CIMAP-Chetak
2011 में CSIR-CIMAP, लखनऊ से नागौरी अश्वगंधा भंडार में से हाफ़-सिब चयन विधि से जारी — मध्यम-सिंचित इलाक़ों के लिए पैदा की गई एक उच्च-उपज, अर्ध-वीर्यवान लाइन, जिसकी सूखी जड़ उपज तुलना-किस्म से लगभग दोगुनी है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- अश्वगंधा
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- जड़ पकने तक ~180 दिन (प्रजाति-स्तर की कटाई खिड़की)
- बीज दर
- सीधी छिड़काव बुवाई के लिए 5–12 किग्रा/हेक्टेयर (2–5 किग्रा/एकड़) — यह प्रजाति-मानक दर है
- अपेक्षित उपज
- किस्म के अपने पंजीकरण-परीक्षण में 11.77 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज, तुलना-किस्म के 5.45 क्विंटल/हेक्टेयर के मुक़ाबले — लगभग दोगुनी
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी, pH 7.5–8.0; मध्यम-सिंचित हालात के लिए पैदा की गई
- जारी
- 2011 में जारी · CSIR-CIMAP, लखनऊ (नागौरी अश्वगंधा भंडार से विकसित)
इस किस्म के बारे में
CIMAP-चेतक 2011 में CSIR-केंद्रीय औषधीय व सुगंधित पादप संस्थान (CIMAP), लखनऊ से जारी हुई, नागौरी अश्वगंधा भंडार पर हाफ़-सिब परिवार चयन विधि से विकसित — वही जाना-पहचाना राजस्थानी स्थानीय किस्म जो "नागौरी" नाम से बिकती, यानी यह उसी परंपरागत लाइन का वैज्ञानिक रूप से सुधरा चयन है। अपने पंजीकरण-परीक्षण में इसने तुलना-किस्म के 5.45 क्विंटल/हेक्टेयर के मुक़ाबले 11.77 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज दी, ताज़ा व सूखी पत्ती उपज 1.722 व 0.453 क्विंटल/हेक्टेयर रही (तुलना-किस्म के 0.872 व 0.147 क्विंटल/हेक्टेयर के मुक़ाबले), कुल विथानोलाइड सामग्री 0.40% व विथाफ़ेरिन सामग्री 1.22% रही। पौधा ख़ुद अर्ध-वीर्यवान, मध्यम-छोटी हरी पत्तियों व सफ़ेदी लिए हरे तने वाला बताया जाता, व यह किस्म ख़ासतौर पर मध्यम-सिंचित खेती-हालात के लिए सुझाई जाती, ज़्यादातर अश्वगंधा की पूरी तरह बारानी व्यवस्था की बजाय।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयसीधी बुवाई: जुलाई का दूसरा हफ़्ता, मानसून-पूर्व बारिश से मिट्टी भुरभुरी होने के बाद।
- बीज दरसीधी छिड़काव बुवाई के लिए 5–12 किग्रा/हेक्टेयर (2–5 किग्रा/एकड़) — यह प्रजाति-मानक दर है
- दूरीरोपाई वाली फ़सल के लिए 60×60 सेमी; सीधी बुवाई 25–30 दिन पर विरल कर लगभग 20,000–25,000 पौधे/हेक्टेयर
- बुवाई विधिसीधे खेत में छिड़कें, या नर्सरी में पौध तैयार कर 5–6 हफ़्ते की उम्र पर 60 सेमी नालियों में रोपें
- सिंचाईपूरी तरह बारानी व्यवस्था की बजाय ख़ासतौर पर मध्यम-सिंचित हालात के लिए पैदा की गई — सूखे दौर में जीवन-रक्षक सिंचाई, प्रजाति के सामान्य बारानी मानक से कुछ ज़्यादा भरोसेमंद पानी के साथ
- उर्वरकजान-बूझकर कोई नहीं — फ़सल पिछली फ़सल की बची उर्वरता पर चलती; सचमुच कमज़ोर मिट्टी पर कभी-कभार हल्की 20:20:0 किग्रा N:P:K/हेक्टेयर बेसल दी जाती
- कटाईबुवाई के लगभग 180 दिन बाद, जनवरी–मार्च में, पत्तियाँ सूखने व फल पीले-लाल पड़ने पर कटाई करें।
