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मखाना (फॉक्स नट)रबीजुटाए जननद्रव्य से चयनअपडेट किया गया 1 सितंबर 2026

Sabour Makhana-1

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा पूर्णिया ज़िले से जुटाए जननद्रव्य से जारी। स्वर्णा वैदेही से ज़्यादा उपज देती और पतले बीज-खोल के कारण काफ़ी बेहतर फूला-बीज रिकवरी देती, यही कारण है कि जहाँ फूलने की गुणवत्ता भाव तय करती वहाँ यह तेज़ी से पसंद की जा रही। तालाब व खेत-आधारित दोनों प्रणाली में उगती है।

सीज़नरबी
पकने की अवधि7–8 महीने
अपेक्षित उपज32–35 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी); 55–60% फूला-रिकवरी
उपयुक्त मिट्टीखड़ा पानी रोकने वाली तालाब/खेत तली

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
जुटाए जननद्रव्य से चयन
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
7–8 महीने
बीज दर
बिहार की सब्सिडी वाली मखाना बीज वितरण योजना के तहत लगभग 30 किग्रा/हे.; अधिसूचित ज़िलों के किसानों को इस किस्म की बीज-लागत पर लगभग 75% सब्सिडी (लगभग ₹5,737.50/हे.) मिली है — स्वर्णा वैदेही से थोड़ी ज़्यादा सब्सिडी राशि, जो इस किस्म की ज़्यादा योजना बीज-लागत दर्शाती है।
अपेक्षित उपज
32–35 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी); 55–60% फूला-रिकवरी
उपयुक्त मिट्टी
खड़ा पानी रोकने वाली तालाब/खेत तली
जारी
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर द्वारा जारी, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया से जुटाए जननद्रव्य से

इस किस्म के बारे में

सबौर मखाना-1 बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर द्वारा पूर्णिया ज़िले के भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय से जुटाए मखाना जननद्रव्य से जारी की गई। पौधे में बड़े, गोल पत्ते व गहरे बैंगनी फूल होते, और मध्यम आकार के फल में पतले बीज-खोल वाला छोटा, अंडाकार बीज बनता है। तुलनात्मक परीक्षणों में इसने मानक जाँच स्वर्णा वैदेही की 28–30 क्विंटल/हे. के मुक़ाबले 32–35 क्विंटल/हे. बीज (गुरी) उपज दी, और — पतले खोल के कारण भूनने पर ज़्यादा पूरी तरह फूलने से — 55–60% फूला-बीज रिकवरी, जो पुरानी किस्म से काफ़ी बेहतर है। यह परंपरागत तालाब प्रणाली व नई खेत-आधारित प्रणाली दोनों में उगती है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारजुटाए जननद्रव्य से चयन
    अवधि7–8 महीने
    उपज क्षमता32–35 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी); 55–60% फूला-रिकवरी
    रोग-प्रतिरोधअलग से दर्ज नहीं; सामान्य खेत-स्वच्छता लागू
    मिट्टीखड़ा पानी रोकने वाली तालाब/खेत तली
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बीज दरबिहार की सब्सिडी वाली मखाना बीज वितरण योजना के तहत लगभग 30 किग्रा/हे.; अधिसूचित ज़िलों के किसानों को इस किस्म की बीज-लागत पर लगभग 75% सब्सिडी (लगभग ₹5,737.50/हे.) मिली है — स्वर्णा वैदेही से थोड़ी ज़्यादा सब्सिडी राशि, जो इस किस्म की ज़्यादा योजना बीज-लागत दर्शाती है।
  • कटाईबीज पकते व डूबते ही तालाब या खेत की तली से बीना जाता, एक ही कटाई के बजाय तुड़ाई-खिड़की में कई दौरों में — किसी भी मखाना फ़सल की तरह।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

7–8 महीने

अपेक्षित उपज

32–35 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी); 55–60% फूला-रिकवरी

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • अलग से दर्ज नहीं; सामान्य खेत-स्वच्छता लागू

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • तुलनात्मक परीक्षणों में स्वर्णा वैदेही से ज़्यादा उपज (32–35 क्विंटल/हे. बनाम 28–30 क्विंटल/हे.)।
  • पतले बीज-खोल के कारण काफ़ी बेहतर फूला-बीज रिकवरी (55–60%) देती, जो आमदनी के लिए सीधे मायने रखता है क्योंकि अच्छे भाव पर असल में फूला मखाना बिकता है, कच्चा बीज नहीं।
  • स्वर्णा वैदेही की तरह तालाब व खेत-आधारित दोनों प्रणाली में उगती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बिहार के मखाना-उगाने वाले ज़िलों के लिए विशेष रूप से जारी; राज्य के बाहर प्रदर्शन अलग से दर्ज नहीं।
  • स्वर्णा वैदेही से नई किस्म होने के कारण, इसका सीज़न व ज़िलों में रिकॉर्ड अभी छोटा है।

उपयुक्त क्षेत्र

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा राज्य के मखाना-उगाने वाले ज़िलों के लिए जारी — दूसरे इलाक़ों के लिए मान लेने से पहले स्थानीय रूप से जाँच लें।

  • बिहार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सबौर मखाना-1 स्वर्णा वैदेही से कैसे अलग है?

दोनों तालाब/खेत में उगने वाली मखाना किस्में हैं, पर सबौर मखाना-1 प्रति हेक्टेयर ज़्यादा कच्चा बीज देती (32–35 क्विंटल/हे. बनाम 28–30 क्विंटल/हे.) और पतले बीज-खोल के कारण भूनने पर बेहतर फूला-बीज रिकवरी (55–60%) देती — जिसका असल में किसान को भुगतान मिलता है।

क्या पतला बीज-खोल सबौर मखाना-1 को संभालना मुश्किल बनाता है?

स्रोत पतले खोल को फूलने के लिए एक फ़ायदा बताते, न कि संभालने की समस्या — यही वह है जो भूनने पर बीज को ज़्यादा पूरी तरह फूलने देता। पतले खोल से जुड़ी कोई अलग रोग-संवेदनशीलता या संभालने की कमी दर्ज नहीं है।