VL Mandua 352 (VL 352)
उत्तराखंड व मध्य हिमालयी पहाड़ों के लिए बनी VPKAS अल्मोड़ा की किस्म — जल्दी, ठंड-सहनशील और छोटे पहाड़ी मौसम व बारानी सीढ़ीदार खेतों के लिए उपयुक्त।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- रागी (मंडुआ)
- प्रकार
- रागी किस्म (पहाड़)
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- पहाड़ों में लगभग 105–110 दिन
- बीज दर
- सीढ़ीदार खेतों पर कतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; रोपाई फ़सल के लिए थोड़ा कम
- अपेक्षित उपज
- पहाड़ी सीढ़ीदार खेतों पर लगभग 18–25 क्विंटल/हेक्टेयर, बेहतर ज़मीन पर ज़्यादा
- उपयुक्त मिट्टी
- पहाड़ी सीढ़ी मिट्टी, बलुई दोमट से दोमट
- जारी
- उत्तराखंड व मध्य हिमालयी क्षेत्र की पहाड़ियों के लिए ICAR-VPKAS अल्मोड़ा द्वारा जारी
इस किस्म के बारे में
VL मंडुआ 352 (जिसे VL 352 भी कहते) ICAR-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (VPKAS), अल्मोड़ा की रागी किस्म है, ख़ासतौर उत्तराखंड और मध्य हिमालयी क्षेत्र की पहाड़ी खेती के लिए बनी, जहाँ मंडुआ मुख्य अन्न है। यह जल्दी है और छोटे, ठंडे पहाड़ी मौसम व बारानी सीढ़ीदार खेतों के अनुकूल, मध्यम झुलसा प्रतिरोध के साथ।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयपहाड़ों में मानसून की शुरुआत के साथ बोई जाती, लगभग मध्य जून से जुलाई की शुरुआत, ताकि फ़सल ठंड और बढ़वार मौसम के अंत से पहले पक जाए
- बीज दरसीढ़ीदार खेतों पर कतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; रोपाई फ़सल के लिए थोड़ा कम
- दूरीसीढ़ीदार खेतों पर कतार से कतार 22–25 सेमी, कतार में पौधे छँटे
- बुवाई विधिपहाड़ी सीढ़ियों पर कतार बुवाई या छिटकवाँ आम; जहाँ नर्सरी व मज़दूरी हो वहाँ रोपाई
- सिंचाईपहाड़ी सीढ़ियों पर लगभग पूरी तरह बारानी, मानसून पर निर्भर
- उर्वरकपहाड़ी खेती में गोबर खाद मुख्य इनपुट; जहाँ खाद इस्तेमाल हो वहाँ मामूली 40:20:20 किग्रा N:P2O5:K2O प्रति हेक्टेयर, ज़्यादातर बेसल
- कटाईपहाड़ों में लगभग 105–110 दिन; पतझड़ की ठंड आने से पहले काटें, बालियाँ सुखाकर गहाई करें। पुआल पहाड़ों में अहम सर्दी का चारा है
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- पहाड़ी सीढ़ी मिट्टी — बलुई दोमट से दोमट, अक्सर उथली व पथरीली, बारानी ढलानों पर
- pH
- 5.0–7.0
जलवायु
- जलवायु
- ठंडे, छोटे पहाड़ी मौसम के लिए बनी; इसकी जल्दी पकने की आदत व ठंड-सहनशीलता इसे ऊँचाई पर बढ़वार मौसम बंद होने से पहले पूरा होने देती
उपज व अवधि
पकने की अवधि
पहाड़ों में लगभग 105–110 दिन
अपेक्षित उपज
पहाड़ी सीढ़ीदार खेतों पर लगभग 18–25 क्विंटल/हेक्टेयर, बेहतर ज़मीन पर ज़्यादा
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- उपचारित बीज और स्वस्थ नर्सरी या बीज-तल इस्तेमाल करें; गीले, बादल भरे मानसून में पहाड़ी झुलसा दबाव बढ़ता
- बुवाई से पहले मिलाई गोबर खाद उथली पहाड़ी मिट्टियों पर सबसे बड़ा उपज-लीवर है
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- छोटे, ठंडे हिमालयी पहाड़ी मौसम के लिए बनी व अनुकूलित
- जल्दी पकना ऊँचाई पर पतझड़ की ठंड से पहले फ़सल पूरी करता
- दोहरा उद्देश्य — दाना और पुआल जो पहाड़ों में क़ीमती सर्दी का चारा
ध्यान रखने योग्य बातें
- पहाड़ी किस्म — यह मैदानों या दक्षिणी पठार के लिए सही चुनाव नहीं
- उथले, बारानी सीढ़ीदार खेतों पर उपज मामूली; सीमा किस्म जितनी ही ज़मीन तय करती है
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तराखंड
- हिमाचल प्रदेश
- जम्मू और कश्मीर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
VL मंडुआ 352 किसके लिए बनी है?
उत्तराखंड व मध्य हिमालयी क्षेत्र की पहाड़ी खेती के लिए, जहाँ रागी को मंडुआ कहते और यह मुख्य अन्न है। यह जल्दी व ठंड-सहनशील है ताकि बारानी सीढ़ीदार खेतों पर छोटे पहाड़ी बढ़वार मौसम में पक सके।
VL मंडुआ 352 किसने जारी की?
ICAR-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (VPKAS), अल्मोड़ा — उत्तराखंड में ICAR का पहाड़ी-कृषि अनुसंधान संस्थान।
स्रोत: ICAR-VPKAS Almora, ICAR-Indian Institute of Millets Research — finger millet varieties. संपादकीय नीति.
