Dapoli 1
महाराष्ट्र की अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण पट्टी के लिए डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ (दापोली) की रागी किस्म, जहाँ रागी (नाचनी) मुख्य अन्न है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- रागी (मंडुआ)
- प्रकार
- रागी किस्म
- सीज़न
- खरीफ़
- पकने की अवधि
- लगभग 110–120 दिन
- बीज दर
- कतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; नर्सरी के लिए लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- कोंकण की लेटराइट मिट्टी पर लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर
- उपयुक्त मिट्टी
- कोंकण की लेटराइट मिट्टी
- जारी
- महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र के लिए डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली द्वारा जारी
इस किस्म के बारे में
दापोली 1 डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली की रागी किस्म है, तटीय महाराष्ट्र के अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण क्षेत्र के लिए बनी, जहाँ रागी को नाचनी कहते और यह पहाड़ी व ऊँची ज़मीन का मुख्य अन्न है। यह उस इलाक़े के भारी मानसून और अम्लीय लेटराइट मिट्टियों के अनुकूल है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयदक्षिण-पश्चिम मानसून शुरू होते ही जून में नर्सरी; रोपाई 3–4 हफ़्ते पर
- बीज दरकतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; नर्सरी के लिए लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर
- दूरीकतार से कतार 22.5–25 सेमी, कतार में लगभग 10 सेमी
- बुवाई विधिकोंकण में रोपाई आम; समतल ऊँची ज़मीन पर कतार बुवाई
- सिंचाईभारी-मानसून कोंकण में पूरी तरह बारानी; ख़तरा जल-जमाव है, सूखा नहीं, तो सिंचाई से ज़्यादा खेत की निकासी मायने रखती
- उर्वरकगोबर खाद और लगभग 40:20:20 किग्रा N:P2O5:K2O प्रति हेक्टेयर; जहाँ लेटराइट मिट्टी बहुत अम्लीय हो वहाँ चूना
- कटाईपकने तक लगभग 110–120 दिन; बालियाँ भूरी होते ही तुरंत काटें, क्योंकि कोंकण में मानसून-अंत की बारिश बाली में ही दाना अँकुरा सकती
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- ऊँची ज़मीन व सीढ़ीदार ढलानों पर अम्लीय लेटराइट कोंकण मिट्टी
- pH
- 4.5–6.0
जलवायु
- जलवायु
- बहुत भारी मानसून के लिए बनी; फ़सल को पानी जल्दी निकालना पड़ता, तो इसे नीची ज़मीन नहीं, अच्छी-निकासी ऊँची ज़मीन व ढलानों पर उगाया जाता
उपज व अवधि
पकने की अवधि
लगभग 110–120 दिन
अपेक्षित उपज
कोंकण की लेटराइट मिट्टी पर लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- अच्छी-निकासी ऊँची ज़मीन या सीढ़ियों पर उगाएँ, कभी नीची ज़मीन नहीं, और उठी नर्सरी क्यारी इस्तेमाल करें
- नम मानसून फूल भर उपचारित बीज व झुलसा निगरानी
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- ख़ासतौर अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण पट्टी के लिए बनी
- उन अम्लीय लेटराइट मिट्टियों के अनुकूल जहाँ कई किस्में संघर्ष करती हैं
- कोंकण पहाड़ी व ऊँची ज़मीन के किसानों के लिए मुख्य दाना व चारा फ़सल
ध्यान रखने योग्य बातें
- क्षेत्रीय कोंकण किस्म — सूखे दक्षिणी पठार या उत्तरी मैदानों के लिए नहीं
- यह रिकॉर्ड दापोली 1 के लिए पुष्ट जारी-वर्ष नहीं रखता; मौजूदा कोंकण सिफ़ारिश विद्यापीठ या अपने KVK से पुष्ट करें
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- महाराष्ट्र
- गोवा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दापोली 1 किसके लिए बनी है?
तटीय महाराष्ट्र के अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण क्षेत्र के लिए, जहाँ रागी को नाचनी कहते। यह बहुत भारी मानसून और अम्लीय लेटराइट मिट्टियों के अनुकूल है, और अच्छी-निकासी ऊँची ज़मीन व सीढ़ीदार ढलानों पर उगाई जाती।
क्या दापोली 1 कोंकण के बाहर उपयुक्त है?
यह कोंकण की ख़ास अधिक-बारिश, लेटराइट-मिट्टी स्थितियों के लिए बनी क्षेत्रीय किस्म है। दक्षिणी पठार या उत्तरी इलाक़ों में उस क्षेत्र के लिए सुझाई किस्म इस्तेमाल करें।
स्रोत: Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth, Dapoli, ICAR-Indian Institute of Millets Research — finger millet varieties. संपादकीय नीति.
