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मसूररबीखुली-परागितअपडेट किया गया 27 अगस्त 2026

DPL 62 (Sheri)

मध्य क्षेत्र में बड़े-दाने की दाल बाज़ार के लिए लंबे समय से उगाई जाने वाली मोटे-दाने की मसूर, जो मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की काली मिट्टी पर रतुआ व उकठा प्रतिरोध के साथ आकर्षक दाना-आकार देती।

सीज़नरबी
पकने की अवधि125–135 दिन
अपेक्षित उपजज़्यादा — संभली हालात में लगभग 14–16 क्विंटल/हेक्टेयर, मोटे दाने के साथ जो प्रीमियम लाता
उपयुक्त मिट्टीकाली मिट्टी व अच्छी जल-निकासी वाली दोमट; मुख्यतः मध्य क्षेत्र में उगाई

ज़रूरी तथ्य

फसल
मसूर
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
125–135 दिन
बीज दर
मोटे-दाने की किस्म होने से, कतार बुवाई के लिए 45–60 किग्रा/हेक्टेयर (18–24 किग्रा/एकड़)
अपेक्षित उपज
ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 14–16 क्विंटल/हेक्टेयर, मोटे दाने के साथ जो प्रीमियम लाता
उपयुक्त मिट्टी
काली मिट्टी व अच्छी जल-निकासी वाली दोमट; मुख्यतः मध्य क्षेत्र में उगाई
जारी
DPL 62 / शेरी के नाम से जारी मोटे-दाने की मध्य क्षेत्र की मसूर

इस किस्म के बारे में

DPL 62, जिसे शेरी भी कहते, मुख्यतः मध्य क्षेत्र — मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व हरियाणा — में उगाई जाने वाली मोटे-दाने की मसूर है। यह अपने बड़े, आकर्षक दाने के लिए क़ीमती, जो मोटे-दाने की दाल बाज़ार में छोटे पूर्वी मसूर किस्मों से प्रीमियम लाता, व इसे रतुआ तथा उकठा दोनों के प्रति प्रतिरोधी बताया जाता। यह लगभग 125–135 दिन में पकती व मध्य भारत की काली मिट्टी पर अच्छा करती, बशर्ते जल-निकासी ठीक हो। चूँकि मोटे-दाने की मसूर उतनी ही पौध-संख्या के लिए ज़्यादा बीज-वज़न माँगती, DPL 62 छोटे-दाने की किस्म से ज़्यादा बीज दर पर बोई जाती, व इसका बड़ा दाना फटने का थोड़ा ज़्यादा ख़तरा रखता, तो इसे हल्के से थ्रेश करना चाहिए।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि125–135 दिन
    उपज क्षमताज़्यादा — संभली हालात में लगभग 14–16 क्विंटल/हेक्टेयर, मोटे दाने के साथ जो प्रीमियम लाता
    रोग-प्रतिरोधरतुआ व उकठा प्रतिरोधी
    मिट्टीकाली मिट्टी व अच्छी जल-निकासी वाली दोमट; मुख्यतः मध्य क्षेत्र में उगाई
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयमध्य क्षेत्र में मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर
  • बीज दरमोटे-दाने की किस्म होने से, कतार बुवाई के लिए 45–60 किग्रा/हेक्टेयर (18–24 किग्रा/एकड़)
  • उर्वरकलगभग 15–20 किग्रा N व 40–50 किग्रा P2O5 प्रति हेक्टेयर बेसल, हल्की मिट्टी पर 20 किग्रा S; कोई नाइट्रोजन टॉप-ड्रेसिंग नहीं। राइज़ोबियम व PSB बीज-टीका
  • कटाईलगभग 125–135 दिन पर काटें जब पौधे पीले पड़ें व नीचे की फलियाँ भूरी सूखें; मोटे दाने को हल्के से थ्रेश करें ताकि फटे नहीं, जो ग्रेड घटाता।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

125–135 दिन

अपेक्षित उपज

ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 14–16 क्विंटल/हेक्टेयर, मोटे दाने के साथ जो प्रीमियम लाता

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • मोटा, आकर्षक दाना जो दाल बाज़ार में छोटे-दाने की मसूर से प्रीमियम लाता
  • रतुआ व उकठा दोनों का प्रतिरोध रखती
  • मध्य क्षेत्र की काली मिट्टी से अच्छी तरह ढली

ध्यान रखने योग्य बातें

  • मोटे-दाने की किस्म को ज़्यादा बीज दर (45–60 किग्रा/हेक्टेयर) चाहिए, जो प्रति हेक्टेयर बीज-लागत बढ़ाता
  • बड़ा दाना थ्रेशिंग में ज़्यादा आसानी से फटता — प्रीमियम ग्रेड बचाने को हल्के से संभालें

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • हरियाणा

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छोटे-दाने की मसूर की बजाय DPL 62 क्यों चुनें?

मोटे-दाने की दाल बाज़ार के लिए: DPL 62 (शेरी) का बड़ा, आकर्षक दाना छोटी मसूर से प्रीमियम लाता, फिर भी रतुआ व उकठा प्रतिरोध रखता। बदले में ज़्यादा बीज दर व ज़्यादा सावधान थ्रेशिंग।

DPL 62 को प्रति एकड़ कितना बीज चाहिए?

लगभग 18–24 किग्रा प्रति एकड़ (45–60 किग्रा/हेक्टेयर) — छोटे-दाने की मसूर से ज़्यादा, क्योंकि उतनी ही पौध-संख्या बड़े दाने में ज़्यादा वज़न लेती।

स्रोत: ICAR-IIPR, Kanpur — lentil varieties and package of practices, Directorate of Pulses Development — Central released varieties of Lentil (Masoor). संपादकीय नीति.