Panniyur-5
KAU पन्नियूर द्वारा Perumkodi से जारी एक खुली-परागित चयन, ख़ासतौर छाया-सहनशील — कॉफ़ी, सुपारी या पेड़ के छत्र तले अंतर-फ़सल के रूप में उगाने को बनी, जहाँ पन्नियूर-1 संघर्ष करती।
ज़रूरी तथ्य
- फसल
- काली मिर्च
- प्रकार
- काली मिर्च किस्म (जड़युक्त कलम)
- सीज़न
- सभी सीज़न
- पकने की अवधि
- बारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक
- बीज दर
- बीज फ़सल नहीं — प्रति सहारा 2–3 जड़युक्त कलमें; अंतर-फ़सल के रूप में बेल संख्या मेज़बान पेड़ या सुपारी दूरी के हिसाब से
- अपेक्षित उपज
- छाया तले ऊँची
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी-निकासी वन दोमट / लेटराइट, ह्यूमस-भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0
- जारी
- KAU काली मिर्च अनुसंधान केंद्र, पन्नियूर द्वारा Perumkodi से एक छाया-सहनशील चयन के रूप में जारी
इस किस्म के बारे में
पन्नियूर-5 Perumkodi क़िस्म से एक खुली-परागित चयन है, KAU काली मिर्च अनुसंधान केंद्र, पन्नियूर द्वारा जारी। इसकी परिभाषित बात छाया सहनशीलता है: इसे ख़ासतौर कॉफ़ी, सुपारी या अन्य पेड़ों के छत्र तले अंतर-फ़सल के रूप में अच्छी उपज देने को बनाया गया, वही स्थिति जिसमें खुला-प्रिय पन्नियूर-1 ख़राब करता।
मुख्य विशेषताएँ
बुवाई व खेती
- बुवाई का समयमानसून की पहली बारिश के साथ सहारे पर जड़युक्त कलमें लगाएँ, लगभग मई–जून
- बीज दरबीज फ़सल नहीं — प्रति सहारा 2–3 जड़युक्त कलमें; अंतर-फ़सल के रूप में बेल संख्या मेज़बान पेड़ या सुपारी दूरी के हिसाब से
- दूरीअंतर-फ़सल में प्रति छाया-पेड़ या प्रति दो-तीन सुपारी ताड़ एक बेल; समर्पित बग़ीचे में लगभग 3 × 3 मी. सहारे
- बुवाई विधिहर सहारे की उत्तरी ओर 2–3 जड़युक्त कलमें लगाएँ, मल्च करें, और हर नई कोंपल सहारे से बाँधें
- सिंचाईछोटी बेलें अपने पहले सूखे मौसमों भर सींचें; जहाँ उपलब्ध हो वहाँ फलदार बेलों की गर्मी सिंचाई, हालाँकि छायादार छत्र इसका जल तनाव घटाता
- उर्वरकहर साल प्रति बेल 5–10 किग्रा गोबर खाद मोटी मानसून-पूर्व मल्च के साथ, और प्रति बेल प्रति साल लगभग 50:50:150 ग्राम N:P2O5:K2O तक बढ़ाई NPK खुराक दो भागों में
- कटाईकाली मिर्च के लिए नवंबर से फ़रवरी तक कई दौरों में स्पाइकें हाथ से चुनें, जब प्रति स्पाइक एक-दो बेरी रंग पकड़ें
मिट्टी व जलवायु
मिट्टी
- उपयुक्त मिट्टी
- अच्छी-निकासी वन दोमट या लेटराइट; कॉफ़ी या सुपारी बग़ीचे की छायादार ज़मीन इसे भाती
- pH
- 4.5–6.0
जलवायु
- जलवायु
- छाया-सहनशील — इसका पूरा मक़सद उस छत्र तले उपज देना जो पन्नियूर-1 को दबाता; फिर भी सहारे की छाया इतनी नियमित चाहिए कि नम रोग जाल न बने
उपज व अवधि
पकने की अवधि
बारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक
अपेक्षित उपज
छाया तले ऊँची
असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
कीट व रोग संबंधी बातें
मुख्य रोग
- पाद-सड़न / द्रुत उकठा (Phytophthora) — मुख्य जोख़िम; निकासी, टीला रोपाई, ट्राइकोडर्मा और रोकथाम फफूँदनाशी
- पोल्लू रोग व पोल्लू भृंग — घनी छाया तले ज़्यादा बुरे, तो छाया-सहनशील किस्म के साथ भी सहारे का छत्र नियमित रखें
- मंद क्षय — साफ़, सूत्रकृमि-मुक्त रोपण सामग्री इस्तेमाल करें
प्रबंधन सुझाव
- यह छाया सहती है फिर भी हर मानसून से पहले सहारे का छत्र नियमित करें ताकि वह पोल्लू व पाद-सड़न के लिए नम जाल न बने
- रोकथाम पाद-सड़न कार्यक्रम चलाएँ; छाया सहनशीलता का मतलब रोग प्रतिरोध नहीं
फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें
किसान इसे क्यों चुन सकते हैं
- छाया के लिए बनी — कॉफ़ी या सुपारी तले अंतर-फ़सल के रूप में अच्छी उपज
- बहु-मंज़िला बागान के लिए सही चुनाव जहाँ पन्नियूर-1 नाकाम रहती
- छायादार छत्र तले कम जल तनाव
ध्यान रखने योग्य बातें
- पाद-सड़न या मंद क्षय के प्रति कोई ख़ास प्रतिरोध नहीं — मानक रोकथाम पैकेज फिर भी लागू
- पूरी तरह खुली खेती में पन्नियूर-1 की उपज क्षमता ज़्यादा है
उपयुक्त क्षेत्र
कॉफ़ी, सुपारी या अन्य पेड़ों के छत्र तले अंतर-फ़सल काली मिर्च
- केरल
- कर्नाटक
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पन्नियूर-1 के बजाय पन्नियूर-5 क्यों चुनें?
छाया के कारण। पन्नियूर-5 को छाया सहनशीलता के लिए चुना गया और यह कॉफ़ी या सुपारी बागान के छाया-पेड़ों या सुपारी पर सधकर अच्छी उपज देती। पन्नियूर-1 खुले के लिए बनी और भारी छत्र तले ख़राब करती। अगर आपकी काली मिर्च दूसरे पेड़ों तले अंतर-फ़सल है, तो पन्नियूर-5 (या कोई IISR चयन) सही चुनाव है।
स्रोत: ICAR-Indian Institute of Spices Research (IISR), Kozhikode, Kerala Agricultural University — Pepper Research Station, Panniyur. संपादकीय नीति.
