लंगड़ी बुखार (ब्लैक क्वार्टर / बी.क्यू.)
यह झुंड के सबसे अच्छे पशु चुनता है — अच्छी चराई पर पले 6 महीने से 2 साल के हृष्ट-पुष्ट बछड़े — और इतनी तेज़ी से मारता है कि इलाज शायद ही समय पर हो पाए।
- कारण
- क्लॉस्ट्रिडियम शॉवाई (बीजाणु)
- सबसे ज़्यादा जोखिम
- 6 महीने – 2 साल
- पहचान का लक्षण
- चरचराती सूजन
- बचाव
- हर साल बारिश से पहले टीका
परिचय
लंगड़ी बुखार क्लॉस्ट्रिडियम शॉवाई नाम के जीवाणु से होता है, जिसके बीजाणु (स्पोर) मिट्टी में सालों ज़िंदा रहते हैं। घास के साथ निगले गए बीजाणु आँत की दीवार पार करके मांसपेशियों में सुप्त पड़े रहते हैं। कोई झटका — चोट, कड़ी कसरत, हरे चारे पर अचानक बढ़वार — उन्हें जगा देता है, और जीवाणु ज़हर छोड़कर मांसपेशी तेज़ी से गला देते हैं और पूरे पशु को ज़हरीला कर देते हैं।
यह आम तौर पर अच्छी सेहत वाले 6 महीने से 2 साल के पशुओं को पकड़ता है; बहुत छोटे और बूढ़े पशु आम तौर पर बच जाते हैं। पहला संकेत अक्सर तेज़ लंगड़ापन होता है, फिर पिछली टाँग, कंधे, पुट्ठे या कभी गर्दन-छाती की मोटी मांसपेशी में गरम, दर्दभरी सूजन। दबाने पर वह काग़ज़ की तरह चरचराती है — ऊतक में गैस। ऊपर की त्वचा जल्दी ठंडी, काली और चमड़े जैसी हो जाती है।
शुरू में बुखार तेज़ रहता है, फिर पशु के गिरते ही घट सकता है। पहले संकेत के 12–36 घंटे में मौत हो जाती है। इतना तेज़ होने के कारण बचाव ही सब कुछ है: जिन इलाक़ों में रोग का इतिहास है वहाँ बारिश से पहले हर साल टीका, 6 महीने से ऊपर के सभी पशुओं को।
यह एक सामान्य गाइड है, पशु चिकित्सक का विकल्प नहीं। बीमार पशु की जाँच, मात्रा और इलाज के लिए हमेशा पशु चिकित्सक बुलाएँ।
क्या देखें
- जवान, हृष्ट-पुष्ट पशु में अचानक तेज़ लंगड़ापन — अक्सर सबसे पहले यही दिखता है।
- जाँघ, कूल्हे, कंधे या छाती की मोटी मांसपेशी में गरम, दर्दभरी सूजन जो जल्दी बढ़ती है।
- दबाने पर सूजन चरचराती है — त्वचा के नीचे गैस — और बाद में ठंडी, काली और सख़्त हो जाती है।
- शुरू में तेज़ बुखार (41–42 °C), सुस्ती, खाना बंद, जुगाली बंद।
- तेज़ी से कमज़ोरी, मुश्किल साँस, पशु गिर जाता है और अक्सर एक दिन में मर जाता है।
- कभी पशु बस मरा हुआ मिलता है — फूला हुआ, नाक और गुदा से ख़ून-मिला झाग।
पशुओं को यह कैसे लगता है
- जिस चरागाह की मिट्टी में बीजाणु हों उस पर चरना — अक्सर नीची ज़मीन, या बाढ़ के बाद सूखे खेत।
- बीजाणु आँत से घुसते हैं; टक्कर, ढुलाई या रूखे बर्ताव से मांसपेशी की चोट ऊतक में पहले से पड़े सुप्त बीजाणु जगा सकती है।
- पहली मानसूनी बौछारों के बाद और बाढ़ का पानी उतरने पर, बीजाणु उजागर होने से फैलाव बढ़ता है।
- रोग सीधे पशु से पशु नहीं फैलता — हर मामला मिट्टी से आता है — पर एक ही चरागाह कुछ दिनों में कई मामले दे सकता है।
टीकाकरण
- जिन इलाक़ों में रोग का इतिहास है, वहाँ 6 महीने से ऊपर के सभी गाय-भैंस को साल में एक बार, बारिश से पहले टीका लगवाएँ।
