T-397
पुरानी राष्ट्रीय चेक किस्म, लगभग 1960 में जारी — छोटे भूरे-दाने की, फैलने वाली किस्म, अब भी बुंदेलखंड, बिहार, असम, मध्य प्रदेश व राजस्थान में अपने व्यापक अनुकूलन व रतुआ, उकठा व सूखा सहनशीलता के लिए उगाई जाती।
ज़रूरी तथ्य
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 125–145 दिन
- बीज दर
- कतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी (उतेरा/पैरा) बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- मध्यम — संभली हालात में लगभग 8–12 क्विंटल/हेक्टेयर, बारानी में 5–8; बीज-तेल लगभग 42–43%
- उपयुक्त मिट्टी
- काली मिट्टी व भारी दोमट; हाशिये की बारानी ज़मीन पर व्यापक अनुकूलन
- जारी
- लगभग 1960 में जारी · कानपुर · अलसी की लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय चेक किस्म
इस किस्म के बारे में
T-397 भारतीय अलसी की लंबे समय से चली आ रही चेक किस्म है, लगभग 1960 में कानपुर से जारी। यह छोटे भूरे-दाने की, फैलने वाली किस्म का पौधा है जो लगभग 125–145 दिन में पकता, बीज-तेल मात्रा लगभग 42–43%। इसकी टिकाऊ क़ीमत इसकी व्यापकता है: इसे उत्तर प्रदेश की बुंदेलखंड पट्टी, बिहार, असम, मध्य प्रदेश व राजस्थान के लिए उपयुक्त, व रतुआ, उकठा व सूखा सहनशील दर्ज किया गया — यही वजह है कि यह अब भी उस हाशिये की, असिंचित रबी ज़मीन पर उगाई जाती जिस पर ज़्यादातर भारतीय अलसी होती। नई किस्में उस ज़मीन पर इससे साफ़ ज़्यादा उपज देतीं जो खाद खुराक व एक-दो सिंचाई संभाल सके, तो T-397 को उपज-अगुआ की बजाय कम-इनपुट हालात के लिए एक कठोर मानक समझना बेहतर है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयकतार फ़सल के रूप में मध्य अक्टूबर से मध्य नवंबर; खड़े धान में छिड़की धान-खूँटी (उतेरा/पैरा) फ़सल के लिए सितंबर के आख़िर से अक्टूबर। जल्दी बुवाई रतुआ व कली मक्खी से बचाती
- बीज दरकतार बुवाई के लिए 25–30 किग्रा/हेक्टेयर (10–12 किग्रा/एकड़); छिड़काव व धान-खूँटी (उतेरा/पैरा) बुवाई के लिए 35–40 किग्रा/हेक्टेयर
- उर्वरकबारानी: लगभग 30–40 किग्रा N व 20 किग्रा P2O5 प्रति हेक्टेयर, पूरी बेसल। सिंचित: 60:40:20 किग्रा N:P:K/हेक्टेयर तक, आधी N बेसल व आधी शाखा बनते समय पहली सिंचाई के साथ
- कटाई125–145 दिन पर काटें जब कैप्सूल भूरे, सूखे व खनकते हों पर चटकने से पहले। ढेर लगाकर पकाएँ, फिर हल्के से थ्रेश कर छोटा बीज ओसाएँ।
उपज व अवधि
पकने की अवधि
125–145 दिन
अपेक्षित उपज
मध्यम — संभली हालात में लगभग 8–12 क्विंटल/हेक्टेयर, बारानी में 5–8; बीज-तेल लगभग 42–43%
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- अलसी उकठा (Fusarium oxysporum f. sp. lini) — T-397 सहनशील दर्ज है, जो एक वजह है कि यह बार-बार अलसी वाली ज़मीन पर टिकी रहती
- रतुआ (Melampsora lini) — T-397 सहनशील दर्ज है; जल्दी बुवाई जोख़िम और घटाती
- चूर्णिल फफूँद (Oidium lini) — देर-मौसम का ख़तरा; T-397 की मध्यम-से-लंबी अवधि छोटी किस्म से ज़्यादा जोख़िम देती
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- अलसी पट्टी में बहुत व्यापक अनुकूलन, रतुआ, उकठा व सूखा के प्रति दर्ज सहनशीलता के साथ
- हाशिये की, कम-इनपुट बारानी ज़मीन पर भरोसेमंद चुनाव जिस पर ज़्यादातर भारतीय अलसी होती
- लंबा ट्रैक रिकॉर्ड व प्रमाणित बीज के रूप में आसान उपलब्धता
ध्यान रखने योग्य बातें
- यह 1960 की किस्म है व उस ज़मीन पर नई किस्मों से साफ़ कम उपज देती जो खाद खुराक व एक-दो सिंचाई संभाल सके
- इसकी मध्यम-से-लंबी अवधि छोटी किस्म से देर-मौसम की चूर्णिल फफूँद व कली मक्खी को ज़्यादा जोख़िम देती — जल्दी बुवाई मायने रखती
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
- असम
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इतने दशकों बाद भी T-397 क्यों उगाई जाती?
इसकी व्यापकता के कारण: यह पूरी अलसी पट्टी में ढली है व रतुआ, उकठा व सूखा सहती, जो इसे उस हाशिये की, असिंचित ज़मीन पर भरोसेमंद बनाता जिस पर ज़्यादातर अलसी होती। बेहतर ज़मीन पर नई किस्में इससे साफ़ ज़्यादा उपज देतीं।
T-397 बीज में कितना तेल होता?
लगभग 42–43% तेल, भारतीय अलसी की लगभग 37–44% सीमा के अनुरूप। फूल व कैप्सूल-भराव के दौरान ठंडा मौसम, व पर्याप्त सल्फ़र, तेल प्रतिशत में मदद करते।
स्रोत: ICAR — AICRP on Linseed (varieties released), Vikaspedia — Linseed package of practices. संपादकीय नीति.
