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मखाना (फॉक्स नट)रबीशुद्ध-वंश चयनअपडेट किया गया 1 सितंबर 2026

Swarna Vaidehi

भारत में औपचारिक रूप से जारी पहली मखाना किस्म — आईसीएआर के पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर की एक शुद्ध-वंश चयन, 2013 में जारी। पुराने, बिना-सुधरे तालाबी बीज से लगभग दोगुनी बीज-उपज देती और परंपरागत तालाब व नई खेत-आधारित प्रणाली दोनों में चलती है।

सीज़नरबी
पकने की अवधि7–8 महीने
अपेक्षित उपज28–30 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी)
उपयुक्त मिट्टीखड़ा पानी रोकने वाली तालाब/खेत तली

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
शुद्ध-वंश चयन
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
7–8 महीने
बीज दर
बिहार की सब्सिडी वाली मखाना बीज वितरण योजना के तहत लगभग 30 किग्रा/हे.; अधिसूचित ज़िलों के किसानों को इस किस्म की बीज-लागत पर योजना के तहत लगभग 75% सब्सिडी (लगभग ₹4,950/हे.) मिली है, बाक़ी हिस्सा वे स्वयं देते हैं।
अपेक्षित उपज
28–30 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी)
उपयुक्त मिट्टी
खड़ा पानी रोकने वाली तालाब/खेत तली
जारी
15 नवंबर 2013 को जारी · आईसीएआर पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर (ICAR-RCER), पटना की वैराइटी रिलीज़ कमेटी की स्वीकृति, बिहार, असम, छत्तीसगढ़ व ओडिशा के लिए

इस किस्म के बारे में

स्वर्णा वैदेही आईसीएआर के पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा विकसित एक शुद्ध-वंश चयन है (जीनोटाइप लाइन "Sel-6" से), जो 15 नवंबर 2013 को बिहार, असम, छत्तीसगढ़ व ओडिशा के लिए भारत की पहली औपचारिक रूप से जारी मखाना किस्म के रूप में जारी हुई। इसके तैरते पत्ते लगभग 110 सेमी व्यास तक बढ़ते, और लगभग आधे फूल बुवाई के 120–125 दिन में खुल जाते हैं। बीज दूध-सफ़ेद और लगभग 9.5–10.2 मिमी व्यास का है, जिसका 100-बीज वज़न 92–98 ग्राम है। खेत परीक्षणों में इसने 2.8–3.0 टन प्रति हेक्टेयर (28–30 क्विंटल/हे.) की उत्पादन क्षमता दी — पारंपरिक, बिना-सुधरे तालाबी फ़सल के 1.7–1.9 टन/हे. से लगभग दोगुनी — और यह पुरानी तालाब प्रणाली व नई खेत-आधारित प्रणाली दोनों में उगती है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारशुद्ध-वंश चयन
    अवधि7–8 महीने
    उपज क्षमता28–30 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी)
    रोग-प्रतिरोधअलग से दर्ज नहीं; सामान्य खेत-स्वच्छता लागू
    मिट्टीखड़ा पानी रोकने वाली तालाब/खेत तली
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बीज दरबिहार की सब्सिडी वाली मखाना बीज वितरण योजना के तहत लगभग 30 किग्रा/हे.; अधिसूचित ज़िलों के किसानों को इस किस्म की बीज-लागत पर योजना के तहत लगभग 75% सब्सिडी (लगभग ₹4,950/हे.) मिली है, बाक़ी हिस्सा वे स्वयं देते हैं।
  • कटाईबीज पकते व डूबते ही तालाब या खेत की तली से बीना जाता, एक ही कटाई के बजाय तुड़ाई-खिड़की में कई दौरों में — किसी भी मखाना फ़सल की तरह।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

7–8 महीने

अपेक्षित उपज

28–30 क्विंटल/हे. (बीज/गुरी)

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

मुख्य रोग

  • अलग से दर्ज नहीं; सामान्य खेत-स्वच्छता लागू

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • पुराने, बिना-सुधरे तालाबी बीज से बीज-उपज लगभग दोगुनी (2.8–3.0 टन/हे. बनाम 1.7–1.9 टन/हे.).
  • परंपरागत तालाब प्रणाली व नई खेत-आधारित प्रणाली दोनों में चलती, तो इसे इस्तेमाल करने के लिए खेती-तरीक़ा बदलने की ज़रूरत नहीं।
  • भारत में औपचारिक रूप से जारी पहली मखाना किस्म थी, और इसका प्रदर्शन अब भी नई किस्मों को परखने का मानक बना हुआ है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बिहार, असम, छत्तीसगढ़ व ओडिशा के लिए विशेष रूप से आधिकारिक रूप से जारी — इन राज्यों/परिस्थितियों के बाहर प्रदर्शन अलग से दर्ज नहीं।
  • बाद में जारी सबौर मखाना-1 इससे ज़्यादा उपज व बेहतर फूला-बीज रिकवरी देती बताई गई है, तो जहाँ दोनों उपलब्ध हों वहाँ यह अब अपने-आप सबसे ज़्यादा उपज वाली पसंद नहीं रही।

उपयुक्त क्षेत्र

बिहार, असम, छत्तीसगढ़ व ओडिशा के लिए आधिकारिक रूप से जारी — दूसरे मखाना-उगाने वाले इलाक़ों के लिए मान लेने से पहले स्थानीय रूप से जाँच लें।

  • बिहार
  • असम
  • छत्तीसगढ़
  • ओडिशा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या स्वर्णा वैदेही सामान्य देसी मखाना बीज जैसी ही है?

नहीं। यह एक ख़ास तौर पर चुनी व औपचारिक रूप से जारी किस्म है (जीनोटाइप "Sel-6" से शुद्ध-वंश चयन), जो किसानों द्वारा परंपरागत रूप से अपने तालाबों से बचाए बिना-सुधरे बीज से ज़्यादा उपज देने के लिए विकसित की गई। सामान्य बचाया तालाबी बीज स्वर्णा वैदेही नहीं है, जब तक कि वह मूलतः इस किस्म के योजना/प्रमाणित बीज से न लिया गया हो।

असली स्वर्णा वैदेही बीज कहाँ मिलेगा?

बिहार की राज्य बीज-वितरण योजना (मखाना बीज वितरण) और अधिसूचित मखाना-उगाने वाले ज़िलों के कृषि विश्वविद्यालयों/केवीके के ज़रिए, निजी बीज डीलरों से नहीं — मखाना बीज का कोई ब्रांडेड निजी व्यापार नहीं है।