्थान द्वारा विकसित व बेची जाती, किसी अनजान मूल की खेत-बचाई लाइन की बजाय।
- बहु-वर्षीय किस्म-परीक्षणों से दर्ज सूखी जड़ उपज (~14 क्विंटल/हेक्टेयर), जो ICAR के प्रजाति-स्तर औसत 4–5 क्विंटल/हेक्टेयर से लगभग 3 गुना है।
- इसका बहुवर्षीय-प्रकार का स्वभाव किसानों को हर साल दोबारा बोने की बजाय फ़सल को एक से ज़्यादा सीज़न रखने का विकल्प देता।
ध्यान रखने योग्य बातें
- 14 क्विंटल/हेक्टेयर का आँकड़ा किस्म के अपने आधिकारिक CIMAP जारी-बुलेटिन की बजाय एक बहु-वर्षीय किस्म-परीक्षण से आता, व इस रिकॉर्ड के लिए विशेष जारी-वर्ष स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सका — इसे ठोस परीक्षण-प्रमाण मानें, व बड़े स्तर पर बुवाई से पहले CIMAP या अपने स्थानीय KVK से वर्तमान सिफ़ारिश की पुष्टि करें।
- हर अश्वगंधा की तरह, यह फ़सल भी सीधे दवा-बाज़ार ख़रीदारों को गुणवत्ता व ग्रेड पर बिकती, कोई एमएसपी या मंडी-शैली खुली बिक्री-व्यवस्था नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
CSIR-CIMAP, मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा विकसित — इसका मतलब यह नहीं कि किस्म सिर्फ़ यूपी तक सीमित; बुवाई से पहले स्थानीय उपलब्धता जाँच लें।
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पोषिता क्या है?
CSIR-CIMAP, लखनऊ द्वारा विकसित एक उच्च-उपज, बहुवर्षीय-प्रकार की अश्वगंधा (Withania somnifera) लाइन, जो बहु-वर्षीय किस्म-परीक्षणों में लगभग 14 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज व लगभग 0.25% कुल विथानोलाइड सामग्री देती।
पोषिता का बीज कहाँ मिलेगा?
बीज व रोपण-सामग्री की उपलब्धता के लिए सीधे CSIR-CIMAP, लखनऊ से संपर्क करें — यह व अपनी अन्य अश्वगंधा किस्मों के लिए यही संस्थान स्रोत है।
पोषिता, JA-20 या JA-134 से कैसे तुलना करती?
JA-20/JA-134 वार्षिक-प्रकार की JNKVV, मंदसौर की जारी किस्में हैं जिनका आधिकारिक ICAR-DMAPR रिकॉर्ड है पर कोई किस्म-विशेष उपज आँकड़ा दर्ज नहीं, जबकि पोषिता एक बहुवर्षीय-प्रकार की CIMAP, लखनऊ लाइन है जिसका दर्ज परीक्षण-उपज लगभग 14 क्विंटल/हेक्टेयर है — प्रजाति-स्तर औसत से काफ़ी ऊपर। दोनों में चुनने से पहले अपने स्थानीय KVK से वर्तमान सिफ़ारिश पुष्ट करें।
स्रोत: CSIR-CIMAP, Lucknow. संपादकीय नीति.