- लंगड़ी बुखार का टीका, या जहाँ राज्य दे वहाँ संयुक्त क्लॉस्ट्रिडियल / एच.एस.-बी.क्यू. टीका इस्तेमाल करें।
- 6 महीने से पहले टीका लगे बछड़ों को 6 महीने पर दुबारा ख़ुराक दें, क्योंकि माँ की एंटीबॉडी शुरुआती असर घटा देती है।
- फैलाव के समय झुंड के सभी स्वस्थ पशुओं को एक साथ टीका लगाएँ और उन्हें प्रभावित चरागाह से हटा दें।
- हर साल वही तारीख़ रखें — बचाव क़रीब 12 महीने चलता है।
मामला हो जाए तो
- तुरंत पशु चिकित्सक बुलाएँ — बहुत जल्दी दी गई ज़्यादा मात्रा की पेनिसिलिन, और सूजन को चीरकर गैस-ज़हर निकालने से, पहले कुछ घंटों में पकड़ा पशु कभी-कभी बच जाता है।
- सूचना दें — बी.क्यू. सूचनीय रोग है और कई मामले पशु विभाग के ध्यान माँगते हैं।
- शव को खेत में न चीरें। जहाँ मरा वहीं जला दें, या ख़ूब चूने के साथ बहुत गहरा गाड़ें — शव को चरागाह पर घसीटना बीजाणु फैलाता है।
- हो सके तो बाक़ी मौसम के लिए प्रभावित खेत में चराई बंद कर दें या घेर दें।
- बाक़ी झुंड को उसी दिन टीका लगवाएँ और एक हफ़्ते बारीकी से देखें।
प्रभावित पशु
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लंगड़ी बुखार से मेरे सबसे तंदुरुस्त बछड़े क्यों मरते हैं, कमज़ोर नहीं?
ज़हर मांसपेशी को नुकसान पहुँचाता है, इसलिए जिन पशुओं में सबसे ज़्यादा मांस होता है — अच्छी चराई पर तेज़ी से बढ़ते हृष्ट-पुष्ट जवान पशु — उनमें जीवाणु के लिए सबसे ज़्यादा ऊतक होता है और वे सबसे बुरी तरह गिरते हैं। उल्टा लगता है, पर फलता-फूलता बछड़ा खोना ही आम तस्वीर है। इसीलिए टीके में यही पशु ज़रूर आने चाहिए।
क्या मैं ख़ुद एंटीबायोटिक इंजेक्शन से लंगड़ी बुखार का इलाज कर सकता हूँ?
जब तक आपको सूजन दिखती है, मांसपेशी गलना शुरू हो चुकी होती है और ज़हर ख़ून में आ चुका होता है; घर का इलाज लगभग कभी काम नहीं करता। पेनिसिलिन सिर्फ़ पहले कुछ घंटों में और आम तौर पर पशु चिकित्सक के सूजन चीरने के साथ मदद करती है। ज़ोर सालाना टीके पर लगाएँ — यह रोका जाने वाला रोग है, इलाज वाला नहीं।
एक पशु खेत में मर गया। क्या मांस या खाल इस्तेमाल हो सकती है?
नहीं। लंगड़ी बुखार से मरे पशु की खाल न उतारें, न काटें, न खाएँ। शव चीरने से अरबों बीजाणु निकलते हैं जो उस ज़मीन को सालों दूषित कर देते हैं। जहाँ पड़ा है वहीं चूने के साथ जला दें या गहरा गाड़ें।
क्या लंगड़ी बुखार और गलघोंटू एक ही हैं?
दोनों गाय के तेज़ बरसाती क़ातिल हैं, पर अलग रोग हैं। गलघोंटू में गले की सूजन और साँस की तकलीफ़ होती है; लंगड़ी बुखार में टाँग या पुट्ठे की मांसपेशी में चरचराती सूजन और लंगड़ापन। कई राज्य संयुक्त एच.एस.-बी.क्यू. टीका देते हैं, जिससे बारिश से पहले का एक चक्र दोनों को कवर कर देता है।
लक्षण, बचाव और इलाज ICAR, DAHD और राज्य पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों के अभ्यास पर आधारित हैं; टीका कार्यक्रम आम तौर पर सूचित समय-सारणी हैं और क्षेत्र या फैलाव के अनुसार बदल सकते हैं। पशु का इलाज करने से पहले हमेशा पशु चिकित्सक से पक्का करें। संपादकीय नीति.
