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काली मिर्चसभी सीज़नपरंपरागत काली मिर्च क़िस्म (जड़युक्त कलम)अपडेट किया गया 28 अगस्त 2026

Karimunda

केरल में सबसे ज़्यादा उगाई परंपरागत क़िस्म — मध्यम छाया-सहनशील, चौड़ी अनुकूलता, छोटी-से-मध्यम बेरी और भरोसेमंद उपज के साथ; राज्य के बड़े हिस्से में घर-बग़ीचा व बागान की डिफ़ॉल्ट काली मिर्च।

सीज़नसभी सीज़न
पकने की अवधिबारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक
अपेक्षित उपजमध्यम, भरोसेमंद
उपयुक्त मिट्टीअच्छी-निकासी वन दोमट / लेटराइट, ह्यूमस-भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0

ज़रूरी तथ्य

प्रकार
परंपरागत काली मिर्च क़िस्म (जड़युक्त कलम)
सीज़न
सभी सीज़न
पकने की अवधि
बारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक
बीज दर
बीज फ़सल नहीं — प्रति सहारा 2–3 जड़युक्त कलमें; प्रति घर-बग़ीचा पेड़ एक बेल या बग़ीचे में लगभग 3 × 3 मी. सहारे
अपेक्षित उपज
मध्यम, भरोसेमंद
उपयुक्त मिट्टी
अच्छी-निकासी वन दोमट / लेटराइट, ह्यूमस-भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0
जारी
एक परंपरागत केरल क़िस्म; राज्य में सबसे ज़्यादा उगाई काली मिर्च और कई IISR चयनों की जनक

इस किस्म के बारे में

करिमुंडा केरल में सबसे ज़्यादा उगाई परंपरागत काली मिर्च क़िस्म है। यह मध्यम छाया-सहनशील है, तरह-तरह के स्थलों पर अनुकूलित होती, छोटी-से-मध्यम बेरी रखती, और भरोसेमंद हालाँकि शानदार नहीं ऐसी उपज देती। यह राज्य के बड़े हिस्से में डिफ़ॉल्ट घर-बग़ीचा व मिश्रित-बागान काली मिर्च है, और कई ICAR-IISR क्लोनल चयनों (श्रीकरा, शुभकरा) की जनक भी है।

मुख्य विशेषताएँ

    पौध प्रकारपरंपरागत काली मिर्च क़िस्म (जड़युक्त कलम)
    अवधिबारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक
    उपज क्षमतामध्यम, भरोसेमंद
    रोग-प्रतिरोधमध्यम; कोई ख़ास प्रतिरोध नहीं
    मिट्टीअच्छी-निकासी वन दोमट / लेटराइट, ह्यूमस-भरपूर, अम्लीय pH 4.5–6.0
    सीज़नसभी सीज़न

बुवाई व खेती

  • बुवाई का समयमानसून की पहली बारिश के साथ लगाएँ, लगभग मई–जून
  • बीज दरबीज फ़सल नहीं — प्रति सहारा 2–3 जड़युक्त कलमें; प्रति घर-बग़ीचा पेड़ एक बेल या बग़ीचे में लगभग 3 × 3 मी. सहारे
  • दूरीघर-बग़ीचे में प्रति मौजूदा पेड़ एक बेल; समर्पित बग़ीचे में लगभग 3 × 3 मी. सहारे
  • बुवाई विधिसहारे की उत्तरी ओर 2–3 जड़युक्त कलमें लगाएँ, मल्च करें, और हर कोंपल बाँधें
  • सिंचाईछोटी बेलें अपने पहले सूखे मौसमों भर सींचें; परंपरागत घर-बग़ीचा पद्धति में उसके बाद ज़्यादातर बारानी, जहाँ उपलब्ध हो वहाँ गर्मी सिंचाई
  • उर्वरकहर साल प्रति बेल 5–10 किग्रा गोबर खाद मोटी मानसून-पूर्व मल्च के साथ, और जहाँ खाद इस्तेमाल हो वहाँ प्रति बेल प्रति साल लगभग 50:50:150 ग्राम की वयस्क NPK खुराक
  • कटाईकाली मिर्च के लिए नवंबर से फ़रवरी तक कई दौरों में स्पाइकें हाथ से चुनें; छोटी-से-मध्यम बेरी अच्छी, घनी काली मिर्च में सूखती

मिट्टी व जलवायु

मिट्टी

उपयुक्त मिट्टी
अच्छी-निकासी वन दोमट या लेटराइट; केरल भर घर-बग़ीचा मिट्टी
pH
4.5–6.0

जलवायु

जलवायु
चौड़ी अनुकूलता व मध्यम छाया सहनशीलता इसे सुरक्षित परंपरागत चुनाव बनातीं; कोई ख़ास रोग या सूखा प्रतिरोध नहीं

उपज व अवधि

पकने की अवधि

बारहमासी — तीसरे साल पहला फल, 7–8वें साल पूर्ण फलन, 20–30 साल उत्पादक

अपेक्षित उपज

मध्यम, भरोसेमंद

असली उपज बुवाई के समय, मिट्टी, सिंचाई, मौसम, बीज की गुणवत्ता व फ़सल प्रबंधन पर निर्भर करती है।

कीट व रोग संबंधी बातें

प्रबंधन सुझाव

  • मानक पाद-सड़न रोकथाम कार्यक्रम चलाएँ — करिमुंडा में कोई ख़ास प्रतिरोध नहीं
  • घर-बग़ीचे के लिए भरोसेमंद, सहनशील चुनाव; इससे बने IISR चयनों की प्रबंधन में उपज सीमा ज़्यादा

फ़ायदे व ध्यान रखने योग्य बातें

किसान इसे क्यों चुन सकते हैं

  • केरल में सबसे ज़्यादा उगाई, सबसे बेहतर समझी परंपरागत काली मिर्च
  • चौड़ी अनुकूलता व मध्यम छाया सहनशीलता
  • रोपण सामग्री आसानी से मिलती; अच्छी घनी काली मिर्च गुणवत्ता

ध्यान रखने योग्य बातें

  • इससे बने सुधरे IISR चयनों (श्रीकरा, शुभकरा) से उपज सीमा कम
  • पाद-सड़न, मंद क्षय या सूखे के प्रति कोई ख़ास प्रतिरोध नहीं

उपयुक्त क्षेत्र

केरल भर घर-बग़ीचे व मिश्रित बागान, चौड़ी अनुकूलता

  • केरल
  • कर्नाटक

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

करिमुंडा इतनी ज़्यादा क्यों उगाई जाती?

यह एक चौड़ी-अनुकूल, मध्यम छाया-सहनशील परंपरागत क़िस्म है जो मामूली प्रबंधन के साथ भरोसेमंद उपज देती, घर-बग़ीचा पेड़ों पर आसानी से सधती, और अच्छी घनी काली मिर्च में सूखती। रोपण सामग्री केरल में हर जगह है। बदला यह कि इसकी उपज सीमा इससे बने सुधरे ICAR-IISR चयनों (श्रीकरा, शुभकरा) से कम है।

स्रोत: ICAR-Indian Institute of Spices Research (IISR), Kozhikode, Kerala Agricultural University. संपादकीय नीति.