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रागी (मंडुआ)खरीफ़रागी किस्मअपडेट किया गया 28 अगस्त 2026

Dapoli 1

महाराष्ट्र की अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण पट्टी के लिए डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ (दापोली) की रागी किस्म, जहाँ रागी (नाचनी) मुख्य अन्न है।

सीज़नखरीफ़
पकने की अवधिलगभग 110–120 दिन
अपेक्षित उपजकोंकण की लेटराइट मिट्टी पर लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीकोंकण की लेटराइट मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
रागी किस्म
सीज़न
खरीफ़
पकने की अवधि
लगभग 110–120 दिन
बीज दर
कतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; नर्सरी के लिए लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
कोंकण की लेटराइट मिट्टी पर लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
कोंकण की लेटराइट मिट्टी
जारी
महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र के लिए डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली द्वारा जारी

इस किस्म के बारे में

दापोली 1 डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली की रागी किस्म है, तटीय महाराष्ट्र के अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण क्षेत्र के लिए बनी, जहाँ रागी को नाचनी कहते और यह पहाड़ी व ऊँची ज़मीन का मुख्य अन्न है। यह उस इलाक़े के भारी मानसून और अम्लीय लेटराइट मिट्टियों के अनुकूल है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकाररागी किस्म
    अवधिलगभग 110–120 दिन
    उपज क्षमताकोंकण की लेटराइट मिट्टी पर लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधमध्यम झुलसा प्रतिरोध; अधिक-बारिश कोंकण हालात के लिए बनी
    मिट्टीकोंकण की लेटराइट मिट्टी
    सीज़नखरीफ़

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयदक्षिण-पश्चिम मानसून शुरू होते ही जून में नर्सरी; रोपाई 3–4 हफ़्ते पर
  • बीज दरकतार बुवाई के लिए लगभग 8–10 किग्रा/हेक्टेयर; नर्सरी के लिए लगभग 5 किग्रा/हेक्टेयर
  • दूरीकतार से कतार 22.5–25 सेमी, कतार में लगभग 10 सेमी
  • बुवाई विधिकोंकण में रोपाई आम; समतल ऊँची ज़मीन पर कतार बुवाई
  • सिंचाईभारी-मानसून कोंकण में पूरी तरह बारानी; ख़तरा जल-जमाव है, सूखा नहीं, तो सिंचाई से ज़्यादा खेत की निकासी मायने रखती
  • उर्वरकगोबर खाद और लगभग 40:20:20 किग्रा N:P2O5:K2O प्रति हेक्टेयर; जहाँ लेटराइट मिट्टी बहुत अम्लीय हो वहाँ चूना
  • कटाईपकने तक लगभग 110–120 दिन; बालियाँ भूरी होते ही तुरंत काटें, क्योंकि कोंकण में मानसून-अंत की बारिश बाली में ही दाना अँकुरा सकती

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
ऊँची ज़मीन व सीढ़ीदार ढलानों पर अम्लीय लेटराइट कोंकण मिट्टी
pH
4.5–6.0

जलवायु

जलवायु
बहुत भारी मानसून के लिए बनी; फ़सल को पानी जल्दी निकालना पड़ता, तो इसे नीची ज़मीन नहीं, अच्छी-निकासी ऊँची ज़मीन व ढलानों पर उगाया जाता

उपज व अवधि

पकने की अवधि

लगभग 110–120 दिन

अपेक्षित उपज

कोंकण की लेटराइट मिट्टी पर लगभग 22–30 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • अच्छी-निकासी ऊँची ज़मीन या सीढ़ियों पर उगाएँ, कभी नीची ज़मीन नहीं, और उठी नर्सरी क्यारी इस्तेमाल करें
  • नम मानसून फूल भर उपचारित बीज व झुलसा निगरानी

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • ख़ासतौर अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण पट्टी के लिए बनी
  • उन अम्लीय लेटराइट मिट्टियों के अनुकूल जहाँ कई किस्में संघर्ष करती हैं
  • कोंकण पहाड़ी व ऊँची ज़मीन के किसानों के लिए मुख्य दाना व चारा फ़सल

ध्यान रखने योग्य बातें

  • क्षेत्रीय कोंकण किस्म — सूखे दक्षिणी पठार या उत्तरी मैदानों के लिए नहीं
  • यह रिकॉर्ड दापोली 1 के लिए पुष्ट जारी-वर्ष नहीं रखता; मौजूदा कोंकण सिफ़ारिश विद्यापीठ या अपने KVK से पुष्ट करें

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • महाराष्ट्र
  • गोवा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दापोली 1 किसके लिए बनी है?

तटीय महाराष्ट्र के अधिक-बारिश लेटराइट कोंकण क्षेत्र के लिए, जहाँ रागी को नाचनी कहते। यह बहुत भारी मानसून और अम्लीय लेटराइट मिट्टियों के अनुकूल है, और अच्छी-निकासी ऊँची ज़मीन व सीढ़ीदार ढलानों पर उगाई जाती।

क्या दापोली 1 कोंकण के बाहर उपयुक्त है?

यह कोंकण की ख़ास अधिक-बारिश, लेटराइट-मिट्टी स्थितियों के लिए बनी क्षेत्रीय किस्म है। दक्षिणी पठार या उत्तरी इलाक़ों में उस क्षेत्र के लिए सुझाई किस्म इस्तेमाल करें।

स्रोत: Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth, Dapoli, ICAR-Indian Institute of Millets Research — finger millet varieties. संपादकीय नीति.