Co-1
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयंबटूर द्वारा विकसित, 1985 में जारी, दक्षिणी उगाने की स्थितियों के लिए PF-35 से पुनः-चयन द्वारा।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- सौंफ
- प्रकार
- खुली-परागित
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- 160–180 दिन
- बीज दर
- सीधी बुवाई को 10–12 किग्रा/हेक्टेयर
- अपेक्षित उपज
- मध्यम
- उपयुक्त मिट्टी
- दोमट
- जारी
- 1985 में जारी · तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयंबटूर, PF-35 से पुनः-चयन
इस किस्म के बारे में
Co-1 तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयंबटूर द्वारा विकसित की गई और 1985 में आधारभूत PF-35 रेखा से पुनः-चयन द्वारा जारी हुई, इसे अधिकांश सौंफ किस्मों के लक्षित गुजरात-राजस्थान पट्टी की बजाय दक्षिण भारतीय उगाने की स्थितियों के अनुकूल बनाते हुए। यह तमिलनाडु के सौंफ किसानों के लिए मानक अनुशंसा बनी हुई है, अपने PF-35 जनक जैसी लगभग 160 से 180 दिन की अवधि में।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयमध्य सितंबर से मध्य अक्टूबर
- बीज दरसीधी बुवाई को 10–12 किग्रा/हेक्टेयर
- दूरीकतारों के बीच 45–60 सेमी
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी जल-निकासी वाली दोमट
उपज व अवधि
पकने की अवधि
160–180 दिन
अपेक्षित उपज
मध्यम
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- मध्यम
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- तमिलनाडु व दक्षिणी उगाने की स्थितियों के सौंफ किसानों के लिए मानक, स्थानीय रूप से अनुकूलित अनुशंसा।
ध्यान रखने योग्य बातें
- नई, विशेष रूप से झुलसा-रोधी अजमेर किस्मों के आगे केवल मध्यम रोग-सहनशीलता व मध्यम उपज-सीमा।
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- तमिलनाडु
स्रोत: Fennel (Foeniculum vulgare) — variety review. संपादकीय नीति.
