A-1 (Annigeri 1)
UAS धारवाड़ की पुरानी काँटेदार किस्म और दशकों तक कर्नाटक में सबसे ज़्यादा उगाई गई कुसुम; वह बेंचमार्क जिससे नई किस्म तुलना की जाती है।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- कुसुम (करडी)
- प्रकार
- काँटेदार कुसुम किस्म
- सीज़न
- रबी
- पकने की अवधि
- लगभग 120–130 दिन
- बीज दर
- अकेली फ़सल 45 सेमी कतारों में 10–12 किग्रा/हे.; मेड़ / अंतर-फ़सल लगभग 5–6 किग्रा/हे.
- अपेक्षित उपज
- बारानी लगभग 8–12 क्विंटल/हे., सुरक्षात्मक सिंचाई से 15 क्विंटल/हे. तक; लगभग 30% तेल
- उपयुक्त मिट्टी
- गहरी व मध्यम-काली मिट्टी
- जारी
- UAS धारवाड़ द्वारा जारी; लंबे समय तक कर्नाटक बारानी इलाक़ों की मानक काँटेदार कुसुम
इस किस्म के बारे में
A-1, जिसे अन्निगेरी 1 भी कहते, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ की एक काँटेदार कुसुम किस्म है। दशकों तक यह कर्नाटक व महाराष्ट्र के हिस्सों में सबसे ज़्यादा उगाई गई कुसुम रही, काली मिट्टी पर भरोसेमंद बारानी प्रदर्शन और लगभग 30% बीज तेल के लिए क़ीमती। इसमें कोई ख़ास रोग प्रतिरोध नहीं और गीले या बेमौसम साल में फ्यूजेरियम उकठा व अल्टरनेरिया झुलसा को कमज़ोर है।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयसितंबर के आख़िरी हफ़्ते से अक्टूबर के अंत तक, हटते-मानसून की नमी में गहरा ड्रिल
- बीज दरअकेली फ़सल 45 सेमी कतारों में 10–12 किग्रा/हे.; मेड़ / अंतर-फ़सल लगभग 5–6 किग्रा/हे.
- दूरीकतार से कतार 45 सेमी; 2–3 हफ़्ते पर कतार में लगभग 20 सेमी पर छँटाई
- बुवाई विधिनम काली मिट्टी में हल के पीछे 4–6 सेमी गहरा ड्रिल करें; छिटकवाँ न बोएँ
- सिंचाईजमा नमी पर बारानी; जहाँ पानी हो वहाँ रोज़ेट-से-शाखा अवस्था पर एक सिंचाई सबसे बड़ा जवाब देती
- उर्वरकबारानी: लगभग 25:25:0 किग्रा N:P2O5:K2O/हे. बीज के नीचे ड्रिल। सिंचित: 40–60 किग्रा N/हे., आधी बेसल आधी रोज़ेट अवस्था पर
- कटाईपत्तियाँ व सिर भूरे सूखने व बीज सख़्त-सफ़ेद होने पर 120–130 दिन पर काटें; ठंडी सुबह जल्दी दस्ताने व पूरी बाँह के साथ काटें
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी नमी-धारण क्षमता वाली गहरी व मध्यम-काली मिट्टी
- pH
- 6.0–8.0
जलवायु
- जलवायु
- कर्नाटक काली-मिट्टी पट्टी की बारानी रबी फ़सल; फूल के समय बेमौसम बारिश या नम दौर अल्टरनेरिया, सिर-सड़न व भारी माहू लाता, जिनको A-1 कमज़ोर है
उपज व अवधि
पकने की अवधि
लगभग 120–130 दिन
अपेक्षित उपज
बारानी लगभग 8–12 क्विंटल/हे., सुरक्षात्मक सिंचाई से 15 क्विंटल/हे. तक; लगभग 30% तेल
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
मुख्य कीट
प्रबंधन सुझाव
- समय पर और नमी में गहरा बोएँ — बारानी फ़सल का सबसे बड़ा कारक
- माहू के लिए जल्दी, पहली कली बस्तियों पर जाँचें व छिड़कें
- जहाँ फ्यूजेरियम उकठा दिखा हो वहाँ A-1 से बचें; वहाँ उकठा-सहनशील किस्म चुनें
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- कर्नाटक काली मिट्टी पर भरोसेमंद, अच्छी परखी बारानी उपज
- पूरी पट्टी में डीलरों, तेल मिलों व KVK को अच्छी तरह जानी-पहचानी
- लगभग 30% बीज तेल
ध्यान रखने योग्य बातें
- काँटेदार — निराई, छिड़काव व हाथ कटाई धीमी व दर्दनाक; बिना-काँटे किस्म उसका ज़्यादातर टालती
- फ्यूजेरियम उकठा व अल्टरनेरिया को कमज़ोर; नई किस्में (फुले कुसुमा, फुले चंद्रभागा) ज़्यादा सहनशीलता रखतीं
उपयुक्त क्षेत्र
जिन राज्यों के लिए यह किस्म सुझाई गई है — स्थानीय स्तर पर भी जाँच लें, क्योंकि एक राज्य में एक से ज़्यादा सुझाया क्षेत्र हो सकता है।
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या A-1 और अन्निगेरी 1 एक ही हैं?
हाँ। A-1 और अन्निगेरी 1 UAS धारवाड़ की एक ही काँटेदार कुसुम किस्म हैं, लंबे समय तक कर्नाटक व पड़ोसी महाराष्ट्र की मानक बारानी कुसुम।
क्या मुझे अब भी A-1 उगाना चाहिए, या नई किस्म पर जाना चाहिए?
A-1 अब भी उस खेत पर भरोसेमंद बारानी चुनाव है जहाँ उकठा इतिहास न हो और काँटेदार फ़सल के लिए मज़दूरी उपलब्ध हो। जहाँ फ्यूजेरियम उकठा दिखा हो, या जहाँ मज़दूरी कम हो, वहाँ फुले कुसुमा, फुले चंद्रभागा, NARI-6 या NARI-57 जैसी उकठा-सहनशील या बिना-काँटे किस्म बेहतर चुनाव है।
स्रोत: ICAR-Indian Institute of Oilseeds Research (IIOR), Hyderabad, University of Agricultural Sciences, Dharwad. संपादकीय नीति.
