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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
अलसी (फ्लैक्ससीड / तीसी)रबीखुली-परागितअपडेट किया गया 27 अगस्त 2026

JLS 9

JNKVV, जबलपुर की मध्य प्रदेश के लिए किस्म, राज्य भर में बारानी व उतेरा फ़सल के रूप में उगाई जाती; मध्यम अवधि की लाइन, मध्यम उकठा व रतुआ सहनशीलता के साथ। सटीक उपज व तेल आँकड़े इस रिकॉर्ड के लिए स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं।

सीज़नरबी
पकने की अवधि120–130 दिन
अपेक्षित उपजमध्य प्रदेश की हालात में मध्यम से ज़्यादा; बीज-तेल लगभग 38–42%
उपयुक्त मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
120–130 दिन
बीज दर
कतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी (उतेरा) बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
मध्य प्रदेश की हालात में मध्यम से ज़्यादा; बीज-तेल लगभग 38–42%
उपयुक्त मिट्टी
चिकनी / काली मिट्टी
जारी
JNKVV, जबलपुर (जबलपुर अलसी चयन श्रृंखला); मध्य प्रदेश के लिए सुझाई; विशेष जारी-वर्ष इस रिकॉर्ड के लिए स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं

इस किस्म के बारे में

JLS 9 जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर की अलसी किस्म है — "JLS" उपसर्ग जबलपुर अलसी चयन श्रृंखला को दर्शाता — जो मध्य प्रदेश के लिए सुझाई गई, जो भारत का सबसे बड़ा अलसी राज्य है। यह मध्यम अवधि की लाइन है, लगभग 120–130 दिन, जो राज्य की काली मिट्टी पर बारानी अकेली-फ़सल व धान-खूँटी (उतेरा) हालात दोनों में उगाई जाती। इसका उकठा व रतुआ प्रतिक्रिया पूरे प्रतिरोध की बजाय मध्यम सहनशीलता माना जाना बेहतर है। यह रिकॉर्ड JLS 9 के लिए सटीक जारी-वर्ष या उपज-परीक्षण आँकड़ा दोबारा नहीं बताता, क्योंकि वे किसी एक प्राथमिक JNKVV स्रोत से पुष्ट नहीं हुए; इसे खेती में मौजूद एक राज्य-सुझाई मध्य प्रदेश किस्म के तौर पर पेश किया गया। मध्य भारत के लिए JLS श्रृंखला समग्र रूप से — JLS 73 जैसे नए नंबरों सहित — मुख्यधारा का स्थानीय चुनाव है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि120–130 दिन
    उपज क्षमतामध्य प्रदेश की हालात में मध्यम से ज़्यादा; बीज-तेल लगभग 38–42%
    रोग-प्रतिरोधमध्यम उकठा व रतुआ सहनशीलता
    मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयकतार फ़सल के रूप में मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर; खड़े धान में उतेरा फ़सल के लिए सितंबर के आख़िर से अक्टूबर
  • बीज दरकतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी (उतेरा) बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
  • उर्वरकबारानी: लगभग 30–40 किग्रा N व 20 किग्रा P2O5 प्रति हेक्टेयर, पूरी बेसल। उतेरा फ़सल: सिर्फ़ कम बेसल खुराक (लगभग 10–20 किग्रा N, 20 किग्रा P2O5, 10 किग्रा K2O प्रति हेक्टेयर)
  • कटाईलगभग 120–130 दिन पर काटें जब कैप्सूल भूरे व सूखे हों पर अब भी बंद; ढेर में पकाएँ, फिर हल्के से थ्रेश करें।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

120–130 दिन

अपेक्षित उपज

मध्य प्रदेश की हालात में मध्यम से ज़्यादा; बीज-तेल लगभग 38–42%

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • भारत के सबसे बड़े अलसी राज्य मध्य प्रदेश के लिए राज्य-सुझाई किस्म, बारानी व उतेरा दोनों पद्धतियों के लिए उपयुक्त
  • मध्यम अवधि, जो लंबी-अवधि लाइन के मुक़ाबले देर-मौसम की चूर्णिल फफूँद व कली-मक्खी जोख़िम घटाती

ध्यान रखने योग्य बातें

  • यह रिकॉर्ड JLS 9 के लिए पुष्ट जारी-वर्ष या उपज आँकड़ा नहीं रखता — मौजूदा सिफ़ारिश अपने KVK या JNKVV से पुष्ट करें
  • इसका उकठा व रतुआ प्रतिक्रिया मध्यम सहनशीलता है, पूरा प्रतिरोध नहीं — जल्दी बुवाई, बीज-उपचार व फ़सल-चक्र फिर भी मायने रखते

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

JLS 9 में "JLS" का क्या मतलब?

यह जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर की जबलपुर अलसी चयन श्रृंखला को दर्शाता। JLS 9 उस श्रृंखला का एक नंबर है; JLS 73 जैसे नए नंबर बाद में आए।

क्या JLS 9 उतेरा (धान-खूँटी) बुवाई के लिए उपयुक्त है?

हाँ — यह मध्य प्रदेश में बारानी अकेली-फ़सल तथा खड़े लगभग पके धान में छिड़की उतेरा फ़सल दोनों के रूप में उगाई जाती। उतेरा फ़सल को सिर्फ़ छोटी बेसल खाद खुराक मिलती।

स्रोत: ICAR — AICRP on Linseed (varieties released), JNKVV, Jabalpur. संपादकीय नीति.