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वायरलसूचनीयसमीक्षा 20 अगस्त 2026

खुरपका-मुँहपका रोग (FMD)

भारतीय गाय-भैंस का सबसे ज़्यादा आर्थिक नुकसान करने वाला वायरल रोग — बड़े पशु कम मरते हैं, पर दूध की बाल्टी खाली कर देता है और बैल हफ़्तों काम के लायक़ नहीं रहते।

गायभैंसबकरीभेड़सूअर
कारण
FMD वायरस (7 प्रकार)
फैलाव
संपर्क, चारा, हवा
बड़े पशुओं में मृत्यु
कम; बछड़ों में ज़्यादा
बचाव
हर 6 महीने पर टीका

परिचय

FMD एक वायरस से होता है जो सभी फटे खुर वाले पशुओं — गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर — को लगता है। यह बहुत आसानी से फैलता है: सीधे संपर्क से, दूषित चारे-पानी से, हाथ, जूते और गाड़ियों से, और थोड़ी दूर तक हवा से भी। गाँव में लाया गया एक बीमार पशु पूरे इलाक़े के झुंडों में रोग फैला सकता है।

मुख्य लक्षण हैं एक-दो दिन तेज़ बुखार, फिर जीभ, मसूड़ों, तालू और खुरों के बीच छाले। छाले फूटकर लाल घाव बन जाते हैं, इसलिए पशु के मुँह से लंबी लार गिरती है, वह होंठ चटकाता है, खाना छोड़ देता है और अचानक लंगड़ाकर बैठ जाता है। कुछ ही दिनों में दूध बहुत गिर जाता है।

बड़े पशु कम मरते हैं, पर छोटे बछड़े दिल पर असर करने वाले रूप से अचानक मर सकते हैं। असली नुकसान बचे हुए पशुओं में है: कई गायों का दूध पूरा वापस नहीं आता, कुछ गर्मी नहीं सह पातीं (हाँफने लगती हैं), और गाभिन पशुओं का गर्भपात हो सकता है। बचाव है साल में दो बार टीका और शक होते ही पशु-लोगों की आवाजाही रोक देना।

यह एक सामान्य गाइड है, पशु चिकित्सक का विकल्प नहीं। बीमार पशु की जाँच, मात्रा और इलाज के लिए हमेशा पशु चिकित्सक बुलाएँ।

क्या देखें

  • अचानक तेज़ बुखार (41 °C तक), सुस्ती, और खाना-दूध का एकदम गिरना।
  • मुँह से लंबी, झागदार लार लटकना, बार-बार होंठ चटकाना और जुगाली जैसी हरकत।
  • जीभ, मसूड़ों, तालू और होंठों के अंदर पहले छाले, फिर लाल कच्चे घाव।
  • एक या ज़्यादा पैरों में लंगड़ापन; दोनों खुरों के बीच और खुर के ऊपर की त्वचा में छाले और दरारें।
  • पशु पैर सिकोड़कर खड़ा रहता है, बारी-बारी वज़न बदलता है, या बैठ जाता है और उठने से मना करता है।
  • बिना छालों के छोटे बछड़ों की अचानक मौत — दिल को नुकसान वाला रूप।

यह कैसे फैलता है

  • बीमार और स्वस्थ पशु के बीच सीधा संपर्क — झुंड के अंदर सबसे आम रास्ता।
  • दूषित हरा चारा, सूखा चारा, पानी की नाँद और खाने के बर्तन।
  • लोगों के हाथ, कपड़े और जूतों पर, और गाड़ियों-बैलगाड़ियों के पहियों व फ़र्श पर।
  • मंडी से ख़रीदे या बिना अलग रखे (क्वारंटीन) गाँव में लाए गए नए पशु।
  • बीमार पशु की लार, गोबर, मूत्र, दूध और वीर्य; ठंडे-नम मौसम में वायरस देर तक ज़िंदा रहता है।

टीकाकरण

  • राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत मिलने वाला पॉलीवैलेंट FMD टीका लगवाएँ — यह भारत में मिलने वाले वायरस प्रकारों को कवर करता है।
  • बछड़े को पहला टीका 4 महीने की उम्र में, 1 महीने बाद बूस्टर, फिर जीवन भर हर 6 महीने पर एक ख़ुराक।
  • पूरे गाँव को एक ही चक्र में टीका लगवाएँ — अधूरा टीकाकरण वायरस को घूमते रहने देता है।
  • जोखिम वाले मौसम (सर्दी की शुरुआत और मानसून से पहले) से पहले नियमित चक्र रखें; टीके की कोल्ड चेन बनाए रखें।
  • गाभिन पशुओं को भी टीका लगवाएँ — टीका सुरक्षित है और खीस के ज़रिये बछड़े की भी रक्षा करता है।

