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मसूररबीखुली-परागितअपडेट किया गया 27 अगस्त 2026

HUL 57 (Malaviya Vishwanath)

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छोटी, अगेती, छोटे-दाने की मसूर, उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए, HUL 11 के उत्परिवर्तन (म्यूटेंट) के रूप में विकसित व पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार में व्यापक रूप से उगाई जाती।

सीज़नरबी
पकने की अवधि120–125 दिन
अपेक्षित उपजमध्यम से ज़्यादा — पूर्वी मैदानों में संभली हालात में लगभग 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टीदोमट

ज़रूरी तथ्य

फसल
मसूर
प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
120–125 दिन
बीज दर
कतार बुवाई के लिए 30–40 किग्रा/हेक्टेयर (12–16 किग्रा/एकड़); धान-खूँटी फ़सल के लिए थोड़ी घनी
अपेक्षित उपज
मध्यम से ज़्यादा — पूर्वी मैदानों में संभली हालात में लगभग 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
उपयुक्त मिट्टी
दोमट
जारी
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा विकसित (HUL 11 का म्यूटेंट); मालवीय विश्वनाथ के नाम से जारी; उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए सुझाई

इस किस्म के बारे में

HUL 57, जो मालवीय विश्वनाथ के नाम से भी जारी हुई, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में HUL 11 में से उत्परिवर्तन चयन के रूप में विकसित छोटे-दाने की मसूर है। यह उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र — पूर्वी व मध्य उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, व पश्चिम बंगाल व असम के हिस्से — के लिए सुझाई गई। यह छोटी, अगेती किस्म है, लगभग 120–125 दिन में पकती, व रतुआ तथा फ्यूज़ेरियम उकठा दोनों के प्रति प्रतिरोधी बताई जाती। इसकी अगेती पकाव नम पूर्वी पट्टी में असली फ़ायदा है, जहाँ सबसे बुरे सर्दी कोहरे से पहले दाना-भराव पूरा करना स्टेम्फीलियम झुलसा के जोख़िम को घटाता। अगेती पकाव व रोग-प्रतिरोध के इसी मेल के लिए इसे पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार में व्यापक रूप से अपनाया गया।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि120–125 दिन
    उपज क्षमतामध्यम से ज़्यादा — पूर्वी मैदानों में संभली हालात में लगभग 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर
    रोग-प्रतिरोधरतुआ व फ्यूज़ेरियम उकठा प्रतिरोधी
    मिट्टीदोमट
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयपूर्वी मैदानों में मध्य अक्टूबर से नवंबर की शुरुआत — यहाँ जल्दी बुवाई पर ज़ोर ताकि सबसे बुरे कोहरे से पहले दाना-भराव पूरा हो
  • बीज दरकतार बुवाई के लिए 30–40 किग्रा/हेक्टेयर (12–16 किग्रा/एकड़); धान-खूँटी फ़सल के लिए थोड़ी घनी
  • उर्वरकलगभग 15–20 किग्रा N व 40–50 किग्रा P2O5 प्रति हेक्टेयर बेसल, हल्की मिट्टी पर 20 किग्रा S; कोई नाइट्रोजन टॉप-ड्रेसिंग नहीं। राइज़ोबियम व PSB बीज-टीका
  • कटाईलगभग 120–125 दिन पर काटें जब पौधे पीले पड़ें व नीचे की फलियाँ भूरी सूखें — इसकी अगेतीपन फ़सल को सामान्य अवधि की मसूर से पहले खेत से हटा देती।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

120–125 दिन

अपेक्षित उपज

मध्यम से ज़्यादा — पूर्वी मैदानों में संभली हालात में लगभग 12–15 क्विंटल/हेक्टेयर

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • अगेती पकाव के साथ रतुआ व उकठा प्रतिरोध — नम पूर्वी मैदानों से अच्छा मेल जहाँ रोग व टर्मिनल हीट दोनों ख़तरे हैं
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार में व्यापक रूप से अपनाई व आसानी से उपलब्ध
  • समय पर कतार बुवाई व धान-खूँटी (उतेरा) खेती दोनों के लिए उपयुक्त

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह छोटे-दाने की है; मोटे-दाने के प्रीमियम बाज़ार के लिए DPL 62 या L 4076 बेहतर मेल है
  • इसकी सिफ़ारिश उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए है — मध्य क्षेत्र में IPL 316 या DPL 62 ज़्यादा जमी पसंद है

उपयुक्त क्षेत्र

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा विकसित व उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र — पूर्वी व मध्य उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड — के लिए सुझाई।

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • झारखंड

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या HUL 57, मालवीय विश्वनाथ जैसी ही है?

हाँ — HUL 57 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा मालवीय विश्वनाथ के नाम से जारी हुई। यह पहले की HUL 11 में से उत्परिवर्तन चयन है।

HUL 57 पूर्वी उत्तर प्रदेश व बिहार के लिए अच्छी क्यों?

यह अगेती पकाव (लगभग 120–125 दिन) को रतुआ व उकठा प्रतिरोध से जोड़ती। अगेती पकाव दाना-भराव को उस सबसे बुरे सर्दी कोहरे से पहले पूरा करा देती जो स्टेम्फीलियम झुलसा बढ़ाता, व टर्मिनल हीट से पहले।

स्रोत: Banaras Hindu University, Institute of Agricultural Sciences — genetics and plant breeding releases, Directorate of Pulses Development — Central released varieties of Lentil (Masoor). संपादकीय नीति.