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रागी (मंडुआ)खरीफ़रागी किस्मअपडेट किया गया 28 अगस्त 2026

PR 202

उत्तराखंड के हिस्सों व मैदानों समेत उत्तरी व पूर्वी रागी इलाक़ों में लोकप्रिय पुरानी किस्म, मध्यम अवधि और चारे के लिए अच्छी पुआल उपज।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधिलगभग 115–120 दिन
अपेक्षित उपजलगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर; चारे के लिए अच्छी पुआल उपज
उपयुक्त मिट्टीउत्तरी व पूर्वी इलाक़ों की दोमट और बलुई दोमट

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
रागी किस्म
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
लगभग 115–120 दिन
बीज दर
कतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; नर्सरी के लिए लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर; चारे के लिए अच्छी पुआल उपज
उपयुक्त मिट्टी
उत्तरी व पूर्वी इलाक़ों की दोमट और बलुई दोमट
जारी
उत्तरी व पूर्वी रागी इलाक़ों के लिए एक पुरानी जमी रागी किस्म

इस किस्म के बारे में

PR 202 एक पुरानी जमी रागी किस्म है जो दक्षिणी पठार के बजाय उत्तरी व पूर्वी रागी इलाक़ों — उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिस्सों — में उगाई जाती। यह मध्यम-अवधि किस्म है जो भरोसेमंद दाना और अच्छी पुआल उपज के लिए क़ीमती, जो वहाँ मायने रखता जहाँ रागी पुआल अहम चारा है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररागी किस्म
    अवधिलगभग 115–120 दिन
    उपज क्षमतालगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर; चारे के लिए अच्छी पुआल उपज
    रोग-प्रतिरोधमध्यम; मौजूदा झुलसा रेटिंग स्थानीय स्तर पर पुष्ट करें
    मिट्टीउत्तरी व पूर्वी इलाक़ों की दोमट और बलुई दोमट
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयउत्तरी व पूर्वी इलाक़ों में मानसून के साथ, मध्य जून से जुलाई में बोई
  • बीज दरकतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; नर्सरी के लिए लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर
  • दूरीकतार से कतार 22.5–25 सेमी, कतार में पौधे छँटे
  • बुवाई विधिइन इलाक़ों में कतार बुवाई और रोपाई दोनों इस्तेमाल होते
  • सिंचाईमुख्यतः बारानी; जहाँ संभव हो बाली बनने पर एक सुरक्षात्मक सिंचाई
  • उर्वरकइन कम-इनपुट इलाक़ों में गोबर खाद और लगभग 40:20:20 किग्रा N:P2O5:K2O प्रति हेक्टेयर, ज़्यादातर नाइट्रोजन बेसल
  • कटाईपकने तक लगभग 115–120 दिन; फ़सल अलग से चारे के लिए काटी उपयोगी पुआल उपज देती

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
उत्तरी व पूर्वी बारानी इलाक़ों की दोमट और बलुई दोमट
pH
5.5–7.5

जलवायु

जलवायु
नम दक्षिणी पठार के बजाय उत्तरी व पूर्वी रागी इलाक़ों के अनुकूल

उपज व अवधि

पकने की अवधि

लगभग 115–120 दिन

अपेक्षित उपज

लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर; चारे के लिए अच्छी पुआल उपज

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • उपचारित बीज और एक-दो जल्दी निराई; जिन कम-इनपुट इलाक़ों में यह उगती वे भी बुनियादी प्रबंधन का फल देते
  • मौजूदा सुझाई किस्म अपने KVK से पुष्ट करें — आपके ज़िले के लिए अब नई लाइनें सुझाई जा सकती हैं

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • उत्तरी व पूर्वी रागी इलाक़ों में लंबे समय से उगाई व जानी-पहचानी
  • दाने के साथ चारे के लिए अच्छी पुआल उपज
  • कम-इनपुट बारानी खेती के लिए उपयुक्त

ध्यान रखने योग्य बातें

  • पुरानी किस्म — आपके ज़िले के लिए अब नई, ज़्यादा-उपज या ज़्यादा झुलसा-प्रतिरोधी लाइनें सुझाई जा सकती हैं
  • यह रिकॉर्ड PR 202 के लिए पुष्ट जारी-केंद्र व वर्ष नहीं रखता; मौजूदा सिफ़ारिश स्थानीय स्तर पर पुष्ट करें

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तराखंड
  • बिहार
  • झारखंड
  • उत्तर प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

PR 202 रागी कहाँ उगाई जाती है?

उत्तरी व पूर्वी रागी इलाक़ों में — उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हिस्सों — दक्षिणी पठार के बजाय। यह मध्यम-अवधि किस्म है जो भरोसेमंद दाना व अच्छी चारा पुआल उपज के लिए क़ीमती।

क्या मुझे अब भी PR 202 उगानी चाहिए?

यह अपने इलाक़ों में जानी-पहचानी, भरोसेमंद किस्म है, पर पुरानी है। फ़ैसला करने से पहले अपने KVK से जाँचें कि आपके ज़िले के लिए अब कोई नई, ज़्यादा-उपज या ज़्यादा झुलसा-प्रतिरोधी रागी किस्म सुझाई गई है या नहीं।

स्रोत: ICAR-Indian Institute of Millets Research — finger millet varieties, ICAR — All India Coordinated Research Project on Small Millets. संपादकीय नीति.