Neelam
राज्य सिफ़ारिशों में अपने संयुक्त रतुआ व उकठा प्रतिरोध के लिए शामिल किस्म, मुख्यतः मध्य व पूर्वी पट्टियों में उगाई जाती। विशेष जारी-केंद्र व वर्ष को इस रिकॉर्ड के लिए स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं मानें — इसकी हैसियत उस रोग-प्रतिरोध गुण पर टिकी जिसके लिए यह सूचीबद्ध है।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 120–135 दिन
- बीज दर
- कतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- अपनी सिफ़ारिश पट्टियों में मध्यम से ज़्यादा; बीज-तेल लगभग 40–43%
- उपयुक्त मिट्टी
- चिकनी / काली मिट्टी
- जारी
- रतुआ- व उकठा-रोधी अलसी के रूप में राज्य सिफ़ारिशों में शामिल; विशेष जारी-केंद्र व वर्ष इस रिकॉर्ड के लिए स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं
इस किस्म के बारे में
नीलम एक अलसी किस्म है जो भारतीय राज्य सिफ़ारिशों में मुख्यतः अपने रोग-पैकेज के लिए शामिल है: इसे रतुआ (Melampsora lini) व अलसी उकठा (Fusarium oxysporum f. sp. lini) दोनों के प्रति प्रतिरोधी बताया जाता — मध्य व पूर्वी भारत में फ़सल को सबसे ज़्यादा सीमित करने वाले दो रोग। यह लगभग 120–135 दिन में पकती, बीज-तेल मात्रा सामान्य भारतीय सीमा में। यह रिकॉर्ड नीलम के लिए विशेष जारी-केंद्र या वर्ष दोबारा नहीं बताता, क्योंकि ये विवरण स्रोतों के बीच अलग-अलग हैं व किसी एक प्राथमिक संदर्भ से नहीं जुड़ सके — तो इसे सटीक जारी-इतिहास के साथ नहीं, बल्कि खेती में मौजूद एक रोग-प्रतिरोधी किस्म के तौर पर पेश किया गया। रतुआ- व उकठा-प्रवण ज़मीन पर नीलम की क़ीमत वही प्रतिरोध है; बड़े स्तर पर बुवाई से पहले मौजूदा उपलब्धता व अद्यतन रोग-रेटिंग अपने स्थानीय KVK से पुष्ट करें।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयकतार फ़सल के रूप में मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर, जहाँ हो सके वहाँ पहले, ताकि रतुआ व कली-मक्खी जोख़िम घटे
- बीज दरकतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
- उर्वरकबारानी: लगभग 30–40 किग्रा N व 20 किग्रा P2O5 प्रति हेक्टेयर, पूरी बेसल। सिंचित: 60:40:20 किग्रा N:P:K/हेक्टेयर तक, आधी N बेसल व आधी शाखा बनते समय
- कटाईलगभग 120–135 दिन पर काटें जब कैप्सूल भूरे व सूखे हों पर अब भी बंद; ढेर में पकाएँ, फिर हल्के से थ्रेश करें।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
120–135 दिन
अपेक्षित उपज
अपनी सिफ़ारिश पट्टियों में मध्यम से ज़्यादा; बीज-तेल लगभग 40–43%
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- रतुआ (Melampsora lini) — नीलम प्रतिरोधी बताई जाती
- अलसी उकठा (Fusarium oxysporum f. sp. lini) — नीलम प्रतिरोधी बताई जाती; बुरी तरह उकठा वाली ज़मीन पर फिर भी ग़ैर-मेज़बान फ़सल से चक्र बदलें
- कली मक्खी (Dasyneura lini) — किस्म-प्रतिरोध कली मक्खी को नहीं ढकता; किस्म चाहे जो हो, इसे फूल-अवस्था का छिड़काव कार्यक्रम चाहिए
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- रतुआ व उकठा का संयुक्त प्रतिरोध — मध्य व पूर्वी भारत में अलसी को सबसे ज़्यादा सीमित करने वाले दो रोग
- रतुआ या उकठा इतिहास वाली पट्टियों के लिए ख़ासतौर पर काम का चुनाव
ध्यान रखने योग्य बातें
- यह रिकॉर्ड नीलम के लिए पुष्ट जारी-केंद्र या वर्ष नहीं रखता — बड़े स्तर पर बुवाई से पहले मौजूदा सिफ़ारिश व रोग-रेटिंग अपने KVK से पुष्ट करें
- रोग-प्रतिरोध में कली मक्खी शामिल नहीं, जिसे फिर भी फूल-अवस्था का छिड़काव कार्यक्रम चाहिए
उपयुक्त क्षेत्र
मध्य व पूर्वी भारत की रतुआ- व उकठा-प्रवण अलसी पट्टियों के लिए राज्य सिफ़ारिशों में शामिल; विशेष जारी-केंद्र व वर्ष इस रिकॉर्ड के लिए स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं।
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नीलम अलसी किसके लिए जानी जाती?
रतुआ व अलसी उकठा के प्रति इसका संयुक्त प्रतिरोध — मध्य व पूर्वी भारत में फ़सल को सबसे ज़्यादा सीमित करने वाले दो रोग। यह मुख्यतः उसी गुण के लिए राज्य सिफ़ारिशों में शामिल है।
क्या नीलम को अब भी कली मक्खी नियंत्रण चाहिए?
हाँ — इसका प्रतिरोध रतुआ व उकठा ढकता, कली मक्खी नहीं। हर अलसी किस्म को कली मक्खी के ख़िलाफ़ फूल-अवस्था का छिड़काव कार्यक्रम चाहिए, क्योंकि इसके मैगट बीज बनने से पहले फूल-कलियाँ नष्ट कर देते।
स्रोत: ICAR — AICRP on Linseed (varieties released), Vikaspedia — Linseed package of practices. संपादकीय नीति.