फैलाव के समय क्या करें

  • शक होने पर उसी दिन नज़दीकी पशु चिकित्सालय को सूचना दें — FMD एक सूचनीय (नोटिफ़िएबल) रोग है।
  • प्रभावित बाड़े में पशु, चारा, गोबर और लोगों की आवाजाही तुरंत बंद कर दें।
  • बीमार पशुओं को अलग करें; उन्हें सबसे आख़िर में चारा-पानी दें, अलग बर्तन रखें, और बाद में हाथ-पैर धोएँ।
  • मुँह के घावों को हल्के एंटीसेप्टिक या 1% पोटैशियम परमैंगनेट से धोएँ; पैर धोकर मक्खी-रोधी एंटीसेप्टिक मरहम लगाएँ।
  • नरम, स्वादिष्ट चारा — हरी घास, दलिया, भीगा चोकर — और साफ़ पानी दें; खाना छोड़ चुके पशु को ललचाकर खिलाएँ।
  • बाड़ा, नाँद और नालियाँ धोने के सोडे या 2% कॉस्टिक सोडा से कीटाणुरहित करें; तेज़ खारे/क्षारीय घोल में वायरस जल्दी मर जाता है।

इलाज और सुधार

  • वायरस को मारने वाली कोई दवा नहीं है — 2–3 हफ़्ते तक पशु ख़ुद लड़ता है, तब तक देखभाल ही इलाज है।
  • पशु चिकित्सक मुँह और खुर के घावों में जीवाणु संक्रमण रोकने के लिए एंटीबायोटिक, और गंभीर पशुओं को सूजन-रोधी दवा व द्रव दे सकते हैं।
  • पशु को छाँव में नरम ज़मीन पर रखें, पत्थर और कीचड़ से दूर जो खुर के घाव बिगाड़ते हैं।
  • ठीक हुए पशु को तुरंत भारी काम या पूरी ख़ुराक पर न लगाएँ — धीरे-धीरे ताक़त बढ़ाएँ; कुछ का दूध पूरा वापस नहीं आता।

प्रभावित पशु

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इंसान को पशुओं से खुरपका-मुँहपका रोग हो सकता है?

इंसान में संक्रमण बहुत ही दुर्लभ है और होने पर बहुत हल्का। FMD जनस्वास्थ्य के लिए ख़तरा नहीं है। लेकिन यह पशुओं का गंभीर रोग है, और बीमार पशु का दूध या मांस बीमारी के दौरान न बेचें, न इस्तेमाल करें।

क्या FMD से बीमार गाय का दूध सुरक्षित है?

दिखने में बीमार पशु का दूध इस्तेमाल न करें — दूध कम होता है, पशु तनाव में है और दवा पर हो सकता है। पूरी तरह ठीक होने और दवा का प्रतीक्षा-काल बीतने के बाद दूध ठीक है। दूध हमेशा की तरह उबालकर ही लें।

मेरे पशुओं को टीका लगा है, फिर भी FMD क्यों हुआ?

बचाव के लिए पूरा कोर्स ज़रूरी है — बछड़े की ख़ुराक, बूस्टर, फिर हर 6 महीने पर टीका। एक ही ख़ुराक या छूटा हुआ चक्र गुंजाइश छोड़ देता है। कोल्ड चेन टूटने या गाँव के सिर्फ़ कुछ पशुओं को टीका लगने पर भी रोग-प्रतिरोध कमज़ोर रहता है। पूरे झुंड के लिए 6 महीने का चक्र बनाए रखें।

ठीक हुए पशु को कितने दिन अलग रखूँ?

घाव भरने के बाद भी ठीक हुए पशु को कम से कम 4 हफ़्ते स्वस्थ पशुओं से अलग रखें — वे अब भी वायरस छोड़ सकते हैं। गाय और ख़ासकर भैंस महीनों तक गले में वायरस रख सकती हैं, इसलिए प्रभावित गाँव से पशु बाहर ले जाने में पशु विभाग की सलाह मानें।

लक्षण, बचाव और इलाज ICAR, DAHD और राज्य पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों के अभ्यास पर आधारित हैं; टीका कार्यक्रम आम तौर पर सूचित समय-सारणी हैं और क्षेत्र या फैलाव के अनुसार बदल सकते हैं। पशु का इलाज करने से पहले हमेशा पशु चिकित्सक से पक्का करें। संपादकीय नीति.