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई दोमट या हल्की लाल मिट्टी
- सिंचाई
- जल-निकासी बिल्कुल अच्छी होनी चाहिए — रुका पानी जड़ व कॉलर को सड़ाता
जलवायु
- जलवायु
- 20–35°C, 500–750 मिमी बारिश, पूरी तरह बारानी लाइन से कुछ ज़्यादा भरोसेमंद नमी के साथ, क्योंकि CIMAP-चेतक मध्यम-सिंचित हालात के लिए पैदा की गई
उपज व अवधि
पकने की अवधि
जड़ पकने तक ~180 दिन (प्रजाति-स्तर की कटाई खिड़की)
अपेक्षित उपज
किस्म के अपने पंजीकरण-परीक्षण में 11.77 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज, तुलना-किस्म के 5.45 क्विंटल/हेक्टेयर के मुक़ाबले — लगभग दोगुनी
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- सरकारी खेती-नोट सामान्यतः तना छेदक व माइट को अश्वगंधा का मुख्य कीट बताते — फ़ेनवेलरेट छिड़काव (सुमीसिडिन) व नीम बीज गिरी अर्क मानक इलाज हैं।
- बुवाई/रोपाई के 25–30 दिन बाद एक हाथ-निराई आमतौर काफ़ी है।
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- जिस तुलना-किस्म के ख़िलाफ़ यह पंजीकृत हुई उससे लगभग दोगुनी सूखी जड़ उपज — 11.77 बनाम 5.45 क्विंटल/हेक्टेयर।
- नागौरी भंडार से पैदा, तो व्यापार में पहचानी नागौरी जड़ की विशेषता के साथ-साथ इसके पीछे CIMAP का पुष्ट उपज व विथानोलाइड आँकड़ा भी है, बिना सुधारी खेत-बचाई नागौरी की तरह नहीं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- ज़्यादातर अश्वगंधा की पूरी तरह बारानी व्यवस्था की बजाय मध्यम-सिंचित हालात के लिए पैदा व परखी गई — किसी बारानी-ढली स्थानीय लाइन से बदलने से पहले बीज-उपलब्धता व स्थानीय उपयुक्तता अपने KVK से जाँच लें।
- हर अश्वगंधा की तरह, यह फ़सल भी सीधे दवा-बाज़ार ख़रीदारों को गुणवत्ता व ग्रेड पर बिकती, कोई एमएसपी या मंडी-शैली खुली बिक्री-व्यवस्था नहीं।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- राजस्थान
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
CIMAP-चेतक क्या है?
CSIR-CIMAP, लखनऊ से 2011 में जारी एक उच्च-उपज अश्वगंधा किस्म, जो नागौरी अश्वगंधा भंडार में से हाफ़-सिब चयन विधि से मध्यम-सिंचित खेती-हालात के लिए पैदा की गई।
CIMAP-चेतक कितनी उपज देती?
अपने पंजीकरण-परीक्षण में इसने तुलना-किस्म के 5.45 क्विंटल/हेक्टेयर के मुक़ाबले 11.77 क्विंटल/हेक्टेयर सूखी जड़ उपज दी — लगभग दोगुनी — साथ ही 0.40% कुल विथानोलाइड सामग्री।
CIMAP-चेतक, नागौरी अश्वगंधा से कैसे जुड़ी?
यह नागौरी अश्वगंधा भंडार — जाना-पहचाना राजस्थानी स्थानीय किस्म — में से सीधे हाफ़-सिब परिवार चयन विधि से पैदा की गई, तो इसे उसी परंपरागत लाइन का वैज्ञानिक रूप से सुधरा, CIMAP-पुष्ट चयन माना जा सकता।
क्या CIMAP-चेतक को बाक़ी अश्वगंधा किस्मों से ज़्यादा पानी चाहिए?
यह ज़्यादातर अश्वगंधा की पूरी तरह बारानी व्यवस्था की बजाय मध्यम-सिंचित हालात के लिए पैदा व परखी गई, तो यह सख़्ती से बारानी लाइन से कुछ ज़्यादा भरोसेमंद नमी में बेहतर करती होगी — हालाँकि इसे पानी-माँगू फ़सल जितनी सिंचाई नहीं चाहिए।
स्रोत: CSIR-CIMAP, Lucknow. संपादकीय नीति.
