IISR Thevam
Thevanmundi क़िस्म से ICAR-IISR का चयन, इडुक्की व वायनाड की ऊँची पहाड़ियों के अनुकूल, ऊँची ऊँचाई पर अच्छी उपज व गुणवत्ता के साथ।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- काली मिर्च
- प्रकार
- क्लोनल चयन (जड़युक्त कलम)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- बारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक
- बीज दर
- बीज फ़सल नहीं — प्रति सहारा 2–3 जड़युक्त कलमें, लगभग 3 × 3 मी. सहारे
- अपेक्षित उपज
- ऊँची ऊँचाई पर ऊँची
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी-निकासी ऊँची-पहाड़ी वन दोमट, ह्यूमस-भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0
- जारी
- ICAR-IISR, कोझिकोड द्वारा ऊँची पहाड़ियों के लिए Thevanmundi क़िस्म से एक चयन के रूप में जारी
इस किस्म के बारे में
IISR थेवम Thevanmundi क़िस्म से एक क्लोनल चयन है, ICAR-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कोझिकोड द्वारा जारी, और इडुक्की व वायनाड की ऊँची पहाड़ियों के अनुकूल। यह उन ऊँची ऊँचाइयों पर अच्छी उपज व बेरी गुणवत्ता देती है जहाँ कई मैदान-अनुकूल किस्में गिर जातीं।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयऊँची पहाड़ियों में मानसून की पहली बारिश के साथ लगाएँ, लगभग मई–जून
- बीज दरबीज फ़सल नहीं — प्रति सहारा 2–3 जड़युक्त कलमें, लगभग 3 × 3 मी. सहारे
- दूरीलगभग 3 × 3 मी. सहारे; ऊँची पहाड़ियों में अक्सर इलायची या कॉफ़ी खेत के छाया-पेड़ों पर सधाई जाती
- बुवाई विधिसहारे की उत्तरी ओर 2–3 जड़युक्त कलमें लगाएँ, मल्च करें, और हर कोंपल बाँधें
- सिंचाईछोटी बेलें अपने पहले सूखे मौसमों भर सींचें; ऊँची पहाड़ियाँ आम तौर ज़्यादा गीली, तो मैदानों से कम बार गर्मी सिंचाई चाहिए
- उर्वरकमानसून-पूर्व मल्च के साथ प्रति बेल 5–10 किग्रा गोबर खाद, और प्रति बेल प्रति साल लगभग 50:50:150 ग्राम की वयस्क NPK खुराक; बहुत अम्लीय ऊँची-पहाड़ी मिट्टियों पर चूना
- कटाईकई दौरों में स्पाइकें हाथ से चुनें; ऊँची ऊँचाई पर कटाई अक्सर थोड़ा बाद, फ़रवरी–मार्च तक चलती
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी-निकासी ऊँची-पहाड़ी वन दोमट, ह्यूमस-भरपूर और अम्लीय
- pH
- 4.5–6.0
जलवायु
- जलवायु
- इडुक्की व वायनाड की ठंडी, ज़्यादा गीली ऊँची पहाड़ियों के लिए चुनी, जहाँ यह कई मैदान-में-बनी किस्मों से बेहतर करती
उपज व अवधि
पकने की अवधि
बारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक
अपेक्षित उपज
ऊँची ऊँचाई पर ऊँची
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
प्रबंधन सुझाव
- गीली ऊँची पहाड़ियों में पाद-सड़न जोख़िम ऊँचा — निकासी, टीला रोपाई व रोकथाम फफूँदनाशी में कंजूसी न करें
- इडुक्की या वायनाड के इलायची या कॉफ़ी खेत के लिए अच्छा बैठता जो एक काली मिर्च घटक चाहता हो
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- ऊँची पहाड़ियों के अनुकूल जहाँ मैदान-में-बनी किस्में संघर्ष करतीं
- ऊँची ऊँचाई पर अच्छी उपज व बेरी गुणवत्ता
- इडुक्की व वायनाड के बहु-मंज़िला इलायची / कॉफ़ी खेतों में बैठती
ध्यान रखने योग्य बातें
- ऊँची-पहाड़ी किस्म — मैदानों व मध्यभूमि के लिए श्रीकरा, शुभकरा या पन्नियूर किस्में बेहतर बैठतीं
- कोई ख़ास पाद-सड़न प्रतिरोध नहीं, और गीली ऊँची पहाड़ियाँ पाद-सड़न को लगातार ख़तरा बनातीं
उपयुक्त क्षेत्र
इडुक्की व वायनाड की ऊँची पहाड़ियाँ
- केरल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
IISR थेवम को इडुक्की व वायनाड के लिए क्या उपयुक्त बनाता है?
यह Thevanmundi क़िस्म से एक चयन है जिसे ICAR-IISR ने इडुक्की व वायनाड की ऊँची पहाड़ियों की ज़्यादा ऊँचाइयों पर अच्छी उपज व गुणवत्ता के लिए चुना, जो काली मिर्च के मैदानों से ठंडी व ज़्यादा गीली हैं। कई मैदान-में-बनी किस्में उस ऊँचाई पर कम उपज देतीं। भारी बारिश के कारण वहाँ पाद-सड़न गंभीर जोख़िम बना रहता, तो निकासी व फफूँदनाशी कार्यक्रम ज़रूरी हैं।
स्रोत: ICAR-Indian Institute of Spices Research (IISR), Kozhikode, Spices Board India. संपादकीय नीति.
