Black Chia
दो चिया बीज-प्रकारों में गहरे रंग वाला, जो मौजूदा भारतीय परीक्षणों में ज़्यादा व्यापक रूप से उगाया जाता और आमतौर सफ़ेद चिया से ज़्यादा उपज देता, हालाँकि यह आमतौर कुछ कम भाव पर बिकता। अभी कोई आईसीएआर-जारी चिया किस्म नहीं है — यह एक रंग-आधारित भेद है, कोई विकसित किस्म नहीं, और बीज लगभग पूरी तरह निजी अनुबंध-खेती कंपनियों से मिलता है।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- बीज-रंग प्रकार (अभी कोई विकसित/जारी किस्म नहीं)
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- 90–120 दिन
- बीज दर
- कतार बुवाई के लिए लगभग 2.0 किग्रा/हे., या छिड़काव के लिए 2.5–3.0 किग्रा/हे. — सफ़ेद चिया जैसी ही दर।
- अपेक्षित उपज
- लगभग 5 क्विंटल/एकड़ (दोनों प्रकार में ज़्यादा)
- उपयुक्त मिट्टी
- बलुई / हल्की मिट्टी
इस किस्म के बारे में
काला चिया Salvia hispanica का सामान्य, स्वाभाविक रूप से प्रभावी (डोमिनेंट) बीज-रंग है, जो किसी भी चिया पौधे के उत्पादन का लगभग 92–95% हिस्सा बनाता — सफ़ेद बीज एक दुर्लभ अप्रभावी (रिसेसिव) जीन से आता है। ज़्यादा उपलब्ध रंग होने के कारण, काला चिया आमतौर सफ़ेद चिया से प्रति किलो कुछ कम भाव पर बिकता, पर अब तक उपलब्ध भारतीय परीक्षण आँकड़ों (कर्नाटक) में इसने प्रति एकड़ मायने रखने वाली ज़्यादा उपज भी दी है (लगभग 5 क्विंटल/एकड़ बनाम सफ़ेद का लगभग 3), यही कारण है कि यह मौजूदा भारतीय परीक्षणों में दोनों प्रकारों में ज़्यादा व्यापक रूप से उगाया जाता है। अभी किसी भी रंग की कोई आईसीएआर-जारी चिया किस्म नहीं है; लगभग पूरा बीज खुले बीज-बाज़ार के बजाय निजी अनुबंध-खेती कंपनियों से मिलता है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयअगस्त के पहले पखवाड़े से मध्य सितंबर, सफ़ेद चिया जैसी ही खिड़की।
- बीज दरकतार बुवाई के लिए लगभग 2.0 किग्रा/हे., या छिड़काव के लिए 2.5–3.0 किग्रा/हे. — सफ़ेद चिया जैसी ही दर।
- दूरीमुख्य खरीफ़ खिड़की के लिए 60 × 30 सेमी; देर की अक्तूबर–नवंबर बुवाई के लिए 50 × 30 सेमी।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
90–120 दिन
अपेक्षित उपज
लगभग 5 क्विंटल/एकड़ (दोनों प्रकार में ज़्यादा)
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- अलग प्रतिरोध आँकड़े दर्ज नहीं; सामान्य खेत-स्वच्छता लागू
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- अब तक उपलब्ध भारतीय परीक्षण आँकड़ों में सफ़ेद चिया से प्रति एकड़ ज़्यादा उपज।
- स्वाभाविक रूप से प्रभावी बीज-रंग होने के कारण, यह दोनों प्रकारों में ज़्यादा उपलब्ध व ज़्यादा सामान्य रूप से उगाया जाने वाला है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- सफ़ेद चिया से प्रति किलो कुछ कम भाव पर बिकता, तो उपज-फ़ायदे को कम प्रति-किलो भाव के साथ तौलना ज़रूरी है।
- सफ़ेद चिया की तरह, अनुबंध-खेती समझौते में ख़रीदार कंपनी की पसंद ही आमतौर तय करती कि कौन-सा रंग उगाना समझदारी है, क्योंकि खुले-बाज़ार बिक्री के विकल्प अभी पतले हैं।
उपयुक्त क्षेत्र
चिया भारत में एक नई, अभी उभरती फ़सल है जिसका कोई तय खेती-पट्टा नहीं — ये अब तक रिपोर्ट किए गए राज्य हैं, कोई पूर्ण या आधिकारिक रूप से सुझाई सूची नहीं।
- कर्नाटक
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
काला चिया उगाने के लिए ज़्यादा सामान्य प्रकार क्यों है?
चिया में काला बीज-रंग आनुवंशिक रूप से प्रभावी है — एक पौधा आमतौर 92–95% काला बीज देता और सफ़ेद बीज का बस एक छोटा हिस्सा, क्योंकि सफ़ेद एक दुर्लभ रिसेसिव जीन से आता। यह स्वाभाविक बहुतायत, साथ ही भारतीय परीक्षणों में इसकी मायने रखने वाली ज़्यादा उपज, कारण है कि काला चिया ज़्यादा व्यापक रूप से उगाया जाने वाला प्रकार है।
क्या मुझे काला चिया उगाना चाहिए, हालाँकि यह सफ़ेद से कम भाव पर बिकता है?
यह ख़रीदार पर निर्भर करता। काले चिया की ज़्यादा प्रति-एकड़ उपज उसके कम प्रति-किलो भाव पर भारी पड़ सकती, पर चूँकि भारत में लगभग सारी चिया अनुबंध-खेती समझौते के तहत बिकती, ख़रीदार कंपनी का हर रंग के लिए ख़ास भाव-प्रस्ताव ही आमतौर तय करता कि किसी ख़ास सीज़न के लिए कौन-सा ज़्यादा समझदारी भरा है।
