Shekhar (KL-223)
CSAUAT, कानपुर की ज़्यादा उपज वाली किस्म, उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती — काली दाल–अलसी व धान-खूँटी पद्धतियों सहित — व रतुआ व ऑल्टरनेरिया झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 130–140 दिन
- बीज दर
- कतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- उत्तर प्रदेश की हालात के लिए ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 12–16 क्विंटल/हेक्टेयर; बीज-तेल लगभग 40–42%
- उपयुक्त मिट्टी
- चिकनी / काली मिट्टी
- जारी
- CSAUAT, कानपुर द्वारा जारी (प्रजनन नंबर KL-223); उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती
इस किस्म के बारे में
शेखर, जिसका प्रजनन नंबर KL-223 है, चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSAUAT), कानपुर की अलसी किस्म है, जो उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती। यह लगभग 130–140 दिन में पकती व रतुआ (Melampsora lini) तथा ऑल्टरनेरिया झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोधी दर्ज है। यह अकेली-फ़सल व अनुक्रम-पद्धति दोनों में काम करती — मध्य उत्तर प्रदेश की काली दाल–अलसी फ़सल-पद्धति में इसे एक आशाजनक किस्म बताया गया — व धान-खूँटी हालात में भी इस्तेमाल होती। इसका बीज-तेल लगभग 40–42% की सामान्य भारतीय सीमा में। पुरानी T-397 चेक से ज़्यादा उपज वाली किस्म होने के नाते, शेखर उन उत्तर प्रदेश किसानों के लिए उचित चुनाव है जो फ़सल को बेसल खाद खुराक व, जहाँ हो, एक-दो सिंचाई दे सकें।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयकतार फ़सल के रूप में मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर; जल्दी बुवाई रतुआ व कली मक्खी का जोख़िम घटाती
- बीज दरकतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
- उर्वरकबारानी: लगभग 30–40 किग्रा N व 20 किग्रा P2O5 प्रति हेक्टेयर, पूरी बेसल। सिंचित: 60:40:20 किग्रा N:P:K/हेक्टेयर तक, आधी N बेसल व आधी शाखा बनते समय पहली सिंचाई के साथ
- कटाईलगभग 130–140 दिन पर काटें जब कैप्सूल भूरे, सूखे व खनकते हों पर चटकने से पहले; ढेर में पकाएँ, फिर हल्के से थ्रेश करें।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
130–140 दिन
अपेक्षित उपज
उत्तर प्रदेश की हालात के लिए ज़्यादा — संभली हालात में लगभग 12–16 क्विंटल/हेक्टेयर; बीज-तेल लगभग 40–42%
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- रतुआ (Melampsora lini) — शेखर मध्यम प्रतिरोधी दर्ज है
- ऑल्टरनेरिया झुलसा — शेखर मध्यम प्रतिरोधी दर्ज है
- अलसी उकठा व चूर्णिल फफूँद — सामान्य ख़तरा मानें; बीज-उपचार व जल्दी बुवाई करें, व उकठा वाली ज़मीन पर चक्र बदलें
- कली मक्खी (Dasyneura lini) — किस्म चाहे जो हो, फूल-अवस्था का छिड़काव कार्यक्रम चाहिए
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- पुरानी T-397 चेक से ज़्यादा उपज, रतुआ व ऑल्टरनेरिया झुलसा के प्रति मध्यम प्रतिरोध के साथ
- उत्तर प्रदेश में अकेली-फ़सल, अनुक्रम व धान-खूँटी पद्धतियों में काम करती
ध्यान रखने योग्य बातें
- इसका रतुआ व ऑल्टरनेरिया प्रतिरोध "मध्यम" है, पूरा नहीं — जल्दी बुवाई व ज़रूरत पर सुरक्षात्मक फफूँदनाशी फिर भी मायने रखते
- इसकी सिफ़ारिश उत्तर प्रदेश केंद्रित है; मध्य प्रदेश में JLS श्रृंखला ज़्यादा जमी पसंद है
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या शेखर, KL-223 जैसी ही है?
हाँ — शेखर जारी नाम है व KL-223 इसका प्रजनन नंबर। यह CSAUAT, कानपुर की अलसी किस्म है, उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से उगाई जाती।
क्या शेखर धान-खूँटी (उतेरा) बुवाई के लिए उपयुक्त है?
हाँ — इसे उत्तर प्रदेश में धान-खूँटी व अनुक्रम पद्धतियों में इस्तेमाल किया जाता, काली दाल–अलसी चक्र सहित। रिले फ़सल के लिए इसे खड़े लगभग पके धान में थोड़ा घना छिड़कें।
स्रोत: ICAR — AICRP on Linseed (varieties released), CSA University of Agriculture and Technology, Kanpur. संपादकीय नीति.
