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Technical Kisanखेती, तकनीक के साथ
अलसी (फ्लैक्ससीड / तीसी)रबीखुली-परागितअपडेट किया गया 27 अगस्त 2026

Shekhar (KL-223)

CSAUAT, कानपुर की ज़्यादा उपज वाली किस्म, उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती — काली दाल–अलसी व धान-खूँटी पद्धतियों सहित — व रतुआ व ऑल्टरनेरिया झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी।

सीज़नरबी
पकने की अवधि130–140 दिन
अपेक्षित उपजउत्तर प्रदेश की हालात के लिए ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 12–16 क्विंटल/हेक्टेयर; बीज-तेल लगभग 40–42%
उपयुक्त मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
खुली-परागित
सीज़न
रबी
पकने की अवधि
130–140 दिन
बीज दर
कतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
अपेक्षित उपज
उत्तर प्रदेश की हालात के लिए ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 12–16 क्विंटल/हेक्टेयर; बीज-तेल लगभग 40–42%
उपयुक्त मिट्टी
चिकनी / काली मिट्टी
जारी
CSAUAT, कानपुर द्वारा जारी (प्रजनन नंबर KL-223); उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती

इस किस्म के बारे में

शेखर, जिसका प्रजनन नंबर KL-223 है, चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSAUAT), कानपुर की अलसी किस्म है, जो उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती। यह लगभग 130–140 दिन में पकती व रतुआ (Melampsora lini) तथा ऑल्टरनेरिया झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी दर्ज है। यह अकेली-फ़सल व अनुक्रम-पद्धति दोनों में काम करती — मध्य उत्तर प्रदेश की काली दाल–अलसी फ़सल-पद्धति में इसे एक आशाजनक किस्म बताया गया — व धान-खूँटी हालात में भी इस्तेमाल होती। इसका बीज-तेल लगभग 40–42% की सामान्य भारतीय सीमा में। पुरानी T-397 चेक से ज़्यादा उपज वाली किस्म होने के नाते, शेखर उन उत्तर प्रदेश किसानों के लिए उचित चुनाव है जो फ़सल को बेसल खाद खुराक व, जहाँ हो, एक-दो सिंचाई दे सकें।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारखुली-परागित
    अवधि130–140 दिन
    उपज क्षमताउत्तर प्रदेश की हालात के लिए ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 12–16 क्विंटल/हेक्टेयर; बीज-तेल लगभग 40–42%
    रोग-प्रतिरोधरतुआ व ऑल्टरनेरिया झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी
    मिट्टीचिकनी / काली मिट्टी
    सीज़नरबी

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयकतार फ़सल के रूप में मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर; जल्दी बुवाई रतुआ व कली मक्खी का जोख़िम घटाती
  • बीज दरकतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
  • उर्वरकबारानी: लगभग 30–40 किग्रा N व 20 किग्रा P2O5 प्रति हेक्टेयर, पूरी बेसल। सिंचित: 60:40:20 किग्रा N:P:K/हेक्टेयर तक, आधी N बेसल व आधी शाखा बनते समय पहली सिंचाई के साथ
  • कटाईलगभग 130–140 दिन पर काटें जब कैप्सूल भूरे, सूखे व खनकते हों पर चटकने से पहले; ढेर में पकाएँ, फिर हल्के से थ्रेश करें।

उपज व अवधि

पकने की अवधि

130–140 दिन

अपेक्षित उपज

उत्तर प्रदेश की हालात के लिए ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 12–16 क्विंटल/हेक्टेयर; बीज-तेल लगभग 40–42%

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • पुरानी T-397 चेक से ज़्यादा उपज, रतुआ व ऑल्टरनेरिया झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोध के साथ
  • उत्तर प्रदेश में अकेली-फ़सल, अनुक्रम व धान-खूँटी पद्धतियों में काम करती

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इसका रतुआ व ऑल्टरनेरिया प्रतिरोध "मध्यम" है, पूरा नहीं — जल्दी बुवाई व ज़रूरत पर सुरक्षात्मक फफूँदनाशी फिर भी मायने रखते
  • इसकी सिफ़ारिश उत्तर प्रदेश केंद्रित है; मध्य प्रदेश में JLS श्रृंखला ज़्यादा जमी पसंद है

उपयुक्त क्षेत्र

जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।

  • उत्तर प्रदेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या शेखर, KL-223 जैसी ही है?

हाँ — शेखर जारी नाम है व KL-223 इसका प्रजनन नंबर। यह CSAUAT, कानपुर की अलसी किस्म है, उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती।

क्या शेखर धान-खूँटी (उतेरा) बुवाई के लिए उपयुक्त है?

हाँ — इसे उत्तर प्रदेश में धान-खूँटी व अनुक्रम पद्धतियों में इस्तेमाल किया जाता, काली दाल–अलसी चक्र सहित। रिले फ़सल के लिए इसे खड़े लगभग पके धान में थोड़ा घना छिड़कें।

स्रोत: ICAR — AICRP on Linseed (varieties released), CSA University of Agriculture and Technology, Kanpur. संपादकीय नीति.